मुख्य पृष्ठ >> प्रदेश >> मध्यप्रदेश >> उज्जैन / भोपाल >> विपक्ष के सवालों का जवाब देने की बजाय, विपक्ष से ही सवाल पूछ रहे हैं मुख्‍यमंत्री- कमलनाथ

विपक्ष के सवालों का जवाब देने की बजाय, विपक्ष से ही सवाल पूछ रहे हैं मुख्‍यमंत्री- कमलनाथ

भोपाल 23 जुलाई 2018 । मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि कितना शर्मनाक व आश्चर्यजनक है कि जिनकी मध्यप्रदेश में 15 वर्ष से सरकार है , वो विपक्ष के सवालों का जवाब देने की बजाय , उलटा विपक्ष से ही सवाल पूछ रहे है । जिन्हें हिसाब- किताब देना चाहिये , जिन्हें विकास के मुद्दे पर विपक्ष द्वारा पूछे सवालो का जवाब देना चाहिये, वो जवाब देने से मना कर रहे है और ख़ुद विपक्ष से ही सवाल पूछ रहे है। नाथ ने कहा कि मेरे द्वारा जनहित के विभिन्न मुद्दों पर प्रदेश के मुख्यमंत्री को अभी तक 8 पत्र लिखे जा चुके है, उन पत्रों को मेरे द्वारा समय-समय पर सार्वजनिक भी किया गया है लेकिन आज तक उन पत्रों का शिवराज ने कोई जवाब नहीं दिया।
मेरे द्वारा एक दिन पूर्व शिवराज से प्रदेश के विकास के बड़े- बड़े दावे को लेकर 10 सवाल पूछे गये थे, जिनका जवाब देने से मना कर सत्ता में बैठे शिवराज , उलटा विपक्ष से ही सवाल पूछ हास्यादपद व शर्मनाक स्थिति पैदा कर रहे है ? बेहतर होता शिवराज मेरे द्वारा पहले पूछे गये सवालों व पत्रों का पहले जवाब देते फिर कांग्रेस से सवाल पूछने की हिम्मत दिखाते। फिर भी में शिवराज की बातों का जवाब ज़रूर दूँगा। 15 वर्ष में दुनिया विकास की दृष्टि से कहा से कहा पहुँच गयी और शिवराज छोटी – मोटी उपलब्धि को ही गिनवाकर ख़ुश हो रहे है ।किसी भी प्रदेश के विकास को लेकर 5 वर्ष ही बहुत होते है , आपको तो जनता ने 15 वर्ष दिये। और यदि आपने इतने विकास कार्य किये है तो मेरे पत्रों व सवालों का जवाब दीजिये ?
आज प्रदेश देश में विकास को लेकर नहीं अपितु बलात्कार , किसानों की आत्महत्या , कुपोषण , भ्रष्टाचार , अवैध उत्खनन , बेरोज़गारी को लेकर शीर्ष पर है। मेरे केन्द्र सरकार में मंत्री रहते हुए प्रदेश के विकास को लेकर विभिन्न योजनाओं व सड़कों के लिये दी गयी राशि व प्रदेश के विकास को लेकर किये गये योगदान को सार्वजनिक रूप से स्वीकारने वाले शिवराज आज मेरे योगदान पर किस मुँह से सवाल उठा रहे है ? समझ से परे है। अब जनता ही इनसे इस बात का जवाब माँगेगी।

कमलनाथ से घबराई भाजपा ज्योतिरादित्य को कर रही प्रोजेक्ट

पूर्व केन्द्रीय मंत्री तथा कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ को मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान सौंपने के बाद कांग्रेस में गुटबाजी नहीं होने से ने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी में घबराहट का माहौल पैदा हो गया है। कमलनाथ को मध्यप्रदेश का संगठन अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस ने पार्टी में फैली गुटबाजी पर लगाम कसने में काफी हद तक सफलता हासिल कर ली है। उनकी वरिष्ठता और प्रभाव को देखते हुए सारे गुटबाज नेता गुटबाजी को दरकिनार कर पार्टी के काम में लग गये हैं। कमलनाथ को मध्यप्रदेश कांग्रेस के एक और दिग्गज तथा पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के साथ ही सुरेश पचौरी जैसे सभी वरिष्ठ नेताओं का सहयोग, समर्थन, सम्मान और विश्वास प्राप्त होने की वजह से कांग्रेस स्वाभाविक तौर पर मजबूत हो रही है, तो दूसरी ओर भाजपा में उसके ही विधायकों और सांसदों के प्रति खुला असंतोष चिंता का विषय बना हुआ है। भाजपा अब कमलनाथ के कारण कांग्रेस की मजबूती की राह में बाधा बनने जबरदस्त राजनीतिक पैंतरेबाजी दिखाती नजर आ रही है। देखा जा रहा है कि भाजपा का सोशल मीडिया सेल इस समय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और भाजपा के नेताओं से ज्यादा कांग्रेसी नेता ज्योतिरादित्य को मुख्यमंत्री के रूप में प्रचार-प्रसार में जुटा हुआ है। सोशल मीडिया और अन्य प्रचार माध्यमों पर
ज्योतिरात्यि सिंधिया को मुख्यमंत्री बनवाने की मुहिम छेड़ी गई है। उन्हें मुख्यमंत्री पद का दावेदार बताया जा रहा है। जबकि कांग्रेस की ओर से यह स्पष्ट है, कि किसी को भी मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार प्रोजेक्ट नहीं किया जायेगा। पार्टी यहां सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी और उसके बाद विधायक दल के नेता का चयन होगा। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा से जुड़े लोग ही ज्योतिरादित्य को कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर भाजपा का मीडिया तंत्र ज्योतिरादित्य को मुख्यमंत्री के तौर पर आगे लाने का काम क्यों कर रहा है। सीधा सा जवाब है कि प्रदेश में पिछले कुछ दिनों में भाजपा के पांच विधायकों को जनता ने क्षेत्र से बहार कर दिया। तो मंत्री दीपक जोशी भी जनता की नाराजगी के शिकार हुए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इंदौर और राजगढ़ की सभाओं में काले झंडे का इतना भय भाजपा और उसकी सरकार को सताया, कि काले रंग के वस्त्र वालों तक को सभा में प्रवेश नहीं करने दिया गया। कांग्रेस के लिए यह बहुत सुखद स्थिति है। कमलनाथ के हाथ में कमान सौंपे जाने के बाद कांग्रेस में अब तक किसी तरह की गुटबाजी और भीतरघात का खतरा पूरा न सही, काफी हद तक ख़त्म हो गया है। जिस तरह 2003 के चुनाव में भाजपा एकजुट थी और कांग्रेस में आंतरिक शीतयुद्व छिड़ा हुआ था उसी तरह अब कांग्रेस एकजुट और भाजपा बिखरी हुई दिखाई पड़ रही है। अपनी कमजोरी से उबरने के लिए भाजपा को कांग्रेस में गुटबाजी से ही ताकत मिल सकती है। ऐसा सीधे-सीधे तो हो नहीं कहा जा सकता इसलिए भाजपा का प्रचार तंत्र कमलनाथ और ज्योतिरादित्य के बीच खाई खोदने के लिए मेहनत कर रहा है। इधर कांग्रेस की हरसंभव कोशिश है कि गुटबाजी के रोग से बमुश्किल निजात पाने के बाद अब किसी भी हाल में इसे पनपने दिया जाये। इसीलिए कमलनाथ जैसे वरिष्ठ और प्रभावशाली कांग्रेसी को मध्यप्रदेश कांग्रेस का नेतृत्व सौंपा गया है। कांग्रेसी यह समझ चुके हैं कि उनकी आपसी फूट की वजह से भाजपा मध्यप्रदेश में पन्द्रह साल राज कर चुकी है। अब उसे वापस सत्ता से सड़क पर लाना है, तो कांग्रेस को गुटबाजी और गुटबाज नेताओं से दूर रहना पड़ेगा। भाजपा का सोशल मीडिया और नेता जिस तरह कांग्रेस में फूड डालने का प्रयास कर रहे हैं। उसके बाद कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के बीच संबंध और बहतर हो रहे हैं। इससे भाजपा की मुश्किलें आने वाले दिनों में और बढ़ेंगी।

शेयर करें :

इसे भी पढ़ें...

मोदी सरकार के आर्थिक सुधार कार्यक्रमों के सुखद परिणाम अब नजर आने लगे हैं

नई दिल्ली 20 सितम्बर 2021 । वर्ष 2014 में केंद्र में मोदी सरकार के स्थापित …