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जानिये ज्योतिरादित्य सिंधिया का कौन वफादार होगा MP में उप मुख्यमंत्री!

भोपाल  19 दिसंबर 2018 । कमलनाथ ने सोमवार को मध्यप्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलायी। ऐसे में शपथ से पहले काफी देर तक ज्योतिरादित्य सिंधिया का वहां नहीं दिखना चर्चा का विषय बना रहा।

वहीं जानकरों का मानना है कि भले ही कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद के लिए बाजी मार ली हो, लेकिन अब सिंधिया अपने ही किसी विश्वासपात्र को उपमुख्यमंत्री बनवा सकते हैं।

दरअसल कांग्रेस को तीन राज्यों में मिली जीत के बाद राजस्थान की कमान अशोक गहलोत को, छत्तीसगढ़ की कमान भूपेश बघेल को और मध्यप्रदेश के लिए कमलनाथ को चुना गया, जिनमें से गहलोत व नाथ आज शपथ भी ले चुके हैं। इन कार्यक्रमों में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सहित महागठबंधन पार्टियों से कई नेता शिरकत की।

बताया जाता हे कि पार्टी ने मुख्यमंत्रियों का चुनाव कुछ तरह से किया है जिससे उसे आगामी 2019 के चुनाव में कोई दिक्कत नहीं होगी।

वहीं रणनीतिकारों का मानना है कि पार्टी मध्यप्रदेश में बहुत ज्यादा लाभ कमाने की उम्मीद में है, क्योंकि यहां पार्टी का संगठन काफी मजबूत है। भले ही यहां ज्योतिरादित्य सिंधिया राज्य के मुख्यमंत्री बनना चाहते थे, लेकिन अंतिम समय पर बाजी कमलनाथ के हाथ आ गई।

बताया जाता है कि इसके बाद सिंधिया ने शांतिपूर्ण तरीके से अपने मुख्यमंत्री पद की दावेदारी उस समय वापस ले ली, जब उन्हें बताया गया कि नाथ के पक्ष में समर्थन करने से उन्हें प्रशंसा मिलेगी।

सूत्रों का कहना है कि पार्टी उन्हें प्रदेश अध्यक्ष या फिर कांग्रेस का महासचिव बना सकती है। वहीं यह भी माना जा रहा है कि सिंधिया उपमुख्यमंत्री के पद के लिए किसी वफादार का नाम सुझा सकते हैं।
राजनीति के जानकारों की माने तो इनमें केपी सिंह, इमरती देवी या मुन्नालाल गोयल का नाम सुझा सकते हैं।

दूसरी ओर पार्टी रणनीतिकारों को भाजपा शासित रहे तीनों राज्यों से काफी ज्यादा अपेक्षाएं हैं क्योंकि उसे उम्मीद है कि यहां मिली सफलता से वह 2019 में संसद के अंदर अपने सदस्यों की संख्या में इजाफा कर सकती है।

सत्ता में आई कमलनाथ की नई सरकार मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले नहीं कर पाएगी। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के काम से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों को बिना अनुमति हटाने पर रोक लगा दी है।

ऐसा माना जा रहा था कि कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य सरकार कई अधिकारियों का तबादला कर सकती है। इनमें उन अधिकारियों के नाम शामिल हैं जो लंबे समय से एक ही विभाग में तैनात हैं या जो भाजपा सरकार के चहेते रहे हैं।

मतदाता सूची का होगा काम
मार्च के पहले पखवाड़े में लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लग सकती है। इसी के मद्देनजर चुनाव आयोग तैयारियों में जुट गया है। सामने आ रही सूचना के अनुसार ऐसे में 26 दिसंबर को मतदाता सूची का प्रारंभिक प्रकाशन होगा।

इसके साथ ही मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन के दावे-आपत्ति का कार्य शुरू हो जाएगा।

25 जनवरी तक दावे-आपत्ति लिए जाएंगे और 11 फरवरी के पहले इनका निराकरण किया जाएगा। 18 फरवरी तक मतदाता सूची की तैयारी कर 22 फरवरी को अंतिम प्रकाशन कराया जाएगा। इसी सूची के आधार पर लोकसभा चुनाव होंगे।

बताया जाता है कि मतदाता सूची के काम में कमिश्नर, कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, पटवारी व शिक्षक मिलकर 70 हजार से ज्यादा अधिकारी और कर्मचारियों की ड्यूटी लगती है। इसे देखते हुए चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के काम से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को बिना अनुमति हटाने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

फेरबदल इन विभागों में संभव…
दरअसल मुख्यमंत्री पद संभालते ही कमलनाथ को मुख्य सचिव को चुनना है। इसके बाद ही आगे की कार्यवाही होगी। बताया जाता है कि कांग्रेस सरकार गठन के साथ ही गृह, कृषि, ग्रामीण विकास, उद्योग, जनसंपर्क, नगरीय प्रशासन और सामान्य प्रशासन विभाग में बड़े स्तर में अधिकारियों को बदला जा सकता है। इसके साथ ही प्रशासनिक फेरबदल भी हो सकते हैं।

भाजपा नेताओं के रिश्तेदार अधिकारी हटेंगे!…
प्रदेश में सत्ता बदलने के साथ ही भाजपा नेताओं के रिश्तेदार अधिकारियों का भी हटना लगभग तय है। इन अधिकारियों की तैनाती विधानसभा चुनाव से ठीक पहले की गई थी।

जिसमें जनसंपर्क विभाग में तैनात आईपीएस अधिकारी आशुतोष प्रताप सिंह, नगर निगम भोपाल के आयुक्त अवनीश लवानिया का नाम शामिल है। आशुतोष शिवराज सिंह चौहान के भांजे दामाद हैं, जबकि लवानिया नरोत्तम मिश्रा के दामाद हैं।

वहीं कांग्रेस सरकार ने वचन पत्र के मुताबिक पहले 10 दिनों के अंदर किसानों की कर्ज माफी, समेत कई चुनावी वादे हैं जिसे पूरा करना सरकार की प्रतिबद्धता है।

नाथ के हाथ में आई मध्यप्रदेश की कमान, ली शपथ…
कमलनाथ छिंदवाड़ा संसदीय क्षेत्र से नौ बार सांसद चुने गए हैं। 1979 में प्रथम बार छिंदवाड़ा से निर्वाचित हुए, उसके बाद लगातार 1984, 1990, 1991, 1998, 1999, 2004, 2009, 2014 में लोकसभा के लिए निर्वाचित होते रहे हैं।

वहीं मध्यप्रदेश विधानसभा के लिए 28 नवंबर को मतदान हुआ था और 11 दिसंबर को आए चुनाव परिणाम में प्रदेश की कुल 230 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस को 114 सीटें मिली हैं।

वह बसपा के दो, सपा के एक और चार अन्य निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बनी है। कांग्रेस को फिलहाल कुल 121 विधायकों का समर्थन हासिल है। वहीं, भाजपा को 109 सीटें मिली हैं।

इधर आज हुए शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव मल्लिकार्जुन खड़गे, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया आदि मौजूद रहे। वहीं शपथग्रहण के बाद कमलनाथ व सिंधिया भी शिवराजसिंह चौहान से मिले।

इनके अलावा तेलुगू देशम पार्टी के प्रमुख और आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चन्द्रबाबू नायडू, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार, लोकतांत्रिक जनता दल के शरद यादव, द्रमुक नेता एमके स्टालिन, राजद नेता तेजस्वी यादव, नेशनल कांफ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी समारोह में शामिल हुए।

भाजपा के पूर्व सीएम बाबूलाल गौर से बोले राहुल गांधी – हमारी पार्टी में आ जाओ

शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर की मुलाकात कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से कराई।

बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने गौर से कहा कि आप हमारी पार्टी में आ जाओ। वहीं, बाबूलाल गौर और सिंधिया के बीच भी दिलचस्प संवाद हुआ। मुलाकात के दौरान गौर ने सिंधिया से कहा कि आप तो अर्जुन हो गए हो, सिंधिया ने भी जवाब देते हुए कहा, आप के रास्ते पर चल रहा हूं।

राज्यपाल ने रचा इतिहास

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भी आज एक इतिहास रचा है। वे संभवत: पहली राज्यपाल बनी हैं, जिसने एक ही दिन में दो राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पद की शपथ दिलाई। पहले उन्होंने भोपाल में कमलनाथ को मप्र के मुख्यमंत्री पद की और शाम को रायपुर में भूपेश बघेल को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई।

जब बाबूलाल ने कहा था बनेगी कांग्रेस की सरकार

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में अकसर अपने बयानों के लिए चर्चा में रहने वाले पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर ने चुनाव के बाद और मतगणना से पहले एक बड़ा बयान दिया था। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी।

भोपाल उत्तर से कांग्रेस उम्मीदवार और वर्तमान में कांग्रेस विधायक आरिफ अकील बाबूलाल गौर से मिलने पहुंचे तो उन्होंने ने आरिफ अकील को बधाई देते हुए कहा ‘सरकार बन रही है..आप कैबिनेट मंत्री बन रहे हो…बधाई हो।’ दोनों ही नेताओं के बीच काफी देर तक चर्चा चलती रही। आरिफ अकील ने कहा कि वे बाबूलाल से आशीर्वाद लेने आए थे।

दिग्विजय सिंह ने कहा कमलनाथ को “बुलडोजर”

असल में उन्होंने बुलडोजर कहकर कमलनाथ की तारीफ की। उनके अनुसार राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश कांग्रेस की तरफ से घोषणापत्र में किए गए वादे के स्वरूप किसानों के कर्ज माफी के लिए 10 दिन की समयसीमा दी थी। जिस कार्य को कमलनाथ ने सीएम बनते ही पहले दिन में ही कर दिया। उनके अनुसार उन्होंने 10 घंटे भी नहीं लिए इस काम के लिए जिसे करने के लिए उन्हें कांग्रेस आलाकमान ने 10 दिन का समय दिया था। इसलिए उन्हें बुलडोजर कहकर संबोधित किया और उनकी ट्वीट पर प्रशंसा की।

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