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माया की बगावत ने एक कर दिया सिंधिया एवं कमलनाथ खेमे को

उज्जैन 19 नवम्बर 2018 । शहर की राजनीति में खास तौर पर उज्जैन उत्तर विधानसभा क्षेत्र में खेमों मे बंटी कांग्रेस पार्टी में इस बार के चुनाव में अन्तर नज़र आ रहा है। पार्टी ने टिकट सिंधिया खेमे के राजेन्द्र भारती को दिया है। लेकिन उनके चुनाव प्रबंधन से लेकर जनसंपर्क तक का पूरा काम कमलनाथ खेमे के नेता देख रहे है। इसके पीछे कारण कांग्रेस की महिला नेत्री द्वारा पार्टी को दरकिनार कर निर्दलीय चुनाव मैदान में कूद पडना बडा कारण माना जा रहा है।

पिछले 15 साल से कांग्रेस सत्ता से वनवास भोग रही है। इस अवधि में स्थानीय कद्दावर नेताओं के बीच खेमेबाजी और बडी है। हालांकि प्रदेश कांग्रेस के डीएनए में गुटबाजी पुरानी है। इसी के चलते यहां कांग्रेस के छोटे नेता सिंधिया, दिग्विजयसिंह, कमलनाथ जैसे बडे नेताओं के खेमे से जुडकर अपनी राजनीति की शुरूआत करते हैं। फिलहाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ है और इनके सबसे पुराने समर्थकों में से एक पूर्व विधायक तथा शहर अध्यक्ष डॉ. बटुक शंकर जोशी है। इतना ही नहीं पिछले 15 सालों में सत्ता से दूर रहते हुए बटुक शंकर जोशी ने भी अपने कई समर्थक युवा चेहरों को तैयार किया है। इनमें सीनियर युवा चेहरों में मौजूदा शहर कार्यकारी अध्यक्ष रवि राय का नाम शामिल है तो पूर्व निगम अध्यक्ष आजाद यादव भी बटुक गुट के ही माने जाते हैं। इनके अलावा जूनियर समर्थकों में पिछले पांच सालों से कांग्रेस पार्षद माया त्रिवेदी ने भी बटुकजी की छत्रछाया में अपना राजनैतिक कैरियर चमकाया है। इस बार बटुक समर्थक सीनियर युवा नेताओं को उम्मीद थी कि वे कमलनाथ से कहकर उन्हें विधानसभा का टिकट दिलायेंगे। लेकिन डॉ. जोशी ने सीनियर समर्थकों को दरकिनार कर जूनियर समर्थक माया त्रिवेदी के लिए उत्तर से टिकट मांगा था। हालांकि प्रदेश चुनाव अभियान समिति के प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया राजेन्द्र भारती के लिए अड गये तथा आखिरी में उन्हीं का टिकट फायनल हुआ। इधर टिकट कट जाने से नाराज़ होकर माया त्रिवेदी निर्दलीय चुनाव में मैदान में उतर गई। इतना ही नहीं उन्होंने अपने सीनियर नेता बटुक शंकर जोशी के मान मनुहार को भी नज़र अंदाज़ कर दिया। इस पूरे घटना क्रम से जहां एक ओर डॉ. जोशी के सीनियर समर्थकों में नाराजी है वहीं टिकट फायनल होने के बाद राजेन्द्र भारती ने भी इन सीनियर नेताओं के घर जाकर साथ में काम करने के लिये जैसे तैसे उन्हें मना लिया। पार्टी सूत्रों का कहना है कि भले ही बटुकजी ने अपने सीनियर समर्थकों को नज़र अंदाज़ कर जूनियर के लिए टिकट मांगा वहां तक ठीक था लेकिन पार्टी के उम्मीदवार राजेन्द्र भारती के पक्ष में भी वे जमीनी स्तर पर ज्यादा काम नहीं कर रहे है। इसके पीछे पार्टी सूत्र उम्र दराज़ी का हवाला दे रहे है।

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