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राज्यपाल के खाली हो रहे 10 पदों के लिए भाजपा में महादौड़ शुरू

नई दिल्ली 9 जून 2019 । भाजपा में राज्यपाल बनने के लिए महादौड़ शुरू हो गई है क्योंकि इस साल जुलाई से दिसंबर के बीच 10 राज्यों के राज्यपाल सेवानिवृत्त होने वाले हैं. पार्टी में दिग्गजों की लंबी लंबी कतार है, जो राज्यपाल बनने की चाहत रखते हैं. इनमें से कई स्वास्थ्य और अन्य कारणों के लोकसभा चुनाव के मैदान में नहीं उतरे थे. 2019 में राज्यपालों की भारी रिक्तियों ने इनमें से कई दिग्गजों को राजनीतिक जगत में बने रहने के लिए आशा की किरण दी है. चार राज्यपाल जुलाई में ही सेवानिवृत्त होने वाले हैं.

सेवानिवृत्ति का सिलसिला गुजरात के राज्यपाल ओम प्रकाश कोहली से शुरू हो रहा है, जिनका कार्यकाल 15 जुलाई को समाप्त हो रहा है. हमेशा गलत वजहों से सुर्खियों में रहने वाले नगालैंड के राज्यपाल पद्मनाभ आचार्य 19 जुलाई को अपना कार्यकाल पूरा कर रहे हैं. उनके बाद उनके बाद उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक 21 जुलाई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं. वहीं, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी का 5 साल का कार्यकाल 23 जुलाई को पूरा हो रहा है.

उसके बाद अगस्त और सितंबर में एनडीए की ओर से नियुक्त चार और राज्यपालों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. इसमें महाराष्ट्र के राज्यपाल सी. विद्यासागर राव 30 अगस्त को, गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा 31 अगस्त, कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला 1 सितंबर को जबकि राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह 4 सितंबर को. उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस पी. सदाशिवम के 5 साल के कार्यकाल का अंत होता है, जिन्हें 5 सितंबर को केरल के राज्यपाल के पद से पुरस्कृत किया गया था.

दिसंबर 2009 में तत्कालीन संप्रग सरकार द्वारा नियुक्त राज्यपाल ई. एस. एल. नरसिम्हन का मुद्दा भी इसी साल सुलझा लिया जाएगा. वह देश में सबसे लंबे समय तक सेवारत राज्यपाल हैं. आंध्र के पूर्व मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के साथ निकटता के कारण वह लंबे समय तक टिके रहे. नरसिम्हन की निरंतरता चाहने वाले नायडू को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उपकृत किया. अब जब उनका 10 साल का कार्यकाल पूरा हो जाएगा तो उनके जाने की संभावना है.

ये दिग्गज हैं लाइन में
मुरली मनोहर जोशी, सुमित्रा महाजन, कलराज मिश्र, बिजोय चक्रवर्ती, करिया मुंडा, भगत सिंह कोश्यिारी, बंडारू दत्तात्रेय आदि भाजपा के उन वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा. उनकी इच्छा राज्यपाल बनने की है. चुनाव नहीं लड़ने वाली पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी राजनीतिक भूमिका चाहती हैं. इस साल उनके लिए राज्यसभा सीट उपलब्ध नहीं है. इसके लिए उन्होंने 2020 का इंतजार करना होगा.

नौकरशाहों को नहीं करना चाहते नियुक्त
प्रधानमंत्री कार्यालय के करीबी सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी केंद्र शासित प्रदेशों में जहां प्रशासकों की जरूरत है, वहां नौकरशाहों या सेवानिवृत्त अधिकारियों को राज्यपाल के रूप में नियुक्त नहीं करना चाहते हैं. वह नेताओं को राज्यपाल के रूप में नियुक्त करते हैं. काफी हद तक इसी कारण से भाजपा के दिग्गजों के लिए राज्यपाल पद आशा की किरण है.

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