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यूपी में राम ही कराएंगे चुनावी बेड़ा पार, योगी हों, ओवैसी हों या फिर सतीश चंद्र और सिसोदिया…

नई दिल्ली 16 सितम्बर 2021 । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अगले साल शुरुआत में ही प्रस्तावित है। इसी को लेकर सभी पार्टियां लगातार अपनी-अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने की कोशिश में हैं। अयोध्या उत्तर प्रदेश की राजनीति का केंद्र बनता चला जा रहा है। उत्तर प्रदेश चुनाव में अपना भविष्य आजमाने वाले सभी राजनीतिक दल अयोध्या में राम की परिक्रमा में लग गए हैं। राम मंदिर निर्माण को लेकर कभी भाजपा पर निशाना साधने वाले दल भी फिलहाल अयोध्या से ही अपनी चुनावी अभियान की शुरुआत कर रहे हैं। राजनीतिक पंडित यूपी चुनाव में इसे हिंदू वोटों को अपने पाले में लाने की कवायद के तौर पर देख रहे हैं। भगवान राम को लेकर तो भाजपा शुरू से ही चर्चा में रही है। लेकिन अब उसके विरोधी भी राम के नाम का सियासत करने लगे हैं। यही कारण है कि बसपा हो या फिर एआईएमआईएम या फिर आम आदमी पार्टी, सभी अयोध्या से ही अपनी चुनावी समर की शुरुआत कर रहे हैं।

जब से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बने हैं तब से वह लगातार कई बार अयोध्या का दौरा कर चुके हैं। राम मंदिर पर शीर्ष न्यायालय का फैसला आने से पहले भी वह अयोध्या का लगातार दौरा करते रहे और कई तरह के विकास कार्यों का रोडमैप तैयार किया गया था। इसके अलावा वह अयोध्या में दीपावली के समय भी अक्सर जाते रहे हैं। जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में मंदिर का शिलान्यास किया है तबसे योगी का अयोध्या दौरा भी बढ़ गया है। योगी अक्सर अयोध्या पहुंच जाते हैं और रामलला मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं।

बसपा का नया दांव

मायावती की बहुजन समाज पार्टी भी अयोध्या से अपनी चुनावी समर की शुरुआत कर चुकी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता सतीश चंद्र मिश्र ने अयोध्या में रामलला मंदिर में पूजा अर्चना की थी और उसके बाद प्रबुद्ध सम्मेलन की शुरुआत की थी। प्रबुद्ध सम्मेलन के जरिए बसपा ब्राह्मणों को अपने पाले में करने की कोशिश कर रही है। अयोध्या में सतीश चंद्र मिश्र ने कहा कि भगवान राम तो सबके हैं। बसपा की सरकार आएगी तो अयोध्या में विकास के कार्य किए जाएंगे।

सपा भी अयोध्या के रास्ते

राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान कारसेवकों पर गोली चलाने का आरोप का सामना करने वाली समाजवादी पार्टी भी अब अयोध्या को अपनी चुनावी लॉन्चिंग पैड के तौर पर इस्तेमाल कर रही हैं। हाल में ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने अयोध्या में ‘खेत बचाओ रोजगार बचाओ’ अभियान में शामिल हुए थे। हालांकि, अभी समाजवादी पार्टी के बड़े नेता अयोध्या से दूरी बनाते दिख रहे हैं और इसका सबसे बड़ा कारण मुस्लिम वोट है। अखिलेश यादव अपने पिता मुलायम सिंह यादव की एमवाई समीकरण को एक बार फिर से धार देने की कोशिश में है।

आम आदमी पार्टी

उत्तर प्रदेश में अपने राजनीतिक भविष्य देखने वाले आम आदमी पार्टी भी अयोध्या से ही अपने चुनावी समर की शुरुआत कर चुकी है। अयोध्या में पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और संजय सिंह ने रामलला के दर्शन किए और साधु संतों का आशीर्वाद लिया। उसके पास ही पार्टी की ओर से तिरंगा यात्रा निकाला गया तथा 100 सीटों के लिए अपने उम्मीदवार घोषित किए गए।

कांग्रेस

दूसरी ओर कांग्रेस की बात करें तो अब भी पार्टी अयोध्या को लेकर थोड़ी दूरी बनाती हुई दिख रही है। हालांकि सूत्र यह दावा कर रहे हैं कि जैसे-जैसे चुनावी सरगर्मियां आगे बढ़ेगी, पार्टी के बड़े नेता अयोध्या जरूर जाएंगे। इस बात को बल तब और भी मिल रहा है जब हाल में ही राहुल गांधी ने वैष्णो देवी का दर्शन किया था और खुद को कश्मीरी ब्राह्मण बताया था। ऐसे में माना जा रहा है कि वह जब भी उत्तर प्रदेश दौरे पर जाएंगे तो रामलला के दर्शन जरूर करेंगे।

ओवैसी और राजा भैया

सत्ता लोकतांत्रिक दल की अगुवाई कर रहे विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया भी अगस्त के महीने में उत्तर प्रदेश चुनावी अभियान की शुरुआत करते हुए अयोध्या पहुंचे थे। वही कि एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी भी अयोध्या के धन्नीपुर क्षेत्र को अपनी चुनावी अभियान की शुरुआत की है। सबसे खास बात यह है कि जहां सभी दल अयोध्या के जरिए हिंदुओं को लामबंद करने की कोशिश में हैं तो वही असदुद्दीन ओवैसी वहां से मुसलमानों को नया संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। तभी तो अपनी पार्टी के प्रचार में उन्होंने अयोध्या की जगह फैजाबाद का उल्लेख किया था।

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