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भारत में सबसे बड़ा वित्तीय घोटाला हुआ उजागर

नई दिल्ली 30 जनवरी 2019 । पिछले साल ही एक सनसनीखेज खुलासे के बाद कोबरा पोस्ट ने मंगलवार को एक आैर बड़ा खुलासा किया है। 29 जनवरी को कोबरा पोस्ट ने 31 हजार करोड़ रुपए का घोटाला उजागर करने का दावा किया है, जिसे भारत में अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय घोटाल करार दिया जा रहा है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दिवान हाउसिंग फाइनेंस (डीएचएफएल) कंपनी ने लोन व शेल कंपनियों के माध्यम से इस घोटाले काे अंजाम दिया है। कोबरा पोस्ट के अनुसार, इस घोटाले को अंजाम देने के लिए सिक्योर्ड व अनसिक्योर्ड लोन को शेल कंपनियों में जमा किया गया। इसके बाद इस रकम का इस्तेमाल भारत समेत यूके, दुबर्इ, श्रीलंका आैर माॅरिशस जैसे देशों में संपत्ति बनाने आैर निवेश करने के लिए प्रयोग किया गया है।

कोबरा पोस्ट ने डीएचएफएल पर कथित तौर पर आरोप लगाया है कि कंपनी के मुख्य प्रोमोटर्स ने सबसे पहले दर्जनों शेल कंपनियां बनार्इ, जिनकी पूंजी 1 लाख रुपए के करीब है। इन शेल कंपनियों को 3-4 के समूह में बांटा गया है। इन कंपनियों में अधिकतर का पता समान है या एक दूसरे से मिलता-जुलता है। इन कंपनियों के निदेशकों के नाम आैर आॅडिटर्स के नाम भी एक ही हैं। आरोप लगाया गया है कि कंपनी के प्रोमोटर्स ने इन शेल कंपनियों को बड़ी मात्रा में लोन दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन लोन्स को एक ही बार में जारी किया गया है जो कि इस तरह के मामलों से थोड़ा अलग रास्ता अपनाया है। आमतौर पर इस तरह के घोटाले में लोन को अलग-अलग हिस्से में खपाया जाता है। रिपोर्ट में यह भी पाया गया है कि डीएचएफएल के प्रोमोटर्स ने श्रीलंकन प्रीमियर लीग क्रिकेट टीम में भी इन्हीं लोन से लिया हुआ पैसा लगाया है। इस पूरे स्कैम को आंकडों के माध्यम से समझाने के लिए हमने आपको नीचे एक टेबल दी है, जिससे आप आसानी से समझ सकते हैं की कंपनी ने कहां-कहां से लोन लिया है।

शेल कंपनियों के दस्तावेजों के बारे में कोर्इ जानकारी नहीं

इस रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी रकम को कहां आैर किस तरह से इस्तेमाल किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 34 शेल कंपनियों को डीएचएफएल द्वारा 10,493 करोड़ रुपए का लोन दिया गया है। शहाना समूह की अन्य 11 शेल कंपनियों को 3,789 करोड़ रुपए लोन के रूप में दिया गया है। इन 34 शेल कंपनियों में से अधिकांशतः एेसी कंपनियां है जिनका कोर्इ बिजनेस नहीं है या कोर्इ इनकम नहीं है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इन कंपनियों की अकाउंट  थार एंड कंपनी से करवार्इ गर्इ है जो कि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी वाले लेनदेन को छुपाने के लिए जानी जाती है। इन 45 शेल कंपनियों में से अधिकतर कंपनियों ने लगभग एक समान ही आधिकारिक मेल आर्इडी का इस्तेमाल किया गया है। इन कंपनियों काॅरपोरेट मंत्रालय की वेबसाइट पर लोन के दस्तावेजों के बारे में कोर्इ जानकारी नहीं दी है।

क्या है बीजेपी फंडिंग मामला

इस घोटाले में भाजपा फंडिंग का मामला भी प्रमुख तौर पर अाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2014-15 आैर 2016-17 के दौरान भाजपा को 19.5 करोड़ रुपए का डाेनेशन तीन डेवलपर्स के माध्यम से दिया गया है। ये तीनों डेवलपर्स कथित तौर पर डीएचएफएल के प्रोमोटर्स से जुड़े हुए हैं। इन तीनाें डेवलपर्स का नाम RKW डेवलपर्स प्रा. लिमिटेड, स्किल रिएल्टर्स आैर दर्शन डेवलपर्स है। RKW डेवलपर्स आैर दर्शन डेवलपर्स का राजनीतिक फंडिंग के लिए जानी जाती हैं। साल 2014-15 के दौरान RKW डेवलपर्स ने 10 करोड़ रुपए डोनेशन के तौर पर दिया जबकि 2016-17 के दौरान दर्शन डेवलपर्स ने 7.5 करोड़ रुपए का डोनेशन दिया है। साल 2014-15 में स्किल डेवलपर्स ने 2 करोड़ रुपए का डोनेशन दिया था। भाजपा इन डोनेशन को लेकर कंपनियों के PAN से संबंधित जानकारी देने में असमर्थ रही है। इस प्रकार इन कंपनियों ने कंपनी एक्ट 2013 के तहत सेक्शन 182 का उल्लंघन किया है जो कि राजनीतिक दलों काे दिए जाने वाले काॅरपाेरेट फंडिंग से संबंधित है।

डोनेशन देने वाली कंपनियों को घाटा

इन फंडिंग को लेकर एक चौंकाने वाली बात यह भी है कि RKW डेवलपर्स को 2012-13 के दौरान 82,84,772 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है आैर इसके बावजूद भी कंपनी ने 2014-15 में 10 करोड़ रुपए डोनेशन के तौर पर दिया है। स्किल रिएल्टर्स ने 2 करोड़ रुपए के डोनेशन को अपने बैलेंस शीट में नहीं दिखाया है। इस कंपनी को सामान अवधि में 26,914 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ है। 2013-14 के दौरान दर्शन डेवलपर्स को भी 5,13,406 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है।

गुजरात चुनाव से भी तार जुड़ने के संकेत

इस खुलासे में कहा गया है कि डीएचएफएल ने गुजरात आैर कर्नाटक में भी कंपनियों को लोन दिया है। गुजरात में कंपनी ने कर्इ स्थानीय कंपनियों को अलग-अलग स्कीम्स आैर प्रोजेक्ट्स के लिए 1,106 करोड़ रुपए का लोन दिया है। इनमें से कर्इ प्रोजेक्ट्स पर नगर निगम द्वारा रोक लगा दिया गया है। कुछ मामलों में तो इन प्रोजेक्ट्स को सस्पेंड भी कर दिया गया है। इन कंपनियों ने काेर्इ रिटर्न तक दाखिल नहीं किया है। रिपोर्ट मे दावा किया गया है कि इनमें से अधिकतर लोन्स को गुजरात विधानसभा चुनाव के समय दिया गया है। कोबरा पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है उसने डीएचएफएल के प्रोमोटर्स को इस खुलासे से संबंधित काेर्इ संपर्क नहीं किया है।

कंपनी के स्टाॅक्स भी लुढ़के

इस खुलासे के बाद शेयर बाजार में भी डीएचएफएल के स्टाॅक्स में गिरावट देखने को मिला। कंपनी द्वारा इस गबन के खुलासे के बाद स्टाॅक्स में 11 फीसदी की गिरावट आर्इ है। इसके साथ बाॅम्बे स्टाॅक एक्सचेंज पर कंपनी के प्रति शेयरों का दाम 164.50 रुपए के सबसे न्यूनतम स्तर पर आ गया। हालांकि थोड़ी देर बाद इसमें सुधार देखने को मिला। दिनभर के कारोबार के बाद अंततः 170.05 रुपए प्रति शेयर की दर पर बंद हुआ। सप्ताह के दूसरे कारोबार सत्र के बाद कंपनी स्टाॅक्स में कुल गिरावट 8.1 फीसदी की रही।

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