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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत अब देश में 9 केंद्र शासित प्रदेश

नई दिल्ली 7 अगस्त 2019 । राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह ( Home Minister Amit Shah ) ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर ( Jammu Kashmir ) से धारा 370 हटाने का संकल्प पेश किया है। इसके साथ ही अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन का संकल्प भी पेश किया है। इसके बाद जम्मू-कश्मीर से लद्दाख ( Ladakh ) को अलग कर दिया गया। यही नहीं जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा ( Unioin territory ) भी दे दिया गया। लद्दाख को बिना विधानसभा केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया है। हालांकि शाह के इस संकल्प पर राज्यसभा में जमकर हंगामा भी हुआ।

अमित शाह के संकल्प को मंजूरी मिलने के बाद अब जम्मू-कश्मीर अलग राज्य नहीं होगा।

इसे केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दे दिया गया है।

यही नहीं जम्मू-कश्मीर से अब धारा 370 भी हटा दी जाएगी।

आईए जानते हैं सरकार के बड़े फैसले के बाद क्या बदलाव आएगा। ऐसा होगा नया स्वरूप
भारत में 29 राज्य हैं। जिनमें से 7 केंद्र शासित प्रदेश है। दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, लक्षद्वीप और पुडुचेरी यह सभी राज्य केंद्र शासित प्रदेशों के तहत आते हैं।

लेकिन नए बदलाव के बाद अब दो केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख बनाए गए हैं। यानी अब देश में कुल 9 केंद्र शासित प्रदेश होंगे।

जम्मू-कश्मीर जहां विधायिका सहित केंद्र शासित प्रदेश होगा वहीं लद्दाख बगैर विधायिका के केंद्र शासित प्रदेश बनेगा।

जम्मू कश्मीर में विधानसभा भी होगी, लेकिन केंद्र शासित प्रदेश माना जाएगा। दिल्ली और पुडुचेरी में ऐसी व्यवस्था है। केंद्र शासित प्रदेश में ऐसे होता है काम
केंद्र शासित प्रदेश में केंद्र सरकार की ओर से बनाए गए कानून के तहत काम होता है। हालांकि भले ही यहां मुख्यमंत्री को जनता चुनकर भेजती हो। संविधान के अनुसार यहां के कार्यों को करने का अधिकार सीधे राष्ट्रपति को होता है।

अंडमान-निकोबार, दिल्ली और पुडुचेरी का मुखिया उपराज्यपाल होता है। इन राज्यों में राज्यपाल को मुख्यमंत्री से ज्यादा अधिकार होते हैं। अब जम्मू-कश्मीर में भी ऐसा ही होगा। चंडीगढ़ का प्रशासक मुख्य आयुक्त होता है। वहीं पूर्ण राज्य दर्जा प्राप्त राज्यों में राज्य सरकार का मुखिया सीएम होता है। सरकार भी चलाता है। यहां के सभी विकास कामों का फैसला सीएम अपने कैबिनेट की मदद से लेता है।

लेकिन दिल्ली और अन्य राज्यों में बड़ा अंतर है। वैसे तो दिल्ली केंद्र शासित राज्य है लेकिन यहां मुख्यमंत्री का चुनाव होता है। मंत्रिमंडल भी होता है।

लेकिन यहां की पुलिस मुख्यमंत्री के अंडर में नहीं होती है। दिल्ली पुलिस राज्य सरकार नहीं बल्कि केंद्र सरकार के तहत काम करती है।

कश्मीर में बड़ा निवेश सम्मेलन करवाएगी केंद्र सरकार
अनुच्छेद 370 के दो खंडों को निरस्त करने के फैसले के बाद सरकार ने अक्टूबर में जम्मू-कश्मीर में एक बड़ा निवेश सम्मेलन आयोजित करने की योजना बनाई है, जिसमें देश के नामी-गिरामी कारोबारी हिस्सा लेंगे. इस सम्मेलन का आयोजन दशहरे के आसपास किया जाएगा, क्योंकि सरकार का मानना है कि अनुच्छेद 370 समाप्त होने से इलाके में निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनेगा.

न्यूज एजेंसी आईएएनएस ने सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है. सरकार ने कहा कि प्रदेश के विकास के मार्ग में यह अनुच्छेद सबसे बड़ा बाधक था, क्योंकि इसके कारण कश्मीर के बाहर के लोग प्रदेश में जमीन-जायदाद में निवेश नहीं कर पाते थे. इस कारण उद्योगपति अपना कारखाना नहीं लगा पाते थे.

सरकार ने कहा कि यह अनुच्छेद राज्य में निजी या वैश्विक निवेश के मार्ग में बाधक था. अधिकारियों को उम्मीद है कि हालात जब सुधरेंगे और शांति बहाल होगी, तब लोगों को समझ में आएगा कि विशेष दर्जा समाप्त करना उनके हित में था.

गौरतलब है कि सोमवार को गृहमंत्री अमित शाह ने सदन में अनुच्छेद 370 हटाने का संकल्प सदन में पेश किया. उन्होंने कहा कि कश्मीर में लागू धारा 370 में सिर्फ खंड-1 रहेगा, बाकी प्रावधानों को हटा दिया जाएगा.

इसके अलावा नए प्रावधान में जम्मू कश्मीर पुनर्गठन का प्रस्ताव भी शामिल है. उसके तहत जम्मू-कश्मीर अब केंद्र शासित प्रदेश होगा और लद्दाख को जम्मू कश्मीर से अलग कर दिया गया है. उसे भी केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया है. हालांकि वहां विधानसभा नहीं होगी.

इस फैसले के साथ ही जम्मू-कश्मीर में प्रॉपर्टी के रेट में करीब 50 फीसदी के उछाल का अनुमान लगाया जा रहा है. दरअसल, मोदी सरकार के इस फैसले के बाद अब भारत में रहने वाला कोई भी नागरिक अगर चाहे तो वो जम्मू-कश्मीर में घर, प्लॉट, खेती की जमीन, दुकान वगैरह खरीद सकेगा. पहले केवल राज्य का निवासी ही संपत्ति को खरीद सकता था और भारतीयों को संपत्ति खरीदने पर रोक थी. इससे जम्मू-कश्मीर के रियल एस्टेट सेक्टर में जबरदस्त उछाल की उम्मीद की जा रही है.

जानिए कश्मीर की खूबसूरत घाटी में कितने का है एक प्लॉट

अनुच्छेद 370 के प्रावधान खत्म किए जाने के बाद जम्मू कश्मीर लगातार चर्चाओं में है और तमाम तरह की राजनीतिक खबरें सुर्खियों में बनी हुई हैं. इस बीच, ये जानिए कि कश्मीर में प्रॉपर्टी यानी रियल एस्टेट का क्या गणित है. रियल एस्टेट के विशेषज्ञों की मानें तो पिछले कुछ सालों से श्रीनगर में आवासीय प्रॉपर्टी की मांग बहुत बढ़ी है. मकान, प्लॉट, विला, फार्म हाउस, कमर्शियल दुकानों को लेकर खास तौर से लोग दिलचस्पी ले रहे हैं. कहा जा रहा है कि श्रीनगर में हर वर्ग के खरीदार के लिए प्रॉपर्टी के विकल्प मौजूद हैं. ताज़ा राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर हास्य के तौर पर कश्मीर में प्रॉपर्टी और उसकी कीमतों को लेकर चर्चा की जा रही है. इस चर्चा के पीछे कारण यह है कि कश्मीर का विशेष राज्य दर्जा खत्म होने के बाद दूसरे राज्यों के लोग भी यहां संपत्ति ले सकेंगे. हालांकि इसके लिए अभी सफ़र लंबा है क्योंकि अभी कई कानूनी प्रक्रियाएं बाकी हैं. लेकिन इस बीच जानिए कि कश्मीर की राजधानी और ड्रीम सिटी कहे जाने वाले श्रीनगर के साथ ही कुछ और इलाकों में ज़मीनों की कीमतें क्या हैं.

फ़िलहाल इस तरह हैं प्रॉपर्टी कीमतें

श्रीनगर ज़िला प्रशासन के पोर्टल पर 2019-20 के लिए शहरी प्लॉट की मार्केट वैल्यू को लेकर एक सर्कुलर जारी किया जा चुका है. इस सर्कुलर के मुताबिक श्रीनगर ज़िले के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न तरह की प्रॉपर्टी को लेकर मार्केट वैल्यू का हिसाब दिया गया है. मसलन, श्रीगनर की उत्तर तहसील के शालीमार में कीमतें कुछ इस तरह हैं. यहां आवासीय प्लॉट की मार्केट वैल्यू 52.50 लाख रुपये प्रति कनाल है जबकि कमर्शियल के लिए 97 लाख रुपये प्रति कनाल है. इसी तरह, उत्तर तहसील में ग्रामीण प्लॉट के लिए मार्केट वैल्यू सैदपुरा में आवासीय के लिए 15.75 लाख रुपये प्रति कनाल और कमर्शियल के लिए 17.85 लाख रुपये प्रति कनाल है. इसी तरह जम्मू व कश्मीर के हर ज़िला प्रशासन का एक अलग पोर्टल है, जहां इस तरह के सर्कुलर जारी किए गए हैं. अनंतनाग में 2018-19 के लिए शहरी प्लॉट की मार्केट वैल्यू संबंधी सर्कुलर है, जिसमें अलग अलग कॉलोनियों के हिसाब से कीमतें दर्शाई गई हैं. उदाहरण के तौर पर पहलगाम नगरपालिका के तहत पहलगाम लोअर फ्रंट साइड पर रेज़िडेंशियल प्लॉट की मार्केट वैल्यू 81.20 लाख प्रति कनाल है जबकि कमर्शियल की 92 लाख प्रति कनाल. जम्मू में इस तरह हैं कीमतें

इसी तरह जम्मू के सब डिविज़न अखनूर में ग्रामीण क्षेत्रों में ज़मीनों के रेट संबंधी एक सर्कुलर पोर्टल पर है. इसके मुताबिक अखनूर खास के ग्रामीण इलाकों में एक रेज़िडेंशियल प्लॉट की मार्केट वैल्यू 24.71 लाख रुपये प्रति कनाल तक है और कमर्शियल की 36.85 लाख रुपये प्रति कनाल तक. विस्तार से जम्मू कश्मीर राज्य के ज़िलों की कीमतें जानने के लिए आप संबंधित ज़िला प्रशासन के पोर्टल पर लोड किए गए सर्कुलर देख सकते हैं.

पिछले साल के मुकाबले बढ़ी हैं कीमतें

इस सर्कुलर में ज़िलेवार ये बताया गया है कि ज़मीनों की कीमतों में पिछले साल या सालों की तुलना में कितना फर्क आया है. कहा गया है कि श्रीनगर की ज़िला वैल्यूएशन समिति ने पाया कि पिछले साल 2018-19 की तुलना में इस साल ज़मीनों की कीमतों में 5 फीसदी तक का इज़ाफ़ा हुआ है. इस इज़ाफ़े की रिपोर्ट पर संवाद एवं विचार करने के बाद बोर्ड ने नये प्रस्ताव तय किए हैं. वहीं, कुपवाड़ा में ज़मीनों की कीमतें पिछले साल के मुकाबले 7 और पुलवामा व अनंतनाग में 6 फीसदी तक बढ़ी हैं.

अब कनाल की यूनिट समझें

जम्मू कश्मीर सहित कुछ और राज्यों में ज़मीनें मापने के लिए कनाल और मार्ला इकाइयों का इस्तेमाल किया जाता है. कनाल को आप अपनी सुविधानुसार इस तरह कन्वर्ट करके समझ सकते हैं कि 1 कनाल 510 वर्गमीटर के बराबर होता है यानी 1 बटे 8 एकड़. 1 कनाल 5400 वर्गफीट और 605 वर्ग यार्ड के बराबर होता है. वहीं, 1 कनाल में 20 मार्ला शामिल होते हैं. इस हिसाब से पहले बताए गए श्रीनगर के शालीमार में आवासीय प्लॉट की मार्केट वैल्यू 52.50 लाख रुपये प्रति 5400 वर्गफीट है. यानी 1000 वर्गफीट का आवासीय प्लॉट यहां करीब 9 लाख 73 हज़ार रुपये का है.

मंगाए गए सारे हाईटेक ड्रोन
आखिरकार जम्मू-काश्मीर (Jammu Kashmir) से Article 370 हट गई है जिससे वहां का माहौल गर्म न हो इसलिए इसलिए गृहमंत्रालय ने अपने पूर्वा नुमान के चलते पूरे जम्मू कश्मीर को छावनी में तब्दील कर दिया था। जैसे जमीन से नजर रखी जा रही थी उसी तरह आसमान से भी आतंकियों व पत्थरबाजों पर नजर रखने देश के सबसे हाईटेक ड्रोन जम्मू कश्मीर मंगा लिए गए है। गृहमंत्रालय ने देशभर के हाइटेक ड्रोन को जम्मू-काश्मीर मंगवाया है। इसके पीछे वहां के वर्तमान हालात को बताया जा रहा है। हालांकि पुलिस के आला अधिकारी इस विषय पर जानकारी को देने से बच रहे हैं। लेकिन पत्रिका को विभागीय सूत्रों से जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक आदेश के बाद बस्तर पुलिस ने ड्रोन को जम्मू-काश्मीर के लिए रवाना कर दिया है।

माओवादी मोर्चे पर अहम साबित हो चुका है हेरॉन
दरअसल पहले बस्तर के इलाकों में ड्रोन हैदराबाद व भिलाई से उड़ान भरता था, दूरी की अधिकता के चलते माओवादी गतिविधिकयों की जानकारी सटीक व समय पर नहीं मिल पा रही थी। बस्तर के झीरम, टाहकवाड़ा और बुरकापाल जैसी बड़ी माओवादी वारदात के बाद ड्रोन की उड़ान बस्तर से प्रारंभ करने की बात सीआरपीएफ के उच्चाधिकारियों ने केन्द्रीय गृह मंत्रालय से की थी। जिला मुख्यालय से 12 किमी दूर बकावंड ब्लॉक के मसगांव में नेशनल टेक्निकल रिसर्च आर्गनाइजेशन एनटीआरओ के वैज्ञानिकों, सीआरपीएफ तथा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में अनमैन्ड एरियल व्हीकल (यूएव्ही) की उड़ान का परीक्षण करने के बाद यहां से इसका संचालन किया जा रहा था। बस्तर से इसका संचालन होने के बाद माओवादी मोर्चे में पुसिल ने यूएव्ही के निशानदेही पर लगातार माओवादियों के लिब्रिटेड जोन में ऑपरेशन लांच किया। इसमें न केवल उन्हें सफलता मिली बल्कि उनका नुकसान भी कम हुआ है।

१८ घंटे तक लगातार उड़ान भरने जैसी कई खासियत है इस ड्रोन की
यह ड्रोन इजराइल में निर्मित हेरोन यूएवी है। यह मानव रहित विमान की हाइ रिजॉलूशन कैमरे से लैस है जो इसे दूर बैठे व्यक्ति को लाइव तस्वीरें और वीडियो भेज सकता है। इसकी रेंज भी ३५० किमी से अधिक है यानी इसे ३५० किमी से भी अधिक दूरी से संचालित किया जा सकता है। यह यूएवी लगातार 18 घंटे तक उड़ान भरने जैसे कई आधूनिक तकनीक और खासियत से लैस है।

भेजे गए 12 हजार जवान

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए हटाने के बाद केंद्र सरकार ने सोमवार को सीआरपीएफ के 12 हजार और जवानों को भी वहां रवाना कर दिया है। वहीं कई राज्यों में एलर्ट भी जारी किया गया है तो हिंसा को रोकने के लिए पुलिस से माक ड्रिल चलाने का निर्देश भी दिया है।

गौरतलब है कि जम्मू- कश्मीर के मसले पर पिछले कुछ दिनों से कयास लगाए जा रहे थे कि केंद्र सरकार कुछ बड़ा कदम उठा सकती है। सोमवार को सारे कयासों पर विराम लग गया है। लेकिन जम्मू-कश्मीर में इससे पहले भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए ताकि किसी तरह की कोई अप्रिय घटना न हो सके।

बावजूद इसके अर्धसैनिक बलों की करीब एक हजार कंपनियां घाटी में तैनात हैं। सोमवार को जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित राज्य घोषित हो जाने और सुरक्षा के मद्देनजर सरकार ने उत्तर प्रदेश, ओडिशा, असम और देश के अन्य हिस्सों से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 12 हजार और जवानों को रवाना कर दिया। जवानों को सी-17 विमान से कश्मीर भेजा गया।

लागू है 370 लेकिन सिर्फ नाम का
गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में अपने बयान में कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 के खंड 1 के सिवा इसके सभी खंडों को रद्द कर दिया जाएगा. दरअसल खंड एक भारत के राष्ट्रपति को कई अधिकार देता है. इसके तहत राष्ट्रपति जम्मू और कश्मीर के ‘राज्य विषयों’ के लाभ के लिए संविधान में “अपवाद और संशोधन” करने की ताकत रखता है. इसी ताकत का इस्तेमाल करते हुए सरकार ने इसके प्रावधानों को खत्म कर दिया है. हालांकि खंड 1 बना रहेगा.

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