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किरण बेदी को जोर का झटका धीरे से नहीं जोर से ही लगा

नई दिल्ली 14 जुलाई 2019 । पुड्डुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी और केंद्र सरकार को जोर का झटका लगा है. अधिकारों की जंग में किरण बेदी को अदालत ने आईना दिखाया है. कुछ महीने पहले मद्रास हाईकोर्ट ने किरण बेदी के अधिकारों को सीमित कर डाला था. अदालत के इस तरह पर कतरे जाने से किरण बेदी तिलमिला गईं और उन्होंने अधिकार वापस पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई. केंद्र सरकार उनके साथ खड़ी थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दलीलें नहीं मानीं. किरण बेदी और पुड्डुचेरी के मुख्यमंत्री नारायणसामी के बीच अधिकारों को लेकर रस्साकशी चल रही थी. अब सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के किरण बेदी के अधिकारों को लेकर फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.

मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने हाइकोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले कांग्रेस विधायक लक्ष्मी नारायण को नोटिस भी जारी किया है. दरअसल, हाल ही में मद्रास हाईकोर्ट ने साफ किया था कि उपराज्यपाल किरण बेदी के पास केंद्रशासित प्रदेश की रोजमर्रा की गतिविधियों में हस्तक्षेप करने की शक्ति नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को दखल देने से इनकार कर दिया. मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर पुड्डुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी की शक्तियों पर रोक लगाई है. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया और बेदी की दायर याचिका का निस्तारण कर दिया. बेदी ने इस याचिका में विवाद पर स्पष्टता की मांग की थी.

किरण बेदी के मई 2016 में पदभार संभालने के बाद से उनमें और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी के बीच गतिरोध बना हुआ है. इस गतिरोध के बाद किरण बेदी ने पुडुचेरी में नौकरशाहों के नियंत्रण पर स्पष्टता की मांग करते हुए मद्रास हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. मद्रास हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल को कहा कि उपराज्यपाल ‘निर्वाचित सरकार की गतिविधियों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती हैं.’

सुप्रीम कोर्ट में बेदी की याचिका में दलील दी गई कि मुख्यमंत्री ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के हवाले से एक नोट जारी किया है और निर्देश दिया है कि मुख्य सचिव, विकास आयुक्त-सह-सचिव (कार्मिक) और आयुक्त-सह-सचिव (वित्त) विभागों की जारी सभी मौजूदा स्थायी आदेशों की समीक्षा करेंगे. शीर्ष अदालत ने दस मई को बेदी की याचिका को स्वीकार की थी.

कोर्ट की इस हिदायत के बाद उपराज्यपाल किरण बेदी इस केंद्रशासित प्रदेश की सरकार से किसी भी फाइल के बारे में नहीं पूछ सकती हैं. इसके साथ ही वह न तो सरकार को कोई आदेश दे सकती है और न ही सरकार की तरफ कोई आदेश जारी कर सकेंगी. अदालत पुड्डुचेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी और किरण बेदी के बीच जारी सियासी घमासान और अधिकार क्षेत्र से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी.

नारायाणसामी का आरोप है कि किरण बेदी कई महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं से जुड़ी फाइलों को सरकार के पास नहीं भेज रही हैं. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नारायणसामी ने तो राहत ली ही है. पुड्डुचेरी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया. आतिशबाजी छोड़ी और मिठाइयां बांटीं. कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि किरण बेदी ने पुड्डुचेरी के विकास में रोड़े अटका रहीं थीं.

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