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कमलनाथ मंत्रिमंडल की शपथ संभवत: 24 दिसंबर को, 20 से अधिक मंत्री हो सकते हैं शामिल

भोपाल 22 दिसंबर 2018 । डेढ़ दशक बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस के मुख्यमंत्री कमलनाथ 24 दिसंबर को अपनी कैबिनेट का गठन करेंगे। मुख्यमंत्री ने शपथ समारोह के लिए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से चर्चा कर ली है। पहली बार के विधायकों को मौका नहीं दिया जाएगा। देर शाम वह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी एवं अन्य नेताओं से मिलने रवाना हो गए, मुख्यमंत्री के रूप में यह उनकी पहली दिल्ली यात्रा है।

बताया जाता है कि मंत्रियों की शपथ संभवत: 24 दिसंबर को होगी। 8 जनवरी से विधानसभा का सत्र प्रारंभ होगा। मंत्रिमंडल का आकार अभी सीमित रहेगा। पहली किस्त में 20-22 मंत्रियों को शपथ दिलाने की तैयारी है। इनमें क्षेत्रीय और जातीय संतुलन बिठाने के साथ कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों को पहले जगह दी जाएगी। मंत्रियों के रूप में पहली सूची में वरिष्ठ विधायकों को शामिल किए जाने पर सहमति बनी है।

सोमवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद कमलनाथ चार दिन से लगातार मंत्रालय में बैठकर सभी विभागों के अधिकारियों से कामकाज संबंधी ब्योरा ले रहे हैं। कुछ अफसरों को उन्होंने इधर से उधर भी किया। वह अपने भरोसे के अधिकारियों की टीम बनाने की प्रक्रिया में भी सक्रिय हैं। गुरुवार देर शाम वह दिल्ली के लिए रवाना हो गए, मुख्यमंत्री के रूप में यह उनकी पहली यात्रा है।

दिल्ली में वह अपने मंत्रिमंडल के बारे में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं से विचार-विमर्श करेंगे। दिल्ली में उनकी मुलाकात ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया एवं एके एंटोनी सहित पार्टी के अन्य नेताओं से होना निर्धारित है। मंत्रियों के शपथ समारोह के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां जोर-शोर से जारी हैं। राज्यपाल 25 दिसंबर को बाहर जा रही हैं। इसलिए शपथ के लिए 24 दिसंबर की तारीख तय की गई है।राज्यपाल से मिलने के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पत्रकारों से कहा कि पहली बार के विधायकों को मंत्री बनाने में प्राथमिकता नहीं देंगे। सपा-बसपा के सदस्यों को कैबिनेट में शामिल करने के सवाल पर वह बोले कि यह उनके नेता ही तय करेंगे, उन्होंने इस तरह की शर्त नहीं रखी थी।

भाजपा के भीतरघातियों की सूची तैयार, जल्द गिरेगी गाज

विधानसभा चुनाव में भाजपा की करारी हार पर संगठन स्तर पर सख्त कार्रवाई के संकेत मिले हैं। राज्य भर से मिले भीतरघात की शिकायतों की सूची के बाद पदाधिकारियों पर गाज गिर सकती है। कोरबा, सरगुजा, दुर्ग, धमतरी समेत सात जिलाध्यक्षों को हटाने की कार्रवाई की जा सकती है। इसके साथ ही जिला स्तर के अन्य पदाधिकारी भी निशाने पर हैं। आगामी लोकसभा चुनाव को मद्देनजर रखते हुए यह कदम उठाया जाएगा।

लोकसभा चुनाव को लेकर पार्टी कड़े एक्शन के मूड में है। कांग्रेस व भाजपा दोनों पार्टी में भीतरघात से इनकार नहीं किया जा रहा है। कांग्रेस ने कोरबा, कटघोरा तथा पाली-तानाखार सीट से जीत हासिल की है, इसके बावजूद पार्टी कार्यकर्ताओं ने कई नेताओं पर भीतरघात करने का आरोप लगाते हुए वरिष्ठ पदाधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराई है।

इस आधार पर जिला पदाधिकारियों ने भीतरघातियों की सूची पीसीसी मुख्यालय भेजी है। अब कार्यकर्ताओं को भीतरघातियों पर कार्रवाई का इंतजार है। इधर भाजपा को एक बार तीन सीट में हार का सामना करना पड़ा। पिछले दो चुनाव से पार्टी की यही स्थित बनी हुई है।

इस बार पार्टी को उम्मीद थी कि जिले की चारों सीट पर जीत हासिल होगी, पर ऐसा नहीं हुआ। इसकी मुख्य वजह भीतरघात बताया जा रहा है। पार्टी से जुड़े जानकारों का कहना है कि सिर्फ छोटे पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं ने ही भीतरघात नहीं किया है, बल्कि जिलास्तर पद पर बैठे पदाधिकारियों तथा वरिष्ठ नेताओं ने भी पार्टी को नुकसान पहुंचाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।

भाजपा जिलाध्यक्ष ने भीतरघातियों की सूची मुख्यालय में सौपी है, पर जानकारों का कहना है कि इस सूची में प्रत्याशी के विरोध में काम करने वाले कई पदाधिकारी का नाम शामिल नहीं है।इसके बाद भी ऐसे पदाधिकारियों को पदमुक्त करने की तैयारी की जा रही। इसके साथ ही नए पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, ताकि संगठन मजबूती से कार्य करे और लोकसभा चुनाव में पार्टी बेहतर प्रदर्शन कर सके। संगठन को चिंता है कि यदि अभी कार्रवाई नहीं की गई तो उन कार्यकर्ताओं पर गलत असर पड़ेगा जो पूरी ईमानदारी से पार्टी के लिए चुनाव के वक्त काम करते हैं।वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक बिल्हा विधानसभा से जीत कर विधायक बन चुके हैं। पार्टी की नीति एक व्यक्ति एक पद का पालन किया जाता है, तो धरमलाल को भी पद छोड़ना पड़ेगा। उनके स्थान पर किसी नए कार्यकर्ता को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही समीक्षा बैठक में निर्णय लिया जाएगा।

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