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‘कलेक्टर’ के नाम को लेकर बड़े बदालव की तैयारी में कमलनाथ सरकार!

भोपाल 11 फरवरी 2020 । मध्य प्रदेश सरकार कलेक्टर पद का नाम बदलने को लेकर ठोस कदम उठाने जा रही है। सरकार ने इस बात का हवाला देते हुए कहा कि कलेक्टर शब्द अंग्रेजों के जमाने से चला आ रहा है और इससे अंग्रेजियत की बू आती है। अंग्रेजों के समय जो राजस्व कुलेक्ट करते थे उन्हें कलेक्टर कहा जाता था। इसमें अब बदलाव की जरूरत है। इसके साथ ही नया और आधुनिक नाम पर भी विचार किया जा रहा है। कमलनाथ सरकार ने सत्ता में आने के बाद कलेक्टरों के पदनाम बदलने के लिए आईएएस अधिकारियों से सुझाव भी मांगे थे, लेकिन यह फैसला अधर में ही अटका रह गया।
अब इसके लिए कमलनाथ सरकार ने बकायदा तैयारियां शुरु कर दी। जल्द ही नाम सरकार पदनाम में परिवर्तन करने वाली है। मुख्यमंत्री कमलनाथ की मंशा के अनुसार यह पदनाम बदला जाएगा। कलेक्टर का नाम बदलने के लिए पांच अफसरों की एक कमेटी अपर मुख्य सचिव आईपीसी केसरी की अध्यक्षता में बनाई गई है। जो सोमवार को मंत्रालय में पहली बैठक करेगी। इस कमेटी में पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव मलय श्रीवास्तव, मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के एमडी विशेष गढ़पाले और सागर कलेक्टर प्रीति मैथिल के साथ राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी शामिल है। यह कमेटी आपस में विचार मंथन करने के साथ-साथ अन्य लोगों से भी इस बारे में अन्य लोगों से भी सलाह मशवरा करेगी। हालांकि खुद मुख्यमंत्री कलेक्टर के नए नाम के बारे में जिला अधिकारी और जिलाधीश नाम सुझा चुके हैं।

आशय पत्र अटका प्रतिदिन करोड़ों रुपये की हो रही है रेत चोरी

मध्यप्रदेश के रेत खदानों वाले 42 में से 37 जिलों में रेत खनन के ठेके हो चुके हैं। इनमें से 32 रेत ठेकेदार अग्रिम भुगतान राशि (ठेके की 50 प्रतिशत) भी जमा कर चुके हैं। लेकिन जिन ठेकेदारों को ठेके मिले हैं, उन्होंने अभी तक राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण (सिया) से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिया है। इस कारण सरकार ने इन्हें आशय पत्र जारी नहीं किए गए हैं, अर्थात आशय पत्र मिलने तक यह वैधानिक रूप से रेत उत्खनन नहीं कर सकते।

इसके विपरीत प्रदेशभर में इन ठेकेदारों ने अवैधानिक रेत नाके स्थापित कर अवैध रूप से रेत खनन करने वालों से वसूली और स्वयं भी रेत खनन शुरू कर दिया है। सूत्र बताते हैं कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस के सहयोग से प्रत्येक जिले से प्रतिदिन करोड़ों रुपये की रेत चोरी कराई जा रही है।

उल्लेखनीय है कि विगत 16 जनवरी को प्रदेश के खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल ने 37 जिलों में रेत उत्खनन के लिए उच्चतम बोली लगाने वाले ठेकेदारों को ठेके दिए जाने संबंधी आशय पत्र (एलओआई) जारी किए थे। चूंकि इस आशय पत्र के आधार पर ठेकेदार सीधे ही रेत उत्खनन नहीं कर सकते।

रेत खनन से पर्यावरण और पर्यावरणीय संरचनाओं जैसे नदी, पहाड़ आदि को नुकसान न हो। इसे सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण (सिया) ने कुछ मानक तय किए हैं। इन्हीं मानकों के पालन के साथ रेत खनन किए जाने की अनुमति सिया द्वारा इन्हें दी जाती है। अधिकांश ठेकेदारों ने इसके लिए आवेदन भी कर दिया है, लेकिन अभी तक एक भी रेत ठेकेदार को सिया से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं मिली है।

परिणाम स्वरूप अभी प्रदेश की किसी भी नदी से वैधानिक या अवैधानिक रूप से रेत खनन नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद राजनीतिक संरक्षण में प्रदेशभर में प्रतिदिन रेत के हजारों ट्रक नदियों को मशीनों से खरोंचने में लगे हैं।

सरकार को सब पता है, फिर भी रोक नहीं

ऐसा नहीं कि प्रदेश में चल रहे अवैध रेत खनन की सूचना और जानकारी सरकार में बैठे नेताओं और अधिकारियों को नहीं है, बल्कि यूं कहें कि इन्हीं राजनेताओं और अधिकारियों के संरक्षण में यह अवैध उत्खनन धड़ल्ले से जारी है।

प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही रेत घाटों पर अवैध उत्खनन जारी है। पंचायतों के नाम पर भी ठेकेदार अवैध खनन में जुटे रहे। अब जिन ठेकेदारों को ठेके दिए गए हैं, कई स्थानों खुद उन्होंने अवैध खनन करना शुरू कर दिया है, जबकि कई घाटों पर पूर्व से अवैध उत्खनन करने वाला माफिया ही सक्रिय है, लेकिन ठेकेदारों ने नाके लगाकर इनसे वसूली करना शुरू कर दिया है।

बाबा के नाम पर 2-2 लाख की वसूली

नदियों में रेत उत्खनन पर नजर गढ़ाए बैठे मप्र नदी न्यास के अध्यक्ष कम्प्युटर बाबा के नाम पर इन दिनों कई लोग वसूली में जुटे हैं। हालांकि यह वसूली उन लोगों से की जा रही है जो नदियों से अवैध रूप से रेत उत्खनन कर रहे हैं। इस कारण इन वसूलीखोरों का खुलकर विरोध भी नहीं हो पा रहा है।

उल्लेखनीय है कि कम्प्युटर बाबा विगत 3-4 महीनों में करीब आधा दर्जन बार नदी के घाटों पर छापा मार चुके हैं। हालांकि एक स्थान पर छापामार कार्रवाई सम्पन्न होने के बाद बाबा फिर से घाट पर अवैध उत्खनन की सूचना मिलने पर भी नहीं पहुंच रहे हैं।

रेत कारोबार से जुड़े सूत्र बताते हैं कि जिन रेत ठेकेदारों को विभिन्न जिलों के ठेके दिए गए हैं, उन्होंने जिले की विभिन्न सीमाओं पर अपने नाके स्थापित कर लिए हैं तथा धड़ल्ले से अवैध वसूली की जा रही है। जबकि सिया की अनुमति नहीं मिलने के कारण राज्य शासन ने अभी इन्हें रेत खनन की अनुमति प्रदान नहीं की है।

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