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अफगान संकट का समाधान दुनिया के देशों के साथ मिलकर करेगा हिन्दुस्तान, PM मोदी से भी मिलेंगे 7 देशों के NSA

नई दिल्ली 10 नवंबर 2021 । काबुल पर तालिबान के कब्जे के करीब ढाई महीने बाद अफगानिस्तान में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के इरादे के साथ हिन्दुस्तान अफगानिस्तान पर दिल्ली क्षेत्रीय सुरक्षा वार्ता का आयोजन कर रहा है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल 10 नवंबर को एनएसए की इस महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी करेंगे। जिसमें अफगानिस्तान के भविष्य पर चर्चा होगी। इसके साथ ही वहां के सत्ता परिवर्तन के बाद पैदा हुए माहौल और सुरक्षा के खतरों से निपटने पर भी मंथन होगा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सात देशों के एनएसए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे। हिन्दुस्तान समेत आठ मुल्क क्या करने वाले हैं

भारत के एक बुलावे पर यहां आकर तमाम मुल्क क्षेत्रीय सुनिश्चित करने की दिशा में बात करने वाले हैं। दिल्ली डॉलाग नाम की रिजनल कॉनफ्रेंस ये दिखाती है कि हिन्दुस्तान का इन तमाम मुल्कों के एनएसए को बुलाना और उनका यहां आना ये भारत की पूरे इलाके में शांति की पहल की दिशा में महत्ता को दर्शाता है। भारत की तरफ से ये एक अच्छी पहल मानी जा रही है। विश्व समुदाय के लिए एक ऐसा सिग्नल है कि भारत के दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं। चाहे वो डिप्लोमेटिक चैनल हो या मिलिट्री या अपेक्स लेवल की वार्ता हो। भारत चाहता है कि अफगानिस्तान में शांति हो। वहां का जो आवाम है वो एक अच्छी जिंदगी वहां पर बिताए। उसने हर चीज को दरकिनार रखते हुए पाकिस्तान, चीन, रूस, तजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान जैसे सभी देशों को न्योता दिया है कि एक सुलझे हुए तरीके से कैसे बातचीत की जाए और सेंट्रल एशिया में शांति बहाली की जा सके।

एनएसए डोभाल करेंगे अध्यक्षता

एनएसए अजीत डोभाल की अध्यक्षता में ये बैठक होने वाली है। जिन्हें भारत में जेम्स बॉन्ड के नाम से भी जाना जाता है। अफगानिस्तान में मानवीय संकट की बात हो रही है। इसके साथ ही शासन, महिला सुरक्षा, तालिबान का शासन को लेकर चर्चा होगी। जहां तक भारत के साथ अफगानिस्तान के रिश्तों की बात है तो भारत यह नहीं चाहता है कि अफगानिस्तान किसी भी परिस्थिति में भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधि को अंजाम न देने दे।

प्रधानमंत्री मोदी से मिलगें सात देशों के एनएसए

किसी देश ने अब तक तालिबान को मान्यता नहीं दी है। इसमें दिलचस्प बात ये है कि चीन और पाकिस्तान ने भी तालिबान को मान्यता नहीं दी है। इस बीच एनएसए की ये बैठक जिसमें बायलेटरल टॉक होने वाली है। इस बैठक के बाद सात देशों के एनएसए की मुलाकात प्रधानमंत्री के साथ भी होने वाली है। आतंकवाद, कट्टरता और ड्रग तस्करी रोकने पर इस दौरान चर्चा हो सकती है।

चीन और पाकिस्तान ने बनाई दूरी

हिन्दुस्तान सद्भाव, सहृदयता, सदाशयता वाला देश है। हिन्दुस्तान ने एक ब्लूप्रिंट बनाकर एक भरोसे का माहौल बने इसकी कोशिश की लेकिन चीन और पाकिस्तान दोनों ने ही इससे दूरी बना ली है। पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) मोईद युसूफ ने कहा कि वह अफगानिस्तान पर 10 नवंबर को होने वाले सम्मेलन के लिए भारत की यात्रा नहीं करेंगे।

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