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अब प्लास्टिक नहीं बांस की बोतल में पीएं पानी

नई दिल्ली 05 अक्टूबर 2019 । 2 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह रोक लगाने जा रहे हैं। एक तरफ जहां प्लास्टिक के इस्तेमाल को लेकर होने वाले नुकसान के बारे में लोगों को जागरुक किया जा रहा है। वहीं, प्लास्टिक के स्थान पर इस्तेमाल होने वाली नई-नई चीजें ईजाद हो रही हैं। अब प्लास्टिक की बोतल की जगह जल्द बाजार में बांस की बोतल आने वाली है। खादी ग्रामोद्योग आयोग ने गाधी जयंती से पहले बांस की इस बोतल को लॉन्च कर दिया है। इसके अलावा सोलर वस्त्र (सोलर चरखा से बना), गोबर से बना साबुन और शैम्पू, कच्ची घानी सरसो तेल सहित कई उत्पाद लॉन्च किए गए हैं।

आपको बता दें कि राज्य के हर जिले में खादी ग्रामोद्योग का एक स्टोर होता है। इस स्टोर पर जाकर आप बांस की बोतल, गाय के गोबर से बना साबुन इत्यादि खरीद सकते है। खादी ग्रामोद्योग आयोग के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना ने बताया है कि प्लास्टिक बोतल की जगह लॉन्च की गई बांस की बोतल की क्षमता कम से कम 750 एमएल है। इसकी शुरुआती कीमत 300 रुपये तय की गई है। यह बोतल पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ टिकाऊ भी है। खादी ग्रामोद्योग ने गाय के मूत्र और गोबर से साबुन बनाया है। इस पर विनय कुमार सक्सेना बताते हैं कि ये सभी टेस्ट में सफल रहा है। यह त्वचा के लिए बहुत ही लाभकारी है। इसके अलावा खादी ग्रामोद्योग के सभी स्टोर पर कई प्रोडक्ट्स बड़े डिस्काउंट पर मिल रहे है। बांस की बनी पानी बोतल की कीमत 560 रुपये और 125 ग्राम का साबुन का दाम 125 रुपये है। सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को गाय के गोबर और बांस की बनी पानी की बोतलें पेश की। इन उत्पादों को खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग ने तैयार किया है।मंत्री ने मंगलवार को गांधी जयंती के मौके पर एक कार्यक्रम में कहा कि वह जैविक खेती और उसके लाभ के पुरजोर समर्थक है। सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की भी जिम्मेदारी संभाल रहे गडकरी ने बेहतर प्रदर्शन करने वाली निर्यात इकाइयों से नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने को कहा है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने एक योजना का प्रस्ताव किया है जिसके तहत इस प्रकार की एमएसएमई इकाइयों में 10 प्रतिशत इक्विटी भागीदारी केंद्र सरकार की होगी। खादी ग्रामोद्योग आयोग प्लास्टिक के इस्तेमाल के खिलाफ अपनी तैयारी पहले ही कर चुका है। आयोग ने मिट्टी के कुल्हड़ तैयार करवाने शुरू कर दिए हैं। 1 करोड़ से ज्यादा कुल्हड़ तैयार हो चुके हैं। खादी ग्रामोद्योग की इस पहल पर बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिल रहा है।

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