मुख्य पृष्ठ >> खास खबरें >> अब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का कौशल्या मंदिर बनेगा

अब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का कौशल्या मंदिर बनेगा

रायपुर  20 अगस्त 2020 । रामायण में कैकेयी और सुमित्रा के राज परिवारों का बखान तो है, कौशल्या के मायके के बारे में ज्यादा विवरण नहीं मिलता। लेकिन छत्तीसगढ के लोग मानते हैं कि कौशल्या का जन्म रायपुर के पास चंदखुरी गाँव में हुआ था। वहाँ कौशल्या का मंदिर भी है। राज्य की कांग्रेस सरकार इसका पुनर्निर्माण करने जा रही है। यह संघ परिवार और भारतीय जनता पार्टी के राम मंदिर निर्माण अभियान की काट में कांग्रेस का ‘सॉफ़्ट हिदुत्व’ मुद्दा माना जा रहा है।

राम ने वनवास का काफी समय छत्तीसगढ़ में गुज़ारा था। मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश की सीमा पर स्थित चित्रकूट के बाद वे वर्तमान छत्तीसगढ़ की तरफ बढ़े। दंडकारण्य आज भी छत्तीसगढ़ के बस्तर का इलाक़ा है। छत्तीसगढ़ की एक शोध समिति राम वन गमन शोध समिति का दावा है कि चौदह में से बारह साल उन्होंने यहीं काटे। हालाँकि इसमें संशय है।

भारतीय जनता पार्टी को राममंदिर मुद्दे पर मिली चुनावी सफलता के बाद मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ में कांग्रेस ने राम वन गमन पथ के निर्माण का काम हाथ में लिया। मप्र में कमलनाथ सरकार के डेढ़ साल में ही गिर जाने से उसका यह एजेंडा पूरा नहीं हो सका परंतु छग की भूपेश बघेल सरकार इस पर काम कर रही है। उसने रामायण सर्किट के नौ स्थानों का चयन किया और 137.45 करोड़ रुपए की परियोजना तैयार की है। इसमें लगभग 75 स्थान चिह्नित किए गए हैं जहां राम ठहरे थे या जहा़ं से गुज़रे थे। अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास की घोषणा होने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राम की माता कौशल्या के जन्मस्थान पर भव्य मंदिर बनाने के लिए भूमिपूजन कर दिया है। यानी भाजपा राम का मंदिर बनाएगी तो कांग्रेस उनका ननिहाल संवारेगी।

कौशल्या के बचपन और कुल के बारे में रामायण ज्यादा कुछ नहीं कहती। जबकि उनकी सौतेली कैकेयी और सुमित्रा के परिवारों और परवरिश पर काफी लिखा गया है। कुछ लेखक कौशल्या को सामान्य घराने से संबद्ध बताते हैं जिसके पक्ष में उनकी दशरथ कुल में उनकी अवस्थिति और स्वभाव का हवाला देते है। दूसरी तरफ उन्हें दक्षिण कौशलाधिपति भानुमान की पुत्री बताया गया है।

रामायण में वर्णित कौशल प्रदेश की राजधानी अयोध्या थी और यह इलाका वर्तमान उत्तरप्रदेश में था। बुद्ध का जन्म इसी कौशल में हुआ। इसलिए छग वाले इलाके का नाम दक्षिण कौशल समझा जाता है। मान्यताओं में रायपुर से सटे चंदखुरी गाँव को कौशल्या का जन्मस्थान माना गया है। यहाँ स्थित कौशल्या मंदिर की प्राचीनता के लिए पुरातात्विक साक्ष्य भी तलाशने होंगे। मंदिर के पुजारी का कहना है कि यहां कौशल्या की मूर्ति आठवीं सदी की है। बताते हैं कि भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री रमनसिंह की सरकार ने भी इसके विकास का वादा किया था।

मंदिर परिसर को राज्य सरकार 16 करोड़ रुपए की लागत से सँवारने जा रही है। मंदिर तालाब में स्थित है जिसमें हाईटैक पुल बनाया जाएगा। यही नहीं, बलौदाबाजार के तुरतुरिया में बाल्मीकि आश्रम को भी सँवारने की योजना है। माना जाता है कि यहाँ लव और कुश का जन्म हुआ था। हालाँकि यह मान्यता मप्र के करीला ( अशोकनगर), अमृतसर, बिहार व नेपाल में भी है। तुरतुरिया में पर्यटन स्थल विकसित किया जाएगा। यहाँ महानदी, शिवनाथ और जोंक नदियों का संगम है। इसके अलावा,शिबरीनारायण को भी सँवारने की तैयारी है। वनवास के समय राम यहाँ रुके यद्यपि उनके यहां बचपन गुज़ारने के बारे में लोक साहित्य में संदर्भ नगण्य हैं पर कुछ मान्यताएँ श्रद्धा व आस्था का आधार हैं।

शेयर करें :

इसे भी पढ़ें...

कोरोना की तीसरी लहर आई तो बच्चों को कैसे दें सुरक्षा कवच

नई दिल्ली 12 मई 2021 । भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर से हाहाकार …