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रेलवे की नई पहल, अब अंगुलियों से मिलेगी जनरल बोगी में सीट

नई दिल्ली 30 जुलाई 2019 । रेलमंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि अब जनरल डिब्बों में सीट के लिए नई बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू हो गई है। अब पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर सीटें प्रदान की जाएगी। यात्रियों को इससे फायदा मिलेगा। मुंबई से लखनऊ के बीच चलने वाले पुष्पक एक्सप्रेस में इसकी शुरुआत की गई है।
दरअसल, जनरल कोच में होने वाली भारी भीड़ के कारण अक्सर यात्रियों के बीच लड़ाई-झगड़े और मार-पीट के मामले सामने आते हैं। इस व्यवस्था से यात्रियों को ऐसी अमानवीय स्थितियों से छुटकारा मिलेगा और लोग सम्मानजनक यात्रा कर सकेंगे। पहले पुष्पक एक्सप्रेस में बायोमेट्रिक की सफलता का आंकलन किया जाएगा, जिसके बाद जल्द ही ये व्यवस्था बाकी सभी रेलगाड़ियों के जनरल डिब्बों में भी लगाई जाएगी।
जनरल डिब्बों के लिए टिकट खरीदने वाले यात्रियों को बायोमेट्रिक मशीन से अपनी उंगलियों के निशान स्कैन करवाने होंगे, जिसके बाद एक टोकन जनरेट होगा। जनरेट हुए टोकन की कुल संख्या एक विशेष जनरल डिब्बों में उपलब्ध सीटों की संख्या के अनुरूप होगी। प्लेटफॉर्म पर रेक लगाने से कुछ मिनट पहले यात्रियों को टोकन पर अपने सीरियल नंबर के अनुसार एक कतार में इकट्ठा होना होगा। जनरल डिब्बों के प्रवेश बिंदु पर आरपीएफ स्टाफ टोकन क्रमांक की पुष्टि करेगा और यात्रियों को क्रमबद्ध तरीके से कोच में चढ़ने की अनुमति देगा।
इस व्यवस्था में देर से आए यात्रियों को भी बैठने दिया जाएगा। लेकिन उन्हें बैठने के लिए सीट नहीं मिल पाएगी। उन्हें खड़े रहकर या जमीन पर बैठकर यात्रा करनी पड़ेगी। जनरल डिब्बों में होने वाली भीड़ को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था की शुरुआत की गई है।
बायोमेट्रिक के जरिए ट्रेन यात्रा को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। सवाल यात्रियों की सुरक्षा के साथ उनकी निजता का भी है। लोगों को संदेह है कि जैसे ही ट्रेन में उनका दाखिला बायोमेट्रिक के जरिए होगा, उनका सारा निजी डेटा सरकार के पास पहुंच जाएगा। लोगों का सवाल है कि क्या उनके डेटा का गलत इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है?

जनरल डिब्बे में महिलाओं के लिए सीटें रिजर्व करने के लिए भारतीय रेलवे ने उठाया ये कदम

अब ज्यादातर सरकारी यातायात के साधनों में महिलाओं के लिए सीटें रिजर्व होती हैं. लेकिन जब जनरल डिब्बे में महिलाओं के यात्रा करने की बात आती है तो तो वे बेहद कष्‍टकारी लगती है. क्‍योंकि महिलाओं को बच्‍चों के साथ जनरल डिब्‍बे की भिड़भाड़ में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.

अगर महिला अकेले या बच्चों के साथ यात्रा कर रही हो तो जनरल डिब्बे में सुविधाजनक यात्रा उसके लिए आसान नहीं होती. लेकिन पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने जनरल डिब्बे में रेलयात्रा को महिला यात्रियों के लिए आसान और सुविधाजनक बनाने का फैसला किया है.

महिला यात्रियों को जनरल डिब्बों में यात्रा के दौरान आसानी और सुरक्षा देने के लिए पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने ट्रेन के जनरल डिब्बों को गुलाबी रंग से रंगना शुरू कर दिया है. यह रंग यात्रियों को महिलाओं के लिए रिजर्व सीटें पहचानने में मदद करेगा ताकि वे रिजर्व सीटों को न घेरें और भीड़भाड़ के वक्त भी महिलाओं को सीटें मिल सकें.

कई ट्रेनों में डिब्बों को गुलाबी रंग में रंगा भी जा चुका है

जनरल डिब्बों में अगर पूरे डिब्बे को महिलाओं के लिए घोषित किया गया है तो उसे गुलाबी रंग से रंग दिया जा रहा है. अगर डिब्बे के केवल एक हिस्से को महिलाओं के लिए रिजर्व किया गया है तो केवल उतने हिस्से को गुलाबी रंग से रंग दिया जा रहा है. न्यू बोंगाईगांव से गुवाहाटी जाने वाली कई ट्रेनों को ऐसे रंगा गया है. जबकि ऐसे ही रंगिया और मुरकॉन्गसेलेक के बीच चलने वाली ट्रेन को भी रंगा गया है.

कुछ रेलगाड़ियों में, ट्रेन के कोच के अनुसार, एक ही कोच में महिलाओं और दिव्यांग लोगों के लिए डिब्बे के हिस्से रिजर्व कर दिए गए हैं.

व्यवस्था को स्थापित कराने के लिए जनरल डिब्बे में होगी RPF और TC की तैनाती

NRF मानता है कि यह नया कदम महिला यात्रियों की सुरक्षा और आराम के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है. यह और ज्यादा महिलाओं को ट्रेन को यात्रा के माध्यम के तौर पर चुनने के लिए प्रेरित करेगा. ये महिलाएं इन डिब्बों में लंबी यात्राएं भी कर सकेंगीं. रेलवे अधिकारी इन कोच में अगले कुछ दिनों के लिए RPF और टिकट चेक करने वाले अधिकारियों की नियुक्ति भी करने वाले हैं ताकि इस नई व्यवस्था को पूरी तरह से स्थापित किया जा सके.

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