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ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह मेरे खिलाफ लड़ें चुनाव तो रोचक होगा मुकाबला

भोपाल  11 फरवरी 2019 ।मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस अपनी-अपनी तैयारियों में जुट गए हैं। लोकसभा स्पीकर और इंदौर सांसद सुत्रित्रा महाजन ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि अभी इंदौर की चाबी मेरे पास है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सही समय आने पर मैं इंदौर की चाबी किसी और को दूंगी। महाजन ने कहा- अगर मेरे खिलाफ अच्छे लोग मैदान में हों तो अच्छी बात होगी। उन्होंने कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह को चुनौती देते हुए कहा कि अगर इन दोनों में से कोई मेरे खिलाफ चुनाव लड़े तो मुकाबला दिलचस्प होगा। महाजन ने कहा कि अभी मैं पूरी तरह से स्वस्थ हूं और मैं अगला लोकसभा चुनाव इंदौर से ही लड़ूगी।

उम्मीदवार बदलने की थी खबरें
भाजपा की तरह से इस बार इंदौर से अपना उम्मीदवार बदलने की अटकलें सामने आ रही थीं। हाल ही में ऐसी खबरें सामने आईं थी कि इंदौर लोकसभा सीट से इस बार भाजपा पार्टी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को उम्मीदवार बना सकती है। हालांकि विजयवर्गीय ने कहा था कि पार्टी ने मुझे अभी पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी दी है औऱ मेरा फोकस बंगाल में पार्टी को जीत दिलाना है। सुमित्रा महाजन की तरफ से दिए गए बयान से साफ हो गया है कि ताई एक बार फिर से चुनाव लड़ेंगी। बता दें कि सुमित्रा महाजन लगातार आठवीं बार इंदौर संसदीय सीट से चुनाव जीत रही है। कांग्रेस यहां सुमित्रा महाजन को नहीं हरा पाई है।

अरुण हगोविल को उम्मीदवार बना सकती है कांग्रेस
कांग्रेस की तरफ से इस बार इंदौर लोकसभा सीट से टीवी कलाकार अरुण गोविल को उम्मीदवार बनाए जाने की सुर्खियां हैं। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी अरुण गोविल के नाम पर अपनी सहमति जताई है। हालांकि कांग्रेस की तरफ से अभी अरुण गोविल को उम्मीदवार बनाए जाने का कोई अधाकारिक बयान नहीं आया है।

मप्र में भाजपा का चुनावी शंखनाद करेंगे मोदी

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की भोपाल में आठ फरवरी को आयोजित किसान रैली के हफ्ते भर बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 और 16 फरवरी को मध्यप्रदेश के अलग-अलग इलाकों में दो जन सभाओं को संबोधित करेंगे। प्रदेश भाजपा इकाई मोदी के इस दो दिवसीय दौरे को अप्रैल-मई में प्रस्तावित लोकसभा चुनावों का शंखनाद बता रही है।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह ने रविवार को यहां संवाददाताओं को बताया कि प्रधानमंत्री 15 फरवरी को होशंगाबाद और 16 फरवरी को धार में जन समुदाय को संबोधित करेंगे।

उन्होंने कहा, “मोदी की इन रैलियों के जरिये भाजपा की ओर से प्रदेश में आगामी लोकसभा चुनावों का शंखनाद होगा।”

सूबे में गत नवंबर में हुए विधानसभा चुनावों के कांटे की टक्कर वाले मुकाबले में भाजपा की 15 साल पुरानी सत्ता चली गयी थी और विजयी कांग्रेस इतने ही बरस बाद सत्ता में लौटी थी।

भाजपा की चुनावी हार के बाद सूबे में मोदी की आगामी रैलियों को सियासी लिहाज से बेहद अहम आंका जा रहा है।

भाजपा संगठन के सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री की रैलियों के जरिये पार्टी सूबे में अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए उन्हें लोकसभा चुनावों की आगामी जंग के लिये तैयार करना चाहती है.

प्रदेश में लोकसभा की कुल 29 सीटें हैं। वर्ष 2014 के पिछले चुनावों में भाजपा ने इनमें से 26 सीटें जीती थीं, जबकि शेष तीन सीटें कांग्रेस की झोली में गयी थीं।

KAMAL NATH ने महाराष्ट्र से मांगी शिवराज की ससुराल

सीएम कमलनाथ ने महाराष्ट्र से शिवराज सिंह चौहान की ससुराल मांग ली है। जी हां, मजाक-मजाक में ही सही लेकिन उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया जिले की समस्याओं का स्थाई समाधान सुझाया है कि उसे मध्यप्रदेश में शामिल कर दिया जाए। बता दें कि गोंदिया जिला पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह का मायका है। साधना सिंह के परिवारजन, गोंदिया में रहते हैं और मध्यप्रदेश के बालाघाट में कारोबार करते हैं।

पूर्वी महाराष्ट्र का गोंदिया जिला मध्यप्रदेश की सीमा से सटा है। गोंदिया शहर में मनोहर भाई पटेल पुरस्कार कार्यक्रम में सीएम कमलनाथ को आमंत्रित किया गया था। राकांपा नेता प्रफुल्ल पटेल ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री से जिले के लिए वैनगंगा और बाघ नदियों से पानी छोड़ने का अनुरोध करते हुए कहा कि यदि कंकोरनी में वैनगंगा पर बैराज बना दिया जाता है तो आधा पानी मध्यप्रदेश का बालाघाट जिला और बाकी गोंदिया इस्तेमाल कर सकता है।

इस पर कमलनाथ ने मजाक मजाक में कहा, ‘‘दो विकल्प हैं। पहला, मध्यप्रदेश इस मांग को स्वीकार करे, अन्यथा अच्छा विकल्प है कि आप गोंदिया को मध्यप्रदेश में मिला दें तब आपको अनुरोध नहीं करना होगा। बता दें कि मध्यप्रदेश के बालाघाट और महाराष्ट्र के गोंदिया के बीच अटूट रिश्ते हैं परंतु राज्य अलग होने के कारण ना केवल कई तरह के घोटाले हो जाते हैं बल्कि आम जनता को परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है।

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