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लाखों कमा रहे हैं भस्मारती में परमिशन के नाम पर,चलित भस्मारती दर्शन का निर्णय सही

उज्जैन 22 सितम्बर 2019 । चलित भस्मारती दर्शन के निर्णय पर कलेक्टर शशांक मिश्र अटल रहें, क्योंकि इससे देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रध्दालुओं को लाभ होगा, इस व्यवस्था से केवल उन्हें तकलीफ है जिनकी दुकानदारी बंद हो रही है, वहीं इसका विरोध महाकाल मंदिर समिति में बैठे वे सदस्य कर रहे है जो स्वयं ही अवैध तरीके से महाकाल मंदिर में तथा समिति में काबिज हैं।
उक्त बात सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता सारिका गुरू ने कही। सारिका गुरू ने कहा कि कलेक्टर शशांक मिश्र महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष है उनका निर्णय करोड़ों श्रध्दालुओं के हित में है। आपने कहा कि कहीं भी शास्त्रों में यह उल्लेख नहीं है कि अधूरी आरती देखने से फल नहीं मिलता है। भस्मारती का विरोध सिर्फ वे लोग कर रहे हैं जिनकी दुकानदारी बंद हो रही है वे। क्योंकि भस्मारती के नाम से देश विदेश के करोड़ों भक्तों को गुमराह कर करोड़ों लोगों से भस्मारती में बैठाने के लिए लाखों रूपये अवैध रूप से वसूल करते हैं। कलेक्टर चलित भस्मारती चालू कर देंगे तो इन लोगों से भस्मारती के नाम पर पैसा मिलना बंद हो जाएगा और अवैध वसूली बंद हो जाएगी। महाकाल मंदिर समिति के तथाकथित कर्मचारी भी भस्मारती बुकिंग के नाम से अवैध वसूली करते हैं इसी कारण विरोध कर रहे हैं। सिंहस्थ में चलित भस्मारती प्रारंभ हुई थी जिसका करोड़ों लोगों को लाभ मिलता है। लिमिट में अनुमति मिलने से ऐसे लोग लाभ कमाते हैं। महाकाल मंदिर में सभी को भस्मारती का लाभ मिले इस हेतु कलेक्टर का निर्णय विधि सम्मत है।
भस्मारती के नाम पर मिलता है मुंहमांगा दाम
सारिका गुरू ने कहा कि महाकाल मंदिर में सुबह 7 बजे दंद्योदक आरती होती है, 10.30 पर भोग आरती, शाम 7 बजे संध्या आरती, रात्रि में 10.30 बजे शयन आरती होती है। इन सभी आरती में भक्तों को चलित दर्शन कराये जाते हैं। इन आरतियों में चलित आरती का विरोध क्यों नहीं हो रहा क्योंकि भस्मारती का प्रभाव है जिसके कारण भक्त दर्शन करने देश विदेश से आते हैं और इस दर्शन के नाम पर मुंहमांगा पैसा मिलता है जो लोग विरोध कर रहे हैं वे महाकाल मंदिर में वैधानिक रूप से नियुक्त भी नहीं है। महाकाल मंदिर समिति के अध्यक्ष कलेक्टर का निर्णय मान्य करना चाहिये।
महाकाल मंदिर अधिनियम में प्रतिनिधि नियुक्ति का कोई प्रावधान नहीं
महाकाल मंदिर अधिनियम में प्रतिनिधि नियुक्ति का कोई प्रावधान नहीं है बावजूद कुछ तथाकथित व्यक्तियों के दबाव में आकर 15 अगस्त 2019 को कुछ प्रतिनिधियों को मंदिर समिति में नियुक्त करने की सूची जारी की गई जिसमें दत्तक पुत्र का भी उल्लेख किया गया है जबकि महाकाल मंदिर एक्ट में प्रतिनिधि या पुजारी नियुक्त करने का कोई अधिकार ही नहीं है। दत्तक पुत्र सिर्फ अचल संपत्ति में ही अधिकार प्राप्त करता है चूंकि महाकाल मंदिर सरकार के अधीन है इसमें प्रतिनिधि या पुजारी नियुक्त करने का कोई अधिकार नहीं है और न ही प्रावधान है। इसलिए यह सूची निरस्त की जाए। पूर्व में महाकाल मंदिर समिति द्वारा 28 फरवरी 2012 को पुरोहितों की नियुक्ति हेतु सूची जारी की गई थी जिसका अनुमोदन आज तक समिति द्वारा नहीं किया गया है। जब यही सूची अभी तक विचाराधीन है तो नई नियुक्ति जारी करने का प्रश्न ही नहीं उठता। जिनकी सूची जारी की गई है वे मंदिर में तथाकथित पुजारी परिवार के सदस्य होने के कारण इनकी सूची का अनुमोदन के लिए महाकाल मंदिर समिति पर दबाव बनाया जा रहा है।
वैधानिक रूप से नियुक्त नहीं
महाकाल मंदिर में वर्तमान में एक भी पुजारी, पुरोहित, कर्मचारी, अधिकारी वैधानिक रूप से नियुक्त नहीं है और न ही किसी के नियुक्ति आदेश वर्तमान में महाकाल मंदिर समिति के पास उपलब्ध है। महाकाल मंदिर में जब ये ही वैधानिक रूप से नियुक्त नहीं है तो इन्हें महाकाल मंदिर के संबंध में आपत्ति लेने का कोई अधिकार नहीं है।

कलेक्टर आम श्रध्दालुओं के हित में यह निर्णय सर्वमान्य करें, करोड़ों दर्शनार्थियों के हित में लिया है
एक्ट का उल्लंघन हो रहा
महाकाल मंदिर अधिनियम 1982 बनने के बाद से आज तक एक भी बिंदू लागू नहीं किया गया है। अब एक्ट को संशोधित करने का प्रश्न ही नहीं पैदा होता। संशोधन तो जब होगा जब एक्ट लागू होगा। एक्ट के मुताबिक पुजारियों को भेंट पेटी का 35 प्रतिशत का कोई प्रावधान नहीं होने बावजूद अवैध रूप से पुजारियों को मंदिर एक्ट का उल्लंघन कर दिया जा रहा है। महाकाल मंदिर अधिनियम 1982 में किसी भी पुरोहित एवं पुजारी को रसीदों का 75 प्रतिशत दिये जाने का कोई उल्लेख नहीं होने के बावजूद तथाकथित पुजारियों एवं पुरोहितों को अभिषेक रसीदों का 75 प्रतिशत अवैध रूप से दिया जा रहा है। प्रतिनिधि नियुक्त करने का कोई वैधानिक प्रावधान नहीं होने के बावजूद महाकाल मंदिर समिति द्वारा अवैध रूप से अवैध पुजारियों के सैकड़ों अवैध प्रतिनिधि बना दिये गये हैं। जिससे महाकाल मंदिर समिति को करोड़ों रूपये का राजस्व का नुकसान हो रहा है।
समिति के सदस्य ही अवैध
वैधानिक पुजारी को समिति का सदस्य नियुक्त करने का प्रावधान है महाकाल मंदिर अधिनियम में यह कहीं भी उल्लेख नहीं है कि महाकाल मंदिर के पुजारी को ही समिति का सदस्य नियुक्त किया जाए। सदस्य विजय शंकर शर्मा महाकाल मंदिर में वैधानिक पुजारी नियुक्त ही नहीं है। बावजूद अवैध रूप से मंदिर अधिनियम का उल्लंघन कर समिति सदस्य बना दिया गया है, ऐसे में जो स्वयं अवैध हो वह महाकाल मंदिर के संबंध में आम दर्शनार्थियों और मंदिर के हित में निर्णय कैसे लेंगे। वहीं आशीष शर्मा मंदिर में पुजारी, पुरोहित, कर्मचारी नियुक्त नहीं है यहां तक कि महाकाल मंदिर में किसी भी पद पर नियुक्त नहीं है। कद्दावर नेताओं एवं अधिकारियों की पत्नियों से राखी डोरे के संबंध बनाकर महाकाल मंदिर समिति में सदस्य बन बैठे हैं। ऐसे में मंदिर समिति के सदस्य ही अवैध है वे लाखों करोड़ों दशनार्थियों के हित में फैसला कैसे लेंगे। इसलिए कलेक्टर स्वयं इस निर्णय पर अटल रहें और श्रध्दालुओं के हित में इसे लागू करें, इससे मंदिर को आय बढ़ेगी तथा प्रतिदिन हजारों लोगों को लाभ होगा।

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