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जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से देश मे 61.8% मौतें

उज्जैन 7 मई 2019 । पिछले तीन दशक मे देश मे सर्वाधिक मौते हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह जैसी बीमारियों से हो रही है। 1990 में यह आंकडा 30.5% था जो अब 61.8% हो गया है। मलेरिया , टीबी जैसे रोगो से मौते आधी रह गयी है। आज 95% रोगो का कारण सेहत के पंचतत्व हवा, पानी , जंगल भोजन एवं जीवनशैली की अनदेखी है। विश्व मे भारतीय महिला, पुरुष और बच्चे सेहत के कई मानको पर सबसे बुरी स्थिति मे है । सार्वाधिक एनीमिक महिलाएं एवं नाटे बच्चे भारत मे हैं। तंबाकू से सबसे अधिक मौते भी भारत मे हो रही है।
यह खुलासा राष्ट्रीय सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के सलाहकार डॉ नरेश पुरोहित ने हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन की पत्रिका मे ‘जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से उत्पन्न खतरे” शीर्षक से प्रकाशित अपनी शोध अध्ययन रिपोर्ट मे किया।
शोध अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर डॉ नरेश पुरोहित ने बताया कि देश मे मॉ बनने योग्य 15 से 49 साल आयुवर्ग वाली 53% महिलाएं एनीमिक है। 20 % मोटापे से पीडित है।
देश में 44.5 % पुरुष तंबाकू और 29.2% शराब लेते है। प्रत्येक मिनट तंबाकू सेवन से दो मौते हो रही है। 18% पुरुष मोटापे के शिकार है।
उन्होने शोध- रिपोर्ट मे लेखांकित करते हुए बताया कि कुपोषण से देश में 4.6 करोड बच्चे बौने है। यह दुनिया मे सर्वाधिक है।1OO साल मे लड़कियों की औसत लंबाई 5 सेमी और लडको की 3 सेमी बढ़ी Iऔसत लम्बाई बढने की ये दर दुनिया मे सबसे कम है।
शोध-अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार 28 साल मे जीवनशैली से जुडी मौते दोगुनी हुई। दस मे से एक महिला और 7 मे से एक पुरुष को उच्च रक्तचाप है। खराब जीवनशैली से 65% युवाओं मे अवसाद के लक्षण है। देश में दूषित हवा से मधुमेह और भूलने की बीमारी बढ़ रही है।

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