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कमल शक्तिः भाजपा की सबसे बड़ी ताकत साबित हो सकती है

नई दिल्ली 10 सितम्बर 2018 । मध्य प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव के घमासान को लेकर सूबे के राजनीतिक दल अपनी-अपनी चुनावी तैयारियों में जुटे हुए हैं। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी भी अपनी चुनावी तैयारियों को अमली जामा पहनाने में लगी हुई है, जिसके चलते भाजपा ने सोशल मीडिया पर अपनी योजनाओं के प्रचार के लिए और कांग्रेस के आरोपों से निपटने के लिए महिलाओं की फ़ौज तैयार की है। गौरतलब है कि इन महिलाओं को बाकायदा सोशल मीडिया आदि का प्रशिक्षण भी दिया गया है। प्रशिक्षित महिलाएं अपनी-अपनी विधानसभा में 100-100 महिलाओं को जोड़ कर प्रशिक्षण दे रही है, पार्टी द्वारा इन्हें ‘कमल शक्ति‘ का नाम दिया गया है।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है, ऐसे में भाजपा ने कमल शक्ति के रूप में विरोधियों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर दी है।  विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा की गंभीर तैयारियां अब सामने आने लगी हैं, पार्टी एक के बाद एक तीर अपने चुनाव प्रचार अभियान के तरकश में शामिल कर रही है, जो भाजपा के विरोधियों को माकूल जवाब दे सकें। इसी कड़ी में कमल शक्ति का गठन कर प्रशिक्षण दिया गया है। विशेषज्ञों की मानें तो, भाजपा की कमल शक्ति आने वाले समय में शायद पार्टी की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है, जिसके पीछे कई कारण हैं।

शिवराज सरकार रही है महिला हितैषी
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शुरू से ही महिलाओं के उत्थान के लिए काम कर रहे हैं, प्रदेश में हुए कई सर्वे में भी अधिक से अधिक महिलाओं ने शिवराज सिंह चौहान को बतौर मुख्यमंत्री अपनी पहली पसंद बताया हुआ है, ऐसे में कमल शक्ति के जरिये भाजपा शिवराज सरकार की महिला हितैषी सरकार की छवि को भुनाने की पूरी कोशिश करेगी।

महिलाओं में लोकप्रिय हैं शिवराज सिंह चौहान

एक कारण यह भी हो सकता है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता प्रदेश की महिलाओं में सर्वमान्य है, यूँ ही पूरा प्रदेश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ‘मामा’ नहीं मानता है। साथ ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में महिला सुरक्षा के लिए अभूतपूर्व कार्य किया है। इसके अलावा बेटी बचाओ, कन्यादान, लाड़ली लक्ष्मी योजना, छात्राओं को साइकिल-गणवेश आदि योजनायें उन्हें प्रदेश की महिलाओं में काफी लोकप्रिय बनाती हैं। आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की कमल शक्ति की महिलाएं प्रदेश की महिलाओं के बीच जाकर महिलाओं के मुद्दे पर महिलाओं का वोट मांगेंगी। साथ ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का संदेश भी पहुंचा रही है। गौरतलब है कि प्रदेश कांग्रेस शिवराज सरकार पर महिला सुरक्षा में नाकाम होने का आरोप लगाती है, कमल शक्ति की महिलाएं सोशल मीडिया पर मोर्चा सँभालने के साथ-साथ कांग्रेस को भी मुंहतोड़ जवाब देने का काम कर रही है।

भाजपा में 70 सीटों पर महिलाओं ने की टिकट की दावेदारी

विधानसभा चुनाव में इस बार भारतीय जनता पार्टी महिलाओं के टिकट का कोटा बढ़ा सकती है। इसकी वजह महिलाओं के बीच शिवराज के नेतृत्व वाली प्रदेश भाजपा सरकार का लोकप्रिय होना है। इस लोकप्रियता के चलते 70 सीटों पर महिलाओं ने टिकट के लिए दावेदारी की है। पार्टी नेताओं का मानना है कि पिछली बार 28 महिलाओं को टिकट दिया गया था, इस बार बढ़ाकर 35 टिकट महिलाओं को दिए जा सकते हैं।230 विधायकों वाली मध्यप्रदेश विधानसभा में मात्र 32 महिला विधायक हैं। इसके अलावा एक मनोनीत विधायक लोरेन बी. लोबो हैं। इसमें सर्वाधिक 24 महिला विधायक भारतीय जनता पार्टी की हैं। भाजपा ने 2013 के चुनाव में कुल 28 महिलाओं को चुनाव मैदान में उतारा था। विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की छह महिला विधायक हैं और बहुजन समाज पार्टी की दो महिला विधायक हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो विधानसभा में महिला सदस्यों की संख्या मात्र 14 फीसदी के लगभग है।विधानसभा चुनाव में इस बार भाजपा महिला प्रत्याशियों की संख्या बढ़ा सकती है। पार्टी ने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है। कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री निवास में आयोजित महिलाओं के सम्मेलन में सीएम ने भी इस बात के संकेत दिए थे कि इस बार के चुनाव में हम महिलाओं को ज्यादा संख्या में टिकट देंगे।भाजपा ने प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों पर सर्वे करवाकर यह जानने की कोशिश की है कि आम जनता के बीच सरकार और खासतौर से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की छवि कैसी है। इसकी रिपोर्ट आने पर पार्टी ने सारे विधायकों को बैठक में इस बारे में अवगत भी कराया। सर्वे की रिपोर्ट में महिलाओं के बीच सरकार की ज्यादा लोकप्रियता की बात सामने आने से भाजपा खुश है। पार्टी नेताओं का मानना है कि आधी आबादी को प्रभावित करने वाले वोट बैंक के डगमगाने के आसार नहीं हैं, बाकी स्थितियों को दो महीनों में सुधारने का टारगेट पार्टी ने रखा है।

पेट्रोल-डीजल सस्ता, वसुंधरा सरकार ने घटाया 4 प्रतिशत वैट

राजस्थान सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर वैट कम कर दिया है. राजस्थान सरकार की घोषणा के अनुसार यह वैट रेट आज रात के मध्य से लागू हो जाएगा. आपको बता दें कि पेट्रोल व डीजल की कीमत में जबरदस्त बढोतरी को लेकर कल यानी 10 सितंबर को कांग्रेस एवं उसकी सहयोगी पार्टी का भारत बंद है. जानकारी में रहे कि राजस्थान में अभी चुनाव भी होने वाली है. दोनों पेट्रोलियम पदार्थों पर बढ़ रही कीमत के कारण लोग परेशान भी दिख रहे हैं. राजस्थान सरकार ने इसी को देखकर यह निर्णय लिया है. राजस्थान सरकार ने पेट्रोल व डीजल पर 4 प्रतिशत वैट कम करने का ऐलान किया है.

इधर कांग्रेस शासित दो राज्यों में भी पेट्रोल व डीजल के दाम में कमी के संकेत मिल रहे हैं. ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी (एआईसीसी) की हिमाचल प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल ने यह जानकारी दी है. पाटिल ने एक सवाल के जवाब में कहा कि कांग्रेस शासित पंजाब और कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों को पेट्रोलियम उत्पादों पर मूल्य वर्धित कर (वैट) कम करने के लिए पहले ही कहा जा चुका है. दरअसल, कांग्रेस चुनाव से पहले यह संदेश देना चाहती है कि उसकी सरकार बनी तो इन पेट्रोलियम पदार्थों पर कीमतें कम होगी.

पाटिल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में वीरभद्र सिंह की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने वैट में दो प्रतिशत की कमी की थी. कांग्रेस नेता ने कहा कि मोदी सरकार के दौरान आवश्यक सामग्रियों के दाम तेजी से बढ़े हैं. उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों के विरोध में सोमवार को प्रस्तावित भारत बंद हिमालच प्रदेश में भी शांतिपूर्ण तरीके से प्रभावी होगा. रजनी पाटिल की मानें तो पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के दौरान कच्चे तेल का दाम काफी उच्च स्तर पर था लेकिन इसके बाद भी देश में पेट्रोलियम उत्पादों की दरें कम थीं. उन्होंने कहा कि जनता 2019 के आगामी चुनाव में बीजेपी को सबक सिखाएगी.

वसुंधरा सरकार के इस फैसले से तेल के दाम में 2 से 2.50 रुपये तक की राहत मिलेगी. उधर महाराष्ट्र सरकार के हवाले से भी खबर आ रही है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी राज्य में पेट्रोल और डीजल पर वैट कम करने पर विचार कर रहें हैं. बता दें कि कांग्रेस पार्टी ने पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दाम को लेकर केंद्र की मोदी सरकार को घेरने के लिए 10 सितंबर को भारत बंद का आह्वान किया है, जिसका तमाम विपक्षी दलों ने समर्थन किया है.

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