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भारत ने पाक के इतने सैनिकों को उड़ाया, शवों को ले जाते दिखे पाक लड़ाकू विमान

नई दिल्ली 23 मार्च 2019 । एलओसी पर पाकिस्तान की ओर से लगातार सीजफायर का उल्लंघन किया जा रहा है। इसका भारत के जवानों ने मुंहतोड़ जवाब देते हुए पाकिस्तान के 12 सैनिकों को ढेर कर दिया। इतना ही नहीं भारत की कार्रवाई में पाकिस्तानी सेना के 22 जवान बुरी तरह घायल भी हो गए हैं। जिसके बाद पाकिस्तानी सैनिकों का शव MI17 हेलीकॉप्टर से रावलपिंडी ले जाता हुआ देखा गया।

आपको बताते चलें की सुंदरबनी सेक्टर से सीजफायर उल्लंघन करने के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्ता को मुंहतोड़ जवाब दिया। जिसमें 10 पाकिस्तानी सैनिक और 2 ऑफिसर समेत 12 सैनिक ढेर हो गए।

सूत्रों की मानें तो इस सीजफायर उल्लंघन में 2 MI17 चॉपर का भी इस्तेमाल किया गया। जम्मू-कश्मीर में कल से ही सुरक्षा बलों और आतंकवादियों की बीच मुठभेड़ चल रही है, जिसमें 6 आतंकवादी के ढेर हो गए।

गौरतलब है कि 14 फरवरी को दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर जो हमला हुआ था उसमें 40 जवान शहीद हो गए थे और पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने इसकी जिम्मेदारी ली थी जिसका सरगना मौलाना मसूद अजहर है। इसके बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में हवाई हमला किया था, जिसमें कई आतंकी ढेर हो गए। इसके बाद से भारत-पाक सीमा पर तनाव जारी है। साथ ही पाकिस्तान की ओर से लगातार सीजफायर का उल्लंघन किया जा रहा है।

दिल्ली से गिरफ्तार जैश का आतंकी, पुलवामा हमले से जुड़े हैं तार

पुलवामा आतंकी हमले के सिलसिले में दिल्ली पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने देर रात लाल किले के पास से जैश ए मोहम्मद के एक आतंकी को गिरफ्तार किया है जिसका नाम सज्जाद खान बताया जा रहा है जो कश्मीर के पुलवामा का रहने वाला है. फिलहाल, दिल्ली की एक अदालत ने आतंकी सज्जाद को 29 मार्च तक एनआईए की हिरासत में भेज दिया है.

पुलिस द्वारा मिली जानकारी में सज्जाद को पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड मुदस्सर का करीबी माना जा रहा है. पुलिस ने बताया कि पकड़े गए आतंकी सज्जाद खान के दो भाई के तार भी जैश ए मुहम्मद से जुड़े हुए थे जिसे सेना द्वारा एनकाउंटर में पहले ही मार गिराया गया था. स्पेशल सेल के डिप्टी कमिश्नर प्रमोद सिंह कुशवाहा के मुताबिक आतंकी सज्जाद को दिल्ली में जैश ए मुहम्मद का स्लीपर सेल बनाने का काम सौंपा गया था.

दिल्ली पुलिस ने यह गिरफ्तारी एक संदेश के आधार पर की है. जिसमें कहा गया है कि ”सीआरपीएफ के काफिले पर हमारा हमला सफल रहा है, बदला ले लिया गया है.” पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड द्वारा जिस आतंकवादी को यह संदेश मिला है, उसके कुछ ही मिनटों बाद दिल्ली पुलिस को उस आतंकवादी हमले में उसकी भूमिका के लिए नाकाबंदी कर दी गई थी. पुलिस द्वारा जैश के जिस कैडर को गिरफ्तार किया गया है उसके पुलवामा आतंकी हमलों की साजिश में शामिल होने का संदेह है.

पुलिस ने कहा है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने भी सज्जाद अहमद के खिलाफ आतंकवाद के आरोपों के तहत मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस ने दावा किया है कि दिल्ली की प्रमुख जगहों की रेकी करने के उदेश्य से खान को विशेष रूप से जैश संगठन द्वारा दिल्ली भेजा गया. दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि यह विशिष्ट लक्ष्यों का चयन करने और यूपी और अन्य राज्यों के मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और भर्ती करने के लिए किया गया है.इसके अलावा इनका काम उन्हें हथियार प्रशिक्षण, विस्फोटक और फील्ड क्राफ्ट प्रदान करना, धन जुटाना और हथियार इकट्ठा करना है.

पुलिस ने खुलासा किया है कि सज्जाद ने जैश के लिए 6 युवाओं की भर्ती की थी और वह अपने कमांडरों के साथ लगातार संपर्क में था. पुलिस ने एक नंबर का डिटेल का भी खुलासा किया है जिसका नंबर +1904606#*%3 है. बताया जा रहा है कि इसका इस्तेमाल इन आतंकी गतिविधियों द्वारा किया जा रहा था.

पुलवामा हमले के बाद सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी से एक इनपुट प्राप्त हुआ था कि जैश का एक सक्रिय कैडर स्लीपर सेल की स्थापना के इरादे से दिल्ली में स्थानांतरित हुआ है और एक शॉल विक्रेता की आड़ में रह रहा है. यह इनपुट स्रोतों के माध्यम से विकसित किया गया था और इस इनपुट में भौतिक निगरानी मुहिम की गई थी जिसमें इन गुर्गों के सारी गतिविधियों का बारीकी से और सावधानी पूर्वक निगरानी की गई थी.

दरअसल, पुलिस के ये जानकारी मिली थी कि जैश ए मोहम्मद का एक सक्रिय कैडर लाल किला लाल बत्ती के पास का दौरा करेगा. जिसके बाद सिविल कपड़ों में पुलिस की एक टीम तैनाती की गई थी.

प्रारंभिक जांच में यह पता चला है कि सज्जाद अहमद खान, जिनका जन्म वर्ष 1992 में हुआ था, उनके दो भाई और एक बहन थे. उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा सरकारी प्राइमरी स्कूल, हंडोरा से प्राप्त की उसके बाद उसकी पढ़ाई सरकारी हाईस्कूल त्राल से हुई जहां उन्होंने 9 वीं कक्षा तक पढ़ाई की. दसवीं क्लास में फेल होने के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी.

शुरुआत में तीनों भाई घाटी में पथराव की घटनाओं में लिप्त थे. फरवरी, 2015 के महीने में सज्जाद के भाई इश्फाक को पीएसए (पब्लिक सेफ्टी एक्ट) के तहत पथराव के लिए गिरफ्तार भी किया गया था और लगभग 9 महीने तक वह श्रीनगर जेल में रहा. श्रीनगर जेल में ही इश्फाक जैश आतंकवादी नूर मोहम्मद तांत्रेय के संपर्क में आया.

जेल से छूटने के बाद, इश्फाक ने शुरू में जैश के लिए जमीनी कार्यकर्ता के रूप में काम किया और बाद में एक सक्रिय जैश आतंकवादी में बदल गया. वह लगभग 18 महीने तक सक्रिय रहा. इश्फाक अहमद खान 2 अप्रैल, 2018 को 2 पाक आतंकवादियों के साथ लाम, त्राल, पुलवामा में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया.

इश्फाक की मृत्यु के बाद, उनके दोस्त मुदासिर अहमद खान अक्सर पुलवामा में उनके निवास पर आते थे और शोकाट और सज्जाद अहमद खान को आतंकी संगठन जैश ए मुहम्मद में शामिल होने के लिए प्रेरित करते थे. जून 18 के अंत तक, शोकाट भी जैश में शामिल हो गया. शकट अहमद खान भी बाद में उस्मान हैदर के साथ चान, त्राल, पुलवामा में सितंबर, 2018 में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया.

शोकाट की मृत्यु के बाद, मुदस्सिर ने सज्जाद के निवास पर अधिक बार जाना शुरू कर दिया और सज्जाद को जैश कैडर के रूप में काम करने के लिए प्रेरित किया. सज्जाद ने शुरू में सेना द्वारा किए गए काफिले और कॉर्डन और सर्च ऑपरेशन के आंदोलन के बारे में जानकारी दी.

पुलिस के अनुसार मुदासिर ने सज्जाद को निर्देश दिया कि वह फिदायीन हमलों के लिए युवा कश्मीरी युवकों को हाजिर करे. सज्जाद ने तब बिलाल और तनवीर को प्रेरित किया और भर्ती किया.

जांच के दौरान यह पता चला था कि पुलवामा आतंकी हमले के दिन मुदासिर ने सज्जाद से व्हाट्सएप पर संपर्क किया और बताया कि उन्होंने सीआरपीएफ के काफिले पर हमला किया है. मुदासिर ने फिर उसे आदिल डार का वीडियो भेजा, जिसे उसने अपने फोन से डिलीट कर दिया. मुदासिर के निर्देश पर सज्जाद जेएमएम के स्लीपर सेल की स्थापना के लिए दिल्ली चले गए.

पुलवामा हमले की जांच कर रही एनआईए ने जैश-ए-मोहम्मद और उसके नेताओं सहित अब्दुल रऊफ असगर, मुदस्सिर अहमद खान (पुलवामा के प्रमुख योजनाकार) और 6 अन्य के खिलाफ प्राथमिकता दर्ज कर ली है. सूत्रों का कहना है इस एफआईआर का उद्देश्य पूरे भारत से जैश कैडर या उसके सरगना को गिरफ्तार करना है ताकि भविष्य में होने वाले हमलों को रोका जा सके.

कश्मीर में मोदी सरकार का बड़ा एक्शन, यासीन मलिक के JKLF को किया बैन

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) को आतंक विरोधी कानून के तहत बैन कर दिया है. केंद्र का यह फैसला अलगाववादियों पर बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है. बता दें कि अलगाववादी नेता यासीन मलिक जेकेएलएफ के प्रमुख हैं. बता दें कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने पुलवामा हमले के 8 दिन बाद 22 फरवरी को यासीन मलिक को गिरफ्तार किया था.

जेकेएलएफ पर आतंकी गतिविधियों को समर्थन करने का आरोप लगता रहा है. गृह सचिव राजीव गाबा ने जेकेएलएफ पर बैन की जानकारी देते हुए बताया कि जेकेएलएफ के खिलाफ 37 एफआईआर दर्ज हैं. जिनमें वायुसेना के चार अधिकारियों की हत्या का मामला और मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबैया सईद के अपहरण का मामला शामिल है.

उन्होंने कहा कि यह संगठन आतंक को बढावा देने के लिए अवैध तरीके से धन मुहैया कराने के लिए जिम्मेवार रहा है. यह संगठन चंदा एकत्र कर घाटी में अशांति फैलाने के लिए हुर्रियत के कार्यकर्ताओं और पत्थरबाजों के बीच धन के वितरण और विध्वंसकारी गतिविधियों को बढावा देने के कार्य में भी सक्रिय रूप से लिप्त रहा है.

JKLF को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली हुई थी और इसके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया तीन महीने से चल रही थी. इससे पहले जमात ए इस्लामी पर भी बैन लगाया जा चुका है. ये साफ संदेश देता है कि अलगाववाद के खिलाफ सरकार की कड़ी नीति जारी है और इसे और कड़ा किया जा रहा है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी इस सिलसिले में पिछले कई दिनों से जम्मू कश्मीर में छापेमारी कर रही थी. इस कड़ी में ईडी ने यासीन मलिक के कई ठिकानों पर भी छापेमारी की थी.

गौर हो कि मोदी सरकार ने हाल ही में जमात-ए-इस्लामी संगठन को अलगाववादियों का पीछे से समर्थन कर के आरोप में बैन कर दिया था. साथ ही 26 फरवरी को टेरर फंडिंग के मामले में एनआईए ने घाटी में कई जगहों पर छापेमारी की थी, जिसमें यासीन मलिक, शब्बीर शाह, मीरवाइज उमर फारुक, मोहम्मद अशरफ खान, मसर्रत आलम, जफर अकबर भट्ट और सैयद अली शाह गिलानी के बेटे नसीम गिलानी का नाम शामिल हैं.

छापेमारी के बाद 28 फरवरी को केंद्र की मोदी सरकार ने जमात-ए-इस्लामी (जेईआइ) पर 5 साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था. इसके तहत गृह मंत्रालय की कार्रवाई में जेईआइ के प्रमुख हामिद फैयाज सहित 350 से ज्यादा सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था. बता दें कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार लगातार घाटी में मौजूद अलगाववादी नेताओं पर शिकंजा कसती जा रही है.

अलगाववादी नेताओं पर केंद्र की कार्रवाई लगातार जारी है. इससे पहले जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के ठिकानों पर अवैध तरीके से विदेशी मुद्रा रखने के आरोप में छापेमारी की गई थी, जिसके बाद गिलानी पर 14.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था. साथ ही करीब 6.88 लाख रुपये कुर्क भी किए गए थे. इसी दौरान ईडी सूत्रों ने इस बात की जानाकारी दी थी कि गिलानी के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जम्‍मू-कश्‍मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के पूर्व अध्‍यक्ष यासीन मलिक पर भी कार्रवाई कर सकती है.

इसके अलावा गृह मंत्रालय के निर्देश पर जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 22 अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा और सरकारी सुविधाएं वापस ले ली गई थी. साथ ही घाटी के 155 नेताओं को दी गई सुरक्षा में बदलाव किया था. इस सूची में भी यासीन मलिक का नाम शामिल था. हालांकि, उस दौरान यासीन मलिक ने कहा था कि सरकार ने उसे कोई सुरक्षा दी ही नहीं थी.

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