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कूनो को मिला नेशनल पार्क का दर्जा -हवाई जहाज से आएंगे 16 शेर

नई दिल्ली 1 जनवरी 2019 । नए साल से एक दिन पहले सरकार ने श्योपुर जिले को तोहफा दिया है। केन्द्र सरकार की सहमति के बाद मप्र सरकार ने कूनो को नेशनल पार्क का दर्जा देते हुए गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। इसके बाद गुजरात से बब्बर शेरों को शिफ्ट करने में आ रही बाधाएं काफी हद तक दूर होंगी।

बता दें कि वर्ष 1996 में कूनो सेंचुरी अस्तित्व में आई। 2003 से मप्र सरकार, गुजरात से बब्बर शेर मांग रही है लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी गुजरात सरकार कूनो को बब्बर शेर देने में अड़ंगा लगाती आ रही है। बब्बर शेरों का 15 साल से इंतजार कर रहे कूनो प्रशासन ने सितंबर 2016 में मप्र सरकार के पास एक प्रस्ताव भेजा जिसमें, कूनो को नेशनल पार्क का दर्जा दिए जाने की मांग की। तीन महीने पहले मप्र सरकार की केबिनेट बैठक में कूनो को नेशनल पार्क का दर्जा दिए जाने का प्रस्ताव पास करके दिल्ली भेजा गया। बताया गया है कि भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने कूनो को नेशनल पार्क का दर्जा देने पर सहमति जता दी। इसके बाद मप्र सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी कर कूनो को राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर दिया है।

कूनो सेंचुरी का एरिया पहले 344.686 वर्ग किलोमीटर था। बब्बर शेर देने के लिए गुजरात सरकार ने कूनो को छोटा बता दिया था। इसके बाद कूनो का एरिया बढ़ाकर दोगुना करने का काम भी साथ-साथ चला। नेशनल पार्क की घोषणा वाला जो गजट नोटिफिकेशन जारी हुआ है उसमें कूनो का क्षेत्रफल 404.0758 वर्ग किलोमीटर और बढ़ा दिया गया है। यानी कूनो का क्षेत्रफल अब 748.7618 वर्ग किलोमीटर हो गया है। इसके लिए करीब 59 करोड़ रुपए खर्च करके बागचा गांव को विस्थापित किया जा रहा है।

तो हवाई जहाज से आएंगे 16 शेर

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात की गिर सेंचुरी से बब्बर शेरों की शिफ्टिंग के लिए एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया है। यह एक्सपर्ट कमेटी दो बार श्योपुर आकर कूनो का निरीक्षण कर चुकी है। कमेटी के सदस्यों ने कूनो को बब्बर शेरों के लिए पूरी तरह सुरक्षित व वातावरण को अनुकूल माना है। नेशनल पार्क का दर्जा मिलने के बाद एक्सपर्ट कमेटी की सिफारियों को आगे रखते हुए मप्र सरकार अब गुजरात से बब्बर शेर मांगेगी। एक्सपर्ट कमेटी की अंतिम बैठक दिल्ली मंे हुई थी। जिसमें पहली बार में 16 बब्बर शेर कूनो में लाए जाने थे। इसके लिए एक्सपर्ट कमेटी ने पूरी योजना सामने रखी। जिसमें हवाई मार्ग से शेरों की शिफ्टिंग का सुझाव है। इससे शेर जल्दी आएंगे और बीमारी की चपेट में आने की आशंका भी नहीं रहेगी। कमेटी ने सर्दियों के सीजन को शिफ्टिंग के लिए सबसे अच्छा माना है।

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