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क्या 70 लाख की ‘छोटी रकम’ है बरखा दत्त के ‘विद्रोह’ के पीछे?

नई दिल्ली 19 जुलाई 2019 । तिरंगा टीवी मैनेजमेंट और सिब्बल मियां-बीवी, बरखा दत्त के एक के बाद एक उन पर लगाए आरोपों के चलते सकते में आए लगते हैं, इसलिए अभी तक उस ओर से कोई ऑफिशियल बयान जारी नहीं हुआ है। हालांकि, तिरंगा टीवी में कार्यरत सोर्सेज से कई कहानियां छन-छनकर बाहर आ रही हैं और अगर वो सच हैं तो वाकई में दिलचस्प और हैरतअंगेज हैं। इन रिपोर्ट्स पर यकीन किया जाए तो बरखा दत्त के आरोपों में एक नया ट्विस्ट आ जाता है।

सूत्रों का कहना है कि ये ठीक है कि तिरंगा टीवी चैनल ठीक नहीं कर पा रहा था और फाइनेंसियल क्राइसेस से गुजर रहा था, इसके लिए कई सारे फैक्टर जिम्मेदार है। बताया गया है कि शुरुआती तौर पर बरखा दत्त को केवल चार लोगों का निजी स्टाफ अलॉट किया गया था, लेकिन धीरे-धीरे यह संख्या चार से बढ़कर 17 पहुंच गई। इससे चैनल का खर्चा भी काफी बढ़ गया।

वैसे बरखा के स्टाफ और उनके निजी खर्चों को लेकर सवाल उस वक्त भी उठे थे. जब उन्होंने राघव बहल के वेंचर ‘द क्विंट’ के लिए कुछ पॉलिटिकल इंटरव्यू करने का करार किया था। बताते हैं कि बरखा के बड़े खर्चों को देखते हुए उस वक्त भी उनका करार बहुत जल्द ही खत्म हो गया था। टीवी इंडस्ट्री में जब भी महंगे एंकर्स की बात होती है तो बरखा की हाई कॉस्ट हमेशा चर्चा का विषय बनती है। सूत्र ये भी बताते हैं कि तिरंगा टीवी में कई अनावश्यक खर्चों और गैर जिम्मेदार फैसलों के चलते चैनल की वित्तीय हालत खराब हुई और टीवी मैनेजमेंट ने कर्मचारियों को निकालने का फैसला किया। चूंकि कंपनी और एम्पलॉइज के बीच कॉन्ट्रैक्ट में केवल एक महीने की सैलरी के कमिटमेंट का उल्लेख था, ऐसे में पिछले दो महीनों से चैनल में शुरू हुई पिंक स्लिप मुहिम के तहत एम्पलॉइज को सिर्फ यही राशि दी गई।

ऐसे में सवाल भी उठते हैं कि जब कर्मचारियों को पिछले दो महीनों से निकाला जा रहा था, तब बरखा ने आवाज क्यों नही उठाई? लोग तो यहां तक बता रहे हैं कि तब बरखा ने ये कहकर पल्ला झाड़ लिया था कि वो तो चैनल में कंसल्टिंग एडिटर हैं, कोई रेग्युलर रोल में नहीं है। उल्लेखनीय है कि जब कर्मचारियों ने तीन जुलाई को कपिल सिब्बल के घर के आगे धरना दिया था, उस वक्त भी बरखा दत्त चुप्पी साधे रहीं।

बरखा ने असली ‘क्रांति’ का बिगुल तब फूंका, जब गाज उन पर गिरी। सूत्रों के मुताबिक बरखा का टोटल एक्सपेंस चैनल को करीब 30 लाख रुपए प्रति महीने का पड़ रहा था और ऐसे में कंपनी ने उनकी सेवाएं समाप्त करने के बाद 70 लाख रुपए देकर कांट्रैक्ट खत्म करने का फैसला लिया।

सूत्र बताते हैं बरखा को ये राशि रास नहीं आई, वो कम से कम 6 महीने का कंपनसेशन अमाउंट चाहती थीं, लेकिन चैनल प्रबंधन ने इससे साफ तौर पर मना कर दिया और यही से कहानी खराब होती चली गई। बताया जा रहा है कि ये तनातनी तब और बढ़ गई जब यशवंत सिन्हा के बुक लॉन्च के कार्यक्रम (जिसकी मॉडरेटर बरखा दत्त थीं) की कवरेज के लिए जाने वाली चैनल की कैमरा यूनिट को तिरंगा टीवी मैनेजमेंट ने ऐन वक्त पर वहां जाने से रोक दिया।

इससे मामला और बिगड़ता चला गया और नौबत यहां तक आ पहुंची कि बरखा ने ट्विटर के माध्यम से सारी भड़ास निकाल दी। महिला आयोग में भी कपिल सिब्बल और उनकी पत्नी के खिलाफ शिकायत कर दी। ऐसे में अभी तक ऑफिशियली कपिल सिब्बल ने कुछ भी बोलने से परहेज किया है। सूत्र तमाम अंदर की बातें शेयर कर रहे हैं, वैसे बरखा ने एकतरफा ट्विटर वार शुरू कर सिब्बल दंपती को अपने निशाने पर ले लिया है।

लेकिन दुर्भाग्य ये है कि जिस तरह एक नए चैनल के बंद होने की खबरें आ रही हैं, उससे करीब 200 पत्रकारों के परिवारों पर बड़ा संकट आ गया है। ऐसे में जरूरत है कि तिरंगा मैनेजमेंट कोई ऐसा बीच का रास्ता निकाले, जिससे मध्यमवर्गीय पत्रकार कम से कम नई नौकरी मिलने तक अपना जीवनयापन तो कर सके।

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