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नितिन गडकरी बोले- पेट्रोल 55, तो डीजल की कीमत हो जाएगी 50 रुपये…

नई दिल्ली 12 सितम्बर 2018 । केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि छत्तीसगढ़ पूरे देश के लिए जैव ईंधन का बड़ा केन्द्र बन सकता है. केन्द्रीय मंत्री गडकरी और मुख्यमंत्री रमन सिंह ने सोमवार को निर्माण कार्यों के लिए राज्य को 4,251 करोड़ की सौगात दी. गडकरी ने सोमवार को दुर्ग जिले के चरौदा नगर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि छत्तीसगढ़ पूरे देश के लिए जैव ईंधन का बड़ा केन्द्र बन सकता है.

गडकरी ने बताया, “नागपुर में लगभग एक हजार ट्रैक्टर जैव ईंधन से चल रहे हैं. आज आवश्यकता जैव ईंधन के क्षेत्र में रिसर्च करने की है.” उन्होंने कहा कि हमने अभी पेट्रोल में एथनॉल मिलाकर वाहन चलाने का सफल प्रयोग किया है, इसे और अधिक बढ़ावा दिया जाएगा.

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में कृषि क्षेत्र में वृद्धि दर बहुत अच्छी है. यहां चावल, गेहूं, दालें और गन्ने का उत्पादन काफी मात्रा में होता है लेकिन राज्य जैव ईंधन के रूप में भी आगे बढ़ सकता है. छत्तीसगढ़ में उत्पादित जेट्रोफा जैव ईंधन का इस्तेमाल पहली जैव ईंधन से उड़ने वाले विमान में किया गया. यह विमान देहरादून से दिल्ली पहुंचा.

गडकरी ने कहा कि हम आठ लाख करोड़ रुपये के पेट्रोल और डीज़ल आयात कर रहे हैं और इसकी कीमतें बढ़ रही हैं. रुपया डॉलर के मुकाबले गिर रहा है. मैं पिछले 15 सालों से कह रहा हूं कि देश के किसान, आदिवासी और वनवासी एथनॉल, मेथेनॉल, जैव ईंधन का उत्पादन कर सकते हैं और विमान उड़ा सकते हैं.

उन्होंने कहा, “हमने फैसला किया है कि एथेनॉल, बायो डीज़ल, मेथेनॉल और बायो फ्यूल से चलने वाले ऑटो रिक्शा, बस, और टैक्सी के लिए परमिट की अनिवार्यता खत्म कर देंगे.”

पेट्रोल और डीज़ल की बढ़ती कीमतों के बारे में ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश में पेट्रोलियम मंत्रालय पांच एथनॉल के प्लांट स्थापित कर रहा है, जहां एथनॉल का उत्पादन धान और गेहूं की भूसी, बांस और गन्ने से किया जाएगा. इससे पेट्रोल 55 रुपये और डीज़ल 50 रुपये में उपलब्ध होगा. केन्द्रीय मंत्री ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि केन्द्र सरकार ने पिछले चार बरसों में छत्तीसगढ़ सरकार को सड़क निर्माण के लिए लगभग 35 हजार करोड़ रूपए दिए हैं और अब सड़कों के लिए और 40 हज़ार करोड़ रूपए दिए जाएंगे. उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ सहित तीन नए राज्य बनाए थे, इनमें छत्तीसगढ़ तेजी से विकास कर रहा है.

इस दौरान मुख्यमंत्री रमन सिंह और केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने चरौदा नगर में 4,251 करोड़ रूपए के आठ निर्माण कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया. उन्होंने मनरेगा मजदूर टिफिन योजना के अंतर्गत 25 हजार श्रमिकों के लिए को टिफिन वितरण का भी शुभारंभ किया. इन्हें मिलाकर विभिन्न योजनाओं के 25 हजार 824 लाभार्थियों के लिए 72.99 लाख रूपए का सामान और सहायता राशि को बांटने की शुरुआत हुई.

समारोह में मुख्यमंत्री के कहने पर गडकरी ने 2,218 करोड़ की लागत से 442 किलोमीटर की पांच सड़कों तथा चार बाईपास मार्ग को बेहतर बनाने और पांच नए बाईपास के निर्माण की स्वीकृति की घोषणा की.

चार साल में पेट्रोलियम से 18 लाख करोड़ कमा चुकी सरकारों को छूट देने में क्या दिक्कत..

पश्चिम बंगाल सरकार ने पेट्रोल-डीज़ल की कीमत एक रुपये कम कर दी. इसके पहले आंध्र और राजस्थान ड्यूटी घटा चुके हैं. सवाल है कि अन्य सरकारें यह कदम उठाने से क्यों कतरा रही हैं? जबकि पिछले सात सालों में पेट्रोलियम से केंद्र सरकार की कमाई 250 फीसदी और राज्य सरकारों की कमाई 76 फीसदी बढ़ी है.

क्या पेट्रोलियम उत्पादों से इतनी कमाई नहीं है कि वे कुछ कटौती कर सकें? पेट्रोल-डीज़ल के दाम को लेकर कांग्रेस-बीजेपी अलग-अलग दावे कर रही हैं. लेकिन सवाल है, पेट्रोलियम पदार्थों से किन सरकारों ने कितनी कमाई की.

पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि भारत सरकार और राज्य सरकारों की कुल कमाई 2014-15 में 3,32,619 करोड़ रुपये थी जो 2015-16 में 4,13,824 करोड़ रुपये हो गई. यह कमाई 2016-17 में 5,24,304 करोड़ रुपये और 2017-18 में बढ़कर 5,53,013 करोड़ रुपये हो गई. यानी इन चार सालों में कुल कमाई 18,23,760 करोड़ रुपये हुई.

लेकिन इस कमाई में केंद्र और राज्यों का अलग-अलग हिस्सा क्या है? मसलन सिर्फ पेट्रोल से हुई कमाई देखें- पेट्रोल से भारत सरकार की कमाई 2011-12 में 80,100 करोड़ थी जो 2014-15 में 122200 करोड़ हो गई. फिर 2017-18 में बढ़कर 280000 करोड़ हो गई. यानी सात साल में 250% की बढ़ोतरी. इस दौरान राज्य सरकारों की पेट्रोल से कमाई 2011-12 में 105400 करोड़ थी, जो 2014-15 में 141000 करोड़ हुई और 2017-18 में बढ़कर 186000 करोड़ हो गई. यानी सात साल में 76% की बढ़ोतरी.

पूर्व पेट्रोलियम सेक्रेटरी एससी त्रिपाठी ने एनडीटीवी से कहा, “शार्ट टर्म में तेल कंपनियां अपना प्रॉफिट मार्जिन कम करें. डीलरों का मार्जिन घटाया जाए, सरकार ड्यूटी कम करें. इन तीनों में से किसी भी एक पहल से बढ़ती कीमतों से राहत मिल सकती है.

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