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मध्यप्रदेश के स्थाई निवासियों को 70 प्रतिशत रोजगार देना अनिवार्य

नई दिल्ली 10 जनवरी 2019 । मध्यप्रदेश के स्थाई निवासियों को अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा एम.एस.एम.ई. विकास नीति-2017 में नया प्रावधान जोड़ा गया है। इस नीति के तहत प्रावधानित रियायतों एवं अन्य सुविधाओं का लाभ लेने वाली इकाइयों को उनके द्वारा उपलब्ध करवाये गये कुल रोजगार का 70 प्रतिशत रोजगार मध्यप्रदेश के स्थाई निवासियों को दिया जाना अनिवार्य होगा।

मध्यप्रदेश एम.एस.एम.ई. विकास नीति-2017 में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी के विनिर्माण उद्यमों को सहायता के लिये किये गये प्रावधानों को क्रियान्वित करने की दृष्टि से राज्य शासन द्वारा लागू मध्यप्रदेश एम.एस.एम.ई. प्रोत्साहन योजना-2017 को इस आशय तक संशोधित माना जायेगा। यह प्रावधान 31 दिसम्बर, 2018 के बाद उत्पादन प्रारंभ करने वाली इकाइयों पर प्रभावी होगा।

पढ़िए कलेक्टर की जगह नया पदनाम क्या होगा, CM ने सुझाया नया नाम
सीएम कमलनाथ को ‘कलेक्टर’ पदनाम से चिढ़ है। उनका कहना है कि यह अंग्रेजों का दिया हुआ पदनाम है। इससे अहंकार की बू आती है इसलिए इसे बदल दिया जाना चाहिए। नया पदनाम क्या हो, इस पर सुझाव मांगे गए हैं। इस बीच सीएम कमलनाथ ने ही एक नया पदनाम भी सुझा दिया है। कहा जा रहा है कि यही फाइनल हो जाएगा।

छिंदवाड़ा के दौरे पर पहुंचे कमलनाथ ने संभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि कलेक्टर नाम अंग्रेजों के जमाने से चल रहा है और आज के जमाने के हिसाब से यह ठीक नहीं है। मीटिंग में कमलनाथ ने अधिकारियों से कहा, ‘कलेक्टर पद का नाम अंग्रेजी में अंग्रेजों के जमाने से चला आ रहा है। मैंने लोगों से सुझाव मांगा है कि यह क्यों कलेक्टर होना चाहिए। मैंने जिले के कलेक्टरों से ही कहा है कि उनके पद का नया नाम क्या होना चाहिए। डीसी (डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर) क्या होता है। यह भी मुझे नहीं चाहिए। कलेक्टर पद का नाम डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेटर होना चाहिए।’

पहले भी उठा चुके हैं ‘कलेक्टर’ पर सवाल
इससे पहले कमलनाथ ने भोपाल में भी कहा था, ‘कलेक्टर पद का नाम ठीक नहीं है। यह अंग्रेजों के समय से चला आ रहा है और आज के जमाने में इस पद के हिसाब से ठीक शब्द नहीं है।’ उन्होंने जिले के आला प्रशासनिक अधिकारी को कलेक्टर कहे जाने पर तंज कसते हुए कहा था, ‘कलेक्टर क्या कलेक्ट (इकट्ठा) करता है, जो उसे कलेक्टर कहा जाए? क्या वह टिकट कलेक्ट करता है या अन्य कुछ चीज कलेक्ट करता है, जो उसे कलेक्टर कहें। इस पद का नाम बदला जाना चाहिए।’

1772 में तय हुआ ‘कलेक्टर’ पदनाम
जानकारों का मानना है कि देश में ब्रिटिश राज के दौरान भारत के पहले गवर्नर जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स ने वर्ष 1772 में डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर पद की शुरुआत करवाई थी। उस दौरान इंडियन सिविल सर्विसेज के सदस्य ही डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर हुआ करते थे जबकि देश की आजादी के बाद भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी ही डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर बनते हैं।

हमारी लड़ाई आर्थिक बदहाली, कुपोषण, घटते रोजगार अवसर और कम होते निवेश से है- कमलनाथ

बुधवार, जनवरी 9, 2019, मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री कमलनाथ ने अपने ब्‍लाग में मध्‍यप्रदेश के भविष्‍य और आने वाली चुनौतियों के संबंध में अपने दिन की बातों को उजागर किया है। उनके ब्‍लाग को यहां हू-ब-हू दिया गया है।

इस लड़ाई में हम कामयाब होंगे

कठोर डगर की विरासत पर

सधे हुए कदमों से बढ़ेंगे हम ,

पूरे हौसले से सारी कठिनाइयों से लड़ेंगे हम ,

सुशासन की एक-एक सीढ़ियाँ गढ़ेंगे,

और कदम-दर-कदम

उस पर चढ़ेंगे हम –

राज्यपाल महोदया ने ‘हम सबकी सरकार कैसे प्रदेश का भविष्य सँवारेगी’ इस पर प्रकाश डाला है। मैं ये मानता हूँ कि हमारे सामने आर्थिक संदर्भों में कई चुनौतियाँ हैं, मगर चुनौतियों को अवसर में बदलने का नाम ही मध्यप्रदेश है। हम इस कठोर डगर पर सधे हुए कदमों से चलेंगे।

हम जानते हैं कि बीते 15 वर्ष के इतिहास की गलतियों से सबक नहीं लेंगे तो भविष्य हमें माफ़ नहीं करेगा। हमारी मान्यता है कि किये हुए काम अपना प्रचार ख़ुद करते हैं, इसलिए हम सिर्फ़ कोरी घोषणाओं से बचें और अपना सारा ध्यान काम पर लगाएँ।

मध्यप्रदेश के नागरिकों ने नई सरकार को बदलाव के लिये चुना है। ये बदलाव सुशासन के लिये है। बीते 24 दिनों में बदलाव की पदचाप सुनाई देने लगी है। हम सरकार में से ‘मैं और मेरी’ हटाकर ‘हमारी सरकार’ की भावना स्थापित करना चाहते हैं। अब हर नागरिक गर्व से कह सकता है, ‘मैं भी सरकार हूँ’। हम सही मायने में सत्ता की कमान प्रदेश के नागरिकों को सौंपना चाहते हैं ।

विश्वास मानिए, जब भी सत्ता ‘व्यक्ति केंद्रित’ होती है, तो प्रजातंत्र को नुकसान पहुँचता है। इसमें सामूहिकता का बोध होना चाहिए। पक्ष, प्रतिपक्ष और जनता, सबका दायित्व प्रजातंत्र ने निर्धारित किया है। हमारी मान्यता है कि सरकार ठीक काम करे, इसके लिये प्रतिपक्ष मज़बूत और ज़िम्मेदार होना चाहिये।

मैं ये साफ़ कर देना चाहता हूँ कि हमारी लड़ाई प्रतिपक्ष के खिलाफ़ नहीं है। हम सब मिलकर मध्यप्रदेश की आर्थिक बदहाली, कुपोषण, अपराध, घटते रोज़गार के अवसर और कम होते औद्योगिक निवेश के खिलाफ़ लड़ाई लड़ेंगे और कामयाब होंगे। हमारी प्राथमिकता में नागरिकों का स्वास्थ्य, शिक्षा और अधोसरंचना भी है।

हमारे अन्नदाता भाइयों को कठिनाइयों से उबारना है। कर्ज माफ़ी स्थाई समाधान नहीं है। उनकी बहुत बड़ी अपेक्षाएँ नहीं हैं। वो सिर्फ़ अपनी फ़सलों के दाम चाहते हैं,ये हमें सुनिश्चित करना होगा।

भारतीय सनातन संस्कृति से बेटियाँ देवियों का स्वरूप हैं। उनसे प्रेरणा ली गई है। आज क्या हम उन्हें प्रताड़ित होने दें ? कतई नहीं। उनके सशक्तिकरण के लिए कदम उठा रहे हैं। उनके ससुराल जाने के वक्त 51 हज़ार रु. देकर पिता का फ़र्ज निभा रहे हैं। बेटियाँ खुशी मनाती हैं, तो तरक्की मुस्कुराती है।

प्रदेश का उज्जवल भविष्य युवाओं में निहित है। अगर उनको अवसर प्रदान किये जाएंगे, तो हम तरक्की की पायदान चढ़ते जाएंगे। ये तब ही संभव है जब मध्यप्रदेश में निवेश हो और वो सिर्फ़ बड़े आयोजनों से आकर्षित नहीं होगा। बड़े कदम उठाने की ज़रूरत है। लाल फीता शाही ख़त्म कर लाल कारपेट बिछाने होंगे।

गौ माता के लिए गौ शाला हो, भगवान राम का वनगमन पथ या नर्मदा जैसी शास्त्रीय नदियों की अविरलता हो, हम अपने वचन-पत्र के प्रति पूरी प्रतिबद्धता से काम करेंगे।

हम गर्व से कह सकते हैं कि मध्यप्रदेश देश का वो राज्य है जहाँ सबसे ज़्यादा आदिवासी भाई रहते हैं और प्रदेश के विकास में भरपूर साथ देते हैं। अब बारी हमारी है उनका साथ निभाने की, उनकी खुशियाँ उन्हें लौटाने की। अनुसूचित जाति, सामान्य वर्ग, हर वर्ग के हाथों में लेकर हाथ चलेंगे। हम सब साथ साथ करेंगे ‘सिर्फ़ और सिर्फ़ सुशासन के लिए बदलाव की बात।’

राज्यपाल ने की कांग्रेस की तारीफ, गदगद हुए कमलनाथ

 मध्यप्रदेश में विधानसभा सत्र के दौरान स्पीकर का चयन कर लिया गया। इसके बाद प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपना अभिभाषण शुरू किया। उन्होंने कहा है कि ‘मध्य प्रदेश सरकार घोषणाओं में नहीं प्रचार कम-काम ज्यादा में विश्वास करती है। सरकार का मानना है कि कहने से ज्यादा जरूरी काम करना है। मुझे विश्वास है कि यह नई संस्कृति ‘वक्त है बदलाव का’ को चरितार्थ कर प्रदेश को प्रगति की नई दिशा की ओर ले जायेगी। राज्यपाल आनंदी बेन से कांग्रेस पार्टी की तारीफ सुनकर कमलनाथ गदगद हो गए।

प्रदेश में 15 साल बाद कांग्रेस की सरकार बनी है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के भाषण के दौरान बीजेपी के विधायक सदन में अनुपस्थित रहे। राज्यपाल ने कहा कि ‘मप्र सरकार ने तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। किसानों की कर्ज माफी, अध्यात्म विभाग का गठन, कन्या विवाह-निकाह योजना की राशि में वृद्धि, उद्योग नीति में परिवर्तन कर 70 प्रतिशत स्थानीय युवाओं को साप्ताहिक अवकाश देने और ऐसे ही अनेक फैसले इस बात का प्रमाण है कि सरकार ने, जो कहा सो किया, को चरितार्थ कर रही है। आनंदीबेन ने कहा कि ने कमलनाथ सरकार ने कार्यभार संभालते ही राष्ट्रीयकृत तथा सहकारी बैंकों में अल्पकालीन फसल कर्ज के रूप में शासन द्वारा पात्रतानुसार पात्र पाये गये किसानों के दो लाख रूपये की सीमा तक का बकाया फसल ऋण माफ कर दिया है।’

बता दें कि बीजेपी के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर और विजयराघवगढ़ से विधायक संजय पाठक भी कमलनाथ की तारीफ कर चुके हैं। एक कार्यक्रम में बाबूलाल गौर ने कहा था कि कमलनाथ का संसदीय क्षेत्र छिंदवाड़ा विकास का मॉडल है। उन्होंने जिस तरह छिंदवाड़ा का विकास किया वह तारीफ करने लायक है। संजय पाठक ने कहा था कि कमलनाथ काबिल नेता और उन्हें लम्बा अनुभव है, कमलनाथ अच्छे मैनेजर हैं वो सरकार चला लेंगे। पार्टी नेताओं के बयान से हटकर पाठक द्वारा दिए गए इस बयान से सियासत गरमा गई थी।

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