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कमलनाथ का चौंकाने वाला दावा- चिंता की बात नहीं, हमारे पास बहुमत

भोपाल 11 मार्च 2020 । मध्य प्रदेश के कद्दावर नेता रहे माधवराव सिंधिया के बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस छोड़ने के बाद अब औपचारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन थामेंगे. सिंधिया समर्थक विधायकों के समर्थन से बीजेपी फिर प्रदेश की सत्ता पर कब्जा करने की तैयारी कर रही है.

भारतीय जनता पार्टी हालांकि कमलनाथ सरकार का तख्ता पलट करने की फिराक में काफी पहले से ही रही है, लेकिन बीजेपी अब कांग्रेस को तोड़ने में कामयाब हो गई. इस बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बहुमत का दावा किया है. सीएम कमलनाथ ने कहा कि चिंता की बात नहीं है, हमारे पास बहुमत है. उन्होंने कहा कि विधायकों को कैद किया गया है.

बता दें कि मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार पर गहराए संकट के बीच कांग्रेस विधायकों की मुख्यमंत्री आवास पर मंगलवार शाम बैठक हुई, जिसमें कांग्रेस के सिर्फ 88 विधायक पहुंचे. जबकि 26 विधायक गैरहाजिर रहे, जिसमें 22 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया यानी कांग्रेस के चार और विधायक मीटिंग से गायब रहे.

कांग्रेस विधायक दल की बैठक में कुल 92 विधायक पहुंचे, जिनमें 4 निर्दलीय थे. बता दें कि कांग्रेस के कुल 114 विधायक थे, जिनमें से 22 ने खुले तौर पर अपने इस्तीफे दे दिए हैं, जबकि अब चार और विधायक मिसिंग रहे. एक तरफ कमलनाथ ने जहां बहुमत का दावा किया तो वहीं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव ने बैठक भी कहा कि कांग्रेस की सरकार को कोई खतरा नहीं है.

सिंधिया और PM मोदी के बीच मध्यस्थता कराने में बड़ौदा राजपरिवार की महारानी ने निभाई अहम भूमिका

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) एवं उनके बेटे राहुल गांधी (Rahul Gandhi) द्वारा पार्टी में तवज्जो नहीं देने के बाद हुई अनबन के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के ससुराल पक्ष से बड़ौदा राजपरिवार की महारानी राजमाता शुभांगिनी देवी गायकवाड ने उनके एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच मध्यस्थता कराने में अहम भूमिका निभाई है, जिसके कारण वह आखिरकार कांग्रेस छोड़ कर भाजपा के नजदीक जाते दिख रहे हैं. सिंधिया परिवार के एक करीबी सूत्र ने मंगलवार को बताया कि ग्वालियर राजघराने से ताल्लुक रखने वाले 49 वर्षीय ज्योतिरादित्य सिंधिया की ससुराल बड़ौदा राजघराने में है. इसी राजघराने की महारानी राजमाता शुभांगिनी देवी गायकवाड ने सिंधिया और मोदी के बीच बातचीत का रास्ता तैयार किया. उन्होंने कहा कि उन्हीं की बदौलत संभव हुआ कि भाजपा और सिंधिया के बीच बातचीत हुई और आखिरकर वह आज कांग्रेस छोड़ कर भाजपा के करीब नजर आ रहे हैं.
सिंधिया परिवार के एक करीबी सूत्र ने बताया, ‘ज्योतिरादित्य की पत्नी प्रियदर्शनी बड़ौदा के गायकवाड राजघराने से हैं. इस वजह से उनका वहां अक्सर आना जाना रहता है. बड़ौदा की महारानी का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अत्यधिक सम्मान करते हैं और उनसे उनके अच्छे संबंध हैं.’ उन्होंने कहा कि संभावना है कि सिंधिया जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं. उन्होंने बताया, ‘सोनिया जी ने सिंधिया की बातें नहीं सुनीं. राहुलजी ने भी उन्हें कहा कि आप (मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री) कमलनाथ के साथ बात कर अपने मतभेदों को सुलझाओ.’ इस सूत्र ने बताया कि लेकिन कमलनाथ द्वारा भी उनकी समस्याओं को अनसुना कर दिया. इससे सिंधिया कांग्रेस से नाराज हो गए थे. रविवार को भी सिंधिया ने सोनिया से मिलने का प्रयास किया था, लेकिन उन्हें मिलने का समय नहीं दिया गया.

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने छोड़ी कांग्रेस, 12 मार्च को ज्वाइन कर सकते हैं BJP

उन्होंने कहा कि तीन मार्च को मध्यप्रदेश के 10 विधायक गायब हो गए थे, जिनमें दो बसपा, एक सपा, एक निर्दलीय एवं बाकी कांग्रेस के विधायक थे. इसके बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया था कि कमलनाथ की सरकार को गिराने के लिए भाजपा नेता इन विधायकों को करोड़ों रूपये का आफर दे रहे हैं. भाजपा ने हालांकि इस आरोप को खारिज कर दिया और दावा किया कि 26 मार्च को मध्यप्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव के मद्देनजर यह कांग्रेस के विभिन्न गुटों के बीच चल रही अंदरूनी लड़ाई का नतीजा है. इसके बाद प्रदेश की सत्तारूढ़ कांग्रेस इन 10 विधायकों में से आठ विधायकों को वापस लाने में सफल हो गई.

उन्होंने कहा कि इसे देखते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मध्यप्रदेश में हुए इस सारे घटनाक्रम की निगरानी खुद की और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्‌डा, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान एवं केन्द्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ बैठकें कर रणनीति बनाई. उन्होंने कहा कि आखिरकार इसका भाजपा को फायदा भी मिला है, क्योंकि ज्योतिरादित्या सिंधिया ने मंगलवार को कांग्रेस छोड़ दी और उनके भाजपा में शामिल होने की संभावना है. सिंधिया के इस कदम के बाद कांग्रेस के 22 विधायकों ने भी इस्तीफे दे दिए, जिससे राज्य की कमलनाथ सरकार गिरने के कगार पर पहुंच गई है.

मध्यप्रदेश में कांग्रेस को तोड़ने में अमित शाह के इस विश्वस्त सहयोगी ने निभाई अहम भूमिका…

मध्यप्रदेश के कद्दावर नेता रहे माधवराव सिंधिया के पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस छोड़ने के बाद अब जल्द ही औपचारिक तौर पर भाजपा का दामन थामेंगे. सिंधिया समर्थक विधायकों के समर्थन से भाजपा फिर प्रदेश की सत्ता पर कब्जा करने की मुक्कमल तैयारी कर चुकी है. भारतीय जनता पार्टी हालांकि कमलनाथ सरकार का तख्ता पलट करने की फिराक में काफी पहले से ही रही है, लेकिन पार्टी संगठन के एक मजबूत सिपाही और कद्दावर नेता ने इस बार सियासत की ऐसी बिसात बिछाई कि भाजपा कांग्रेस को तोड़ने में कामयाब हो गई.
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यह नेता कोई और नहीं, बल्कि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर हैं. जमीन से जुड़े नेता नरेंद्र सिंह तोमर का मध्यप्रदेश के ग्वालियर-चंबल संभाग में काफी प्रभाव है और कांग्रेस के ज्यादातर बागी विधायक भी इन्हीं संभाग से आते हैं, जिनके बगावत पर उतरने के कारण कमलनाथ सरकार संकट में आ गई है.केंद्रीय मंत्री के एक करीबी ने बताया कि भाजपा की नई सियासत की बिसात बिछाने के सूत्रधार नरेंद्र सिंह तोमर ही थे और मध्यप्रदेश से लेकर दिल्ली तक की राजनीतिक घटनाक्रमों में वह हमेशा सक्रिय रहे.

करीबी सूत्र के अनुसार, ग्वालियर के मुरार में 1957 में पैदा हुए तोमर ने छात्र नेता के रूप ही अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी, इसलिए संगठन पर इनकी मजबूत पकड़ है. इस संभाग में कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाने की जिम्मेदारी इनको दी गई थी. ग्वालियर सिंधिया परिवार का गढ़ है, इसके लिए उनके गढ़ में पार्टी विधायकों को तोड़ने की रणनीति का सीधा मतलब था कि भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए अपना दरवाजा पहले ही खोल दिया था.

ज्योतिरादित्य सिंधिया की दादी व ग्वालियर की राजमाता विजया राजे सिंधिया जनसंघ की सक्रिय सदस्य होने के साथ-साथ भाजपा की संस्थापकों में शामिल रही थीं.यह भी बताया जाता है कि पार्टी में राजमाता विजया राजे सिंधिया के भी विश्वस्त रहे तोमर के सिंधिया परिवार से करीबी रिश्ते को देखते हुए भी उनको नई जिम्मेदारी सौंपी गई थी.

सूत्रों ने बताया कि विगत कुछ दिनों से दिल्ली स्थित नरेंद्र सिंह तोमर के आवास 3, कृष्ण मेनन मार्ग पर मध्यप्रदेश के बड़े नेताओं की आवाजाही बढ़ गई थी. इसके अलावा, तोमर भी अपने क्षेत्र का दौरा ज्यादा करने लगे थे.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के करीबी व विश्वस्त माने जाने वाले तोमर को कुछ दिन पहले ही मध्यप्रदेश में भाजपा की रणनीति की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.

मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद से लेकर प्रदेश में कैबिनेट स्तर के मंत्री तक की जिम्मेदारी संभाल चुके तोमर मध्यप्रदेश में भाजपा के कद्दावर नेता हैं. प्रदेश में ‘जय और वीरू’ के नाम से चर्चित शिवराज और तोमर की जोड़ी ने 2013 में 165 सीटें जितवाकर भाजपा को तीसरी बार सत्ता में काबिज करवाई थी.

‘ज्योतिरादित्य कई महीनों से राहुल गांधी से मिलना चाहते थे लेकिन…’, सिंधिया के चचेरे भाई का बयान

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के करीबी सहयोगी कहलाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया महीनों की कोशिश के बावजूद उनसे मिलने में सक्षम नहीं थे. यह बात एनडीटीवी को शाही परिवार से आने वाले एक नेता प्रद्योत माणिक्य देबबर्मा, जिनका सिंधिया परिवार के साथ जुड़ाव भी है, ने बताया. मध्य प्रदेश के पूर्व सांसद व 49 वर्षीय नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा इस्तीफे के बाद कांग्रेस द्वारा निष्कासित कर दिया गया. कहा जा रहा है कि वह इस सप्ताह के अंत तक भाजपा में शामिल हो सकते हैं. कुछ ही महीने पहले पार्टी से दूरी बनाने वाले त्रिपुरा कांग्रेस प्रमुख रहे प्रद्योत माणिक्य देबबर्मा ने कहा, ”मुझे पता है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया महीनों से राहुल गांधी से मिलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हे कोई अप्वाइंटमेंट नहीं मिला. अगर वह (राहुल गांधी) हमें नहीं सुनना चाहते थे, तो उन्होंने हमें पार्टी में क्यों लाया?”
सिंधिया के करीबी माने जाने वाले देबबर्मा ने फेसबुक पोस्ट में मंगलवार को लिखा, “मैंने देर रात ज्योतिरादित्य सिंधिया से बात की और उन्होंने मुझे बताया कि उन्होंने इंतजार किया और इंतजार करते रहे, लेकिन उनके द्वारा ‘हमारे’ नेता को कोई भी अप्वाइंटमेंट नहीं मिली.”

उन्होंने अपने पोस्ट में आगे लिखा, “जब मैंने त्रिपुरा में कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में इस्तीफा दे दिया था, तो मैंने कहा था कि युवा नेता ‘अनाथ’ महसूस करते हैं और राहुल गांधी द्वारा पार्टी अध्यक्ष के रूप में अचानक छोड़ने के बाद हमें बीच मझधार में छोड़ दिया गया. अचानक हमारे विचारों को दरकिनार कर दिया गया. ‘स्टालवार्ट्स’ ने प्रमुख मुद्दों पर हमारी नीतियों की अवहेलना शुरू कर दी थी.”

लोकसभा में कांग्रेस की बुरी तरह हार के बाद राहुल गांधी ने पिछले साल पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ दिया था. वर्तमान स्थिति के बारे में बात करते हुए प्रद्योत माणिक्य देबबर्मा ने एनडीटीवी से कहा, “यह डिबेट इसलिए देखा गया, जब पुराने समूह द्वारा कलह नजर आई. जब हमारा नेता हमें नहीं सुन रहा है और पुराने लोग एक-एक करके जाने का फैसला कर रहे हैं, तो यह समय है कि आगे बढ़ जाओ.”

बता दें कि ज्योतिरादित्य सिधिया ने कांग्रेस से इस्तीफ़ा दे दिया है. उनके मंगलवार को बीजेपी में शामिल होने के क़यास लगाए जा रहे थे. लेकिन बाद में ख़बर आई कि सिंधिया आज बीजेपी ज्वाइन नहीं कर रहे हैं. 12 मार्च को वो बीजेपी का दामन थाम सकते हैं. इन सबके बीच कमलनाथ सरकार पर संकट के बादल हैं क्योंकि सरकार के साथ रहे 21 विधायकों ने इस्तीफ़ा दे दिया है. माना जा रहा है कि इनमें ज़्यादातर ज्योतिरादित्य सिंधिया के क़रीबी हैं.

दिल्ली से भोपाल तक बैठकों का भी दौर है. दिल्ली में बीजेपी चुनाव समिति की बैठक हुई, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा शामिल हुए. चुनाव समिति की बैठक ख़त्म हो चुकी है. होली के दिन बगावत की शुरुआत सुबह साढ़े 10 बजे के आसपास हुई जब वो अमित शाह के साथ प्रधानमंत्री मोदी से मिलने के लिये गए. दोनों अमित शाह की गाड़ी में साथ दिखे. सिंधिया ने अपने इस्तीफ़े को जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि वो कांग्रेस में रहकर अपने प्रदेश और देश की सेवा नहीं कर सकते हैं.

कुछ देर बाद ही कांग्रेस की प्रमुख सोनिया गांधी ने सिंधिया को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निकाल दिया. सारा विवाद मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट को लेकर बढ़ा. कांग्रेस की एक सीट पर तो जीत एकदम पक्की है लेकिन दूसरी के लिए उसे बाहर के 2 विधायकों की ज़रूरत थी. कहा जा रहा है कि सिंधिया वो सीट चाहते थे जो एकदम पक्की है और जिसे दिग्विजय सिंह के लिये रखा गया है.

कमल के कारण संकट में कमलनाथ सरकार

भाजपा ने मंगलवार देर रात अपने विधायकों को भोपाल से दिल्ली रवाना कर दिया. भाजपा के 106 विधायक प्लेन से दिल्ली गये और बताया जा रहा है कि उसके बाद उन्हें किसी अन्य स्थान पर ले जाया गया है.

इन विधायकों को 5 बसों में भरकर एयरपोर्ट तक लाया गया. जिसके बाद ये लोग यहां से रवाना हो गये.

हालांकि भोपाल से रवाना होने से पहले विधायकों ने दावा किया कि वो होली मिलन के लिये भोपाल से जा रहे है.

भाजपा विधायक संजय पाठक ने कहा, “हम होली मिलन के लिये जा रहे हैं. इससे से ज्यादा इसमें कोई मतलब नहीं निकाला जाना चाहिये.”

सिंधिया कांग्रेस में हाशिए पर सिमटे

होली से एक दिन पहले और होली के दिन भी भोपाल से लेकर नई दिल्ली के सियासी गलियारों में ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम सुर्ख़ियों में बना रहा. उनकी सोनिया गांधी से ‘बात’, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ‘मुलाक़ात’ और ‘बीजेपी में शामिल’ होने के क़यास लगाए जाते रहे.

इनमें एक बात तो स्पष्ट हो चुकी है कि सिंधिया ने कांग्रेस का दामन छोड़ दिया है. मगर वो अब बीजेपी का झंडा थामेंगे या नहीं, इसे लेकर अनिश्चय बना हुआ है. हालाँकि मौजूदा परिस्थितियों में सिंधिया के राजनीतिक करियर का रास्ता अब जिस ओर जा सकता है, उसमें बीजेपी का पता सबसे मज़बूत संभावनाओं वाला दिखाई देता है.

वैसे ये दिलचस्प है कि इन दो दिनों में जब सिंधिया अटकलों के केंद्र में थे, स्वयं सिंधिया ने बस दो शब्द बोले – हैप्पी होली.

मगर अपने इस्तीफ़े की कॉपी, जो उन्होंने सोमवार को ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेजी थी, उसे एक दिन बाद उन्होंने ट्विटर पर जारी कर दिया.

और इसकी भाषा स्पष्ट थी. उन्होंने लिखा कि वो “कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा दे रहे हैं लेकिन इस रास्ते की शुरुआत एक साल पहले हो चुकी थी.”

कैलाश विजयवर्गीय ने दिग्विजय पर कसा तंज, कहा- रायता समेट नहीं पा रहे
मध्य प्रदेश में विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोपों के बीच कांग्रेस अपनी सरकार को सुरक्षित बनाने की जुगत में जुटी हुई है. मध्य प्रदेश में इस सियासी खींचतान के केंद्र में बीजेपी से अधिक कांग्रेस के नेता हैं. इनमें मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं. यही वजह से बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने हल्के अंदाज में दिग्विजय सिंह पर तंज कसा है.

काँग्रेसी आपस में लड़ रहे, रायता दिया बिखराय। दिग्गी चाचा समेट रहे, पर समेटा न जाय।

कैलाश विजयवर्गीय ने ट्वीट किया, ‘कांग्रेसी आपस में लड़ रहे, रायता दिया बिखराय. दिग्गी चाचा समेट रहे, पर समेटा न जाय. बुरा न मानो होली है!!!’ असल में, मध्य प्रदेश में सरकार के इस संकट के बीच कांग्रेस नेताओं के बीच ही बयानबाजी जारी है.

कांग्रेस ने दावा किया है कि संकट टल गया है, लेकिन कांग्रेसी नेताओं के बयान से ऐसा लगता नहीं है. दिग्विजय सिंह ने कमलनाथ सरकार के मंत्री उमंग सिंघार पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की भाषा बोलने का आरोप लगाया था.

दिग्विजय सिंह ने शुक्रवार ने कहा था कि ये बीजेपी का ऑपरेशन लोटस नहीं ऑपरेशन मनी बैग था. हमारी सरकार सुरक्षित है और पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी. वे कह रहे हैं कि हमारी सरकार सिर्फ तीन महीने चलेगी. इत्तेफाक की बात है कि राज्यसभा चुनाव को लेकर मेरे खिलाफ बीजेपी और उमंग सिंघार एक ही भाषा बोल रहे हैं.

दिग्विजय सिंह और उमंग सिंघार में वर्चस्व की लड़ाई काफी दिनों से चल रही है. वन मंत्री उमंग सिंघार ने दिग्विजय सिंह के खिलाफ कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को खत लिखा था. उमंग का आरोप है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ काम करना चाहते हैं, लेकिन दिग्विजय सिंह उनको काम नहीं करने देना चाह रहे हैं. जब दिग्विजय सिंह पर्दे के पीछे रहकर सरकार चला रहे हैं, तो उनको चिट्टी लिखने की आवश्यकता क्यों?

उधर, कांग्रेस सरकार में मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया ने शुक्रवार को कहा था, ‘कमलनाथ सरकार को संकट तब होगा जब हमारे नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया जी की उपेक्षा या अनादर सरकार करेगी. तब निश्चित तौर से सरकार पर जो काला बादल छाएगा वो क्या करके जाएगा मैं ये नहीं कह सकता.’ शायद कांग्रेस नेताओं के इन बयानों की वजह से ही कैलाश विजय वर्गीय को यह तंज कसने का मौका मिल गया.

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