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अब सफेद हाथी बने अधिकारियों को घर बैठाएगी मोदी सरकार

नई दिल्ली 12 जून 2019 । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नये सिरे से सरकार का कामकाज सँभालने के बाद अब भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के कुछ ऐसे अधिकारियों पर अपना ध्यान केन्द्रित किया है जो या तो काम नहीं करते हैं या काम करने में लापरवाही बरतते हैं। पीएम मोदी ऐसे अधिकारियों को सरकार पर भार मानते हैं और यह भार उतारने के लिये ऐसे अधिकारियों को सेवानिवृत्त करने का विचार कर रहे हैं।

देश में कार्यरत् हैं 5,104 IAS अधिकारी

दरअसल केन्द्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय के अनुसार देश में लगभग 5,104 आईएएस अधिकारी कार्यरत् हैं। मोदी सरकार ने इनमें से लगभग 1,143 आईएएस अधिकारियों की एक लिस्ट तैयार की है। सरकार इन अधिकारियों के पिछले चार साल में किये गये कार्यों की समीक्षा करके यह पता लगाएगी कि इनमें से कितने अधिकारियों ने कार्यकाल के 25 साल पूरे कर लिये हैं या फिर उनकी उम्र 50 वर्ष से अधिक हो गई है और वह कैसा काम कर रहे हैं। उनके कामकाज की रिपोर्ट बनाने के लिये उनके पिछले 4 साल के दौरान किये गये कामों के रिकॉर्ड की समीक्षा की जाएगी।

कठोर मानकों के आधार पर हो रही कामकाज की समीक्षा

एक अधिकारी ने बताया कि मोदी सरकार बहुत कठोर मानकों के आधार पर अधिकारियों के कामकाज के रिकॉर्ड की समीक्षा करने वाली है। अधिकारी के अनुसार अखिल भारतीय सेवा नियमावली-1958 के नियम 16(3) के अंतर्गत 1,143 आईएएस अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा की जाएगी। इन अधिकारियों के 2014 से 2018 के दौरान किये गये कामकाज के रिकॉर्ड की समीक्षा होगी। अधिकारी के अनुसार केन्द्र सरकार ने विविध राज्य सरकारों के साथ भी इसके लिये बातचीत की है और राज्य सरकारों को उनके राज्य में कार्यरत् आईएएस अधिकारियों के कामों की समीक्षा करके रिपोर्ट कार्ड भेजने के लिये कहा है। इनमें से आंध्र प्रदेश, कर्णाटक, केरल, तेलंगाना, उत्तराखंड, जम्मू-काश्मीर और त्रिपुरा आदि राज्यों ने केन्द्र सरकार की ओर से रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद अधिकारियों की सेवा के रिकॉर्ड की समीक्षा नहीं की है।

समय पूर्व सेवानिवृत्ति से सरकार करेगी सफाई
मोदी सरकार का मानना है कि समय-समय पर अधिकारियों के कामकाज की समीक्षा करने से अधिकारियों में अपने कामकाज के प्रति उत्तरदायित्व बढ़ेगा, भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी और निकम्मे अधिकारियों की छंटनी करने से सरकार पर ऐसे अधिकारियों का आर्थिक भार घटेगा। दूसरे शब्दों में कहें तो सरकार ऐसे आईएएस अधिकारियों को घर बैठाने जा रही है जो सफेद हाथी बने हुए हैं।

कई अधिकारियों को घर बैठा चुकी है मोदी सरकार
मोदी सरकार ऐसे आईएएस अधिकारियों को जनहित में सेवानिवृत्ति लेने के लिये कह सकती है और इसके लिये उन्हें कम से कम तीन महीने का नोटिस दे सकती है। इसके अलावा उन्हें तीन माह का वेतन व अन्य भत्ते देकर चलता भी कर सकती है। अधिकारी ने बताया कि इन लिस्टेड 1,143 अधिकारियों में से छत्तीसगढ़ कैडर के 2, अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम, बिहार तथा केन्द्र शासित कैडर (AGUMT) के 1-1 अधिकारी को केन्द्र सरकार जनहित में समय से पूर्व सेवानिवृत्ति दे भी चुकी है। हालाँकि इन अधिकारियों के नाम सार्वजनिक नहीं किये गये हैं।

इस शख्स को पीएम मोदी की खास टीम में रखने के लिए बदल दिया गया 60 साल पुराना नियम

केन्द्र सरकार ने कैबिनेट सचिव प्रदीप कुमार सिन्हा को तीन महीने का सेवा विस्तार देने के लिए 60 साल पुराने नियम में बदलाव किया है. कैबिनेट सचिव की नियुक्ति दो साल के तय कार्यकाल के लिए होती है. अखिल भारतीय सेवा (मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ) नियम, 1958 के मुताबिक, सरकार कैबिनेट सचिव को सेवा विस्तार दे सकती है, लेकिन उनका कुल कार्यकाल चार साल से ज्यादा का नहीं होना चाहिए. प्रदीप कुमार सिन्हा अपने कार्यकाल का चार साल पूरा करने जा रहे हैं. लेकिन मोदी सरकार ने नियम ही बदल दिया.

संशोधित नियमों के अनुसार, केन्द्र सरकार चार साल के कार्यकाल के बाद भी कैबिनेट सचिव को अधिकतम तीन महीने का कार्य विस्तार दे सकती है. नियम में बदलाव के तुरंत बाद सरकार ने सिन्हा को तीन महीने का कार्य विस्तार देने की घोषणा की है. इसके साथ ही सिन्हा कैबिनेट सचिव के तौर पर सबसे लंबे वक्त तक काम करने वाले देश के पहले नौकरशाह बन जाएंगे.

कैबिनेट सचिव देश के नौकरशाही का सर्वश्रेष्ठ पद होता है. पीएम मोदी की टीम में इस पद पर कार्यरत लोगों को खास तवज्‍जो मिलती है. एक पीएम मोदी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और कैबिनेट सचिव की टीम को ही पीएमओ के सबसे प्रभावशाली टीम के तौर देखा जाता है. ऐसे में प्रदीप कुमार सिन्हा के सेवानिवृत होने से टीम के संयोजन में बदलाव आ जाता, जबकि पीएम मोदी ने पिछले महीने ही दोबारा पीएम पद का कार्यभार संभाला है.

इसलिए तत्काल किसी बड़े बदलाव की ओर बढ़ने की तुलना में सिन्हा को तीसरी बार कार्य विस्तार दिया गया है, इससे पहले उनका कार्यकाल 2017 और 2018 में एक-एक साल के लिए बढ़ाया गया था. कार्मिक मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को जारी आदेश के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की नियुक्ति मामलों की समिति ने 12 जून, 2019 के बाद सिन्हा को तीन महीने का कार्य विस्तार दिया है. सिन्हा को मई 2015 में दो साल के लिए कैबिनेट सचिव नियुक्त किया गया था.

तीन महीने बाद कौन लेगा पीके सिन्हा की जगह?

केंद्रीय गृहसचिव राजीव गाबा, पीके सिन्हा के बाद अगले कैबिनेट सेक्रेटरी हो सकते हैं. गाबा ने केंद्र सरकार के कई विभागों में काम किया है, और बिहार व झारखंड सरकार में कई पदों पर रह चुके हैं. बताया जा रहा है कि 31 अगस्त को गृह सचिव के रूप में उनका दो साल का कार्यकाल खत्म होगा. माना जा रहा है कि 1987 बैच के आईएएस ऑफीसर और जम्मू कश्मीर के मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम गाबा के बाद इस पद के लिए प्रमुख दावेदार हैं.

1982 बैच के आईएएस अधिकारी हैं गाबा

1982 बैच के आईएएस अधिकारी गाबा की नियुक्ति अगर इस पद पर की जाती है तो वह दो सालों के लिए इस पद पर बने रहेंगे. हालांकि, आगे के दो सालों के लिए उनका कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है. अभी तक इस पद पर पीके सिन्हा हैं जिनकी नियुक्ति 2015 में की गई थी. बाद में 2017 और 2018 में उनके कार्यकाल को दो सालों के लिए बढ़ा दिया गया था. पीके सिन्हा के पहले अजीत कुमार सेठ और केएम चंद्रशेखर दोनों चार-चार साल के लिए इस पद पर रह चुके हैं. सेठ की नियुक्ति यूपीए ने 2011 में की थी, जिनका कार्यकाल 2014 तक बना रहा.

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