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करोना महामारी मे दूसरे कई रोगो की उपेक्षा: डॉ पुरोहित

भोपाल 10 जनवरी 2022 । कोविड़ महामारी के 20 महीने के दौरान दूसरे कई रोगों की जबर्दस्त उपेक्षा हुई। बच्चों में टीकाकरण के कार्यक्रम बाधित हुए। स्कूलों में मध्याह्न भोजन, बच्चों व गर्भवती महिलाओं के पोषण, पहले से चली आ रही बीमारियों की रोकथाम और इसके उपचार आदि के कार्यक्रम, कैंसर, किडनी व मूत्र सम्बन्धी रोग, मानसिक रोग, दांत व आंख, नाक, कान-गला सम्बन्धी रोगों, मानसिक बीमारियों से ग्रस्त मरीजों की स्थिति और बदतर हो गयी है।
यह खुलासा राष्ट्रीय संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम के सलाहकार डॉ नरेश पुरोहित ने हाल ही में ब्रिटिश उच्चायोग की स्वास्थ्य पत्रिका मे करोना महामारी की पीडा शीर्षक से प्रकाशित अपनी समीक्षा रिपोर्ट मे करते हुए ब्लू आईज को बताया की महामारी के दौरान कैंसर के विभिन्न रोगियों के कई सामान्य मामले पहले से ज्यादा जटिल हो गए हैं। सामान्य जीवाणु और फंगस से होने वाले रोगों की स्थिति इस कोरोना वायरस ने बिगाड़ दी है। ऊपर से ‘‘लांग कोविड’’ यानि उपचार के बावजूद र्कोरोना पूरी तरह ठीक नहीं हुए रोगियों के गुर्दे और फेफड़े खराब हो चुके हैं, उनके इलाज की दिक्कतों ने भी स्थिति को बिगाड़ दिया है। इस दौर के हालात ने लोगों के जीवन के प्रति अनिश्चितता व आशंका को और बढ़ा दिया है।

महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ पुरोहित ने रिपोर्ट में बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण के लंबे अनुभव के बावजूद हमारा सरकारी स्वास्थ्य तंत्र भरोसे के लायक नहीं बन पाया है। सरकारी दावे के अनुसार कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के नाम पर कोई 30 लाख करोड़ से भी ज्यादा रकम खर्च की जा चुकी है लेकिन फिर भी हम इस आशंका से उबर नहीं पा रहे कि स्वास्थ्य की आपात स्थिति में हमारे नागरिक समुचित स्वास्थ्य सेवा सहज प्राप्त कर पाएंगे। उन्होने बताया कि सन् 2020 और 2021 के आरम्भिक महीनों में जब देश कोरोना वायरस संक्रमण की पहली और दूसरी लहर का दंश झेल रहा था तब सरकारी स्वास्थ्य सेवा स्वयं वेंटिलेटर पर थी और निजी क्षेत्र के अस्पताल बेशर्म लूट के अड्डे बने हुए थे। बाजार और कारपोरेट अपना घाटा पूरा करने में लगे थे। गैरजरूरी दवाओं की कालाबाजारी और आम लोगों की दहशत की पूरी कीमत वसूली जा रही थी। वहीं राजनेता इसे ‘‘आपदा में अवसर’’ बता रहे थे। लाखों नागरिकों की मौत को देश की बेशर्म राजनीति ने बिना कफन नदियों के किनारे ही मिट्टी में दबा दिया।

राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के सलाहकार डॉ पुरोहित ने कहा कि महामारी की रोकथाम के लिए टीका (वैक्सीनेशन) एक अहम चीज होती है लेकिन केवल टीके की अनिवार्यता से ही महामारी की रोकथाम हो सकती है यह समझ से परे है।
उन्होंने आगे कहा कि एक वायरल संक्रमण को रोकने के लिए उसके संक्रमण की चेन को काटना जरूरी है। कोरोना वायरस संक्रमण में शुरू से ही देखा जा रहा है कि संक्रमण के फैलने के सभी रास्ते सहज रूप से खुले हुए हैं, केवल टीके की अनिवार्यता पर दवाब डाला जा रहा है। जाहिर है सरकार और कम्पनियां महामारी के रोकथाम के नाम धंधे और मुनाफे को ज्यादा महत्व दे रही है।

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