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मध्यान्ह भोजन डोर-टू-डोर पहुँचाने वाला देश का पहला राज्य बना मध्यप्रदेश

नई दिल्ली 2 मई 2020 । राज्य शासन द्वारा कोरोना संक्रमण में स्कूली बच्चों को मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराने के लिये प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल के कुल 66 लाख 27 हजार विद्यार्थियों के अभिभावकों के बैंक खाते में 117 करोड़ रूपये की राशि ऑनलाइन ट्रान्सफर की गई है। साथ ही, 56 लाख 87 हजार बच्चों को डोर-टू-डोर मध्यान्ह भोजन का राशन भी पहुँचाया जा चुका है। अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्री मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि भारत सरकार की समीक्षा बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश डोर-टू-डोर मध्यान्ह भोजन राशन पहुँचाने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि कोरोना संक्रमण में गत 23 मार्च को लॉक डाउन होने पर 29 मार्च को मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा एन.आई.सी. के माध्यम से बच्चों के अभिभावकों के खाते में खाद्य सुरक्षा भत्ते की राशि अंतरित की गई। यह राशि सभी बच्चों के अभिभावकों को प्राप्त हो गई है।

डोर-टू-डोर मध्यान्ह भोजन राशन वितरण

अपर मुख्य सचिव श्री मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि अप्रैल माह में विद्यालय बंद हो जाने पर विद्यार्थियों को भोजन का राशन उनके घर पर ही भिजवाने में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय शिक्षिकों का सहयोग प्राप्त किया गया। भारत सरकार ने मध्यप्रदेश में मध्यान्ह भोजन योजना के क्रियान्वयन में नवाचार के सफल प्रयासों की सराहना की है।

उज्जैन में बाहर के फंसे लोगों को अपने गन्तव्य की ओर भेजने के निरन्तर प्रयास जारी

उज्जैन में 22 मार्च से फंसे श्रद्धालुओं को अपने-अपने राज्य के नगर-गाँव में जाने के लिए विधायक डॉ.मोहन यादव ने मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से चर्चा की, जिस पर उन्होंने तुरन्त कार्यवाही करते हुए उज्जैन और भोपाल प्रशासन के बीच तालमेल बनाने के निर्देश दिये हैं। इससे उज्जैन में फंसे लोगों को अपने-अपने संसाधन से बाहर जाना चाहते हैं, उनकी स्वीकृति शुरू करवाई गई। इसके लिये विधायक डॉ.मोहन यादव ने एक कन्ट्रोल डेस्क बनाया है, जिसमें स्वयंसेवक की ड्यूटी लगाईं गई है और सभी बाहर जाने की मांग करने वाले लोगों को सम्पर्क हेतु वीडियो सन्देश देकर मो.नं. 9630290327 प्रसारित किया है, इच्छुक व्यक्ति उक्त मोबाइल नम्बर पर संपर्क करके अपने नाम व विस्तृत विवरण दे सकते हैं।

इसके परिणामस्वरूप अब काफी संख्या में स्वीकृति आने लगी है और लोगों के धन्यवाद भी आने लगे हैं। अब लगातार यह कार्य जारी है। विधायक डॉ.मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन बाबा महाकाल की नगरी में बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना लगा रहता है, अतः उनके घर पहुँचा कर यह विश्वास बना रहे, ऐसा प्रयास किया जा रहा है।

लॉकडाउन के तीसरे चरण की घोषणा । COVID19 महामारी के कारण लॉकडाउन 4 मई से आगे दो सप्ताह के लिए बढ़ा ।

लॉकडाउन की अवधि फिर से दो हफ्ते के लिए बढ़ा दी गई है। देशभर को रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोनों में बांटा जा रहा है। ग्रीन जोन में सभी बड़ी आर्थिक गतिविधियों की छूट दे दी गई है। ताजा आदेश के मुताबिक, ग्रीन जोनों में बसें चल सकेंगी, लेकिन बसों की क्षमता 50% से ज्यादा नहीं होगी। यानी, अगर किसी बस में 50 सीटें हैं तो उसमें 25 से ज्यादा यात्री नहीं चढ़ेंगे। इसी तरह, डीपो में भी 50% से ज्यादा कर्मचारी काम नहीं करेंगे।

देश में कौन से जोन, कितने
ध्यान रहे कि पूरे देश को 733 जोनों में बांटा गया है। इनमें 130 रेड जोन, 284 ऑरेंज जोन जबकि 319 ग्रीन जोन घोषित किए गए हैं। ग्रीन जोन के जिलों में नाई की दुकानें, सैलून समेत अन्य जरूरी सेवाओं और वस्तुएं मुहैया कराने वाले संस्थान भी 4 मई से खुल जाएंगे। सिनेमा हॉल, मॉल, जिम, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स आदि बंद रहेंगे।

ऑरेंज जोन में बसें नहीं, कैब की अनुमति
वहीं, ऑरेंज जोन में बसों के परिचालन की छूट नहीं होगी, लेकिन कैब की अनुमति होगी। कैब में ड्राइवर के साथ एक ही पैसेंजर हो सकता है। ऑरेंज जोन में इंडस्ट्रियल ऐक्टिविटीज शुरू होगी और कॉम्प्लेक्स भी खुलेंगे। रेड जोन में नई की दुकानें, सैलून आदि बंद रहेंगे। विस्तृत जानकारी गृह मंत्रालय की तरफ से दी जाएगी।

देश में अभी 307 जिले ग्रीन जोन में
देश में कुल 739 जिले हैं, जिनमें से 307 अब भी कोरोना से अछूते हैं यानी 40 प्रतिशत से भी ज्यादा। ये 319 जिले ग्रीन जोन्स हैं। 3 मई के बाद इन जिलों में फैक्ट्रियों, दुकानों, छोटे-मोटे उद्योगों समेत ट्रांसपोर्ट और अन्य सेवाओं को भी शर्तों के साथ पूरी तरह खोलने की अनुमति दे दी गई है। गौरतलब है कि जिन जिलों में पिछले 21 दिनों से कोरोना वायरस के संक्रमण का एक भी मामला नहीं आता है, उन्हें ग्रीन जोन घोषित कर दिया जाता है। पहले यह मियाद 28 दिनों की थी जिसे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने घटाकर 21 दिन कर दी।

ऑरेंज जोन में 284 जिले
ऑरेंज जोन में उन जिलों को शामिल किया गया है जहां कोरोना मरीजों की संख्या कम है और वहां संक्रमण फैलने का खतरा भी कम है। चूंकि यहां कोविड-19 मरीज हैं, इसलिए इन्हें ग्रीन जोन में नहीं रखा जा सकता है और खतरा ज्यादा नहीं होने के कारण इन्हें रेड जोन में भी नहीं रखा गया है। यानी, इन्हें बीच के ऑरेंज जोन में रखा गया है जिन्हें नॉन-हॉटस्पॉट डिस्ट्रक्टि्स भी कहा जाता है। इस कैटिगरी में अभी 284 जिले हैं।

129 जिले रेड जोन में, पूरी दिल्ली भी
देश में 130 जिले रेड जोन्स में हैं यानी वहां कोरोना वायरस के हॉटस्पॉट्स हैं। पूरी दिल्ली रेड जोन में है। मुंबई, अहमदाबाद, सूरत जैसे बड़े औद्योगिक केंद्र भी रेड जोन्स में हैं, जहां रियायतों की गुंजाइश न के बराबर है।

 

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