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कमलनाथ के बहनोई और भाँजे का 300 करोड़ का बंगला और 4 करोड़ डॉलर की FDI जब्त

भोपाल 16 अगस्त 2019 । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भाँजे और कारोबारी रतुल पुरी के खिलाफ आयकर विभाग ने शिकंजा कस दिया है। आयकर विभाग ने बेनामी संपत्ति लेनदेन निषेध कानून, 1988 की धारा 24 (तीन) के तहत रतुल पुरी और उनके पिता दीपक पुरी की संपत्तियों को जब्त कर लिया है। जानकारी के मुताबिक, आयकर विभाग ने इस कार्रवाई के तहत दिल्ली के पॉश इलाके में 300 करोड़ रुपए के बंगले और चार करोड़ डॉलर की एफडीआई राशि जब्त की है। आयकर विभाग के अधिकारियों ने रविवार (अगस्त 11, 2019) को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि बंगला दिल्ली के लुटियन जोन के एपीजी अब्दुल कलाम रोड पर है और यह संपत्ति मोजर बेयर ग्रुप की कंपनी रामा एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर रजिस्टर्ड है, जिसके मालिक और प्रवर्तक रतुल पुरी के पिता दीपक पुरी हैं।

बता दें कि, आयकर विभाग अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर मामले के संबंध में धनशोधन के आरोपों की जाँच कर रहा है और रतुल पुरी के खिलाफ यह आयकर विभाग की इस तरह की दूसरी कार्रवाई है। इससे पहले आयकर विभाग ने रतुल पुरी के 254 करोड़ रुपए के बेनामी शेयर को जब्त किया था। अधिकारी ने बताया कि बेनामी प्रॉपर्टी ट्रांजेक्शन एक्ट के तहत रतुल के नाम पर बेनामी शेयर को जब्त करने का प्रोविजनल ऑर्डर जारी किया गया था। अधिकारी के मुताबिक, यह राशि ऑप्टिमा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड में एफडीआई निवेश के जरिए हासिल हुई।

शिव राज में स्मार्ट सिटी में भी घोटाला! जांच के घेरे में BJP नेता और IAS अफसर
मध्य प्रदेश में ई टेंडर घोटाले के बाद अब स्मार्ट सिटी घोटाला पकड़ में आया है. EOW ने इसकी जांच भी शुरू कर दी है. ये घोटाला प्रदेश की बीजेपी यानि शिवराज सरकार के दौरान किया गया. इसमें नेता और अफसर सब शामिल हैं. EOW की जांच के दायरे में भोपाल महापौर आलोक शर्मा सहित IAS अफसर भी शामिल हैं.

मध्य प्रदेश में अभी ई टेंडर महाघोटाले की जांच पूरी भी नहीं हुई है कि शिव राज में हुए एक और घोटाले का ख़ुलासा हो गया. इस बार स्मार्ट सिटी के निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार किया गया. कांग्रेस नेता शबिस्ता आसिफ जकी ने इसकी शिकायत EOW से की थी. शिकायत पर EOW ने घोटाले की जांच शुरू कर दी है.शबिस्ता ने घोटाले के कई सबूत भी EOW को सौंपे हैं.

ऐसे हुआ घोटाला

स्मार्ट सिटी के नाम पर भोपाल के पॉलीटेक्निक चौराहे से भारत माता चौराहे तक स्मार्ट रोड का टेंडर 31 करोड़ रुपए में हुआ था.27 करोड़ का वर्क ऑर्डर जारी किया गया था.स्मार्ट सिटी कॉर्पोरेशन ने ठेकेदार को 32 करोड़ का भुगतान कर दिया, जबकि एग्रीमेंट में कान्ट्रेक्ट वेल्यू किसी भी स्थिति में नहीं बढ़ाने की शर्त थी. अगर कांट्रेक्ट वेल्यू बढ़ती है, तो इसकी जिम्मेदारी कांट्रेक्टर की होती.

-स्मार्ट सिटी गाइड लाइन के अनुसार विभाग की जमीन स्मार्ट सिटी के नाम ट्रांसफर होना था, लेकिन स्मार्ट रोड की आधी जमीन प्राइवेट और आधी वन विभाग की है.इस नियम का पालन किए बिना ही करोड़ों का निर्माण कार्य आनन-फानन में शुरू कर दिया गया.

-स्मार्ट रोड में अंडर ग्राउंड बिजली लाइन बिछाने के नियमों का उल्लंघन भी किया गया.रोड के ऊपर से बिजली की लाइन निकाली गयी.

-29 जुलाई को पहली बारिश में स्मार्ट सिटी की बाउंड्रीवॉल ढह गयी.जब दीवार में लगी ईंटों की जांच कराई गई, तो वो गुणवत्ता में फेल साबित हुईं.

कांग्रेस का आरोप

कांग्रेस ने बीजेपी नेताओं पर आर्थिक अनियमितता और करीबियों को ठेके देने के गंभीर आरोप लगाए हैं. EOW में जो शिकायत दर्ज करायी गयी उसमें कई नेताओं और अफसरों के नाम शामिल हैं. उस शिकायत के आधार पर EOW ने तत्कालीन कलेक्टर छवि भारतद्वाज, चंद्रमौली शुक्ला, संजय कुमार, रामजी अवस्थी, उपदेश शर्मा, श्रीराम तिवारी के साथ महापौर आलोक शर्मा की भूमिका की जांच शुरू कर दी है.

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