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अब अयोध्या का राम मंदिर दो नहीं, तीन मंजिला होगा

अयोध्या  30 दिसंबर 2019 ।  अयोध्या में बनने वाले राममंदिर निर्माण के मौजूदा मॉडल में विश्व हिन्दू परिषद ने बदलाव करने का फैसला लिया है। मौजूदा मॉडल से अलग हटकर अब एक नया नक्शा तैयार करने में कई बदलाव किए जा रहे हैं। अब राम मंदिर 2 मंजिल के बजाय अब 3 मंजिल में होगा। गगनचुंबी मंदिर के नए मॉडल का नक्शा तैयार कर लिया गया है जिस पर ट्रस्ट अपनी मुहर लगा सकती है। राम मंदिर के आर्किटेक्ट चंद्रकांत सोनपुरा ने राम मंदिर का नया नक्शा तैयार किया है जिसमें पुराने मॉडल को एक नया विस्तार दिया गया है। अब नए मॉडल में एक मंडप व एक मंजिला और बढ़ा करके इसे तीन मंजिला बनाया गया है। साथ ही इसके 33 फुट ऊंचे शिखर का भी विस्तार किया गया है। पिछले माह सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने की तैयारी चल रही है। इसलिए गगनचुंबी राम मंदिर निर्माण की भी तैयारी शुरू कर दी गई है। अहमदाबाद में मंदिर के मॉडल पर मंथन के बाद आर्किटेक्ट चंद्रकांत सोनपुरा ने मंदिर मॉडल को नया स्वरूप दिया है। अयोध्या कार्यशाला के प्रभारी एवं वास्तुकार अन्नू भाई सोमपुरा ने बताया कि तैयार किए गए नए मंदिर मॉडल में कई बदलाव किए गए हैं। मंदिर को एक मंजिला और बढ़ाया गया है। इसके साथ ही रंग मंडप, नित्य मंडप के अलावा एक मंडप और बनाया गया है। इसके शिखर को भी और ऊंचा किया गया है। धरातल से शिखर की ऊंचाई 128 फुट के स्थान पर 161 फीट की ऊंचाई कर दी गई है। अनु भाई सोनपुरा ने यह भी बताया कि मंदिर मॉडल का नया नक्शा संघ परिवार एवं विश्व हिंदू परिषद को सौंप दिया गया है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने यूपी के डीजीपी को दिया प्रेमी जोड़े से लिखित में माफी मांगने का आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने यूपी के डीजीपी को अंतरधर्मीय जोड़े से माफी मांगने का आदेश दिया है जिसने लड़की के परिवार की मर्जी के खिलाफ घर बसाया था और पुलिस ने उन्हें (जोड़े को) गिरफ्तार कर लिया था. जस्टिस एस मुरलीधर और जस्टिस तलवंत सिंह ने यूपी सरकार को आदेश दिए हैं कि संदीप कुमार और उनकी पत्नी निशा को 50-50 हजार रुपये भी दिए जाएं.

पुलिस पर आरोप था कि अंतरधर्मीय जोड़े को पुलिस ने गैरकानूनी रूप से गिरफ्तार कर लिया था. हाईकोर्ट ने कहा कि जुर्माने की राशि चार हफ्तों में दे दी जाए और साथ ही यूपी के डीजीपी खुद एक चिट्ठी लिखें जिसमें पुलिस के व्यवहार पर माफी मांगी जाए.

इसके अलावा उन तीन पुलिस पुलिसवालों पर भी कार्रवाई करने को कहा है जिन्होंने जेएनयू परिसर से जोड़े को गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तार कर लिया था. पुलिस ने इस बात की सूचना स्थानीय पुलिस तक को नहीं दी थी.अदालत ने उस पैनल की रिपोर्ट को भी स्वीकार कर लिया है जिसमें उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश और दिल्ली पुलिस के पूर्व डीजीपी भी शामिल थे. पैनल ने एक अंतर-राज्यीय गिरफ्तारी की स्थिति में पुलिस द्वारा प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए विस्तृत सुझाव दिए थे. कोर्ट ने यह निर्देश दिया कि रिपोर्ट को दिल्ली और उत्तर प्रदेश दोनों के द्वारा अपने-अपने क्षेत्राधिकार में लागू करने के लिए अपनाया जाए.

कमेटी ने सुझाव दिया था कि दूसरे राज्य में गिरफ्तारी के दौरान, जिसे गिरफ्तार किया जा रहा है वह अपने किसी परिचित को भी अपने साथ ले जा सकता है क्योंकि वह जहां ले जाया जा रहा है वहां उसका कोई परिचित नहीं होगा. जुडीशियल मजिस्ट्रेट के सामने जब तक उसे पेश नहीं किया जाता, उसका परिचित उसके साथ रह सकता है. कमेटी ने ये भी कहा कि यात्रा के वक्त को यदि छोड़ दिया जाए तो गिरफ्तार शख्स को 24 घंटे के भीतर ही न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना चाहिए.

संदीप और निशा की शादी यूपी के गाजियाबाद में जून 2018 को हुई थी. ये शादी हिंदू रीति-रिवाज के साथ हुई थी. गौरतलब है कि निशा मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखती है जिसने हिंदू धर्म को अपना लिया है. शादी के बाद ये जोड़ा जेएनयू कैंपस में संदीप के आवास पर रह रहा था. संदीप के परिवार को इस शादी पर आपत्ति नहीं थी लेकिन निशा का परिवार शादी से नाखुश था.

निशा के भाई ने लोनी थाने में निशा के अपहरण का मामला दर्ज कराया था. पुलिस ने जोड़े को हिरासत में लिया जहां निशा को उसके परिवार के हवाले कर दिया गया वहीं संदीप को तीन दिन और दो रातों तक लॉकअप में ही रखा गया. कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि वे क्यों जेएनयू में घुसे और जोड़े को अपने साथ ले गए जबकि निशा 21 साल की है और उसने अपनी मर्जी से संदीप के साथ शादी की है.

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