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आते ही एक्‍शन मोड में मोदी सरकार

नई दिल्ली 1 जून 2019 । मोदी कैबिनेट में मंत्रालयों का बंटवारा हो गया है. इसके साथ ही मोदी सरकार के मंत्री एक्‍शन मोड में भी आ गए हैं. इसी के तहत नई सरकार के श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने पेंशन स्‍कीम की फाइल पर साइन करने का ऐलान किया है.

उन्‍होंने कहा कि वह असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को 3000 हजार रुपये की मासिक पेंशन देने की फाइल पर साइन करने वाले हैं. इस फाइल पर साइन होने के साथ ही मजदूर वर्ग के लोगों के लिए पेंशन स्‍कीम लागू हो जाएगी.

क्‍या है पेंशन स्‍कीम
दरअसल, बीते अंतरिम बजट में मोदी सरकार ने मजदूर वर्ग के लिए भी ”प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन” नाम से एक बड़ी योजना का ऐलान किया गया है. इस योजना का लाभ घरेलू कामगार, रिक्शा चालक, कृषि मजदूर और बीड़ी मजदूरों समेत उन हर लोगों को मिलेगा जिनकी महीने की कमाई सिर्फ 15000 रुपये या उससे कम है. चूंकि यह पेंशन योजना है, इसलिए इसका फायदा 60 साल की उम्र के बाद मिलेगा. इस उम्र के बाद हर महीने कामगार को 3000 रुपये की मासिक पेंशन मिलेगी.

हालांकि इस योजना की कुछ शर्तें भी हैं. इस योजना का फायदा 18 साल से 40 साल तक की उम्र का कोई भी असंगठित क्षेत्र का कर्मचारी उठा सकता है. जिस शख्‍स की उम्र 18 साल है, उसे 55 रुपये प्रति माह का योगदान देना होगा. वहीं 29 साल की उम्र के लोगों को पेंशन के लिए 100 रुपये प्रति माह जमा कराने होंगे.

सरकार के इस कदम से उन घरेलू नौकरानियों , ड्राइवरों, प्लबंर, बिजली का काम करने वाले कामगारों को फायदा हो सकता है, जो 15000 की सैलरी से कम कमाई कर पाते हैं. इस दायरे में 10 करोड़ कामगारों के आने की उम्‍मीद है.

हालांकि राष्ट्रीय पेंशन योजना या कर्मचारी राज्य बीमा निगम योजना और कर्मचारी भविष्य निधि योजना के तहत आने वाले कामगार को इसका फायदा नहीं मिलेगा. ऐसे मजदूर जो इनकम टैक्स रिटर्न देते हैं, वे भी योजना के दायरे से बाहर होंगे. अहम बात यह है कि इस योजना के लिए अंतरिम बजट में 500 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है.

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह क्यों बने देश के गृह मंत्री, क्या है पीएम मोदी की मंशा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बीच में आपस में एक दूसरे को बधाई या रिवार्ड देने का कोई रिश्ता नहीं है, बल्कि दोनों के बीच में आपस की केमिस्ट्री और उद्देश्य को अच्छी तरह से समझने की अंतरंगता है। यही वजह है कि कभी मुख्यमंत्री रहने के दौरान कैबिनेट में गृह मंत्री रहे अमित अनिल चंद्र शाह को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी कैबिनेट में इस बार गृह मंत्री बनाया है।
अमित शाह को गृह मंत्री बनाने के पीछे प्रधानमंत्री की कुछ जटिल चुनौतियों पर पार पा लेने की मंशा है। प्रधानमंत्री को भरोसा है कि इन चुनौतियों से निबटने के लिए जरूरी संदेश अमित शाह ही दे सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर की चुनौती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने सबसे बड़ी चुनौती जम्मू-कश्मीर का आतंकवाद है। यह उनके पहले कार्यकाल में नासूर बना था। पाकिस्तान की शह पर जम्मू-कश्मीर में आतंकी भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं। इसके लिए जितनी बड़ी जरूरत नियंत्रण रेखा और पाकिस्तान पर आतंकवाद को शह न देने पर दबाव बनाने की है, उससे कहीं बड़ी जरूरत जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाज, आंदोलनकारी और विघटनकारी, अलगाववादियों को काबू में रखने की है।
भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की छवि इसके लिए बिल्कुल उपयुक्त है। प्रधानमंत्री को भरोसा है कि अमित शाह के कार्यभार संभालते ही जम्मू-कश्मीर से लेकर पाकिस्तान में चल रहे आतंकी संगठनों तक इसका सकारात्मक संदेश जाएगा। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 35ए को लेकर भाजपा ने देश से एक वादा किया है। इसके लिए भी अमित शाह से अच्छा चेहरा प्रधानमंत्री के पास नहीं है।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा जम्मू-कश्मीर के लद्दाख के हित को भी जोड़ती है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इसे अमली जामा पहनाने में सक्षम हैं। खास बात यह है कि पूर्व गृह मंत्री राजनाथ सिंह अब रक्षा मंत्री हैं। इस तरह से राजनाथ सिंह और अमित शाह आसानी से तालमेल बनाकर जम्मू-कश्मीर में तमाम चुनौतियों से निबट सकते हैं।
एनआरसी का मुद्दा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली सरकार में राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण ने आकार लेना शुरू किया है। ज्वलंत मुद्दा है। पूर्वोत्तर और खासकर असम के इतिहास से इसकी जड़े जुड़ी हैं। भाजपा बांग्लादेश के अनाधिकृत रूप से रह रहे विदेशियों को लेकर लगातार संवेदनशील रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्य एजेंडे में है।
असम विधान सभा के पिछले चुनाव में भाजपा ने इसे मुद्दा बनाया था। इस साल वहां चुनाव भी होना है। भाजपा के कुछ बड़े नेता बिना नाम छापने की शर्त पर कहते हैं कि इस जटिल स्थिति से अध्यक्ष जी (अमित शाह) के अलावा बहुत कम लोर पार पा सकते हैं। उनका केंद्रीय गृह मंत्री बनना ही पर्याप्त है।
नक्सल उग्रवाद
पुरानी कहावत है। पुलिस नहीं उसका डंडा (हनक) राज करता है। नक्सल क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे और खुफिया सेवा से 2017 में रिटायर हुए वरिष्ठ अफसर की मानें तो अमित शाह के केंद्रीय गृह मंत्री बनने से नक्सल समस्या को नियंत्रित करने में आसानी होगी।
अमित शाह सख्त हैं। उन्हें कड़े होमवर्क के साथ सख्ती से लागू कराने वाले चेहरे के तौर पर जाना जाता है। दूसरा, उनके गृह मंत्री बनने के बाद केन्द्र सरकार की नीतियों में एक स्पष्टता देखने को मिलेगी। इससे नक्सलवाद पर बड़ा दबाव बनाने में मदद मिलेगी। अलगाववादी ताकतों को इससे झटका लगेगा।

दिग्गज कांग्रेसी नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने PM मोदी से की अपील

लोकसभा चुनाव-2019 में प्रचंड बहुमत के साथ पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी के समर्थन से एनडीए गठबंधन एक बार फिर से सरकार बनाने जा रही है। 30 मई को मोदी प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। हाल ही में पाकिस्तान में सदियों पुराने गुरुनानक महल को कथित तौर पर तोड़े जाने को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री और कांग्रेसी नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पीएम नरेंद्र मोदी से एक अपील की है।

जानिए क्या बोले कैप्टन अमरिंदर सिंह
दरअसल पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में गुरुनानक महल को उपद्रवियों ने आंशिक तौर पर तोड़ दिया और इस महल की कीमती खिड़कियों और दरवाजों को बेच दिया। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पीएम नरेंद्र मोदी से अपील करते हुए कहा कि आप पाकिस्तान पर दबाव बनाइये, हम गुरुनानक महल का पुनर्निर्माण कराएंगे।

दोषियों को सज़ा मिले
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पीएम मोदी से यह अपील भी की वह पाकिस्तान से महल के तोड़े जाने की घटना की जांच कराने और दोषियों को सज़ा दिलाने की मांग करें। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार इमरान खान की अगुवाई वाली पाकिस्तान सरकार पर दबाव बनाए कि वह सिख धरोहर से जुड़े ऐसे सभी स्मारकों का संस्थागत तरीके से संरक्षण करे।

मोदी सरकार के साथ काम करने को तैयार कांग्रेस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी कैबिनेट मंत्रियों के हुए शपथ ग्रहण समारोह के बाद कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि वह देश के विकास के लिए और नागरिकों की प्रगति के लिए मोदी सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है।

कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर ट्वीट कर कहा कि ‘प्रधानमंत्री मोदी और उनकी नई कैबिनेट के मंत्रियों को बधाई। हम उन्हें शुभकामनाएं देते हैं और भारत और उसके नागरिकों की प्रगति और विकास के लिए साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं।’ गौरतलब है कि गुरुवार को हुए पीएम मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस के कई दिग्गजों ने भी शिरकत की थी। जिसमें यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद का नाम शामिल है।

बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है और पार्टी मात्र 52 सीटों पर ही सिमट गई है। लगातार दूसरी बार ऐसा हुआ है कि कांग्रेस को संसद में प्रमुख विपक्षी दल का दर्जा नहीं मिल पाएगा। वहीं दूसरी तरफ बीजेपी को चुनाव में 303 सीटें मिली है साथ ही सहयोगी दलों की सीटों को मिलाकर यह आंकड़ा करीब 350 तक पहुंच गया है। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मात्र 44 सीटें मिली थी।

लालू के बेटे तेज प्रताप की कार की भीषण टक्कर, हुए घायल

बिहार के पूर्व सीएम और आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव की गाड़ी हादसे की शिकार हो गई। इस हादसे में तेज प्रताप यादव को चोटें आई है। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना राजधानी पटना के ईको पार्क के पास की है। सड़क हादसे में तेजप्रताप की गाड़ी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है।

बताया जा रहा है कि तेजप्रताप यादव अपने समर्थकों के साथ कहीं जा रहे थे। ईको पार्क के पास सामने से आ रही तेज रफ्तार कार से उनकी गाड़ी की टक्कर हो गई। खबरों की माने तो इस हादसे में कई लोगों के घायल होने की खबर है।

वहीं घटना स्थल पर मौजूद लोगों का कहना है कि दोनों गाड़ियों की रफ्तार ज्यादा थी। वहीं घटना की सूचना मिलते ही पुलिस स्कॉर्ट की गाड़ी मौके पर तुरंत पहुंच गई। हादसे में घायल हुए लोगों को पुलिस स्कॉर्ट गाड़ी से अस्पताल ले गई। इस घटना के बाद राबड़ी देवी के अलावा तेजस्वी यादव समेत तमाम नेता अस्पताल पहुंचकर तेज प्रताप का हालचाल जाना है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

बता दें कि इससे पहले तेज प्रताप यादव सड़क हादसे के शिकार हो चुके हैं। पटना में बीते साल 26 जुलाई की सुबह सड़क पर साइकिल चलाते हुए वे अपने ही कारकेड की गाड़ी से टकराकर गिर पड़े थे।

गौरतलब है कि इससे पहले फरवरी महीने में मुजफ्फरपुर में बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ सीपी ठाकुर के काफिले में बडा सडक हादसा हो गया था। तब सीपी ठाकुर के स्कॉर्ट में शामिल एक गाडी दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में एक दारोगा की मौत हो गई थी. वहीं, तीन अन्य सिपाही गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

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