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वरूण गांधी को कांग्रेस में ला कर गांधी परिवार को एकजुट कर सकते हैं MP के सीएम कमलनाथ

वाराणसी 16 दिसंबर 2018 । 15 सालों के बाद एमपी की सत्ता से भाजपा को दूर करने वाले नये मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कांग्रेस को जो मजबूती दी है वो किसी संजीवनी से कम नहीं है। कांग्रेस की तीन पीढियों के साथ काम करने वाले कमलनाथ हमेशा से ही पार्टी के विश्वस्त रहे हैं। पार्टी ने अच्छे बुरे सभी दिन देखे लेकिन इस नेता ने कभी पार्टी लाइन से हटकर काम नहीं किया। 1968 में महज 22 साल की उम्र में कांग्रेस का हाथ थामने आने वाले इस नेता ने राजनीति में जो मुकाम हासिल किया वो कम लोगों के नसीब मे होता है।

दरअसल, कमलनाथ संजय गांधी के स्कूली दोस्त थे, दून स्कूल से शुरू हुई दोस्ती, मारुति कार बनाने के सपने के साथ-साथ युवा कांग्रेस की राजनीति तक जा पहुंची थी। कानपुर में जन्मे और पश्चिम बंगाल में कारोबार करने वाले कमलनाथ को यूथ कांग्रेस के दिनों में संजय गांधी ने पश्चिम बंगाल में सिद्धार्थ शंकर रे और प्रिय रंजन दासमुंशी को टक्कर देने के लिए उतारा था। उसके बाद से कमलनाथ ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अब एमपी के मुख्यमंत्री बनकर एक कीर्तिमान बना दिया। अब कांग्रेस के करीबियों की मानें तो आने वाले लोकसभा चुनाव से पहले कमलनाथ भाजपा सांसद वरूण गांधी को कांग्रेस में शामिल कराकर गांधी परिवार को एकजुट करने की कोशिश कर सकते हैं।

कमल को बागडोर और एमपी कांग्रेस दफ्तर में संजय की तस्वीर

2018 में जब कमलनाथ को मध्य प्रदेश कांग्रेस को अध्यक्ष बनाया गया तो एक बात की चर्चा खूब हुई। वो ये कि अध्यक्ष बनते ही कांग्रेस के दफ्तर में एक तस्वीर लगाई गई। इस तस्वीर में चार चेहरे दिखे राजीव गांधी, सोनिया गांधी, संजय गांधी और राहुल गांधी। कमल ने ये फिर साबित कर दिया कि संजय गांधी उनके लिए क्या अहमियत रखते हैं। जो संजय उनके बचपन के दोस्त थे जो उन्हे राजनीति में लेकर आए उस संजय को भला कमल कैसे भूल जाते।

वरूण को भाजपा में भी नहीं मिली खास तरजीह

भाजपा के दिग्गज नेता रहे प्रमोद महाजन ने वरूण गांधी को जो सपना दिखाकर 2004 में बीजेपी में शामिल कराया था वरूण का सपना बिखरता चला गया। प्रमोद ने कहा था कि कांग्रेस की राजनीति अगर वो करें भी तो वो वहां नंबर वन नेता नहीं बन सकते क्यूंकि वहां पहले से ही सोनिया के बाद राहुल को प्रोजेक्ट किया जाएगा। पर वो अगर भाजपा में शामिल हो जाते हैं तो वो पार्टी के तरफ से कभी राहुल गांधी के मुकाबले बड़ा नेता बन सकते हैं। लेकिन 2013 से अमित शाह और मोदी युग की शुरूआत के साथ ही वरूण का पर कतरा जाने लगा। पीएम मोदी ने बिल्कुल खास तवज्जो नहीं दी। 2017 में यूपी के सीएम का भी सपना देखा लेकिन पार्टी ने उन्हे स्टार कैंपेनर की जगह भी नहीं दी। चार साल से वरूण बिल्कुल न के बराबर भाजपा में दिख रहे हैं।

ऐसा हुआ तो यूपी की राजनीति में वरूण को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

हालांकि काग्रेस के कई विश्वस्त ऐसा मानते हैं कि कमलनाथ वरूण और राहुल को एक करने के लिए सबसे अहम कड़ी हैं। लोग ये भी कहते हैं कि यूपी में कांग्रेस बहुत कमजोर है। अगर वरूण को कांग्रेस लाने में सफल रही तो उन्हे यूपी की जिम्मेदारी दी जा सकती है। अगर कांग्रेस इसमें कामयाब हुई तो उसे बड़ी मजबूती मिलने से कोई रोक नहीं सकता।

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