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लालू का PM पर निशाना: चौकीदार ईमानदार तो सच बताने में कैसा डर

नई दिल्ली 24 सितम्बर 2018 । राफेल विमान सौदे को लेकर फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के बयान से देश में मचे राजनीतिक घमासान के बीच राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने अपने ट्विटर हैंडलर के माध्यम से कहा कि यदि देश का चौकीदार ईमानदार है तो उसे सच बताने में किस बात का डर है।

शनिवार को किए गए ट्वीट में कहा गया कि ह्यमित्रो, राफेल सौदे की सही जानकारी 125 करोड़ देशवासियों को मिलनी चाहिए कि नहीं? उन्होंने कहा कि यदि पूंजीपति मिलनसार प्रधानमंत्री गुनहगार एवं भागीदार नहीं हैं और ईमानदार चौकीदार हैं तो सच बताने में डर किस बात की है।

गौरतलब है कि बहुचर्चित चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता लालू प्रसाद इन दिनों रांची जेल में हैं। जेल जाने से पूर्व श्री प्रसाद ने कहा था कि ट्विटर समेत अन्य सोशल मीडिया के जरिए वे अपने प्रशंसकों से जुड़े रहेंगे। जेल में रहने के दौरान उनके परिवार के सदस्य ट्विटर समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनके विचार कार्यकर्ताओं और प्रशंसकों के सामने रखेंगे।

राफेल विवाद पर बोले BJP सांसद- भूल हुई तो PM माफी मांग लें

राफेल डील को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपर अब उन्हीं की पार्टी के नेता भी हमलावर होने लगे हैं. भाजपा के बागी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने प्रधानमंत्री पर हमला बोला है. उन्‍होंने कहा कि पीएम मोदी को खुद विपक्ष के सवालों का जवाब देना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने पीएम को देश से माफी मांगने की सलाह भी दे डाली है.

शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, ‘सत्‍ता पक्ष के जो लोग इस मामले पर बोल रहे हैं, उन्हें क्या पता कि मौका ए वारदात पर क्या हुआ. हम लोग अपने प्रधानमंत्री को देख रहे हैं. जो बोल रहे हैं, उनके साथ मजबूरी है. आज हम मंत्रिमंडल में रहते तो हम भी सरकार की महिमा गान करते.”

मामला सच्चाई और पारदर्शिता का

पटना में शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि यह मामला सच्चाई और पारदर्शिता का है. मामला देश की अस्मिता और डिफेंस सुरक्षा से जुड़ा हुआ है. हमारी जय हिंद की सेना देख रही है कि ऐसा क्यों हुआ. इतना बड़ा बवंडर क्यों हुआ. इसके पीछे तर्क क्या हैं. उन्होंने आगे कहा कि पीएम मोदी इसका सबके सामने खुलासा करें. मेरी अपील है कि अगर कहीं भूल हुई है तो पीएम माफी मांग लें. सॉरी बोलने से हम छोटे नहीं हो जाएंगे. हम अगर सॉरी बोल देते हैं तो इससे और हम बड़े हो जाएंगे.

सरकार को सुझाव देते हुए शत्रुघ्‍न सिन्हा ने कहा कि पारदर्शिता के साथ इस मामले में हम लोगों को सामने आना चाहिए. इस मामले को लेकर देश में चारों तरफ बदनामी हो रही है. सब लोगों के दिमाग में सवालिया निशान बैठ गए हैं कि आखिर ऐसा क्या हो गया और कैसे हो गया. जैसे लग रहा है कि हम लोगों को किसी की नजर लग गई है. चार साल तक तो हमने कहा कि हम लोग ईमानदारी के साथ सरकार चला रहे हैं. हमारे ऊपर कोई इल्जाम नहीं, कोई आरोप नहीं. अचानक इतना बड़ा धमाल.

कुछ दिनों के लिए सच दब जाएगा लेकिन हटेगा नहीं

शत्रुघ्‍न सिन्‍हा ने कहा, ”पीएम बताएं कि क्या वजह है HAL के साथ डील होने के बावजूद उसके बजाय दूसरी कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया. वह भी ऐसी कंपनी को जिसको डील होने से पहले रजिस्ट्रेशन कराए सिर्फ 10 या 15 दिन ही हुए थे. उनके पास संपत्ति के नाम पर 10 या 12 लाख थे. कैसे उन्हें डिफेंस का हवाई जहाज बनाने का मौका दिया गया. चारों तरफ हम लोगों से सवाल किए जाते हैं. ” उन्होंने कहा कि इस बात से सब चिंतित ही नहीं हैं बल्कि नई-नई बातें निकाल रहे हैं. अगर सच को दबाने की कोशिश करेंगे तो कुछ दिनों के लिए दब तो जाएगा लेकिन हटेगा नहीं.

अंत में शत्रुघ्‍न सिन्हा चुटकी लेने से भी नहीं चूके. उन्‍होंने कहा कि राफेल डील मामले से एक ही फायदा हुआ है कि कुछ चीजों से हमारा ध्यान हट गया. उन्‍होंने कहा कि हम लोग डॉलर की बढ़ती कीमत, रुपये की घटती वैल्यू या पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से ध्यान हटाने में कामयाब हो गए हैं.

ओलांद का इंटरव्यू लेने वाले पत्रकार का दावा- भारत का बयान गलत

राफेल डील पर सिर्फ हिंदुस्तान ही नहीं बल्कि फ्रांस में भी सियासी भूचाल आ गया है. फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि मोदी सरकार ने रिलायंस डिफेंस को साझीदार बनाने का प्रस्ताव दिया था. वहीं, फ्रांस सरकार ने इस पर सफाई दी है.

ओलांद ने इंटरव्यू में खुलासा किया है कि भारत ने जिस सर्विस ग्रुप का नाम दिया उससे दसॉल्ट कंपनी ने बात की. ओलांद का कहना है कि दसॉल्ट ने रिलांयस ग्रुप के अनिल अंबानी से संपर्क किया. फ्रांस के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था. वहीं, फ्रांस सरकार का कहना है कि दसॉल्ट ने खुद भारत की रिलायंस डिफेंस का चुनाव किया.

फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद का इंटरव्यू करने वाले पत्रकार ने इंडिया टुडे टीवी से खास बातचीत में कहा, भारत का यह कहना गलत है कि भारतीय और फ्रांस सरकार दसॉल्ट एविएशन और रिलायंस डिफेंस के बीच हुई डील में शामिल नहीं थीं. फ्रांस्वा ओलांद का इंटरव्यू लेने वाले पत्रकार एंटन रोगट ने कहा कि ओलांद ने स्पष्ट रूप से कहा था कि भारत सरकार ने फ्रांसीसी अधिकारियों को रिलायंस डिफेंस का नाम प्रस्तावित किया था.

इंडिया टुडे टीवी: पूर्व फ्रांसीसी राष्ट्रपति ओलांद ने आपको दिए इंटरव्यू में राफेल सौदे और अनिल अंबानी के रिलायंस डिफेंस के बारे में क्या बताया?

एंटन रोगट: पूर्व फ्रांसीसी राष्ट्रपति जो दसॉल्ट एविएशन और रिलायंस डिफेंस के बीच राफेल डील पर हस्ताक्षर करने के लिए ऑफिस में मौजूद थे, उन्होंने साफ तौर पर बताया था कि भारत सरकार ने रिलायंस का नाम फ्रांसीसी अधिकारियों को प्रस्तावित किया है. फ्रांस्वा ओलांद ने इंटरव्यू में दावा किया कि मोदी सरकार ने रिलायंस डिफेंस को साझेदार बनाने का प्रस्ताव दिया था.

इंडिया टुडे टीवी: भारतीय सरकार द्वारा प्रस्तावित रिलायंस डिफेंस का नाम प्रस्तावित करने के पीछे ओलांद ने क्या कारण बताया?

एंटन रोगट: उन्होंने हमें भारत सरकार के उद्देश्यों के बारे में कुछ नहीं बताया. हमें जानकारी नहीं कि ओलांद को इस बारे में कुछ पता था या नहीं. वहीं फ्रांसीसी अधिकारियों ने इसे इसलिए स्वीकार कर लिया क्योंकि राफेल डील फ्रांस के लिए महत्वपूर्ण थी.

एंटन रोगट: डील के फिल्म कनेक्शन पर भी ओलांद ने जानकारी दी. उन्होंने अपनी सहयोगी जूली गायेट की फिल्म का रिलायंस एंटरटेनमेंट से कोई कनेक्शन होने से इनकार किया. ओलांद ने कहा फिल्म और राफेल डील का एक दूसरे से कुछ लेना देना नहीं.

गौरतलब है कि राफेल डील पर ओलांद के बयान के बाद जमकर बयानबाज़ी हो रही है. फ्रांस सरकार ने साफ कहा है कि फ्रेंच कंपनी को पूरी आज़ादी थी और कंपनी ने खुद ही इस करार के लिए रिलायंस डिफेंस को चुना. वहीं कंपनी ने भी अपनी सफाई में कहा है कि उनके सीईओ ने खुद मेक इन इंडिया के तहत रिलायंस का चुनाव किया था. यानी अब फ्रांस सरकार और फ्रेंच कंपनी एक हो गई हैं और ओलांद अपने बयान की वजह से अकेले पड़ गए हैं.

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