मुख्य पृष्ठ >> प्रदेश >> उत्तरप्रदेश >> बीजेपी के इन 50 सांसदों के कटेंगे टिकट

बीजेपी के इन 50 सांसदों के कटेंगे टिकट

लखनऊ 9 जुलाई 2018 ।अपने दो दिन के दौरे पर उत्तर प्रदेश आए भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने विस्तारकों, पन्ना प्रमुखों (बूथ प्रमुखों) के अलावा संगठन और संघ के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान शाह को यूपी के लगभग 35 से 50 वर्तमान सांसदों के काम-काज की निगेटिव रिपोर्ट मिली है। इसी के चलते इनके टिकट कटने तय माने जा रहे हैं। अमित शाह ने विस्तारकों से जातिगत दावेदारों की सूची तैयार कर उसे प्रदेश कार्यालय भेजने के आदेश भी दे गए। यह खबर जैसे ही मौजूदा सांसदों तक पहुंची तो सभी में हड़कंप मच गया। सभी सांसद पार्टी के अंदर बैठे बड़े नेताओं से संपर्क कर लिस्ट में किसके-किसके नाम हैं उसकी जानकारी कर रहे हैं।

नए चेहरों की तलाश शुरू

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का दो दिवसीय दौरा जहां संगठन और सोशल मीडिया को दुरूस्त करने पर था तो वहीं उन्होंने विस्तारकों के साथ अहम बैठक भी की। इस दौरान विस्तारकों ने एक रिपोर्ट अमित शाह को सौंपी। जिसमें यूपी के 35 से लेकर 50 सांसदों के कामों का लेखा-जोखा था। रिपोर्ट में बताया गया है कि चार साल के कार्यकाल के दौरान यह सांसद जनता के पास नहीं गए। पीएम मोदी और सीएम योगी की योजनाओं की जानकारी लोगों तक नहीं पहुंचाई। सांसद निधि से जितने भी काम कराए, वह जमीन पर नहीं है। जनता इन सांसदों से असंतुष्ट है और अगर इन्हें टिकट दोबारा दिया जाएगा तो पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी के बाद अमित शाह ने नए चेहरों की खोज के लिए संगठन को जिम्मेदारी दी है।

सांसदों की धड़कनें तेज

टिकट कटने के सुगबुगाहट मिलते ही बीजेपी के सभी 68 सांसदों की धड़कनें तेज हो गई हैं। टिकट कटने के अंदेशे में चार साल तक अपने संसदीय क्षेत्र में काम न करने वाले सांसदों ने आरएसएस से लेकर प्रदेश और क्षेत्रीय संगठनों के बड़े पदाधिकारियों के दरवाजों की परिक्रमा लगानी शुरू कर दी है। कानपुर-बुंदलेखंड के 9 सांसदों में 6 के टिकट लगभग-लगभग कटने तय हैं। इनकी जगह नए उम्मीदवारों की खोज भी आरएसएस और पदाधिकारियों ने करनी शुरू कर दी है। दावेदार सुबह से लेकर देर रात तक गांव-गली, मोहल्लों की खाक छान रहे हैं तो वहीं वर्तमान सांसद भी पीछे हटने को तैयार नहीं। वह अपने करीबी नेताओं के जरिए टिकट पक्का करने का जुगाड़ लगा रहे हैं।

बैठक के दौरान खुली पोल

पिछली चार जुलाई को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह काशी, अवध और गोरखपुर क्षेत्रीय संगठनों के साथ लोकसभा चुनाव की रणनीति तैयार करने के लिए मिर्जापुर और वाराणसी आए। उसके बाद पांच जुलाई को आगरा गए और वहां उन्होंने ब्रज, कानपुर और पश्चिम क्षेत्रीय संगठन के नेताओं के साथ बैठक की। उनके जाने के बाद मीडिया समेत यूपी के सियासी हलके में मौजूदा 50 सांसदों को दोबारा प्रत्याशी न बनाए जाने की अटकलें लगने लगीं। जानकारी के मुताबिक खुद आरएसएस भी मौजूदा सांसदों के खिलाफ है और एक रिपोर्ट बनाकर संघ प्रमुख मोहन भागवत के पास भी जा चुकी है। ऐसे में यह तय है कि यूपी की 80 सीटों में से 50 भाजपा प्रत्याशी नए होंगे, जबकि वर्तमान सांसद संगठन में काम करेंगे।

यूपी में 68 सांसद

2014 के लोकसभा चुनाव में यूपी की 80 सीटों में से भाजपा के अपने 71 और सहयोगी दल अपना दल के दो सांसद जीते थे। इनमें गोरखपुर, फूलपुर और कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव भाजपा हार चुकी है। ऐसे में मौजूदा समय में भाजपा के 68 सांसद रह गए हैं। इनमें से ज्यादातक लोगों का काम जमीन पर शुन्य रहा। चार साल तक सांसद जनता के बजाए दिल्ली में डेरा जमाए रहे। मोदी सरकार की योजनाओं की जानकारी के अलावा अपने खुद के फंड से काम नहीं करवाए। ऐसे में इन सभी सांसदों के टिकट इस बार कटना तय माना जा रहा है।

सांसदों के कामकाज से नाराज

ऐसे सांसदों में से कुछ पिछड़े और दलित सांसद भी हैं, जो भाजपा के खिलाफ ही बगावत का बिगुल फूंक चुके हैं। कुछ सांसदों के कदाचरण की शिकायतें पीएम नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास है। इनके स्थान पर चुनाव मैदान में उतारने के लिए नए चेहरे तलाशे जा रहे हैं। इस वक्त यूपी में सबसे ज्यादा पिछड़े वर्ग के अलावा दलित सांसदों की संख्या है। सूत्रों के मुताबिक एक भाजपा सांसद टिकट कटने की जानकारी मिलते ही बसपा के बड़े नेताओं के संपर्क में है और किसी भी वक्त पार्टी छोड़कर मायावती के साथ जा सकता है। खुद भाजपा सांसद ने बीते दिनों मायावती को मंच से अपना नेता माना और दावा भी कर चुका है कि वह ही दलितों की बड़ी नेता हैं। ऐसे में अटकलें तेज हैं कि कई दलित सांसद जो बसपा में पहले थे, उनकी घर वापसी होगी।

74 सीटों पर फतह के लिए बना प्लॉन

वहीं बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के दौरे में संगठनात्मक कामों को गति देने पर चर्चा हुई। मौजूदा सांसदों को दोबारा प्रत्याशी बनाने को लेकर केंद्रीय नेतृत्व उचित समय पर फैसला करेंगा। पार्टी जिसे टिकट देगी उसी को कार्यकर्ता जिताएगा। जिनका टिकट कटेगा उन्हें संगठन में काम दिया जाएगा। जबकि योगी सरकार के एक मंत्री ने कहा कि बीजेपी एक अनुसासित दल है और हमारे यहां पद से बड़ी पार्टी होती है। पार्टी जिताऊ उम्मीदवार को टिकट देगी, जबकि जिनका टिकट कटेगा उन्हें संगठन में काम दिया जाएगा। भाजपा मिशन 74 को फहत करने के लिए जुट गई है। सपा-बसपा के बीच गठबंधन होता भी है तो इससे कोई फर्क नही पड़ने वाला।

अमित शाह ने काटे 28 सांसदों के टिकट

बीजेपी के सांसदों पर राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की गाज गिरी है। अमित शाह ने पूर्वांचल समेत यूपी के करीब 28 सांसदों का टिकट काटने का फैसला कर लिया है। इसमें सबसे ज्यादा संख्या पूर्वांचल के सांसदों की है। पूर्वांचल से कलराज मिश्रा जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। जबकि अभी दर्जन भर और निशाने पर हैं। बताया जा रहा है कि आलाकमान ने लोकल कमेटी से लोकसभा चुनाव के लिए नए उम्मीदवारों के नाम तक मंगाए हैं। शाह ने कार्यकर्ताओं से मिले फीडबैक और सांसदों के रिपोर्ट कार्ड के आधार पर यह सूची तैयार की है।
इन सांसदों को रखा जाएगा चुनाव से दूर
दरअसल अच्छी छवि ना होने के कारण अमित शाह ने कानपुर के मौजूदा सांसद मुरली मनोहर जोशी, झांसी की सांसद उमाभारती, हमीरपुर के सांसद पुष्पेंद्र चंदेल, इटावा के सांसद अशोक दोहरे समेत 28 सांसदों को अगले चुनाव में उम्मीदवारी से दूर रहने का संकेत दिया है। शाह ने सबसे ज्यादा पूर्वी यूपी के सांसदों के टिकट काटे हैं। पूर्वांचल में 12 सांसदों को टिकट नहीं मिलेगा, जबकि कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में 5 सांसदों पर गाज गिरी है।
लिस्ट में शामिल सांसदों के कटे टिकट
इसी प्रकार अवध क्षेत्र के 3 सांसद निशाने पर आए हैं, जबकि बृज के 2 सांसदों को दोबारा टिकट नहीं दिया जाएगा। 6 अन्य सांसद पश्चिम यूपी से नाता रखते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चर्चा के बाद अमित शाह टिकट से वंचित सांसदों की सूची को तय कर दिया है। चर्चा है कि सूची में देवरिया से कलराज मिश्र, मथुरा से हेमा मालिनी, फतेहपुर सिकरी से चौधरी बाबूलाल, हरदोई से अंशुल वर्मा, उन्नाव से साक्षी महाराज, फर्रुखाबाद से मुकेश राजपूत, इटावा से अशोक दोहरे, इलाहाबाद से श्यामाचरण गुप्त, बहराइच से सावित्री बाई फुले, डुमरियागंज से जगदंबिका पाल, राबर्ट्सगंज से छोटेलाल के नाम टिकट से वंचित रहने वाले सांसदों में शामिल हैं।
गोपनीय तरीके से बनाया रिपोर्ट कार्ड
कहा जा रहा है कि बीजेपी ने पहले सभी सांसदों का रिपोर्ट कार्ड बड़े ही गोपनीय तरीके से पूरी जांच कर बनाया है। पिछले चार सालों में उनके कामकाज और क्षेत्र की जनता से जुड़ाव को सबसे ऊपर रखा गया है। इसके अलावा कार्यकर्ता लेबल पर भी यह जांचने की कोशिश की गई है कि सांसद महोदय का उनके प्रति व्यवहार कैसा रहा है। इसके अलावा भी कई बिन्दु हैं जिनको आधार बनाकर सांसदों की रिपोर्ट बनी है और उसके आधार पर उनके टिकट का फैसला आलाकमान फाइनल करेगा।
फैसले पर पीएम मोदी की लगी मुहर
एक सर्वे के जरिए स्थानीय जनता से उनके सांसदों के बारे में रायशुमारी कराई गई थी। इस सर्वे में 35 ऐसे सांसदों के नाम सामने आए थे, जिन्हें सत्तर प्रतिशत लोग दोबारा अपने क्षेत्र के जनप्रतिनिधि के रूप में देखना नहीं चाहते हैं। इसी सर्वे के आधार पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मिर्जापुर और आगरा में पूर्णकालिक कार्यकर्ता विस्तारकों, क्षेत्रीय अध्यक्षों, क्षेत्रीय संगठन मंत्रियों, प्रदेश महामंत्रियों, क्षेत्रीय प्रभारियों और लोकसभा प्रभारियों से चर्चा के बाद फैसला किया है कि 28 सांसदों को दोबारा टिकट नहीं दिया जाएगा। इस फैसले पर अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुहर लग गई है।

शेयर करें :

इसे भी पढ़ें...

अमेरिका के आगे झुका पाकिस्तान, अफगानिस्तान में हमलों के लिए देगा एयरस्पेस

नई दिल्ली 23 अक्टूबर 2021 । जो बाइडेन प्रशासन ने कहा है कि अमेरिका अफगानिस्तान …