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नागरिकता संशोधन कानून और NRC ही नहीं NPR की भी है तैयारी

नई दिल्ली 21 दिसंबर 2019 । नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (NRC) पर देशभर में मचे घमासान के बीच मोदी सरकार नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर(NPR) की ओर कदम बढ़ा रही है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसके लिए कैबिनेट से 3,941 करोड़ रुपये की मांग भी की है. एनपीआर का उद्देश्य देश के सामान्य निवासियों का व्यापक पहचान डेटाबेस बनाना है. इस डेटा में जनसांख्यिंकी के साथ बायोमेट्रिक जानकारी भी होगी.

हालांकि, CAA और NRC की तरह गैर-बीजेपी शासित राज्य इसका भी विरोध कर रहे हैं और इसमें सबसे आगे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं. CAA और NRC को लेकर मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने वालीं ममता बनर्जी ने तो बंगाल में एनपीआर पर जारी काम को भी रोक दिया है.

इसके अलावा केरल की लेफ्ट सरकार ने भी एनपीआर से संबंधित सभी कार्यवाही रोकने का आदेश दिया है. मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि सरकार ने एनपीआर को स्थगित रखने का फैसला किया है क्योंकि आशंका है कि इसके जरिए एनआरसी लागू की जाएगी.क्यों विरोध कर रहीं ममता बनर्जी

ममता बनर्जी पहले यह लगातार कहती रही हैं कि वो अपने राज्य में एनआरसी और नागरिकता संशोधन क़ानून लागू नहीं होने देंगी, लेकिन उन्होंने एनपीआर को लेकर भी अपना रुख साफ कर दिया है. दरअसल, घुसपैठ की समस्या असम से ज्यादा पश्चिम बंगाल में है. 1971 में बांग्लादेश के गठन के साथ ही वहां से बड़ी संख्या में लोग यहां आए.इन लोगों में एनआरसी को लेकर तो पहले से ही डर था और नागरिकता संशोधन कानून ने उनके खौफ को और बढ़ा दिया है. वहीं एनपीआर को लेकर उनके मन में पहले से डर है. नागरिकता संशोधन कानून लागू होने से जो डर मुसलमानों को है वही डर यहां के लोगों को भी है. उन्हें खौफ है कि उन्हें यहां से निकाल दिया जाएगा. इन्हीं लोगों के समर्थन में ममता बनर्जी खड़ी हैं और यही कारण है कि ममता बनर्जी ने एनपीआर का काम रोकवा दिया है.

एक अप्रैल 2020 से सर्वे

आजादी के बाद 1951 में पहली जनगणना करवाई गई. प्रत्येक 10 साल में होने वाली जनगणना अब तक 7 बार करवाई जा चुकी है. अभी 2011 में की गई जनगणना के आंकड़े उपलब्ध हैं और 2021 की जनगणना पर काम जारी है. इसे तैयार करने में करीब तीन साल का समय लगता है. इसकी प्रक्रिया तीन चरणों में होगी.

पहले चरण यानी अगले साल एक अप्रैल 2020 लेकर से 30 सितंबर के बीच केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी घर-घर जाकर आंकड़े जुटाएंगे. जनगणना का दूसरा चरण 2021 में 9 फरवरी से 28 फरवरी के बीच पूरा किया जाएगा. 1 मार्च से 5 मार्च के बीच संशोधन की प्रक्रिया होगी.

क्या है एनपीआर

NPR देश के सभी सामान्य निवासियों का दस्तावेज है और नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों के तहत स्थानीय, उप-जिला, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है. कोई भी निवासी जो 6 महीने या उससे अधिक समय से स्थानीय क्षेत्र में निवास कर रहा है तो उसे NPR में अनिवार्य रूप से पंजीकरण करना होता है. 2010 से सरकार ने देश के नागरिकों की पहचान का डेटाबेस जमा करने के लिए इसकी शुरुआत की. इसे 2016 में सरकार ने जारी किया था.

प्रियंका फिर इंडिया गेट पहुंचीं, कहा- नोटबंदी की तरह लाइन में लगवाना चाहती है सरकार

नागरिकता संशोधन एक्ट (सीएए) पर देशभर में हो रहे हिंसक प्रदर्शन के बाद अब राजनीतिक दल भी सक्रिय होते जा रहे हैं. कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी की एक्ट को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधने के कुछ देर बाद अब पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी प्रदर्शनकारियों का मनोबल बढ़ाने के लिए इंडिया गेट पहुंचीं और सरकार पर जमकर हमला भी किया.

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा शुक्रवार रात इंडिया गेट पहुंचीं और वहां नागरिकता संशोधन एक्ट (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शनकारियों का मनोबल बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन एक्ट (सीएए) और एनआरसी गरीबों के खिलाफ है. गरीब जनता ही इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होगी. ऐसे में दिहाड़ी मजदूरों का क्या होगा.देश को किस स्थिति में डाल रहेः प्रियंका
प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि अगर किसी को 30-35 साल पुराने दस्तावेज निकालने पड़े तो लोग कैसे दिखा पाएंगे. वो किस स्थिति में देश को डाल रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि जिस तरह से नोटबंदी के लिए लोगों को लाइन में खड़ा होना पड़ा था. उसी तरह से अब सरकार चाह रही है कि इस मुद्दे पर भी लोगों को लाइन में खड़ा कराया जाए. उन्होंने कहा कि इससे कौन प्रभावित होगा. जो अमीर है वो तो पासपोर्ट दिखा देगा, लेकिन जो गरीब है, दिहाड़ी मजदूर हैं वो क्या करेंगे. हालांकि प्रियंका गांधी ने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वो शांतिपूर्वक तरीके से प्रदर्शन करें. इससे पहले कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी वीडियो जारी कर सरकार पर हमला बोला था. सोनिया गांधी ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि नागरिकता संशोधन एक्ट भेदभावपूर्ण है. नोटबंदी की तरह एक बार फिर एक-एक व्यक्ति को अपनी एवं अपने पूर्वजों की नागरिकता साबित करने के लिए लाइन में खड़ा होना पड़ेगा.

राज्यों से भगवा नक्शा और सिकुड़ा, झारखंड भी बीजेपी के हाथ से जाने का अनुमान

महाराष्ट्र में हाल में सत्ता से बाहर होने के बाद बीजेपी को एक और राज्य में झटका लगने जा रहा है. इंडिया टुडे – एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल के अनुमान के मुताबिक झारखंड राज्य में भी बीजेपी सत्ता से हाथ धो सकती है. एग्जिट पोल के अनुमान बता रहे हैं कि झारखंड विधानसभा चुनाव में विपक्षी गठबंधन निर्णायक जीत हासिल करने जा रहा है. इस विपक्षी गठबंधन में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) शामिल हैं. पांच चरणों वाले झारखंड विधानसभा चुनाव में इस बार बीजेपी ने अकेले ताल ठोकी थी. 81 सदस्यीय सदन में बीजेपी को एग्जिट पोल के अनुमान के मुताबिक 22 से 32 सीटों पर जीत हासिल हो सकती है. वहीं विपक्षी गठबंधन की झोली में 38 से 50 सीट जा सकती है. झारखंड विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा 41 का है.

अभी तक झारखंड विधानसभा में बीजेपी के पास 37 सीट थीं, वहीं उसके सहयोगी रहे आल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (AJSU) के पास 5 सीट थीं. 2014 विधानसभा चुनाव में JMM को 19, कांग्रेस को पास 6 और बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व वाली पार्टी झारखंड विकास मोर्चा यानि JVM को 8 सीट पर जीत हासिल हुई थी. बाद में JVM के 6 विधायकों ने बीजेपी को समर्थन देकर पाला बदल लिया. 2014 विधानसभा में अन्य को भी 6 सीट पर कामयाबी मिली थी.2019 विधानसभा चुनाव के लिए राज्य में बीजेपी और AJSU ने अलग अलग चुनाव लड़ा. एग्जिट पोल के जो अनुमान है वो बीजेपी के लिए इसलिए भी बड़ा झटका है क्योंकि इसी साल मई में लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने राज्य की 14 में से 11 सीट पर जीत हासिल की थी. 2019 लोकसभा चुनाव से झारखंड विधानसभा सीटों का आकलन किया जाए तो मई में राज्य में बीजेपी को 57 सीट पर बढ़त हासिल थी. वोट शेयर

जहां तक वोट शेयर की बात की जाए तो बीजेपी का वोट शेयर 2014 विधानसभा चुनाव के मुकाबले 3% बढ़ सकता है. बीजेपी को इस बार 34% वोट मिलने का अनुमान है. लेकिन सीटों की बात की जाए तो बीजेपी को विपक्षी गठबंधन से इस बार मात खानी पड़ सकती है. जातिगत गणित की बात की जाए तो JMM-कांग्रेस-RJD गठबंधन को ST वोटरों में से 53% और ईसाई वोटरों में से 69% का समर्थन मिल रहा है. वहीं बीजेपी को SC में 27% और ईसाई वोटरों में 12% का ही समर्थन मिल सका.

सोरेन फैक्टर

झारखंड के वोटरों के लिए मुख्यमंत्री के तौर पर पहली पसंद के तौर पर JMM प्रमुख हेमंत सोरेन उभरे हैं. एग्जिट पोल में उन्हें 29% वोटरों ने अपनी पहली पसंद बताया. वहीं मुख्यमंत्री रघुबर दास को 26% वोटरों ने ही मुख्यमंत्री के लिए अपनी पसंद बताया. इस मोर्चे पर JVM नेता बाबूलाल मरांडी को सिर्फ 10% वोटरों का ही समर्थन मिला.

अहम मुद्दे

झारखंड में 48% वोटरों के मुताबिक सबसे ज्यादा विकास के मुद्दे ने उनके वोट देने के फैसले को प्रभावित किया. सत्ता विरोधी रूझान, दूसरा फैक्टर रहा जिसने 30% वोटरों के वोट देने के फैसले पर असर रहा. एग्जिट पोल के मुताबिक 30% वोटरों ने झारखंड में परिवर्तन के हक में राय व्यक्त की. एग्जिट पोल के अनुमानों से साफ है कि झारखंड के वोटरों की केंद्र में मोदी सरकार और उसके कामकाज को लेकर जैसी अच्छी राय है, वैसा विश्वास झारखंड राज्य में रघुबर दास के नेतृत्व वाली सरकार को नहीं मिला. एग्जिट पोल के 36% प्रतिभागियों ने केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को पसंद किया.

एग्जिट पोल की अहम बातें

-वोटर मुख्यमंत्री रघुबर दास से नाखुश
-बीजेपी को जो समर्थन मिला, वो पीएम मोदी की वजह से

-सत्ता विरोधी रूझान ने झारखंड में असर दिखाया

-गैर आदिवासी सीएम होने की वजह से आदिवासी बीजेपी से दूर हुए

-गैर आदिवासियों को जमीन आवंटन से आदिवासी नाखुश, बेरोजगारी भी मुद्दा

-AJSU ने बीजेपी के कुर्मी/महतो गढ़ों में सेंध लगाई

-विपक्षी गठबंधन ने ज़मीन पर अच्छा तालमेल दिखाया

-विपक्ष ने जातिगत समीकरणों पर सीटों का चुनाव किया

-सीएम के तौर पर हेमंत सोरेन की उम्मीदवारी ने विपक्षी कैडर को कारगर ढंग से प्रेरित किया

एग्जिट पोल पर किसने क्या कहा?

मुख्यमंत्री रघुबर दास ने एग्जिट पोल के नतीजों से असहमति व्यक्त की. उन्होंने विश्वास के साथ कहा कि उनकी पार्टी सत्ता में बनी रहेगी. दास ने कहा, ‘मैं नहीं समझता कि लोग हमसे नाखुश हैं.’ निवर्तमान मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य के वोटर उनकी सरकार के कामकाज से खुश हैं.

देश भर में हिंसक प्रदर्शन के बीच नागरिकता संशोधन कानून के ड्राफ्ट पर विचार शुरू, प्रदर्शनकारी भी दे सकते हैं सुझाव : MHA सूत्र

नागरिकता कानून के खिलाफ देशभर में जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि नागरिकता कानून (CAA) के ड्राफ्ट पर विचार किया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक अगर कानून लागू हुआ तो हालात बेकाबू हो सकते हैं, एेसे में इसके ड्राफ्ट पर फिर विचार किया जाएगा. प्रदर्शनकारी भी गृह मंत्रालय को अपने सुझाव दे सकते हैं. सूत्रों का कहना है कि नागरिकता प्रदान करने पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे नहीं दिया है. यह एक केंद्रीय कानून है और राज्य इसको मानने के लिए बाध्य हैं. सूत्रों का यह भी कहना है कि पूरी प्रक्रिया लगभग डिजिटल होगी और दस्तावेजों की जांच की जाएगी.
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राज्यों की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होगी. पहले यह काम जिलाधिकारी/कलेक्टर के जिम्मे था, लेकिन इस बार प्रक्रिया में बदलाव होगा. सूत्रों का यह भी कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में राज्य के अधिकारियों की भूमिका अहम है और हर पहलू पर उनकी मदद की जरूरत पड़ेगी. अगर किसी भी देश में अवैध शरणार्थी होते हैं, तो उस देश को अधिकार है कि वह उन्हें वापस जाने को कहे. इस मसले पर दिल्ली में लोगों को गुमराह किया जा रहा है.

NRC पूरा होने पर जारी होगा अलग कार्ड
सूत्रों ने यह भी बताया कि देशभर में एनआरसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नागरिकता कानून के आर्टिकल 14 ए के तहत लोगों को एक राष्ट्रीय पहचान पत्र (National Identity Card ) भी जारी किया जाएगा.

प्रियंका गांधी ने NDTV से कहा- NRC और नागरिकता कानून गरीबों के खिलाफ
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ दिल्ली समेत देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है. इंडिया गेट पर प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने के लिए कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी पहुंची. इस दौरान प्रियंका गांधी ने एनडीटीवी से कहा, ”मैं यहां समर्थन देने आई हूं. देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. एनआरसी और नागरिकता कानून गरीबों के खिलाफ हैं. इससे सबसे ज्यादा प्रभावित गरीब तबका है. अगर आपके दादा-दादी के दस्तावेज दिखाने हो तो क्या आप दिख पाएंगे? जैसे नोटबंदी के लिए लाइन में खड़ा रखा था, ऐसे ही इस मुद्दे पर लाइन में खड़ा रखना चाहते हैं.”

मोदी सरकार पर बरसीं सोनिया गांधी
सोनिया गांधी ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून भेदभावपूर्ण है। नोटबंदी की तरह एक बार फिर एक-एक व्यक्ति को अपनी एवं अपने पूर्वजों की नागरिकता साबित करने के लिए लाइन में खड़ा होना पड़ेगा।

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