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नेताओं को हो गया है चुनाव परिणाम का आभास

नई दिल्ली 8 मई 2019 । सत्तासीन भाजपा ‘फिर एक बार मोदी सरकार’ का ख्वाब देख रही है, तो वहीं कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल मोदी सरकार को बेदखल करने के लिए पुरजोर कोशिशों में लगे हुए हैं। इस बीच 543 सदस्यीय लोकसभा की 425 सीटों के लिए मतदान संपन्न हो जाने के साथ ही नई सरकार को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं। पांचवें चरण के मतदान संपन्न हो जाने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के दिग्गज नेताओं के हाव-भाव बदले-बदले दिखाई दे रहे हैं। भाजपा नेता राम माधव, कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल, टीआरएस नेता के. चंद्रशेखर राव के बयानों में नई सरकार के आकार-प्रकार की झलक बखूबी देखने को मिल रही है। आइए, समझते हैं इन दिग्गज नेताओं के मुताबिक कैसी होगी नई सरकार?

‘सरकार बनाने के लिए भाजपा को पड़ सकती है सहयोगियों की जरूरत’

नई सरकार की रूपरेखा को लेकर लगाए जा रहे कयासों की शुरूआत सत्तारूढ़ भाजपा के दिग्गज नेता के हालिया बयान से करते हैं। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने संकेत दिया है कि भाजपा अकेले अपने दम पर बहुमत हासिल नहीं कर पाएगी।

राम माधव ने इस बात की संभावना जताई है कि लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा को सहयोगियों की जरूरत पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि इस लोकसभा चुनाव में भाजपा बहुमत से पीछे रह सकती है। राम माधव ने यह भी कहा, ‘भाजपा को उत्तर भारत के उन राज्यों में संभावित तौर पर नुकसान हो सकता है जहां 2014 में रिकॉर्ड जीत मिली थी। हालांकि दूसरी तरफ पूर्वोत्तर के राज्यों और ओडिशा व पश्चिम बंगाल में पार्टी को फायदा होगा।’

गैर भाजपा गैर कांग्रेस मोर्चा की कवायद

पांचवें चरण का मतदान संपन्न हो जाने के साथ ही गैर-भाजपा, गैर-कांग्रेस मोर्चे के लिए प्रयास तेज हो गए हैं। इस दिशा में पहले कदम के तहत तेलंगाना के मुख्यमंत्री और टीआरएस नेता के. चंद्रशेखर राव ने तिरुवनंतपुरम में केरल के मुख्यमंत्री और माकपा नेता पिनरई विजयन से रात के खाने पर मुलाकात की।

सूत्रों के मुताबिक, चुनाव परिणाम 23 मई को घोषित होने वाले हैं, लिहाजा केसीआर एक गैर-भाजपा, गैर-कांग्रेस सरकार के गठन के लिए विभिन्न पार्टियों के नेताओं से मुलाकात की योजना बना रहे हैं। राव ने ही पिछले साल मार्च में संघीय मोर्चे का विचार पेश किया था और भाजपा और कांग्रेस दोनों का एक विकल्प देने के लिए पहल शुरू की थी। उन्होंने उसके बाद टीएमसी, बीजेडी, सपा, जनता दल (सेकुलर) और डीएमके के नेताओं से मुलाकात की थी। उन्होंने वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को भी प्रस्तावित मोर्चे में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था।

‘कांग्रेस के समर्थन से संयुक्त मोर्चो बनाएगा सरकार’

वरिष्ठ वामपंथी नेता सुरावरम सुधाकर रेड्डी लोकसभा चुनाव के बाद केंद्र में संयुक्त मोर्चा सरकार के गठन का अनुमान लगा रहे हैं जैसा लगभग दो दशक पहले हुआ था। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव रेड्डी के मुताबिक, इस बार न तो यूपीए और न ही एनडीए को इतना बहुमत मिलेगा कि वे सरकार बना लें। रेड्डी ने कहा, ”इस बार संसद त्रिशंकु होगी।”

उन्होंने कहा, ”हमारा झुकाव भाजपा विरोधी सरकार के गठन को लेकर है। यह मोर्चो जिसका केसीआर (तेलंगाना मुख्यमंत्री) प्रस्ताव कर रहे हैं, वह यह छाप छोड़ने का प्रयास कर रहा है कि क्षेत्रीय दलों को बहुमत मिलेगा। उन्हें बहुमत नहीं मिलेगा।” उनके मुताबिक, उन्हें या तो भाजपा का साथ लेना होगा या फिर कांग्रेस का। उन्हें यूपीए या एनडीए में से किसी एक मोर्चे का समर्थन करना होगा।

रेड्डी ने कहा, ”यह पहले के बनी संयुक्त मोर्चा (सरकार) जैसा हो सकता है। उनका इशारा 1996 से 1998 में 13 दलों के गठबंधन से बनी सरकार की तरफ था जिसे कांग्रेस ने बाहर से समर्थन दिया था। रेड्डी ने दावा किया कि इस बात की संभावना है कि एनडीए को ज्यादा सीटें मिलें मगर वह सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत से दूर रहेगी।

‘220 से 230 सीटों तक सिमट जाएगी भाजपा’

भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने पिछले दिनों बयान दिया था कि भाजपा को इस बार चुनाव में बहुमत नहीं मिलेगा और भाजपा 220 से 230 सीटों तक सिमट जाएगी और उसे बहुमत जुटाने के लिए भारी संघर्ष करना पड़ेगा। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया था कि पुलवामा हमले के बाद मोदी सरकार ने अगर बालाकोट में एयर स्ट्राइक नहीं किया होता तो पार्टी 160 सीटों पर सिमट जाती। स्वामी के मुताबिक, यदि भाजपा 220 से 230 सीटों तक सिमटती है तो शायद नरेंद्र मोदी फिर से प्रधानमंत्री न बन सकें। उन्होंने कहा, “मान लीजिए भाजपा 220 या 230 सीटों पर सिमट जाती है और एनडीए के सहयोगियों को 30 सीटें मिलतीं है तो आंकड़ा 250 तक जाएगा, भाजपा को फिर भी 30 सीटों की आवश्यकता होगी।”

नरेंद्र मोदी के फिर से प्रधानमंत्री बनने के प्रश्न पर सुब्रमण्यम स्वामी का मानना है कि यह अन्य सहयोगियों पर निर्भर करता है। बहुमत के लिए 30 से 40 अतिरिक्त सीटों की आवश्यकता पड़ेगी। सरकार बनाने के लिए बसपा और बीजू जनता दल (बीजेडी) जैसे दल समर्थन कर सकते हैं।

‘कांग्रेस को अपने दम पर बहुमत हासिल करने की संभावना नहीं’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल का कहना है कि कांग्रेस को अपने दम पर बहुमत हासिल करने की संभावना नहीं है, साथ ही उन्होंने कहा कि गठबंधन अगली सरकार बनाने की स्थिति में हो सकता है। सिब्बल ने कहा, “हम जानते हैं कि हमें बहुमत नहीं मिलेगा। हम जानते हैं कि हमें 272 सीटें नहीं हासिल होंगी, हम यह भी जानते हैं कि भाजपा को भी 160 से ज्यादा सीटें नहीं मिलेंगी।’ उन्होंने कहा, ‘हमें अपने दम पर 272 सीटें नहीं मिलेंगी। बहुमत मिलने की बात कहना मेरे लिए मूर्खता होगी और भाजपा को 160 से कम सीटें मिलेंगी।’

हालांकि उन्होंने कहा कि कांग्रेस की अगुवाई वाले यूपीए को चुनाव में बढ़त हासिल होगी और यह सरकार बना सकता है।

सिब्बल ने यह भी कहा, ‘हमारा गठबंधन एकजुट है। हमारे सभी गठबंधन 2014 से पहले के हैं और बरकरार हैं, चाहे यह राकांपा हो या द्रमुक। हमने दो और को जोड़ा है। इसमें कर्नाटक में जेडीएस व पश्चिम बंगाल में माकपा है।’

मायावती का संकेत

बसपा सुप्रीमो मायावती के हालिया बयान में भी कई सियासी मायने छुपे हुए हैं। आंबेडकर नगर में चुनावी रैली के संबोधन वोट की अपील के साथ मायावती ने धीरे से अपनी ख्वाहिशों का भी इजहार कर दिया।

उन्होंने कहा कि यदि सब कुछ ठीक रहा तो वो आंबेडकर नगर लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतर सकती है, क्योंकि देश की सियासत का रास्ता आंबेडकर नगर से होकर जाता है। उन्होंने पीएम मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ‘नमो-नमो’ का दौर बीत चुका है और अब ‘जय भीम’ का नारा गूंज रहा है।

लोकसभा चुनाव के बीच कांग्रेस का आंतरिक सर्वे, पार्टी ने किया इतनी सीटें पाने का दावा

चौथे चरण के मतदान के बाद कांग्रेस(congress) ने दावा किया है कि 17वीं लोकसभा(Lok sabha elections 2019) के चुनावों में

उसकी सीटों की संख्या तीन अंक के आंकड़ों के पार जाएगी।

एक आंतरिक आकलन के अनुसार, कांग्रेस ने 2014 के चुनाव की तुलना में इस बार अपनी टैली में काफी सुधार किया है।

2014 में पार्टी को 543 सीटों में से केवल 44 सीटें मिली थीं। कांग्रेस पार्टी की सीटों की यह संख्या अब तक के लोकसभा चुनावों में सबसे कम थी।

बता दें कि इससे पहले 1991 में कांग्रेस 114 सीटों पर सिमट गई थी।

2014 में, कांग्रेस गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, दिल्ली और ओडिशा सहित 13 राज्यों में अपना खाता खोलने में विफल रही थी।

यही नहीं वह किसी भी राज्य में दोहरे अंकों के आंकड़े को पार नहीं कर सकी थी। जिसके चलते उससे विपक्ष का दर्जा भी छिन गया था।

क्योंकि प्रमुख विपक्षी दल बनने के लिए 10 फीसदी सीटों पर जीतना अनिर्वाय है। जबकि कांग्रेस को केवल 44 सीटें ही मिल सकी थीं।

वहीं दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी 30 साल बाद 282 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल करने वाली पहली राजनीतिक पार्टी बनी थी।

इन राज्यों में कांग्रेस की ज्यादा सीटें जीतने की संभावना

हिन्दुस्तान टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, इस आंकलन के अनुसार 2019 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी को

केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान और पंजाब में लाभ होता दिख रहा है।

तो आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, दिल्ली और पूर्वोत्तर में पार्टी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद नहीं कर रही है।

इन मामले से जुड़े कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने कहा कि, आंतरिक मूल्यांकन देश भर की कई लोकसभा सीटों से मिले फीडबैक पर आधारित है।

पार्टी के उम्मीद है कि, आखिरी चरण के चुनाव के बाद इस मूल्यांकन में और सुधार होगा। बता दें कि, 23 मई को मतगणना होनी है।

केंद्र में भाजपा सरकार का पतन निश्चित

कांग्रेस का कहना है कि लोग बदलाव के लिए मतदान कर रहे थे और केंद्र में भाजपा सरकार का पतन निश्चित है।

जैसा कि पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा प्रमुख अमित शाह के बयानों से स्पष्ट हो रहा है।

पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला का कहना है कि, हमारा पहला और सबसे महत्वपूर्ण मूल्यांकन मोदी की हताशा और घबराहट से है……..

कभी वह राहुल गांधी को लेकर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं, तो दूसरे दिन कहते हैं कि, वह पश्चिम बंगाल में निर्वाचित सरकार को गिराने वाले हैं।

तीसरे दिन वे गृह मंत्रालय को नोटिस भेज राहुल गांधी की नागरिकता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

भाजपा को बड़ा नुकसान होता दिख रहा है

सुरजेवाला ने कहा कि, ऐसा लग रहा है कि नरेंद्र मोदी अपनी डूबती नाव को बचाने के लिए हर तिनके का सहारा लेने की कोशिश कर रहे हैं।

सुरजेवाला ने कहा कि पार्टी का दूसरा आंकलन कार्यकर्ताओं की टिप्पणियों पर आधारित है।

यह बहुत उत्साहजनक है और कांग्रेस और सहयोगियों के लिए बड़े पैमाने पर लाभ होता दिख रहा है। वहीं भाजपा को बड़ा नुकसान होता दिख रहा है।

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