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20 अप्रैल से इंदौर, भोपाल और उज्जैन को छूट नहीं मिलेगी

भोपाल 20 अप्रैल 2020 । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा है कि प्रदेश में सबसे ज्यादा संक्रमित इंदौर, भोपाल और उज्जैन में 20 अप्रैल से कोई छूट नहीं दी जा रही है। जहां कोई मरीज नहीं है वहां भी धीरे-धीरे व्यावसायिक गतिविधियां शुरू की जाएंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना वायरस को लेकर जहां जैसी स्थिति है वहां संक्रमण को रोकने के लिए वैसे ही उपाय किए जाएंगे। और अन्य गतिविधियों में छूट दी जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बिकने वाले गुटखा पाउच पर तुरंत प्रभाव से प्रतिबंध लगाया जा रहा है। इससे लोग सड़कों पर कहीं भी थूक नहीं सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनौती तो है, पर हमें प्रदेश को नए सिरे से खड़ा करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर इंस्पेक्टर देवेंद्र चंद्रवंशी को मरणोपरांत कर्मवीर पुरस्कार दिया जाएगा। इसी के साथ उनकी पत्नी सुषमा को विभाग मे सब इंस्पेक्टर के पद पर पदस्थ किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना की लड़ाई के परिणाम आना शुरू हो गए हैं। मरीजों की संख्या में कमी आई है। लेकिन, चुनौती बढ़ी है।

यह पूरी तरह प्रतिबंध

हवाई, रेल, रोड से आवागमन, शैक्षणिक संस्थाएं, औद्योगिक, व्यापारिक, होटल (जिन्हें अनुमति दी गई हो, उनके अलावा), सिनेमा हॉल, मॉल, शॉपिंग काम्पलेक्स, धार्मिक स्थल, धार्मिक सभाएं, टैक्सी, ऑटो, रिक्शा सेवाएं बंद रहेगी। अंतिम यात्रा में 20 से अधिक के जाने पर प्रतिबंध रहेगा।
बैंकों में होगा काम, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसियां, किराना दुकानेंं खुलेंगी

बैंकों की गतिविधियाँ, वृद्धाश्रम, सामाजिक पेंशन योजनाओं की राशि का वितरण, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसियां संचालन, पेट्रोल-गैस परिवहन, बिजली उत्पादन, डाक वितरण सेवाएं, पोस्ट ऑफिस, जल आपूर्ति व्यवस्था, सफाई व्यवस्था, अपशिष्ट प्रबंधन, टेलीकम्युनिकेशन एवं इंटरनेट सेवाएं।
माल वाहक वाहनों का संचालन, मरम्मत की दुकानें, ढाबे, किराना दुकानें एवं उचित मूल्य दुकानें , प्रिंट व इलैक्ट्रोनिक मीडिया, आईटी सेवाएं (50 प्रतिशत), कूरियर सेवाएं, इलेक्ट्रिशियन मोटर मेकेनिक, प्लंबर, आईटी मरम्मत, कारपेंटर।
कृषि एवं संबंधित गतिविधियां, ग्रामीण अर्थव्यवस्था संबंधी कार्य, मजदूरों की दैनिक आमदनी की गतिविधियां, आवश्यक सेवाओं की चयनित औद्योगिक गतिविधियां, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ई-कॉमर्स आदि। स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं, दवा निर्माण इकाइयां, चिकित्सा उपकरण संबंधी इकाइयां।
औद्योगिक क्षेत्र गतिविधियां, एसईजेड, निर्यात उन्मुख उद्योग, आवश्यक वस्तुएं, दवाओं के उद्योग, निरंतर चलने वाले उद्योग, आई.टी. हार्डवेयर, कोयला उत्पाद, मिनरल प्रोडक्टस, पैकेजिंग मटेरियल, जूट इंडस्ट्री, ऑइल, गैस इंडस्ट्री।
पांच से ज्यादा लोग एकत्रित नहीं होंगे

सभी मास्क पहनना जरूरी, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन, पांच से ज्यादा लोग एक स्थान पर एकत्रित ना होना, सार्वजनिक स्थानों पर ना थूकना, शराब, गुटका, तंबाकू पर सख्त प्रतिबंध, कार्य स्थल पर टेंप्रेचर स्क्रीनिंग, सेनिटाइजेशन, वृद्ध, कमजोर, मरीज, बच्चे घर पर ही रहेंगे।
इन शर्तों का पालन करना होगा

कंटेनमेंट जोन के कर्मचारियों को काम पर जाने की अनुमति नहीं होगी।
कंपनियों से कहा जाएगा कि जहां संभव हैं, वे कर्मचारियों को फैक्ट्री कैंपस में ही ठहरने की व्यवस्था करे। बुदनी में वर्धमान और ट्राइडेंट में कैंपस में ही आवास की व्यवस्था है, उनका उत्पादन बिल्कुल बाधित नहीं होगा।
जहां ऐसा संभव नहीं होगा तो कर्मचारियों के आवागमन की व्यवस्था की कंपनियों को करनी होगी। इसमें सोशल डिस्टेंसिंग, सैनिटाइजर और मास्क जरूरी होगा।
कंपनियों में प्रवेश से पहले थर्मल स्क्रीनिंग जरूरी होगी।
बैंकों में होगा काम, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसियां, किराना दुकानेंं खुलेंगी

बैंकों की गतिविधियाँ, वृद्धाश्रम, सामाजिक पेंशन योजनाओं की राशि का वितरण, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसियां संचालन, पेट्रोल-गैस परिवहन, बिजली उत्पादन, डाक वितरण सेवाएं, पोस्ट ऑफिस, जल आपूर्ति व्यवस्था, सफाई व्यवस्था, अपशिष्ट प्रबंधन, टेलीकम्युनिकेशन एवं इंटरनेट सेवाएं।
माल वाहक वाहनों का संचालन, मरम्मत की दुकानें, ढाबे, किराना दुकानें एवं उचित मूल्य दुकानें , प्रिंट व इलैक्ट्रोनिक मीडिया, आईटी सेवाएं (50 प्रतिशत), कूरियर सेवाएं, इलेक्ट्रिशियन मोटर मेकेनिक, प्लंबर, आईटी मरम्मत, कारपेंटर।
कृषि एवं संबंधित गतिविधियां, ग्रामीण अर्थव्यवस्था संबंधी कार्य, मजदूरों की दैनिक आमदनी की गतिविधियां, आवश्यक सेवाओं की चयनित औद्योगिक गतिविधियां, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ई-कॉमर्स आदि। स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं, दवा निर्माण इकाइयां, चिकित्सा उपकरण संबंधी इकाइयां।
औद्योगिक क्षेत्र गतिविधियां एसईजेड, निर्यात उन्मुख उद्योग, आवश्यक वस्तुएं, दवाओं के उद्योग, निरंतर चलने वाले उद्योग, आई.टी. हार्डवेयर, कोयला उत्पाद, मिनरल प्रोडक्टस, पैकेजिंग मटेरियल, जूट इंडस्ट्री, ऑइल, गैस इंडस्ट्री।
रेड एरिया- जहां 10 से ज्यादा केस
7 अप्रैल को भोपाल-इंदौर और मुरैना ही रेड एरिया में थे। अब 15 अप्रैल को यह संख्या बढ़ गई। भोपाल, इंदौर, मुरैना के साथ उज्जैन, खरगौन, जबलपुर, बड़वानी, विदिशा, होशंगाबाद, खंडवा, देवास और रतलाम शामिल हो गए हैं।

ऑरेंज एरिया- जहां 10 से कम केस

ग्वालियर, शिवपुरी, छिंदवाड़ा, बैतूल, श्योपुर, रायसेन, धार, सागर, शाजापुर, मंदसौर, सतना, टीकमगढ़, आगर मालवा और अलीराजपुर।
ग्रीन एरिया-सात दिन से कोई केस नहीं

अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, सीधी, सिंगरौली, रीवा, बालाघाट, डिंडोरी, मंडला, सिवनी, नरसिंहपुर, कटनी, निवाड़ी, छतरपुर, पन्ना, दमोह, हरदा, राजगढ़, सीहोर, बुरहानपुर, झाबुआ, नीमच, दतिया, अशोक नगर, गुना व भिंड।

किसानों के लिए खुश खबर 15 लाख किसानों को मिलेंगे फसल बीमा के 2990 करोड़ राज्य सरकार ने जमा किया 22 सौ करोड़ रुपए का प्रीमियम

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश के 15 लाख किसानों को फसल बीमा की
कुल 2990 करोड़ की बीमा राशि अगले सप्ताह तक प्राप्त हो जाएगी। यह राशि सीधे उनके खातों में आ
जाएगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मंत्रालय में कृषि विभाग की बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्य
सचिव इकबाल सिंह बैंस, प्रमुख सचिव कृषि अजीत केसरी एवं अन्य अधिकारी बैठक में उपस्थित
थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि पिछली सरकार ने खरीफ एवं रबी फसलों के लिए सरकार
द्वारा देय प्रीमियम 22 सौ करोड़ का भुगतान नहीं किया था। इसके कारण किसानों को फसल बीमा का
लाभ नहीं मिला। श्री चौहान ने कहा कि हमने सरकार बनते ही मार्च माह में बीमा कंपनियों की यह
राशि जारी कर दी, जिससे अब किसानों को फसल बीमा राशि प्राप्त हो जाएगी।
बैठक में प्रमुख सचिव कृषि ने बताया कि सरकार द्वारा खरीफ वर्ष 2018 तथा रबी वर्ष 2018-
19 की फसल बीमा के प्रीमियम की राशि बीमा कंपनियों को जारी कर दी गई है। अब इन वर्षों की
फसल बीमा की राशि किसानों को प्राप्त हो जाएगी। बैठक में बताया गया कि खरीफ 2018 में प्रदेश के
35 लाख किसानों द्वारा फसलों का बीमा कराया गया था, उनमें से 8.40 लाख किसानों को 19 सौ 30
करोड़ रुपए की बीमा राशि प्राप्त होगी। इसी प्रकार, रबी 2018-19 में प्रदेश के 25 लाख किसानों द्वारा
रबी फसलों का बीमा कराया गया था। इनमें से 6.60 लाख किसानों को 10 सौ 60 करोड़ रुपए की बीमा
राशि प्राप्त होगी।

संकट के दौर से गुजर रहे है बस ऑपरेटर , राज्य सरकार का आगामी आदेश जब तक नहीं आ जाता तब तक थमे ही रहेंगे

22 मार्च से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश सहित पूरे प्रदेश में बसों पहिये थम चुके है और लॉकडाउन खुले तक या केन्द्र सरकार, राज्य सरकार का आगामी आदेश जब तक नहीं आ जाता तब तक थमे ही रहेंगे ।

देवास-इन्दौर प्राईम रूट बस ऑपरेटर एसोसिएशन के अध्यक्ष ठा. वीरेन्द्र सिंह बैस ने बताया कि वाहन स्वामियों के आगे कई विकट समस्याएं उत्पन्न होते देख अन्य प्रदेशों की सरकारों ने अपने प्रदेश के वाहन स्वामियों को अपने मासिक कर में 3-3 माह की छूट दे रही है।

परंतु म.प्र. सरकार की तरह से बस व्यवसाईयों को किसी भी प्रकार की छूट का प्रावधान अभी तक नहीं किया गया है । अप्रैल माह का कर जो हर माह की 10 तारीख को भरते उसे भी भरने हेतु ज्यादा-ज्यादा बढ़कर 30 तारिख कर दी है ।

यानि अभी तक जो आदेश आया है इससे यह स्पष्ट होता है कि वाहन स्वामियों को अपने वाहनों का संचालन नहीं होने के उपरांत भी परमीट सहित अपने वाहनों का टेक्स भरना है ।

बस ऑपरेटर को अपनी एक बस के लिए वार्षिक बीमा राशि 60 हजार रूपये और 20 हजार रूपये प्रतिमाह न्यूनतम आरटीओ टेक्स और इसके साथ बस की फायनेंस कंपनी की किस्त करीब 40 हजार रूपये महिना प्रति बस के हिसाब से देना होती है । इस मान से जिस बस ऑपरेटर पर पास जितनी बसें होगी इतनी राशि का आर्थिक भार उस पर प्रत्येक माह आएगा ।

पहले से महंगाई की मार झेल रहे बस आपरेटरों के सामने दयनीय स्थिति थी ऊपर से यह महामारी जिसे कोरोना के नाम से संबोधित किया गया है जिसने सबकी कमर तोड़ दी है ।

चारो तरह त्राही-त्राही मची हुई है कोरोना का कहर फैला हुआ है किंतु् विडबंना यह है कि बस संचालकों की तरफ सरकार का अभी ध्यान नहीं गया है । बस संचालन नहीं होने से सीधा-सीधा नुकसान बस ऑपरेटर को भुगतना पड़ रहा है ।

बसें खड़ी हुई है फायनेंस किस्ते बकाया हो गई

बसों का स्टाफ भी मोटर मालकों की तरफ देख रहा है । सरकार की उदासिनता ने लाखों परिवार को भारी परेशानी में डाल रखा है । श्री बैस ने कहा कि हम अपनी बात म.प्र. की समस्त बस ऑपरेटर युनियन के माध्यम से मुख्यमंत्रीजी तक पहुचाएंगे ।

हमें पुरा विश्वास है कि म.प्र. के संवेदनशील मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान बस ऑपरेटरों के दर्द को समझेंगे और राहत प्रदान करेंगे । हम सभी वाहन स्वामियों की प्रदेश सरकार से अपेक्षा है कम से कम तीन माह की करों, फिटनेस की छूट प्रदान की जाए । तीन माह का बीमा, फायनेंस किस्ते आगे बढ़ाई जाए । जो फायनेंस कंपनियां किस्ते तीन माह बढ़ा तो रही है लेकिन तीन माहिने का ब्याज अतिरिक्त ले रही है जो कि बहुत ज्यादा है ।

ब्याज न लेते हुए सीधे किस्ते बढाई जाए जिससे हमारी आर्थिक स्थिति खराब न हो । माननीय केन्द्र सरकार व राज्य सरकार इस विपदा की घड़ी में सभी को कुछ न कुछ राहत प्रदान कर रही है । लेकिन अभी तक वाहन स्वामियों के लिए कोई छूट का आदेश नहीं आया है ।

बस ऑपरेटरों को समझ नहीं आ रहा है कि अपने व्यापार को कैसे बचाया जाए । ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई कि शासन द्वारा कोई छूट का प्रावधान नहीं मिला तो समस्त वाहन स्वामी की स्थिति बेहद दुखदायी हो जाएगी ।

बस व्यवसाय से जुड़े सभी बस मालिकों से अनुरोध है कि बस व्यवसाय अभी फिलहाल आगामी आदेश तक संचालन के योग्य नहीें बन रहे है और अगर संचालन प्रारंभ होता भी है तो दुनियाभर की शर्तो के साथ प्रारंभ होगा और इन शर्तो को बस ऑपरेटरों द्वारा पूरी करना संभव नहीं होगा ।

ऐसी स्थिति में हमें बहुत सयंम के साथ आगे बढऩा और बसें संचालन की कोई पहल न करें जब तक हम लाभ की स्थिति में न हो । अपने बसों के पहिए बिलकुल न हिलाए । मेरी बस ऑपरेटरों से हाथ जोड़कर विनती है । जिस प्रकार हमें नये परमीट बनाने के लिए प्रयास करना पड़ते है वैसे ही प्रयास हम सब साथियों को अपनी मांग मनवाने के लिए प्रदेश सरकार से करने होंगे ।

उद्योगों के सहयोग से फिर खड़ी करेंगे प्रदेश की अर्थ-व्यवस्था : मुख्यमंत्री श्री चौहान

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के औद्योगिक प्रतिनिधियों से कहा है कि आपके सहयोग से प्रदेश की अर्थ-व्यवस्था को फिर से खड़ा करेंगे। श्री चौहान ने बताया कि भारत सरकार द्वारा जारी गाइड लाइन का सख्ती से पालन करते हुए उसमें दिए गए उद्योगों को ही 20 अप्रैल से प्रारंभ किया जाए। उन्होंने कहा कि इस बात का पूरा ध्यान रखा जाए कि संक्रमित क्षेत्रों से कोई भी मजदूर कार्य पर न आए। कार्य क्षेत्रों पर मास्क, सेनेटाईजर आदि सभी सुरक्षात्मक उपायों का पालन किया जाए। यथासंभव कार्य स्थल पर ही मजदूरों के रुकने की व्यवस्था की जाए। श्री चौहान मंत्रालय में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के औद्योगिक प्रतिनिधियों से चर्चा कर रहे थे। मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, पुलिस महानिदेशक श्री विवेक जौहरी, प्रमुख सचिव उद्योग श्री राजेश राजौरा, संचालक जनसंपर्क श्री ओ.पी. श्रीवास्तव कॉन्फ्रेंस में उपस्थित थे।

कोरोना से बचाव एवं उपचार की प्रभावी रणनीति

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि प्रदेश में कोरोना से बचाव एवं उपचार की प्रभावी रणनीति पर काम किया जा रहा है। प्रदेश में 9 टेस्ट लैब निरंतर कार्य कर रही हैं। प्रदेश की टेस्टिंग क्षमता निरंतर बढ़ रही है। विशेष विमान से टेस्टिंग सैम्पल दिल्ली भी भिजवाए जा रहे हैं। इंदौर में लगभग 4 लाख व्यक्तियों का सर्वे किया गया है। इलाज के लिए सर्वोत्तम व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। सभी के सहयोग से हम कोरोना को शीघ्र परास्त कर लेंगे।

उच्च गुणवत्ता की है मध्यप्रदेश की पीपीई किट्स

मुख्यमंत्री ने उद्यमियों से कहा कि आप लोगों द्वारा मध्यप्रदेश में बनाई गई पीपीई किट्स उत्तम गुणवत्ता की हैं। इसके लिए आप बधाई के पात्र हैं। उन्होंने बताया कि आज प्रदेश में लगभग 10 हजार किट्स रोज बन रही हैं। हमारी कई फैक्ट्रियों में हाईड्रोक्सी-क्लोरोक्वीन गोलियां बनाई जा रही हैं।

सुझाव महत्वपूर्ण

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने औद्योगिक प्रतिनिधियों से कहा कि आप लोगों के द्वारा दिए गए सुझाव महत्वपूर्ण हैं। आपको उद्योगों के संचालन में हरसंभव सुविधा गाइड लाइन का पूरा पालन करते हुए दी जाएगी। उद्योगों के संचालन में इस बात का पूरा ध्यान रखें कि कोरोना संक्रमण बिल्कुल न फैले। कोरोना संक्रमण को नियंत्रित कर उद्योग चलाएं।

मजदूरों के रूकने की व्यवस्था

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने औद्योगिक प्रतिनिधियों से कहा कि वे कार्य स्थल पर ही यथासंभव मजदूरों के रुकने की व्यवस्था करें। बाहर से यदि आना-जाना आवश्यक हो, तो उसके लिए वाहनों में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मजदूरों को बिठाया जाए तथा कार्यस्थल पर भी इस बात का पूरा ध्यान रखा जाए।

मिल जाएंगी अनुमतियां

मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों को 20 अप्रैल से उद्योग संचालित करने की आवश्यक अनुमतियां शीघ्र मिल जाएंगी। साथ ही मजदूरों को कार्य-स्थल पर आने-जाने के लिए पास भी उद्योग विभाग द्वारा जिला प्रशासन के सहयोग से प्राप्त हो जाएंगे।

कार्य अधिक लेने पर दें बढ़ी हुई मजदूरी

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मजदूरों की कमी को देखते हुए यदि कोई उद्योग 8 घंटे के स्थान पर 12 घंटे की शिफ्ट करना चाहता है, तो उसे अनुमति दे दी जाएगी, परंतु उन्हें उस हिसाब से मजदूरों को बढ़ी हुई राशि देनी होगी। साथ ही 5 के स्थान पर 6 दिन कार्य की भी अनुमति दे दी जाएगी। उद्योग लायसेंस नवीनीकरण भी एक अप्रैल 2020 से एक वर्ष के लिए कर लिया जाएगा। न्यूनतम क्षमता मापदंड इस वर्ष के लिए समाप्त किए जा सकते हैं।

सभी सुरक्षात्मक उपाय अपनाएं

प्रमुख सचिव उद्योग डॉ. राजेश राजौरा ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान प्रदेश में 112 बड़े तथा 1200 एम.एस.एम.ई. उद्योग संचालित थे जो दवा कंपनियों, खाद्यान्न सामग्री तथा आवश्यक वस्तुओं से संबंधित थे। अब 20 अप्रैल से भारत सरकार की गाइड लाइन के अनुसार प्रदेश के कुल 360 बड़े उद्योगों में से लगभग 200 उद्योग चालू किए जा सकेंगे तथा 12 हजार एमएसएमई उद्योगों में से लगभग 6 हजार उद्योग प्रारंभ किए जा सकेंगे। डॉ. राजौरा ने प्रतिनिधियों से कहा कि एसईजेड, निर्यात उद्योग, औद्योगिक क्षेत्र के उद्योग, ग्रामीण क्षेत्र के उद्योग सहित अत्यावश्यक सेवाओं के उद्यम प्रारंभ किए जा सकेंगे। सभी सुरक्षात्मक उपायों के साथ उद्योग प्रारंभ करें। इस बात का पूरा ध्यान रखा जाए कि संक्रमण न फैले। उद्योगों में 40 से 50 प्रतिशत मजूदर से ज्यादा न हों। श्रमिकों को यथासंभव उद्योग परिसर में ही रुकवाया जाए। उन्हें लाने वाली बसों में 30 से 40 प्रतिशत क्षमता का ही उपयोग हो। संक्रमित क्षेत्रों में न तो कोई उद्योग प्रारंभ होगा और न ही कोई मजूदर वहां से आएं-जाएं। सर्दी, जुकाम, 55 वर्ष से अधिक के डायबटीज, बी.पी.मरीज, छोटे बच्चों वाली महिलाएं काम पर नहीं आएं। परिसर में साबुन, सेनेटाईजर, मास्क, ग्लब्स, थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था हो। कार्य स्थल पर मजदूरों की दूरी 8 से 10 फीट हो। उद्यम को खुलने, बंद होने तथा दोपहर में भोजन अवकाश के समय सेनेटाईज किया जाए। कार्य स्थल पर अस्पतालों की सूची टांगें, जहां इलाज की सुविधा हो।

उद्योगपतियों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव

वीडियो कान्फ्रेंसिंग में औद्योगिक प्रतिनिधि श्री रवि झुनझुनवाला, श्री राजेन्द्र गुप्ता, श्री अनुराग श्रीवास्तव (सी.आई.आई.), श्री एस. चौधरी, श्री दिनेश पाटीदार (शक्ति पम्प) श्री सिद्धार्थ सेठी, (इन्फोबीन), सुश्री शिरीष गोयल (एम.एस.एम.ई.), श्री आर.एस. गोस्वामी, (‍हिंद फार्मा), श्री आदित्य श्रीवास्तव (वॉल्वो आयशर), श्री सिद्धार्थ अग्रवाल (सागर इण्डस्ट्री), श्री अखिलेश राठी (अध्यक्ष, टेक्सटाईल मिल्स एसोसिएशन), श्री अरूण सोनी (लघु उद्योग भारती) ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने प्रदेश में कोरोना बचाव एवं उपचार के लिए मुख्यमंत्री सहित शासन की सराहना करते हुए उनका धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने सुझाव दिए कि मजदूरों को फैक्ट्री आने-जाने की लिखित अनुमति दी जाए। बिजली का भुगतान एक-दो माह के लिए टाला जाए और 8 घंटे के स्थान पर मजदूरों के 12 घंटे की शिफ्ट चलाए जाने की अनुमति दी जाए तथा 5 दिन के स्थान पर 6 दिन कार्य की अनुमति दी जाए। मजदूरों के लिए ई.एस.आई. अस्पतालों को सुदृढ़ किया जाए। ट्रांसपोर्टर्स को आश्वस्त किया जाए कि उन्हें आने-जाने में तकलीफ नहीं होगी। कोरियर सेवाएं प्रारंभ कराई जाएं, जिससे कंटेनर आ-जा सकें। सरकार लिक्विडी सपोर्ट करे तथा पॉवर चार्जेस में कमी करे। तुअर दाल पर मण्डी टैक्स में छूट मिले।

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