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नायडू की बुक लॉन्च, मोदी बोले- अनुशासन दिखाने वालों को कहा जाता है ‘ऑटोक्रेट’

नई दिल्ली 3 सितम्बर 2018 । उपराष्ट्रपति के तौर पर राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू की पहली पुस्तक का विमोचन प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने किया. इस मौके पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी मौजूद थे. जिन्होंने शायराना अंदाज में नायडू पर बोलते हुए कहा, ‘सितारों के आगे जहां और भी हैं, अभी इश्क के इम्तेहां और भी हैं.’ वहीं, इस दौरान पीएम मोदी ने वेंकैया नायडू के अनुशासन की तारीफ करते हुए देश की मौजूदा स्थिति पर भी टिप्पणी की.

अपने संबोधन में पीएम मोदी वेंकैया नायडू के व्यक्तित्व की प्रशंसा कर रहे थे, साथ ही संगठन में उनके साथ रहे अपने अनुभव साझा कर रहे थे. इसी दौरान उन्होंने बताया कि नायडू जी के जीवन में अनुशासन बेहद अहम रहा है. इसके बाद मोदी ने कहा कि आजकल देश में ऐसे हालात हैं कि अगर कोई अनुशासित हो तो उसे अलोकतांत्रिक कह दिया जाता है या ऑटोक्रेट तक कह दिया जाता है.

वहीं, कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि, इस किताब में वेंकैया नायडू उपराष्ट्रपति कार्यकाल में अपने राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव को शामिल करते हैं, और यह उनके एक साल के कार्यकाल में काफी हद तक परिलक्षित होता है. लेकिन सबसे अच्छा अभी भी आने वाला है. किसी कवि ने कहा है कि ‘सितारों के आगे जहां और भी हैं, अभी इश्क के इम्तेहां और भी हैं.’

वहीं संसद के कामकाज पर चिंता व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति नायडू ने कहा कि वे संसद को जिस तरह कार्य करना चाहिए वैसा नहीं हो पा रहा है जिसकी वजह से वे थोड़े नाखुश हैं. अन्य विषयों पर चीजे आगे बढ़ रही हैं. विश्व बैंक, एशियन डेवेलपमेंट बैंक, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने जिस तरह की रेटिंग दी है वो प्रशंसनीय है. सभी भारतीयों को आर्थिक क्षेत्र में हो रहे कार्यों पर गर्व करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि कृषि को निरंतर सहारा देने की जरूरत है. वित्‍त मंत्री यहां मौजूद हैं, शायद उन्हें यह पसंद नहीं आए जो मैं कह रहा हूं, क्योंकि उन्हें सभी का ध्यान रखना है, लेकिन आने वाले दिनों में कृषि क्षेत्र में विशेष झुकाव की जरूरत है नहीं तो लोग खेती छोड़ देंगे, क्योंकि यह लाभाकारी नहीं है.

बता दें कि उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने पिछले एक साल के कार्यकाल के अनुभवों को चित्र और शब्दों के माध्यम से संकलित कर पुस्तक का रूप दिया है. जिसका नाम है ‘मूविंग आन मूविंग फारवर्ड, ए इयर इन ऑफिस.’ प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि एक बार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वेंकैया नायडू को अपनी सरकार में मंत्री बनाने की पेशकश की. तब नायडू ने उनसे कहा कि उन्हें ग्रामीण विकास का कार्यभार सौंपा जाए. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वे दिल से किसान हैं, और किसानों और कृषि के विकास के लिए उनका समर्पण का भाव है.

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का ‘प्लान 75’

इस साल के अंत में होने वाले मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्‍थान के विधानसभा में तकरीबन 75 सीटों पर कांग्रेस ने विशेष रणनीति तैयार की है. बीजेपी के दिग्गजों को घेरने के लिए कांग्रेस सेवा दल उन सीटों पर डोर टू डोर प्रचार अभियान चलाने जा रहा है जहां पिछले कई चुनावों में कांग्रेस को लगातार हार झेलनी पड़ी है.

घर घर दस्तक देने के इस अभियान के लिए संगठन की तरफ से मध्‍यप्रदेश की ऐसी 30, राजस्थान की 25 और छत्तीसगढ़ में 20 सीटों का चुनाव किया जा रहा है, जहां सेवा दल की विशेष रूप से प्रशिक्षित टीमें कांग्रेस के लिए प्रचार करेंगी.

लंबे समय बाद चुनाव में जमीन पर पूरी सक्रियता से उतरने जा रहा सेवा दल उन सीटों पर प्रचार करेगा जहां पिछले पांच-छह बार से कांग्रेस हार रही है और भाजपा के दिग्गज चुनावी मैदान में हैं.

सेवा दल के मुख्य संगठक लालजीभाई देसाई ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा है कि, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के समय सेवा दल कांग्रेस के लिए सक्रिय रूप से प्रचार करता था, लेकिन पिछले कई वर्षों से यह नहीं हो पा रहा था. अब हम आगामी विधानसभा चुनावों में यह फिर शुरू करने जा रहे हैं.

उन्होंने कहा, सेवा दल करीब 75 सीटों का चुनाव कर रहा है जिस पर पार्टी नेतृत्व से बातचीत हो गई है. पहले इन सीटों के मुद्दों को लेकर सर्वेक्षण कराए जाएंगे और फिर भाजपा के महारथियों के खिलाफ हमारा डोर टू डोर प्रचार आरंभ होगा.

सेवा दल ने मध्य प्रदेश में प्रचार के लिए जिन 30 सीटों का चयन किया है उनमें पूर्व मुख्यमंत्री बाबू लाल गौर की सीट गोविंदपुरा (भोपाल) और ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव की सीट रेहली (सागर) शामिल हैं.

देसाई का कहना है कि, सेवा दल इन सीटों पर प्रचार के लिए ऐसे कार्यकर्ताओं को उतार रहा है जो चुनाव के संदर्भ में विशेष रूप से प्रशिक्षित होंगे. इन सीटों में हर बूथ पर सेवा दल के कार्यकर्ता होंगे जो कांग्रेस के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय रखेंगे.

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस सेवा दल का गठन वर्ष 1923 में हिंदुस्तान सेवा दल के नाम से हुआ था. बाद में इसे कांग्रेस सेवा दल का नाम दे दिया गया. सेवा दल की संरचना आज के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तरह है. जिसके कार्यकर्ता सरकार और पार्टी में विशेष पद की महत्वकांक्षा न रखते हुए निस्वार्थ भाव से कार्य करते हैं. जबकि इसके करीब दो साल बाद 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में संघ की स्थापना की. संघ से दो साल पहले बना सेवादल न सिर्फ उसके मुकाबले काफी पिछड़ गया बल्कि खत्म होने की कगार पर आ गया. जिसे अब कांग्रेस की तरफ से पुनर्जीवित करने की कोशिश की जा रही है.

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