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विधायक पुत्र करण मोरवाल की मुश्किले बढ़ी- देखे वीडियो

उज्जैन 15 जनवरी 2022 । बड़नगर विधायक पुत्र करण मोरवाल की मुश्किले कम होने का नाम नही ले रही है। रेप पीड़िता ने एसपी, कलेक्टर से गुहार लगाने के बाद आईजी और शिक्षा मंत्री के समक्ष न्याय की गुहार लगाते हुए चेतावनी दी है कि अगर दो दिन में विधायक पुत्र और डॉक्टर के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज नही किया तो सीएम हाउस पहुंचकर आत्महत्या करूंगी। रेप पीड़िता का आरोप है कि सरकार और अधिकारी विधायक पुत्र को बचाने के लिए उसे धमकी भी दे रहे है। उज्जैन जिले के बडनगर तहसील से कांग्रेस विधायक मुरली मोरवाल के बेटे करण मोरवाल को रेप के एक मामाले मे जमानत मिल गई है, लेकिन रेप पीड़िता का दावा है कि करण को जमानत बडनगर के सिविल अस्प्ताल में दर्ज फर्जी डॉक्यूमेंट के आधार पर मिली है, दावा सच इसलिए हो रहा है क्योकि विगत करीब 2 माह पूर्व सिविल अस्पताल के एक डॉ व कर्मचारियों को फर्जी डॉक्युमेंट मामले में जिला कलेक्टर आशीषसिंह द्वारा निलंबन की कार्रवाई गई थी। क्या दर्ज नही हुआ धोखाधड़ी का मामला
रेप पीड़िता का कहना है की जमानत के बाद से लगातार आवेदन दे रही हु की अस्पताल रिकार्ड में फर्जी इंट्री हुई है, जिसके मामले में जांच के बाद डॉक्टर व अन्य कर्मचारी का निलंबन भी हुआ है, तो फिर इस मामले में न्यायालय में गलत तर्क और झूठी जानकारी देने वाले डॉक्टर, कर्मचारी और विधायक पुत्र करण मोरवाल के विरूद्ध 420 व अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए। पीड़िता को मिला आश्वासन
करण पर कार्रवाई क्यों नही की, उसको क्यो बचाया जा रहा है, जमानत कैसे मिली उसको फर्जी डॉक्यूमेंट पर! पूरे मामले में मंत्री डॉ यादव, सांसद अनिल फिरोजिया, आईजी सन्तोष कुमार व कमिश्नर ने पीड़िता को आश्वासन दिया है निष्पक्ष जांच की जाएगी! लेकिन पीड़िता इस 2 दिन में करण के विरुद्ध प्रकरण दर्ज नहीं होता है तो सीएम हाउस के बाहर जाकर सुसाइड करने का अल्टीमेटम दिया है। झूठे आधार पर मिली जमानत
पीड़िता का कहना है जब डॉ दोषी है निलंबित कर दिया गया तो विधायक पुत्र करण पर मामला दर्ज क्यों नहीं हुआ उसको जमानत उसी फर्जी डॉक्यूमेंट के आधार पर कैसे मिल गई, पूरे मामले में आईजी, कमिश्नर और मंत्री यादव ने पीड़िता स कहा हम जांच करवाते है निष्पक्ष जांच होगी। पीड़िता ने बताया कि घटना 14 फरवरी की है, करण ने सफाई में बडनगर के सिविल अस्पताल के डॉक्यूमेंट दिखाए और प्रूफ दिया कि में 13 से 15 फरवरी तक अस्प्ताल में भर्ती था। जबकि जिला कलेक्टर ने जांच जो जांच कराई उसमें वह वहां नही मौजूद था और फर्जी इंट्री पाई गई तो उसके खिलाफ 420 व अन्य धाराओं में कार्रवाई क्यो नही की जा रही है।

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