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सूबे से सटे यूपी के 12 जिलों में बीजेपी जीती तो एमपी के नेताओं को मिलेगा इनाम

नयी दिल्ली 16 फरवरी 2022 । वैसे तो मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2023 में होंगे। लेकिन उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से इसका तगड़ा कनेक्शन बन रहा है। बताया जा रहा है कि भाजपा ने एमपी की सीमा से लगे यूपी के 12 जिलों के चुनाव परिणाम को लेकर खास ऐलान किया है। इसके मुताबिक इन 12 सीटों के परिणाम के आधार पर भाजपा मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए टिकट के दावेदार तय होंगे। अंदरूनी मामलों की जानकारी रखने वाले मध्य प्रदेश भाजपा के नेताओं ने यह दावा किया है। स्थानीय लोगों से परिचय, मुद्दों से वाकिफ
गौरतलब है कि यूपी विधानसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की सीमा से लगे 12 जिलों में 200 से ज्यादा भाजपा नेता जमे हुए हैं। इसके अलावा हजारों की संख्या में कार्यकर्ता भी इसमें शामिल हैं। यह सभी नेता मध्य प्रदेश के उन 13 जिलों से जुड़े हैं, जिनकी सीमा उत्तर प्रदेश से लगती है। इनमें से कुछ को कैंपेन कोऑर्डिनेटर और ऑब्जर्वर बनाया गया है। मध्य प्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पराशर ने बताया कि इन नेताओं को यूपी से सटे जिलों में प्रचार के लिए भेजे जाने के पीछे खास वजह है। असल में पड़ोसी जिलों से होने के नाते यह नेता स्थानीय लोगों के साथ-साथ स्थानीय मुद्दों से भी अच्छी तरह वाकिफ हैं।

टिकट के लिए प्रदर्शन पर करेंगे गौर
एक अन्य भाजपा नेता ने बताया कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव और स्थानीय निकायों के लिए टिकट बंटवारे के समय यूपी में पार्टी के प्रदर्शन पर गौर किया जाएगा। उन्होंने कहाकि यह सभी नेता यूपी के चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने को बेताब हैं, ताकि केंद्रीय नेतृत्व की निगाह में रहकर मध्य प्रदेश के चुनाव में टिकट की दावेदारी पेश कर सकें। इस भाजपा नेता ने बताया कि इन 12 जिलों के चुनाव परिणाम मध्य प्रदेश के चुनाव को भी प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहाकि इन जिलों में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के प्रदर्शन का असर सीमा पार के जिलों पर भी असर डालता है। अगर भाजपा यूपी चुनाव में इन जिलों में अच्छा प्रदर्शन करती है तो इससे मध्य प्रदेश के आगामी चुनाव में उसका प्रदर्शन बेहतर होगा। इस परिणाम ने किया प्रभावित
अगर पिछले चुनाव परिणामों की बात करें तो चंबल, बुंदेलखंड और यूपी से लगे मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में सपा और बसपा का असर दिखा था। 2008 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने मध्य प्रदेश के इन क्षेत्रों में 7 सीटों पर जीत दर्ज की थी और करीब 9 परसेंट वोट हासिल किया था। एक साल बाद बसपा ने उत्तर प्रदेश में चुनाव जीतकर सरकार बनाई थी। इसी तरह 2013 में समाजवादी पार्टी ने मध्य प्रदेश में पांच सीटें जीती थीं। एक साल पहले यूपी चुनाव में जीत के बाद उसका यह प्रदर्शन उल्लेखनीय था, खासतौर पर बुंदेलखंड में जो कि यूपी और एमपी में पड़ता है।

दिखता है यूपी का असर
जयंत सिंह चंबल में राजनीतिक विशेषज्ञ हैं। वह बताते हैं चंबल और विंध्य में बसपा के उभार के पीछे इसका यूपी में प्रदर्शन है। 1998 में बसपा ने यहां 11 सीटें जीती थीं, लेकिन उसका वोट बैंक बढ़ा 2008 में जब 2007 में वह यूपी में सरकार बना चुकी थी। चंबल और बुंदेलखंड में बसपा के टिकट के लिए खासी मारा-मारी है। जयंत सिंह कहते हैं कि अगर भाजपा यूपी में हारती है तो मध्य प्रदेश में भी मुश्किल बढ़ेगी। वजह, यहां पहले से ही एंटी-इंकम्बैंसी फैक्टर है। विंध्य के राजनीतिक विशेषज्ञ जयशंकर शुक्ला बताते हैं कि विंध्य में यूपी चुनावों का प्रभाव साफ दिखता है। 2018 में यहां भाजपा ने 30 में से 24 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। उन्होंने कहाकि इसके पीछे विंध्य में कांग्रेस का खराब प्रदर्शन था। उत्तर प्रदेश भाजपा के नेताओं ने आक्रामक चुनाव प्रचार किया था और बसपा और कांग्रेस के वोटर भाजपा की तरफ शिफ्ट हो गए थे। झांसी में नरोत्तम, प्रयागराज में शंकर लाल तिवारी
भाजपा मध्य प्रदेश के नेताओं का इस्तेमाल यूपी चुनाव में जातीय मुद्दों पर टिप्पणी के लिए कर रही है। मंगलवार को मध्य प्रदेश के गृहमंत्री और झांसी से लगे दतिया से विधायक नरोत्तम मिश्रा ने झांसी में ब्राह्मणों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने लोगों से भाजपा को वोट देने की अपील की। जनसभा के बोलते हुए उन्होंने कहाकि केवल भाजपा हमारे बारे में सोचती और किसी पार्टी को हमारी परवाह नहीं। वहीं विंध्य क्षेत्र से पूर्व विधायक शंकर लाल तिवारी प्रयागराज में कैंप कर रहे हैं। उन्होंने कहाकि मैं लोगों से मुलाकात कर रहा हूं। छोटी-छोटी मीटिंग कर रहा हूं और लोगों को राम मंदिर व विश्वनाथ कॉरिडोर से जुड़े ऐतिहासिक बदलावों के बारे में बता रहा हूं।

एमपी के नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी
मध्य प्रदेश के सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया भिंड से विधायक हैं। वह पड़ोसी जिले कन्नौज में हैं। भदौरिया ने कहाकि पार्टी ने मुझे इस विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाया है और मैं यहां पार्टी का प्रचार कर रहा हूं। उन्होंने बताया कि उनके कई समर्थक भी उनका साथ देने पहुंचे हुए हैं। भोपाल के राजनीतिक विशेषज्ञ गिरिजा शंकर कहते हैं इस बार मध्य प्रदेश भाजपा के नेताओं को यूपी में चुनाव प्रचार की बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने कहाकि भाजपा महसूस कर रही है कि यूपी में फतह के लिए बड़ी संख्या में सिपहसालारों की जरूरत है। उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि अभी तक तो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज का भी यूपी चुनाव में इतना इस्तेमाल नहीं होता था।

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