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शिवराज के फैसलों पर कमलनाथ का ब्रेक

भोपाल 11 जनवरी 2019 । कमलनाथ सरकार ने शिव सरकार के फैसलों को बदलना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में दो विभागों पर ताले लगा दिए हैं। इनमें एक वह विभाग है, जिसे शिवराज ने प्रदेश की जनता को आनंद दिलवाने के लिए शुरू किया था।

शिवराज ने आनंद मंत्रालय की शुरुआत की थी। इस विभाग का उद्देश्य प्रदेश के निवासियों में उत्साह और आनंददायक गतिविधियों के जरिए ऊर्जा भरना बताया गया था। कमलनाथ को शिवराज का यह कॉन्सेप्ट पसंद नहीं आया। उन्होंने आनंद मंत्रालय बंद करवा दिया। आनंद विभाग के साथ नाथ ने एक और विभाग पर ताला लगाया है, वह है धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग। यह विभाग भी भाजपा सरकार ने ही शुरू किया था। अब इन दोनों विभागों को एक ही विभाग में मर्ज कर दिया गया है, लेकिन कई गतिविधियां हटा दी गईं।

अब होगा अध्यात्म विभाग

धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग को नए स्वरूप में लाए हैं। इसे अध्यात्म विभाग नाम दिया गया है। इस विभाग के तहत संस्कृति विकास, समुदायों के बीच शांतिपूर्ण सहअस्तित्व, मैत्री और बंधुत्व की भावना विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। इसी विभाग में आनंद विभाग की एक्टिविटी भी जोड़ दी गई हैं यानी अब तक जो आनंद विभाग के तहत किया जाता था, अब उनमें से कुछ गतिविधियां इस विभाग के जरिए होंगीं।

इंदौर के लिए क्या..?

– इन दोनों विभागों के बंद होने के बाद शुरू हुए नए विभाग में इंदौर को भी बड़ा तोहफा मिलेगा।

– अध्यात्म विभाग के तहत नर्मदा न्यास का विकास के साथ तीन नदियों के न्यास के गठन का भी प्रस्ताव है। इनमें से एक नदी इंदौर से लगी शिप्रा है। शिप्रा के साथ ताप्ती और मंदाकिनी के लिए भी न्यास बनेगा।

– शास्त्रों में उल्लेखित प्रदेश की पवित्र नदियों को जीवित करने की भी योजना है। इसमें इंदौर में सरस्वती नदी के पुनरुद्धार कार्यक्रम मेें तेजी आएगी।

– प्रदेश में धार्मिक टूरिज्म को बढ़ावा देने की भी योजना है, जिसमें इंदौर के पास उज्जैन, महेश्वर, मंडलेश्वर, ओंकारेश्वर जैसे तीर्थ स्थलों के विकास के लिए नए सिरे से योजनाएं तैयार की जाएंगीं।

गोपाल भार्गव के साथ ये हो क्या रहा है, नाम के नेता प्रतिपक्ष रह गए

सागर जिले की रहली विधानसभा से भाजपा के वरिष्ठ और कद्दावर नेता गोपाल भार्गव नेता प्रतिपक्ष तो बन गए लेकिन 2 दिनों में उनके साथ 2 अजीब से घटनाक्रम भी हुए। एक महिला विधायक सदन के भीतर उनके बंगले की मांग करने लग गईं। आज शिवराज सिंह चौहान उनकी कुर्सी पर आकर बैठ गए। ज्ञापन नेता प्रतिपक्ष को देना था, लेकिन उन्हे साथ भी नहीं रखा

नेता प्रतिपक्ष की रेस में नरोत्तम मिश्रा से बाजी जीतकर आए गोपाल भार्गव फिलहाल एक पीड़ित की तरह नजर आ रहे हैं। विधानसभा अध्यक्ष के निर्वाचन में आपत्ति जताने के लिए भाजपा का विधायक दल राज्यपाल महोदय से मिलने राजभवन पहुंचा। कायदे से दल का नेता होने के नाते गोपाल भार्गव को नेतृत्व करना चाहिए था परंतु शिवराज सिंह लगातार आगे-आगे आते रहे। यहां तक कि राज्यपाल महोदय को ज्ञापन भी शिवराज सिंह चौहान ने ही सौंपा, गोपाल भार्गव नेता प्रतिपक्ष होते हुए भी सामान्य विधायक की तरह खड़े रहे।

गोपाल भार्गव की कुर्सी पर भी कब्जा कर लिया
बुधवार को विधानसभा सदन के भीतर दमोह जिले से बसपा विधायक रामबाई जिद पर अड़ गईं। बोली उन्हें वो बंगला चाहिए जिसमें गोपाल भार्गव रहते हैं। यह चौंकाने वाला था। एक विधायक सदन के भीतर यह मांग कर रही थी कि नेता प्रतिपक्ष से उनका आवास खाली कराकर उसे आवंटित कर दिया जाए। जबकि वो मंत्री भी नहीं है। गुरूवार को शिवराज सिंह चौहान सदन में उस कुर्सी पर जाकर बैठ गए जो नेता प्रतिपक्ष के लिए आरक्षित होती है। कायदे से यहां गोपाल भार्गव को बैठना चाहिए था परंतु गोपाल भार्गव एक सहायक की तरह पास वाली कुर्सी पर बैठे नजर आए। हालात यह बने कि सत्ता पक्ष के विधायकों को आपत्ति उठानी पड़ी।

विधानसभा में 2 अटपटी सी हरकतें कीं
पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान को भाषण की लत लग गई है यह तो सब जानत हैं, लेकिन यह जानकर आप चौंक जाएंगे कि पिछले 1 साल से हर जगह भाषण देते-देते अब उन्हे भाषण देने की बीमारी हो गई है। जहां भीड़ देखते हैं, भाषण शुरू कर देते हैं। विधानसभा सदन के भीतर आज उन्होंने भाषण शुरू कर दिया। हालात यह बने कि विधानसभा अध्यक्ष को टोककर उन्हे चुप कराना पड़ा। इससे पहले वो नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी पर बैठ गए और नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव को अपने पास वाली कुर्सी पर बिठा दिया।

विधानसभा में आज चौंकाने वाला घटनाक्रम हुआ पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सदन में बुधवार को राज्यसभा में पारित हुए सामान्य वर्ग के आरक्षण बिल पर धन्यवाद ज्ञापित करना शुरू कर दिया। इस पर सत्ता पक्ष के विधायकों ने हंगामा कर दिया। विधानसभा अध्यक्ष ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को टोकते हुए कहा कि बिना अनुमति आप कुछ नहीं बोल सकते आप बैठ जाए। अध्यक्ष की बात सुनते ही विपक्ष के सदस्यों ने भी हंगामा शुरू कर दिया। सदन में भारी हंगामे के बीच उपाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। विपक्षी सदस्य आसंदी के सामने पहुंच नारेबाजी कर रहे हैं। भारी हंगामें के बीच अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दस मिनट के लिए स्थगित कर दी गई है।

नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी पर बैठ गए शिवराज सिंह
सदन में आज सत्ता पक्ष के विधायकों ने शिवराज सिंह की बैठने की जगह पर भी आपत्ति दर्ज कराते हुए अध्यक्ष से इसकी शिकायत की। दरअसल पूर्व मुख्यमंत्री सदन में विपक्ष के नेता वाली जगह पर बैठे हुए थे उनके बगल में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव बैठे थे। सत्ता पक्ष के विधायकों के हंगामा और शिकायत करने के बाद शिवराज सिंह ने गोपाल भार्गव से उनकी जगह आने कहा। फिर दोनों ने अपनी सीट बदल ली।

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