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शपथ लेने के बाद पहले इंटरव्यू में बोले कमलनाथ

भोपाल 19 दिसंबर 2018 । नए सीएम कमलनाथ से सीधा सवाल था- केंद्र सरकार ने मप्र के हक को रोका तो आपकी सरकार क्या करेगी? कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में जो कहा है, उसे अक्षरश: पूरा किया जाएगा और यदि केंद्र सरकार ने प्रदेश का हक देने में पक्षपात किया तो प्रदेश के हित में हम उससे लड़ेंगे।

उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश की जनता बहुत समझदार है। वह कभी ठगी बर्दाश्त नहीं करती। यदि उसे आभास हो जाए कि उसे ठगा गया है, छला गया है तो सबक सिखाने में देर नहीं करती। मप्र सहित तीन राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनना भाजपा को जनता द्वारा सिखाए सबक का ही नतीजा है।

सरकार का खजाना खाली है और आपने वचन पत्र में कर्जमाफी, बेरोजगारी भत्ते के साथ कई घोषणाएं हैं, उन्हें पूरा करने के लिए पैसा कहां से आएगा?

कमलनाथ : यह सच है कि प्रदेश का खजाना खाली पड़ा है लेकिन हमने वचन पत्र में जो भी वादे किए हैं उन्हें नई सोच के साथ नए संसाधन जुटाकर पूरा करेंगे। खर्च में कटौती होगी, कर्ज पर शिकंजा कसा जाएगा।

यदि केंद्र सरकार ने मदद कम की तो समस्या और ज्यादा होगी, कैसे निबटेंगे?

कमलनाथ: हम केंद्र सरकार से अपील करेंगे कि बगैर राजनीतिक भेदभाव के जिस तरह से हमारी यूपीए सरकार ने शिवराज सरकार की मदद की थी, इसी तरह हमारी सरकार की भी मदद करे और यदि केंद्र सरकार ने राजनीतिक भेदभाव से काम किया तो निश्चित ही प्रदेश के हित की लड़ाई लड़ेंगे और प्रदेश का हक लेकर रहेंगे।

बेरोजगारी की समस्या बड़ी है, इससे कैसे निबटेंगे?

कमलनाथ: मुझे मालूम है कि मंदिर-मस्जिद जाने से रोजगार के अवसर नहीं आते। इसके लिए जरूरी है कि ज्यादा से ज्यादा निवेश आए। यह तभी संभव है जब प्रदेश में विश्वास का वातावरण बने। मैं देश का वाणिज्य मंत्री रह चुका हूं, इसलिए जानता हूं कि अर्थव्यवस्था कैसे चलाई जाती है। निवेश लाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

चुनाव के दौरान छिंदवाड़ा मॉडल की खूब चर्चा रही, क्या है यह मॉडल?

कमलनाथ: यह लोगों के दुख-तकलीफ दूर करने की एक व्यवस्था है। अब आप छिंदवाड़ा की सोच को प्रदेश के हर जिले में देखेंगे, क्योंकि मैं अब हर जिले का मुख्यमंत्री हूं।

जिन अफसरों ने चुनाव में भाजपा के दबाव और प्रभाव में काम किया है, उनको हम कतई माफ नहीं करेंगे

क्या विधानसभा चुनाव में सरकारी मशीनरी निष्पक्ष रही, यदि नहीं तो गड़बड़ करने वाले अफसरों की पहचान कैसे करेंगे और क्या कार्रवाई करेंगे? उनका जवाब था- कई स्थानों पर सरकारी अफसरों द्वारा गड़बड़ी करने की शिकायतें मिली हैं। मैं भी लगातार संपर्क में था इसलिए कई अफसर सुधर गए लेकिन कई जिलों में भाजपा के दबाव-प्रभाव में आकर अधिकारियों ने काम किया, उनकी सूची हम तैयार कर रहे हैं। ऐसे अधिकारियों को कतई माफ नहीं किया जाएगा।

– नतीजों को लेकर हमें कुछ आशंका है, क्योंकि ईवीएम खराब होने की सबसे ज्यादा शिकायतें सतना सहित विंध्य अंचल से मिलीं

– जनता में जितनी नाराजगी शिवराज सरकार के प्रति थी, उससे कहीं ज्यादा मोदी सरकार से, मप्र में हमें लोकसभा में 21 से 22 सीटें मिलेंगी

चुनाव के दौरान शिवराज और भाजपा की किस चूक का फायदा कांग्रेस को मिला?

कमलनाथ: भाजपा अथवा शिवराज से चुनाव के दौरान कोई चूक नहीं हुई। सच यह है कि शिवराज ने प्रदेश को ठीक ढंग से पहचाना ही नहीं। यही कारण है कि किसान आत्महत्या हो, भ्रष्टाचार हो, बेरोजगारी हो अथवा बलात्कार सभी में प्रदेश पहले पायदन पर है। इसके अलावा लगातार झूठ बोलकर जनता को ठगा गया। इन्हीं चूकों की वजह से भाजपा सत्ता से बाहर हुई।

शिवराज की भाजपा सरकार और आपकी सरकार में बुनियादी फर्क क्या होगा?

कमलनाथ: भाजपा की सरकार में भ्रष्टाचार गांव से शुरू होकर भोपाल तक चरम पर था। छोटे छोटे कामों से लेकर बड़े स्तर के काम बिना रिश्वत दिए नहीं होते थे। मेरी कोशिश होगी कि इस भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त किया जाए। इसके लिए योजना बनाकर काम किया जाएगा और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

आपने 140 सीटों में जीत का दावा किया था, कहां कमी रह गई?

कमलनाथ: निश्चित ही हमारा अनुमान 140 सीट जीतने का था। हमें विंध्य इलाके से कम सीटें मिलीं, जबकि हमें अनुमान ज्यादा सीट जीतने का था। नतीजों को लेकर हमें कुछ आशंका है। क्योंकि ईवीएम खराब होने की सबसे ज्यादा शिकायतें सतना सहित विंध्य अंचल से मिलीं।

तो क्या ईवीएम में गड़बड़ी की अपनी तरफ से किसी तरह की जांच कराएंगे?

जवाब: निश्चित ही, विंध्य इलाके में जिस तरह से हमें सीटें कम मिली और ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायतें मिलीं। इसकी जांच मैं अपने स्तर पर किसी एजेंसी से कराऊंगा। एजेंसी न कांग्रेस की होगी और न ही सरकारी। हम मतदाता सूचियों की तर्ज पर इसकी भी जांच कराएंगे। विंध्य के जो रिजल्ट आए हैं वे लोगों की राय से मेल नहीं खाते।

6 माह के अंदर लोकसभा चुनाव हैं, आपको मप्र में कितनी सीटें जीतने की उम्मीद है?

कमलनाथ: जिस तरह की सफलता हमें विधानसभा चुनाव में मिली है उम्मीद है कि उससे ज्यादा सफलता लोकसभा चुनाव में मिलेगी। हम लोगों को भरोसा दिलाएंगे कि यह जनता की सरकार है। उनके साथ कोई धोखा नहीं होगा। जनता में जितनी नाराजगी शिवराज सरकार के प्रति थी, उससे कहीं ज्यादा केंद्र की मोदी सरकार से है। मुझे उम्मीद है कि लोकसभा में कांग्रेस मप्र में 21 से 22 सीटें जीतेगी।

क्या कांग्रेस सरकार प्रतिशोध की राजनीति में यकीन रखती है?

कमलनाथ: हम समाज के हर तबके के विकास में और जमीन पर हकीकत में किए गए काम में यकीन रखते हैं। प्रतिशोध में हमारा यकीन नहीं है। हमारे राहुलजी ने कहा भी था कि हम भाजपा को प्यार से हराएंगे। हमने उसे प्यार से हराया भी। हम आगे भी उससे लड़ेंगे और जीतेंगें पर भाजपा को मिटाएंगे नहीं। हमारा फलसफा आदर और सम्मान का है।

ये है कमलनाथ का संभावित मंत्रिमंडल
कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद के लिए शपथ ग्रहण कर ली परंतु अब मंत्रिमंडल एक बड़ी चुनौती है। हालांकि मध्यप्रदेश में मंत्रियों के नाम का चयन चुनौती नहीं है। लड़ाई तो विभागों के बंटवाने में होनी है। कुछ नाम ऐसे हैं जिन पर कोई संशय किया ही नहीं जा सकता। आइए देखते हैं, कौन कौन हैं मंत्री पद के प्रबल दावेदार:

आरिफ अकील: वर्तमान में कांग्रेस के वरिष्ठ मुस्लिम विधायक हैं। सामाजिक प्रतिनिधित्व और लोकल भोपाल में एक मंत्री तो होना ही चाहिए।

इमरती देवी: डबरा विधानसभा सीट से इमरती देवी, ज्योतिरादित्य सिंधिया के कोटे से मंत्री बनाई जा सकतीं हैं।

लक्ष्मण सिंह: दिग्विजय सिंह के छोटे भाई लक्ष्मण सिंह चाचौड़ा विधानसभा सीट से जीतकर विधायक बने हैं।

जीतू पटवारी: इंदौर की राऊ विधानसभा सीट से जीते जीतू पटवारी का नाम कैबिनेट में तय माना जा रहा है। पटवारी कमलनाथ के खास हैं और राहुल गांधी की टीम में भी आते हैं। देखना यह है कि इन्हे कौन सा मंत्रालय मिलता है।

सज्जन सिंह वर्मा: सोनकच्छ सीट से पूर्व मंत्री व विधायक सज्जन सिंह वर्मा कमलनाथ कोटे से हैं।

तुलसी सिलावट: इंदौर सीट विधायक तुलसी सिलावट प्रमुख दावेदार हैं।

विजयलक्ष्मी साधो: महेश्वर से विजयलक्ष्मी साधो काफी वरिष्ठ नेता हैं।

बाला बच्चन: निमाड़ से कांग्रेस के दिग्गज नेता बाला बच्चन कार्यकारी नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं।

सचिन यादव: कसरावद विधायक सचिन यादव पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव के भाई हैं। कैबिनेट नहीं तो राज्यमंत्री का पद जरूर मिलेगा।

कमलेश्वर पटेल: सिहावल विधायक कमलेश्वर पटेल वरिष्ठ नेता हैं। कैबिनेट के हकदार माने जा रहे हैं।

तरुण भनोट: जबलपुर पश्चिम सीट से तरुण भनोट के कमलनाथ से काफी अच्छे रिश्ते हैं।

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