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लोकसभा चुनाव से पहले गिरता NDA का ग्राफ,प्रियंका के आने से UPA ने पकड़ी रेल

नई दिल्ली 26 जनवरी 2019 । साल 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर पर सवार होकर बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन एनडीए ने प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई थी. वहीं, आगामी लोकसभा चुनाव के लिए एनडीए गठबंधन एक बार फिर अपना सरकार बनाने का दावा कर रहा है, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व में दूसरा बड़ा धड़ा यूपीए भी पूरे दम-खम के साथ मैदान में उतरने की तैयारी में है. दोनों बड़े धड़ों के अलावा अन्य दल भी हैं इस गठबंधन से अलग राह पर चल रहे हैं.

पिछले 5 साल के दौरान इंडिया टुडे की तरफ से हर 6 महीने Mood Of The Nation (MOTN) यानी देश का मिजाज जानने की कोशिश की गई. इन 5 सालों के वोट शेयर ट्रैकर पर नजर डाले तो पता चलता है कि पिछले डेढ़ साल में केंद्र में सत्ताधारी एनडीए का ग्राफ लगातार गिरा है, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए ने रफ्तार पकड़ी है. ऐसे में जब देश आम चुनाव के मुहाने पर खड़ा है तो जनवरी 2019 का अनुमानित वोट शेयर ट्रैकर खंडित जनादेश की तरफ इशारा कर रहा है.

5 साल बाद कहां खड़ा है एनडीए?

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में जीत का परचम लहराने वाले एनडीए का वोट शेयर 38 फीसदी था, जबकि इसकी तुलना में यूपीए को 23 फीसदी वोट मिले थे. वहीं, अन्य को 39 फीसदी वोट मिले थे. चूंकि इन चुनावों में तीसरे मोर्चे पर कोई गठबंधन नहीं था लिहाजा एनडीए के विपक्ष में पड़ने वाले अन्य वोटों का बिखराव हुआ.

मई 2014 से जनवरी 2019 के बीच किए गए 7 MOTN सर्वे में केंद्र में सत्ताधारी गठबंधन एनडीए का ग्राफ मोदी सरकार की लोकप्रियता के लिहाज से बढ़ता-घटता रहा. जहां फरवरी 2016 में एनडीए का अनुमानित वोट शेयर पहले की तुलना में 1 फीसदी कम यानी 37 फीसदी था तो वहीं इसके ठीक 6 महीने बाद यानी अगस्त 2016 में यह 40 फीसदी तक पहुंच गया.

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जनवरी 2017 में किए गए सर्वे के मुताबिक एनडीए के अनुमानित वोट शेयर का आंकड़ा 42 फीसदी के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया. यहां बताना जरूरी है कि इस दौरान केंद्र की मोदी सरकार द्वारा उठाए गए बड़े कदम नोटबंदी और सर्जिकल स्ट्राइक से सत्ताधारी एनडीए गठबंधन की लोकप्रियता अपने चरम पर थी.

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टैक्स सुधार की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए जून के महीने में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू किया. लिहाजा इसके ठीक बाद अगस्त 2017 में किए गए सर्वे में एनडीए के अनुमानित वोट शेयर में कोई गिरावट नहीं आई.

हालांकि साल 2017 में मिली बढ़त जनवरी 2018 में कुछ कम जरूर हुई. इस दौरान एनडीए का वोट शेयर 40 फीसदी आंका गया. जबकि अगस्त 2018 एनडीए के वोट शेयर का आंकड़ा 36 फीसदी पर पहुंच गया. बता दें कि इस दौरान केंद्र में एनडीए की एक अहम सहयोगी तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) एनडीए छोड़ चुकी थी और देश में कृषि संकट, बेरोजगारी जैसे मुद्दों को विपक्ष ने हवा देनी शुरू कर दी.

इसके बाद साल दिसंबर 2018 में 5 राज्यों में विधानसभा के चुनाव में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा जिसका प्रभाव उसके अनुमानित वोट शेयर पर भी पड़ा. चुनावी साल यानी जनवरी 2019 में किए गए सर्वे के मुताबिक एनडीए को 35 फीसदी वोट मिलने के अनुमान हैं.

अगला पीएम कौन? सर्वे में तेजी से मोदी के करीब पहुंच रहे हैं राहुल गांधी

आगामी लोकसभा चुनाव से पहले सभी पार्टियां अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में लगी हैं. बीजेपी जहां एक बार फिर अपने सबसे लोकप्रिय चेहरे नरेंद्र मोदी के सहारे सत्ता पर दोबारा काबिज होने का सपना देख रही है तो कांग्रेस अपने अध्यक्ष राहुल गांधी को देश का प्रधानमंत्री बनते देखना चाहती है. वहीं क्षेत्रीय पार्टियां एकसाथ आकर अपनी ताकत को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही हैं. ऐसे में इन सभी उम्मीदों और कोशिशों के बीच इंडिया टुडे और कर्वी इनसाइट्स ने ये जानने की कोशिश की आखिर देश की जनता किसको पीएम बनते देखना चाहती है. कौन है उसकी पसंद. इस सर्वे के जरिए जो नतीजे सामने आ रहे हैं वो कांग्रेस के लिए बेहद अच्छे हैं और बीजेपी के लिए चिंताजनक.

हाल ही में तीन राज्यों में मिली जीत के बाद से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पीएम पर काफी हमलावर दिखे हैं और इस सर्वे में जो नतीजे आ रहे हैं उसमें साफ देखा जा सकता है कि राहुल गांधी की लोकप्रियता में पहले के मुकाबले इजाफा हो रहा है. वहीं पीएम मोदी का ग्राफ नीचे गिर रहा है.

पीएम पद के लिए राहुल गांधी मोदी को दे रहे हैं कड़ी टक्कर

MOTN जनवरी 2019 के सर्वे और जनवरी 2017 के सर्वे को देखा जाए तो राहुल गांधी की लोकप्रियता में इजाफा हुआ है. वह पीएम पद के लिए मोदी को कड़ी टक्कर देते दिख रहे हैं. जनवरी 2017 पीएम पद की पसंद को लेकर जो फासला 55 फीसदी का था वा घटकर अब 12 फीसदी रह गया है.

मूड ऑफ दे नेशन के अगस्त 2018 के सर्वे में उत्तर भारत में पीएम मोदी की लोकप्रियता जो 56 फीसदी थी वह जनवरी 2019 के सर्वे में गिरकर 54 फीसदी पर आ गई है. वहीं राहुल गांधी की लोकप्रियता 19 फीसदी से बढ़कर 26 फीसदी हो गई है. पूर्वी भारत की बात करें तो अगस्त 2018 में पीएम मोदी की लोकप्रियता जो 51 फीसदी थी उसमें 1 फीसदी की बढ़ोचरी हुई है और वह 52 फीसदी हो गई है.

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष की लोकप्रियता पीएम मोदी के मुकाबले ज्यादा हुई है लेकिन वह अब भी उनसे पीछे हैं. अगस्त 2018 में राहुल गांधी की लोकप्रियता इस क्षेत्र में 20 फीसदी थी, उसमें अब 8 फीसदी का इजाफा हुआ है और वह 28 फीसदी हो गई है.

दक्षिण भारत में अगस्त 2018 में पीएम मोदी की लोकप्रियता जो 31 फीसदी थी वो घटकर 25 फीसदी रह गई है. वहीं राहुल गांधी की लोकप्रियता में 8 फीसदी का इजाफा हुआ है. अगस्त 2018 में राहुल गांधी की लोकप्रियता 46 फीसदी थी जो अब 54 फीसदी हो गई है.

अब हम बात करते हैं पश्चिमी भारत की. इस क्षेत्र के जो नतीजे हैं उसको देखा जाए तो यहां भी पीएम मोदी की लोकप्रियता कम हुई और राहुल गांधी की लोकप्रियता में इजाफा हुआ है, हालांकि वह अब भी पीएम मोदी से पीछे हैं.

अगस्त 2018 में पीएम मोदी की लोकप्रियता इस क्षेत्र में 55 फीसदी थी. जनवरी 2019 के सर्वे में पीएम मोदी की लोकप्रियता में 6 फीसदी की कमी आई है. उनकी लोकप्रियता अब 49 फीसदी रह गई है. वहीं राहुल गांधी की लोकप्रियता जो अगस्त 2018 के सर्वे में 24 फीसदी थी वह बढ़कर 28 फीसदी हो गई है.

शहरी इलाके में भी पीएम मोदी की लोकप्रियता में इजाफा हुआ तो वहीं ग्रामीण क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता में कमी आई है. वहीं दोनों ही इलाकों में राहुल गांधी की लोकप्रियता में इजाफा देखने को मिल रहा है.

शहरी क्षेत्र में पीएम मोदी की लोकप्रियता अगस्त 2018 के सर्वे में जो 47 फीसदी थी उसमें 1 फीसदी का इजाफा हुआ है और वह 48 फीसदी हो गई है. वहीं कांग्रेस अध्यक्ष की लोकप्रियता शहरी इलाके में अगस्त 2018 के सर्वे में जो 24 फीसदी थी वो बढ़कर 32 फीसदी हो गई है. ग्रामीण इलाके में भी राहुल गांधी की लोकप्रियता में इजाफा हुआ है. अगस्त 2018 में उनकी लोकप्रियता जो 28 फीसदी थी वह बढ़कर 34 फीसदी हो गई है.

इसके बाद महिलाओं और पुरूषों के बीच यह जानने की कोशिश की गई किसकी पंसद कौन है. पुरूषों में पीएम मोदी की लोकप्रियता पहले के मुकाबले कम हुई है. तो वहीं राहुल गांधी की लोकप्रियता में इजाफा हुआ. वहीं महिलाओं में भी पीएम मोदी की लोकप्रियता में कमी और राहुल गांधी की लोकप्रियता में इजाफा हुआ है, लेकिन कुल मिलाकर पीएम मोदी अब भी राहुल गांधी पर बढ़त बनाए हुए हैं.

अगस्त 2018 के सर्वे में जहां 50 फीसदी पुरूष पीएम मोदी को पसंद करते थे तो वहीं जनवरी 2019 के सर्वे में 45 फीसदी पुरूष पीएम मोदी को पसंद करते हैं. राहुल गांधी की लोकप्रियता जो अगस्त 2018 में 27 फीसदी हुआ करती थी वह जनवरी 2019 में बढ़कर 35 फीसदी हो गई.

अगस्त 2018 के सर्वे में जहां 48 फीसदी महिलाएं पीएम को पसंद करती थीं तो वहीं जनवरी 2019 में 46 फीसदी महिलाएं अब भी पीएम मोदी को पसंद करती हैं. राहुल गांधी की लोकप्रियता में यहां भी इजाफा देखने को मिल रहा है. अगस्त 2018 में जहां 27 फीसदी महिलाएं उनको पसंद करती थीं तो वहीं जनवरी 2019 के सर्वे में 32 फीसदी महिलाएं उनको पसंद करती हैं.

जाति और धर्म के हिसाब से

जाति और धर्म के हिसाब से अगर देखा जाए तो पीएम मोदी यहां भी बढ़त बनाए हुए हैं, लेकिन बीजेपी के लिए चिंता की बात यह है कि मुस्लिमों में पीएम मोदी की लोकप्रियता राहुल गांधी के मुकाबले बेहद कम है.

सामान्य वर्ग के 48 फीसदी लोग जहां पीएम मोदी को पसंद करते हैं तो वहीं 29 फीसदी लोग राहुल गांधी को पसंद करते हैं. सबसे रोमांचक आंकड़ा तो एससी और एसटी वर्ग में देखने को मिल रहा है. यहां पर मुकाबला बराबर का है. दोनों ही नेताओं को 39-39 फीसदी लोग इस वर्ग के पसंद करते हैं. ओबीसी वर्ग के 34 फीसदी लोग कांग्रेस अध्यक्ष को पंसद करते हैं तो वहीं 48 फीसदी लोग पीएम मोदी को पसंद करते हैं.

धर्म के हिसाब से देखा जाए तो हिंदुओं में पीएम मोदी की लोकप्रियता आज भी कायम है. वहीं राहुल गांधी को इसमें और मेहनत करने की जरूरत है. देश के 50 फीसदी हिंदू पीएम मोदी को पसंद करते हैं तो वहीं कांग्रेस अध्यक्ष को 29 फीसदी हिंदू पसंद करते हैं.

मुस्लिमों में पीएम मोदी की लोकप्रियता बेहद कम है जो 14 फीसदी है, वहीं राहुल गांधी की लोकप्रियता 63 फीसदी है. वहीं अन्य यानि कि बाकी के धर्म के 26 फीसदी पीएम मोदी को पसंद करते हैं तो 49 फीसदी राहुल गांधी को पसंद करते हैं.

प्रधानमंत्री पद की पसंद
देश का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा. इस सवाल का जवाब तो चुनाव के बाद ही मिलेगा, लेकिन सर्वे से जो आंकड़े सामने आ रहे हैं वो जरूर बीजेपी की चिंता बढ़ाने वाले हैं और कांग्रेस का हौसला बढ़ाने वाले. देश के 46 फीसदी लोग आज भी मोदी को प्रधानमंत्री बनते देखना चाहते हैं तो 34 फीसदी लोगों ने अपनी पसंद राहुल गांधी को बताया. कोलकाता के बिग्रेड मैदान पर मोदी के खिलाफ विपक्षी पार्टी के नेताओं को एक कर रैली करने वाली ममता बनर्जी को 3 फीसदी लोग पीएम पद की पसंद मानते हैं. वहीं हाल ही कांग्रेस की महासचिव बनाई गईं प्रियंका गांधी को 2 फीसदी लोग पीएम पद की पसंद मानते हैं.

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