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नाथ की मंत्रियों को नसीहत,इस वजह से जा सकता है मंत्री पद

भोपाल  27 दिसंबर 2018 । मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार 15 साल का वनवास काट कर आई है। वह हर कदम फूंक फूंक कर रखना चाहती है। छह महीने बाद लोकसभा चुनाव भी हैं। इन तमाम हालातों को देखते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने मंत्रियों को नसीहत दे दी है। उन्होंने साफ कर दिया है कि अगर किसी भी मंत्री ने कार्यकर्ता और आम जनता को मिलने से रोका तो उनको बाहर करने में देर नहीं लगेगी। सीएम का ये सख्त रवैया मंत्रियों को कई संकेत दे गया।

मुख्यमंत्री नाथ प्रदेशवासियों को इस बात का पूरा भरोसा जताना चाहते हैं कि सरकार उनकी है। जिससे इसका सीधा फायदा लोकसभा चुनाव में मिले। इसलिए वह अपने मंत्रियों को जमीन से जुड़े रहने और गांव गांव जाकर जनता को यह संदेश देने पर फोकस कर रहे हैं कि कांग्रेस की सरकार आ चुकी है। और अब प्रदेश में विकास का एक नया अध्याय लिखा जाएगा। उनकी सख्ती इस ओर इशारा करती है कि वह किसी भी हाल में मंत्रियों का ढीला रवैया और अफसरों की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेंगे। यह बातें सीएम ने पहली अनौपचारिक बैठक में कहीं हैं। इस बैठक से यह भी साफ हो गया कि कांग्रेस में दिग्विजय सिंह का सिक्का अभी भी चल रहा है।

अपनी पहली ही मुलाकात में कमलनाथ ने यह साफ कर दिया है कि वह सख्त सीएम हैं। नाथ के बारे में कहा जाता है कि वह आदमी देखकर उसकी काबिलियत बता देते हैं। यही कारण है उन्होंने अपनी टीम में भी एक से बढ़ कर एक रत्न तलाशे हैं। युवाओं से लेकर अनुभवी और तेज तर्रार विधायकों को अपनी कैबिनेट में शामिल किया है। उन्होंने इस बात के भी संकेत अपने मंत्रियोंं को दे दिए हैं कि उन्हें किसी पॉलिटिकल प्रेशर से प्रभावित नहीं किया जा सकता। वे सिर्फ काम करने वालों को ही तवज्जौ देंगे, उन्हें न किसी नेता की लाइन छोटी करनी और न ही किसी को अहमियत से ज्यादा आंकना है। पहली कैबिनेट में 2019 के आम चुनाव को ध्यान में रखते हुए चुनावी समीकरण तय किए गए हैं। कांग्रेस ने 18 से ज्यादा ज़िलों पर फोकस किया है, जहां से वे लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कर सकें।

कमलनाथ ने दिखाए तेवर : अफसरों से पूछा सरप्लस बिजली है तो फिर कटौती क्यों

भोपाल। मंत्रिमंडल गठन के बाद बुधवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ की अध्यक्षता में पहली कैबिनेट हुई। इसमें ऊर्जा विभाग की समीक्षा की गई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने तेवर दिखाते हुए कई बार अधिकारियों को टोका और निर्देश दिए। उन्होंने पूछा कि जब प्रदेश में सरप्लस बिजली के दावे किए जाते हैं तो फिर कटौती क्यों हो रही है।

अधिकारियों ने जब इससे इनकार करते हुए आंकड़ों का सहारा लिया तो उन्होंने कहा कि इनमें और जमीनी हकीकत में फर्क है। फिर विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि तीन दिन में खराब ट्रांसफार्मर बदले जाएं। ज्यादा बिल आने की समीक्षा हो और बिजली बिल हाफ संबंधी वचन पर क्रियान्वयन शुरू किया जाए।

मंगलवार को मंत्रिमंडल की प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में हुई अनौपचारिक बैठक में बिजली का मुद्दा प्रमुखता से उठा था। वरिष्ठ मंत्री तुलसीराम सिलावट ने इस मुद्दे को उठाया था। इस पर मुख्यमंत्री ने बुधवार को कैबिनेट में ऊर्जा विभाग की बैठक बुलाई।

सूत्रों के मुताबिक, सिलावट ने बैठक में अस्थाई बिजली कनेक्शन को स्थाई करने का विषय रखा। उन्होंने कहा कि चार माह के लिए 16 हजार 865 रुपए अस्थाई कनेक्शन लेने में लगते हैं, लेकिन चना व गेहूं की फसल के लिए दो माह की बिजली की दरकार होती है। यदि स्थाई कनेक्शन दिए जाएं तो किसानों पर कम वित्तीय भार आएगा। पोल से ही कनेक्शन दिया जाए वर्ना इसके भी पैसे लिए जाते हैं।

वहीं, बाला बच्चन ने कहा कि फीडर सेपरेशन का काम फेल हो गया है। गांवों में बहुत से लोग खेत में घर बनाकर रहते हैं। यहां सिर्फ दस घंटे बिजली मिलती है। इन्हें 24 घंटे सिंगल फेज बिजली दी जाए। ट्रांसफार्मर ओवरलोड होने की वजह से खराब हो रहे हैं। इनकी जगह उच्च क्षमता के ट्रांसफार्मर रखे जाएं।

सुखदेव पांसे ने सारणी थर्मल पॉवर प्लांट को उजाड़ देने का मुद्दा उठाते हुए इसे फिर शुरू करने की बात कही। साथ ही बताया कि रात में बिजली प्रदाय की जाती है और दिन में कटौती, इसे बदला जाए। करंट लगने से मृत्यु होने पर चार लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाए। हर्ष यादव ने भी अपनी बात रखी।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनते ही बढ़ी दिग्विजय सिंह की ताकत, कमलनाथ ने दिया ये गिफ्ट!

भोपाल। मध्य प्रदेश में 15 का राजनीतिक वनवास काटने का बाद कांग्रेस एक बार फिर सत्ता में लौट आई है। एमपी में कांग्रेस की सरकार बनते ही पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की ताकत एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही है।

सत्ता में आते ही कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह को एक बार फिर सरकारी बंगला एलॉट कर दिया गया है। कोर्ट के आदेश के बाद दिग्विजय को श्यामल हिल्स स्थित बंगला खाली करना पड़ा था।

आपको बता दें कि इससे पहले हाइकोर्ट ने सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों के बंगले खाली कराने का आदेश दिया था। इस फैसले के बाद सरकार ने भी आदेश जारी किया और पूर्व मुख्यमंत्रियों के सरकारी बंगले का आवंटन निरस्त कर दिया।

इसके कुछ दिन बाद नए आदेश जारी हुए। इसके तहत पूर्व मुख्यमंत्रियों को उनके बंगले फिर से दे दिए गए। लेकिन 2 बार मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस नेता को दरकिनार कर दिया गया।

उस वक्त शिवराज सरकार ने जिन पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगले फिर से अलॉट किये थे उनमें बीजेपी की उमा भारती, बाबूलाल गौर और कैलाश जोशी के नाम तो थे, लेकिन 10 साल तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस के दिग्विजय सिंह का नाम नहीं था। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर पहले भी शिवराज सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाया था।

मंत्री बनते ही भाजपा के इस बड़े प्रोजेक्ट को जल्द खत्म करवाएंगे सज्जन

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इंदौर. तीन साल से मंत्री पद के लिए तरस रहे इंदौर को पहली बार एक साथ तीन मंत्री मिले हैं। इनमें से दो जीतू पटवारी और तुलसी सिलावट तो जिले की ही सीटों को प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और तीसरे सज्जनसिंह वर्मा इंदौर के निवासी होकर देवास जिले की सोनकच्छ से विधायक हैं। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद पत्रिका ने तीनों से ही बात की। शहर के विकास को लेकर उनका एजेंडा और उनकी रणनीति समझने की कोशिश की। तीनों ने ही शहर का तोडफ़ोड़ रहित विकास करने का भरोसा दिलाया है।

सज्जन वर्मा ने कहा कि शहर में परेशानी का कारण अवैध कॉलोनियां और अवैध निर्माण हैं। इन पर सख्ती से रोक लगाने के लिए काम किया जाएगा। अवैध कॉलोनी बसाने वालों पर भी कार्रवाई करेंगे, उन्हें जेल भेजने का काम किया जाएगा।

– इंदौर में सफाई को लेकर अच्छा काम हुआ है, उसे आगे भी जारी रखा जाए, इस पर ध्यान देंगे। लेकिन, इसके कारण जनता को परेशान न होना पड़े, इसका भी ख्याल रखेंगे।

-इंदौर के व्यवस्थित विकास का काम जो पूर्व में शुरू किया गया था, उसे अभी भी जारी रखेंगे। इसमें कोई कौताही नहीं होगी।

-इंदौर में परिवहन के साधनों को बढ़ाने की ओर ध्यान दिया जाएगा। इंदौर के मेट्रो प्रोजेक्ट की समीक्षा कर इस पर तेज गति से काम किया जाएगा। शहर में लोक परिवहन के लिए सिटी बसों से लेकर इ-रिक्शा तक के साधनों पर ध्यान दिया जाएगा। लोक परिवहन के जरिए लोगों को ज्यादा से ज्यादा रोजगार मिल सके, इसके लिए भी हम काम करेंगे।

– स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स के जो काम किए जा रहे हैं, उनकी समीक्षा की जाएगी। ध्यान रखेंगे कि बेवजह की तोडफ़ोड़ न की जाए। यदि कहीं पर आवश्यक तौर पर लोगों के घर तोडऩा पड़ रहे हैं तो पहले उनको बसाने की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए पूरी प्लानिंग की जाएगी, उसके बाद ही कार्रवाई होगी।

– जिस जगह पर भी लोगों की बसाहट की जाए, वहां शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार आदि की व्यवस्था है या नहीं, ये भी देखा जाएगा। यदि व्यवस्था नहीं है तो वहां पर पहले व्यवस्था की जाएगी, उसके बाद ही लोगों को शिफ्ट किया जाएगा।

– इंदौर के सभी हिस्सों में सर्वसुविधा युक्त क्षेत्रों को विकसित किया जाएगा, जिससे नई बसाहट के क्षेत्रों में कोई दिक्कत न आए।

– बीआरटीएस की वजह से शहर की जनता इेहद परेशान है, कांग्रेस के वचन-पत्र में भी हमने इसे हटाने के लिए कहा है। हम इस बारे में जल्द ही निर्णय लेंगे। उस पर कार्रवाई करेंगे।

– शहर में ठेले गुमटी और सडक़ पर कारोबार करने वालों के लिए व्यवस्थित मार्केट बनाने का काम किया जाएगा। हम व्यवस्था करेंगे कि शहरवासियों को परेशानी न हो और लोगों का रोजगार भी न छीना जाए। संतुलन बनाने की कोशिश की जाएगी।

– शहर के विकास के लिए आवश्यक टीडीआर पॉलिसी के नियमों को बनाकर उन्हें लागू करेंगे। मेट्रो प्रोजेक्ट में प्रभावितों के लिए जल्द टीओडी पॉलिसी बनाकर उसे भी लागू करेंगे।

– शहर में हर व्यक्ति सुरक्षित महसूस करे, इसके लिए काम किया जाएगा। शहर में क्राइम रेट को कम करने के लिए हम अच्छे अफसरों को तैनात करने का काम करेंगे।

– महिला सुरक्षा हमारी प्राथमिकता में होगी। पिछले कुछ समय में इस मामले में इंदौर की साख को बहुत धक्का लगा है।

– शहर के विकास के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य, शिक्षा सहित मूलभूत जरूरतें पूरी हों, इसके लिए भी काम किया जाएगा।

– शहर को दूसरे जिलों से और गांवों से जोडऩे वाले मार्गों का उन्नयन किया जाएगा।

मप्र में कांग्रेस सरकार बनवाने वाले ‘चाणक्य’ का अब हर फैसले में रहेगा दखल
कहावत है कि एक फोटो एक हजार शब्दों के सामान होता है. राजनीति में तस्वीरों की बहुत बड़ी भूमिका होती है. तस्वीरें वह सच सामने लाती हैं जो लाख बार लिखे गए शब्दों से भी उजागर नहीं होता. सोशल मीडिया पर एक ऐसी ही तस्वरी वायरल हो रही है. इसमें पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह नव गठित कैबिनेट मंत्रियों को ‘ज्ञान’ देते नजर आ रहे हैं. जबकि उनके साथ में ही वर्तमान मुख्यमंत्री कमलनाथ भी बैठे हैं. चुनाव से पहले दिग्विजय सिंह ने खुद को कांग्रेस में साइडलाइन होने जैसा संदेश देकर लंबी छलांग लगाई. असल में वह कांग्रेस के उन योद्धाओं में शुमार हैं जो कभी सियासी रण नहीं छोड़ते न ही उनकी ‘चाल’ कभी कमजोर होती है. वह पर्दे के पीछे भी ‘चाणक्य’ की भूमिका अदा कर रहे थे.

दरअसल, मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शपथ समारोह के बाद मंत्री मंडल की अनौपचारिक बैठक कांग्रेस कार्यालय में बुलाई थी. इस बैठक में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह भी शामिल हुए. बैठक की एक तस्वीर सामने आई. इसमें दिग्विजय सिंह मंत्रियों को कामकाज की टिप्स देते दिखाई दे रहे हैं. लेकिन उनकी मुद्रा से साफ झलक रहा है कि प्रदेश की भले कमलनाथ के हाथ में हों लेकिन उनका दबदबा आज भी कायम है. सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट चयन में भी उनका बड़ा किरदार रहा है. बताया जा रहा है कि प्रमुख सचिव एसआर मोहंती और डीजीपी के लिए वीके सिंह का नाम भी उन्होंने ही आगे किया है.

सूत्रों का कहना है कि दिग्विजय सिंह मंत्रियों के कामकाज पर पूरी निगाहें बनाए रखेंगे. उन्होंने बैठक में भी मंत्रियों को कहा है कि कांग्रेस के वचन पत्र को पूरा करने के लिए जुट जाएं. पहली प्रथमिकता में कांग्रेस के वचन को शामिल रखें. सीएम कमलनाथ के बाद अगर किसी के सबसे अधिक समर्थक हैं तो वह हैं दिग्विजय सिंह. कैबिनट में भी उनके विधायकों की संख्या काफी है. अब वह प्रशासनिक और आईपीएस अफसरोंं की पोस्टिंग का नया तानाबान बुन रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि सिंह प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के तबादलों में अहम भूमिका निभाएंगे.

दरअसल, नाथ को केंद्र सरकार के कामकाज का बेहतर अनुभव है. लेकिन प्रदेश की हर नब्ज से सिंह वाकिफ हैं. वह प्रशासनिक अधिकारियों में भी जबरदस्त पकड़ रखते हैं. वह दस साल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं. उन्हें प्रदेश को चलाने और हर अधिकारी के लूपहोल का ज्ञान है. सूत्रों के मुताबिक सिंह अब प्रदेश में रहकर सरकार में अहम दखल रखेंगे. वह सरकार चलाने में अहम भूमिका निभाएंगे. लोकसभा चुनाव के लिए भी वह बड़ी भूमिका अदा करेंगे. इसलिए उन्होंने अरूण यादव और जयवर्धन सिंह को डाटा जमा करने के लिए कहा है. इस तरह पूरी सरकार का रिमोट कंट्रोल सिंह के ही हाथों में रहेगा.

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