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विधानसभा चुनाव में हुई हार को भूलकर अब करो लोकसभा की तैयारी : तोमर

भोपाल 24 दिसंबर 2018 । विधानसभा चुनाव में जो हुआ सो हुआ। उसे अब भूलकर हमें लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटना है। वैसे भी विधानसभा चुनावों में पार्टी को कांग्रेस से अधिक वोट मिला है। मायने यही हैं कि जनता ने भाजपा की नीतियों और काम-काज को सराहा है। केवल गणित कुछ इस तरह का बैठा कि हम कुछ सीटों से सरकार बनाने से चूक गए।

दिलासा भरी यह समझाइश स्थानीय सांसद व केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने रविवार को मोदी हाउस में भारतीय जनता युवा मोर्चा की संभागीय बैठक में दी। बैठक में संभाग प्रभारी बंशीलाल गुर्जर, मनोहर ऊंटवाल, संभागीय संगठन मंत्री शैलेन्द्र बस्र्आ, युवा मोर्चा के राष्ट्रीय, प्रदेश जिला पदाधिकारी उपस्थित रहे।

जिले से विवेक चौहान, आलोक डंगस, सीपी मिश्रा, विनय जैन, गिर्राज व्यास, निखिल विजयवर्गीय, हरीश यादव आदि उपस्थित रहे। बैठक के लिए सभी कार्यकर्ताओं को सुबह 11.30 बजे ही बुला लिया गया था। शुरुआती दौर में बंशीलाल गुर्जर, मनोहर ऊंटवाल, शैलेन्द्र बरुआ ने 12 जनवरी से युवा मोर्चा के आयोजनों को लेकर चर्चा की। दोपहर लगभग 2 बजे केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर बैठक में शामिल हुए।

त्री तोमर ने युवा मोर्चा पदाधिकारियों से कहा कि इस बार युवा मोर्चा को जो भी काम सौंपे गए, उसमें वह अपनी क्षमता का 30 प्रतिशत ही दे पाया। उन्होंने युवा मोर्चा के अपने दिनों का उदाहरण देते हुए बताया कि वह किस तरह काम करते थे। उन्होंने कहा कि अब मोर्चा हर काम में अपनी क्षमता का कम से कम 70 प्रतिशत दे। उन्होंने कहा कि युवा मोर्चा आने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटे। विधानसभा चुनाव की हार को भूलकर आगे की जीत सुनिश्चित करने का काम करे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्र निर्माण के कार्यों से घबराकर तमाम विरोधी ताकतें एकजुट हो गई हैं। इन ताकतों के एकजुट होने से हमें निराशा में नहीं आना है। केवल उप्र में जरूर सपा जैसी पार्टियों के गठबंधन में जाने से दिक्कत आ सकती है। अन्य प्रांतों में गठबंधन से लोकसभा चुनाव के नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ने वाला। बैठक में 12 जनवरी से होने वाले आयोजनों की भी जानकारी दी गई।

शिवराज और तोमर के संबंध अब पहले जैसे नहीं
मध्यप्रदेश भाजपा में इन दिनों गुटबाज़ी और आपसी विवाद ज़बरदस्त रूप से गहरा गया है । पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर में भी आपस में पट नहीं रहीं है । किसी समय एक जिस्म दो जान कहे जाने वाले इन दो नेताओं के आपसी संबंध अब मधुर नहीं हैं।

जानकारों का कहना है कि इसी कारण भाजपा मध्यप्रदेश की सत्ता गँवा बैठी है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह के संबंधों में खटास तभी से आ गई थी जब नरेन्द्र सिंह तोमर ने नंदू भैय्या की जगह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद लेने से इंकार कर दिया था, वह केन्द्रीय मंत्री पद छोड़ना नहीं चाहते थे।इसी कारण मजबूरी में राकेश सिंह को प्रदेश अध्यक्ष पद देना पड़ा था।
और तोमर को चुनाव अभियान समिति का पद सिर्फ दिखावे के तौर पर संम्हालना पड़ा था , क्योंकि पार्टी आलाकमान यह बात समझता था कि नरेन्द्र सिंह तोमर और मालवा के क्षत्रप कैलाश विजयवर्गीय यदि प्रचार अभियान से दूर रहे तो पार्टी 40-50 सीटों पर ही सिमट कर रह जायेगी ।
यहाँ यह ज्ञांतव्य है कि भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा ने केन्द्रीय मंत्री तोमर का विकल्प बनने के लिये मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के साथ जमकर मेहनत भी की लेकिन पार्टी नेताओं की आपसी गुटबाज़ी और कलह से ग्वालियर चंबल संभाग में जमकर हार हुई और शिवराज सिंह सत्ता से बाहर हो गये।
विशेष बात यह है कि सारे नेता , मंत्री और कार्यकर्ता अपनी अपनी सीटों पर ही प्रत्याशियों को निपटाने में लगे रहे , उनका यह सोच था कि इस एक सीट पर हार से सरकार बनाने में कोई फ़र्क़ नहीं पडेगा , बस इसी सोच से ग्वालियर चंबल संभाग में भाजपा निपट गई। वहीं कुछ बडे नेताओं ने अपने पुत्रों की गद्दी तैयार करने के लिये दो मंत्रियों को निपटवा दिया ताकि अगले चुनाव में उनके पुत्र यहाँ से पार्टी के उम्मीदवार बन सके ।
कुल मिलाकर भाजपाइयों ने यह नहीं सोचा था कि राज्य की सत्ता उनके हाथ से चली जायेगी , अब सत्ता जाने के सदमे से भाजपाइयो की नींद उड़ गई है , खनन और चंदे के कारोबार में डूबे भाजपाइयों की दुकानें बंद होने के कगार पर हैं। पहले फोन पर जब चाहे अधिकारियों को हड़काने वाले भाजपाईयों का मनोबल इतना टूट गया है कि वह अधिकारियों से जायज़ बात भी करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
वैसे अधिकारी भी अब भाजपाइयों की जगह कांग्रेसियों को तरजीह देने लगे हैं।

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