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बजट में मोदी दागेंगे ये ‘मिसाइल’

नई दिल्ली 26 जून 2019 । मोदी सरकार लगातार छठी बार बजट पेश करने जा रही है। इससे पहले मोदी सरकार ने फरवरी 2019 में एक अंतरिम बजट पेश किया था और अब, चुनाव में इतनी बड़ी जीत के बाद, नरेन्द्र मोदी 2.0 के शासन काल में 5 जुलाई को केन्द्रीय बजट 2019 पेश होने जा रहा है जिसमें नीति और सुधार से संबंधित कई बड़े फैसले लिए जाने की उम्मीद है। इसबार वित्त मंत्री निर्माला सीतारमण पहली बार बजट पेश करेंगी। नव-नियुक्त वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से जहां लोगों बड़ी उम्मीदें हैं वहीं वो कई ऐसे ऐलान भी कर सकती हैं जो प्रधानमंत्री मोदी की महत्वाकांक्षी कैशलेस इकोनॉमी को पंख लगा सके।

प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार अपने पहले कार्यकाल में डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा चुकी है। वहीं इसबार भी डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने और काले धन पर लगाम लगाने के लिए कई प्रस्तावों पर केंद्रीय बजट से पहले चर्चा चल रही है। खबर है कि सरकार बैंकों से 10 लाख से ज्यादा सलाना कैश निकालने वाले लोगों पर टैक्स लगा सकती है। इस कदम के पीछे सरकार का मकसद डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना और ब्लैक मनी को कम करना माना जा रहा है। खबरों के मुताबिक सरकार आधार ऑथेनटिकेशन को तमाम बड़े ट्रांजेक्शन के लिए अनिवार्य बनाने के बारे में सोच रही है। आधार के जरिए सरकार टैक्स छुपाने वालों और बड़े कारोबार पर नजर रखने की सोच रही है। अभी के नियम के मुताबिक 50 हजार से अधिक रूपए के जमा करने पर पैन कार्ड देना होता है।

खबरों की मानें तो वर्तमान सरकार अलग-अलग नियमों एवं शर्तों के साथ फिर से एक कैश विथड्रॉल टैक्स (CWT) लगा सकती है। उम्मीद है कि इस बार CWT तब लगेगा जब बैंक से निकाली जाने वाली नकद रकम, एक वित्तीय वर्ष में 10 लाख रुपए से अधिक होगी। CWT लगाने का मकसद, डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देना और काले धन के प्रसार को रोकना हो सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक ने NEFT और RTGS पर लगने वाले चार्ज को हाल ही में माफ़ कर दिया है जिसे डिजिटल लेनदेन को तेज करने के एक तरीके के रूप में देखा जा सकता है। ATM से पैसे निकालने पर लगने वाले चार्ज की समीक्षा करने के लिए सेंट्रल बैंक ने भी हाल ही में एक कमिटी बनाई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकार का मत है कि अधिकांश अकाउंट धारकों को अपनी रेगुलर जरूरतें पूरी करने के लिए एक साल में 10 लाख रुपए से ज्यादा नकद पैसे निकालने की जरूरत नहीं पड़ती है।

आपको बता दें कि 2009 में यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायन्स (UPA) की सरकार द्वारा एक दिन में 10,000 रुपए से ज्यादा पैसे निकालने पर 0.1% का एक बैंकिंग कैश ट्रांजैक्शन टैक्स लगाया गया था। लेकिन, इसे बाद में उसी साल हटा लिया गया। सरकार के अनुसार देश के अधिकतर लोगों और व्यवसायों को 10 लाख रुपए से अधिक की सालाना नकदी की जरुरत नहीं है। बजट से पहले इस योजना पर भी विचार कर लिया गया है। वैसे अभी इस प्लान को अंतिम रूप नहीं किया गया है। सरकार इस मामले में पूरी तरह से स्पष्ट है कि मध्यम और गरीबों को किसी तरह की कोई परेशानी ना हो और उन पर किसी तरह का बोझ ना बढ़े।

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