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धर्मसभा में वीएचपी का ऐलान, विवादित जमीन पर नहीं पढ़ने देंगे नमाज

नई दिल्ली 26 नवम्बर 2018 । अयोध्या एक बार फिर सियासी अखाड़ा बन गई है. शिवसेना प्रमुख शनिवार से रामनगरी में डेरा डाले हुए हैं. भव्य राम मंदिर के निर्माण को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के लिए विश्व हिंदू परिषद की अगुवाई में होने वाली धर्मसभा राम की नगरी में शुरू हो चुकी है. धर्म सभा में शामिल होने के लिए शनिवार से ही साधु-संतों और रामभक्तों के आने का सिलसिला जारी है. माहौल को देखते हुए सुरक्षा के तगड़े बंदोबस्त किए गए हैं, ताकि कोई अप्रिय घटना न घटे.

धर्मसभा को संबोधित करते हुए वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय सचिव चम्पत राय ने कहा कि राम मंदिर के निर्माण के लिए हमें पूरी जमीन चाहिए और जमीन बंटवारे का कोई भी फार्मूला मंजूर नहीं होगा. चम्पत राय ने आगे कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को जमीन के मालिकाना हक का केस वापस ले लेना चाहिए. और वीएचपी इस जमीन पर नामज नहीं होने देगी. बता दें कि राम मंदिर पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटा था.

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और बजरंग दल के हजारों कार्यकर्ता देश भर से बसों और ट्रेनों के जरिए धर्म सभा में हिस्सा लेने के लिए अयोध्या के कारसेवकपुरम में बड़े भक्तमाल की बगिया में इकट्ठा हो चुके हैं. इस सभा में आरएसएस के 1 लाख और वीएचपी के 1 लाख कार्यकर्ताओं के हिस्सा लेने का दावा किया जा रहा है. सिर्फ वाराणसी से 10000 बजरंगी (बजरंग दल) आयोध्या पहुंच रहे हैं.

वीएचपी की धर्म सभा से पहले शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सुबह साढ़े 9 बजे के लगभह रामलला के दर्शन किए. दर्शन कर वे सीधे होटल लौट गए. धर्मसभा से पहले अयोध्या में सुरक्षा के चाक चौबंद बढ़ा दिए गए हैं.

वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय महासचिव सुरेंद्र जैन के मुताबिक रविवार को होने वाली धर्म सभा के बाद आरएसएस और वीएचपी के प्रतिनिधि सभी दलों के नेताओं से मुलाकात करना शुरू करेंगे और राम मंदिर पर कानून लाने के लिए समर्थन मांगेंगे. प्रयाग में 31 जनवरी और 1 फरवरी को होने वाली धर्म सभा के समापन के बाद राम मंदिर निर्माण के लिए सभी शहरों के मंदिरों में प्रार्थना और यज्ञ का आयोजन होगा.

बड़ी संख्या में साधु-संतों और लाखों कार्यकर्ताओं के अयोध्या पहुंचने पर उत्तर प्रदेश प्रशासन द्वारा बहुस्तरीय सुरक्षा की व्यवस्था की गई है, जिसमें 70 हजार पुलिस जवान तैनात किए गए हैं.

6 दिसंबर 1992, बाबरी विध्वंस की याद अयोध्या में रहने वाले अल्पसंख्यकों के जेहन में अभी भी ताजा है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कई अल्पसंख्यक परिवारों के अयोध्या छोड़ने और दूसरे शहरों में रिश्तेदारों के यहां शरण लेने की खबरें भी आ रहीं हैं. लिहाजा अल्पसंख्यक समाज इस धर्म सभा से निकलने वाले संदेश और इसके परिणाम को लेकर सशंकित हैं.

इससे पहले शनिवार को शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अयोध्या पहुंचे और साधु-संतों से मुलाकात की. शिवसैनिकों और साधु संतों को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि मुझे राम मंदिर निर्माण का श्रेय नहीं चाहिए. मुझे राम मंदिर निर्माण की तारीख चाहिए. हम सब मिलकर राम मंदिर का निर्माण करेंगे. सब साथ आएंगे, तो राम मंदिर जल्द बनेगा.

रविवार होने वाली इस धर्म सभा में 3 लाख कार्यकर्ताओं के शामिल होने का दावा किया जा रहा हैं. इसके अलावा मंच पर 100-150 साधु-संत विराजमान होंगे और तकरीबन 50-60 लोगों का संबोधन होगा. मंच पर शामिल होने वालों में अहम संतों में जगतगुरु रामानंदाचार्य, स्वामी हंसदेवाचार्य, रामभद्राचार्य, रामेश्वर दास वैष्णव, राम जन्मभूमि न्यास के महंत नृत्य गोपाल दास का नाम शामिल है. बता दें कि इस धर्म सभा में किसी नेता के शामिल होने की अनुमति नहीं है.

अगर हिंदुत्व नहीं तो साथ नहीं- उद्धव ठाकरे

अयोध्या। अयोध्या में रविवार का दिन काफी अहम होने जा रहा है। विश्व हिंदू परिषद यहां धर्म सभा का आयोजन कर रही है, जिसमें करीब दो लाख लोगों के पहुंचने का दावा किया जा रहा है। आतंकी हमले की आशंका को देखते हुए सुरक्षा की दृष्टि से अयोध्या में पीएसी की 48 और आरएएफ की पांच कंपनियां तैनात की गई हैं। इसके साथ ही ड्रोन कैमरे से पूरे इलाके पर नजर रखी जाएगी।

विश्व हिंदू परिषद की धर्मसभा रविवार को बड़ा भक्तमाल की बगिया में सुबह 11 बजे से होगी। धर्मसभा में उप्र के 50 से ज्यादा जिलों से रामभक्तों का पहुंचना शुरू हो गया है। अयोध्या में राम मंदिर में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पत्नी रश्मि और बेटे आदित्य ठाकरे के साथ राम लला के दर्शन किए और वहां से होटल रवाना हो गए।शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा, हिंदुत्व के नाते ही भाजपा के साथ। अगर हिंदुत्व नहीं तो साथ नहीं।

यह सबसे ताकतवर सरकार, मंदिर के लिए अध्यादेश लाए सरकार। चुनाव में राम राम बाद में आराम हिंदुओं की भवनाओं से खिलवाड़ बर्दस्त नहीं रामलला के दर्शन से हुआ व्याकुल..मंदिर नहीं जेल की अनुभूति…करोड़ों के ईष्ट देव जेल समान पहरे में।मंदिर निर्माण को लेकर हो रही देरी पर उद्धव ने तंज कसते हुए शनिवार को कहा- ‘कुंभकर्ण छह माह सोता और छह माह जागता था। मैं आज के कुंभकर्ण को जगाने आया हूं।’ उन्होंने अटल सरकार की भी याद दिलाई। कहा- ‘तब मिली-जुली सरकार थी, तो कठिनाई थी। मगर, आज मजबूत सरकार है। उप्र में मेरे मित्र की सरकार है। अगर आप कानून बनाना चाहते हैं, तो कानून बनाओ, अध्यादेश लाना चाहते, तो अध्यादेश लाओ, लेकिन मंदिर बनाओ।’

उद्धव ठाकरे बाल-बाल बचे

शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे रविवार दोपहर एक हादसे में बाल-बाल बच गए. दरअसल, धर्म सभा में शामिल होने के लिए अयोध्या पहुंचे ठाकरे रविवार को अयोध्या से मुंबई के लिए रवाना होने वाले थे. इस बीच, उनका प्लेन टेकऑफ करने वाला ही था कि रनवे पर सामने से नील गाय आ गई. हालांकि, उनका विमान सुरक्षित रवाना हो गया. लेकिन जिस तरह से नील गाय अचानक रनवे पर रफ्तार पकड़ चुके चार्टर्ड प्लेन के आगे आई, उससे कोई भी बड़ा हादसा हो सकता था.

इससे पहले शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार को रामलला के दर्शन किए और प्रेस को संबोधित किया. उन्होंने राम मंदिर निर्माण को लेकर केंद्र सरकार को खरी-खोटी सुनाई. उद्धव ने कहा कि सरकार कुछ भी करें, कानून बनाए या अध्यादेश लाए, राम मंदिर का निर्माण होना चाहिए. उन्होंने कहा कि अब हिंदू ताकतवर हो गया है, अब वो मार नहीं खाएगा. अगर केंद्र सरकार मंदिर नहीं बना सकती है तो कह दे कि यह भी एक चुनावी जुमला था.

गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे शनिवार को अपने परिवार के साथ अयोध्या पहुंचे थें, जहां उन्होंने सरयू तट पर आरती की. साधू-संतों और शिवसैनिकों को संबोधित करते जहुए उद्धव ने कहा था कि वो राम मंदिर का श्रेय लेने नहीं आए हैं, बल्कि चार से सोई हुई सरकार को कुंभकर्ण की नींद से जगाने आए हैं.

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