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अब संघ के जरिए दूर होगी भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराजगी

भोपाल  1 जुलाई 2018 । भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं की नाराजगी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जरिए दूर की जाएगी। पार्टी को मिले फीडबैक के मुताबिक कई विधानसभा क्षेत्रों में विधायक और मंत्रियों के एकाधिकार के कारण बहुत सारे कार्यकर्ता लंबे समय से उपेक्षित हैं। इसका असर चुनाव पर न पड़े, इसके लिए पार्टी संघ की मदद ले रही है। बाकायदा कार्यकर्ताओं को मनाने के लिए वरिष्ठ नेताओं की डैमेज कंट्रोल टीम बनाई है। जो संघ नेताओं और संगठन मंत्रियों की मदद से कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करेंगे।

चुनाव नजदीक होने के कारण पार्टी चाहती है कि कार्यकर्ताओं की नाराजगी से माहौल खराब न हो। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के संभाग व जिलों के दौरों में पता चला है कि अपने एकाधिकार के कारण कई विधायक और मंत्रियों ने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की ही है, पूरे कार्यकाल में विधायकों ने सिर्फ अपनों को ही उपकृत किया है। इसके चलते कार्यकर्ता घर से बाहर नहीं निकल रहा है। पार्टी नेताओं का सोचना है कि ऐसा हुआ तो चुनाव में कई क्षेत्रों में नुकसान उठाना पड़ सकता है। बड़े नेताओं के दौरों में कई कार्यकर्ताओं ने चेतावनी भरे अंदाज में अपना संदेश भी दिया है। यही वजह है कि राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल दौरे पर भोपाल आए तो उन्होंने सारे उन बड़े नेताओं से बातचीत की जो हाशिए पर हैं।

असंतुष्टों पर नजर –

पार्टी अब उन असंतुष्ट कार्यकर्ताओं पर नजर रख रही है जो चुनाव में दिक्कत दे सकते हैं। लिहाजा विधानसभावार ऐसे कार्यकर्ताओं की सूची तैयार की जा रही है। ऐसे कार्यकर्ताओं के साथ पार्टी की डैमेज कंट्रोल टीम बात करेगी। इसके लिए संघ नेताओं की मदद ली जाएगी। पार्टी नेताओं का मानना है कि जनता भाजपा के साथ है इसलिए कार्यकर्ताओं को मना लिया जाएगा।

चौथे सर्वे में खिलाफ आई राय तो कटेगी भाजपा विधायकों की टिकट

 विधायकों का प्रदर्शन जानने के लिए जुलाई के महीने में होने वाले सर्वे में कार्यकर्ताओं की राय भी ली जाएगी। ये राय विधायक की टिकट के लिए काफी महत्वपूर्ण होगी। पार्टी नेताओं का मानना है कि जिन विधानसभा क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं का अभिमत विधायक के खिलाफ होगा, उसे टिकट मिल पाना मुश्किल होगा। इस सर्वे में आम मतदाताओं का रूझान, विधायकों के प्रति उनकी धारणा, जनता के बीच विधायक की मौजूदगी का भी आकलन किया जाएगा। विधानसभा चुनाव के टिकट बांटने से पहले हो रहे इस आखिरी सर्वे में खास बात ये है कि पार्टी कांग्रेस के संभावित प्रत्याशी और उसके बारे में भी लोगों की राय एकत्र  करेगी.

भाजपा प्रदेश में चौथी बार सरकार बनाने के लिए एड़ी-चोटी को जोर लगा रही है। इस बार का चुनाव पार्टी ने संगठन और कार्यकर्ताओं की बदौलत लड़ने का निर्णय लिया है। पार्टी के अंदरूनी हालात बताते हैं कि कार्यकर्ता अपनी उपेक्षा के कारण नाराज हैं। यही वजह है कि पार्टी ने सर्वे में कार्यकर्ताओं को तवज्जो देने का निर्णय लिया है। इससे पार्टी के दो फायदे होंगे। पहला तो विधायक के बारे में उसे सही जानकारी मिलेगी। दूसरा तवज्जो मिलने से कार्यकर्ता खुश हो जाएगा।

एमपी अगर बीजेपी चलती है हिंदुत्व कार्ड तो यह नेता होगा मुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार

मध्यप्रदेश के चुनावों में हिंदुत्व कभी कोई फैक्टर नहीं रहा है। हालांकि जब से केंद्र में मोदी सरकार बनी है, उसके बाद से हर राज्यों में हिंदुत्व फैक्टर काम जरूर करती है। लेकिन 2019 फतह के लिए बीजेपी इस साल मध्यप्रदेश के चुनावों में ऐसा प्रयोग कर सकती है।

जैसे यूपी के चुनावों से पहले धार्मिक संगठनों व आरएसएस की गतिविधियां प्रदेश में बढ़ गई थी, ठीक उसी तरह एमपी में भी ऐसा प्रयोग दिखाई दे रहा है। चुनावी साल में प्रदेश में धार्मिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। पिछले दिनों प्रदेश में धर्म संसद का आयोजन किया गया था। जिसमें पूरे देश से आए साधु संतों ने भाग लिया था। सीएम शिवराज सिंह चौहान भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था।

इसके साथ ही शिवराज ने चुनावी साल में पांच संतों को राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया। इसे लेकर सियासी बवाल भी खूब मचा, लेकिन शिवराज अपने फैसले अडिग रहे। हाल ही में बजरंग दल के द्वारा प्रदेश की लड़कियों व युवाओं को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही थी। इससे पहले प्रदेश से ऐसी तस्वीरें यदा-कदा ही देखने को मिलती थी।

ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि इस बार मध्यप्रदेश के चुनावों में हिंदुत्व का मुद्दा रहेगा। क्योंकि प्रदेश में एंटी इंकंबेसी फैक्टर भी काम रही है। ऐसे में लोगों के सामने मजबूत मुद्दा की तलाश में थी बीजेपी।

अगर एमपी में हिंदुत्व हावी रहा तो बीजेपी अपने इस एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए सीएम उम्मीदवार भी उसी छवि का चाहेगा। ऐसे में उस खांचे में सबसे फिट एमपी बीजेपी के नेता कैलाश विजयवर्गीय बैठते हैं। कैलाश बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव हैं और उनकी छवि बिल्कुल फायर ब्रांड हिंदू नेता की है। राष्ट्रीय लेवल पर भी पहचान है। विजयवर्गीय इंदौर से आते हैं।

ऐसे में यह प्रबल संभावना है कि किसानों और ग्रामीणों को मुद्दों से भटकाने के लिए बीजेपी इस बार हिंदुत्व का कार्ड खेल सकती है। शिवराज को राष्ट्रीय राजनीति में शिफ्ट कर किसी और को मौका दे सकती है।

मध्य प्रदेश: चुनाव से पहले गरमाई राजनीति, शिवराज पर लगा 30 लाख की एसयूवी खरीदने का आरोप

मध्य प्रदेश विधानसभा के तीन दिवसीय मानसून सत्र की समाप्ति के बाद विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर आरोप लगाया है। पार्टी ने कहा है कि मुख्यमंत्री ने किसान सड़क निधि योजना के पैसों से अपने लिए 30 लाख रुपये की एसयूवी गाड़ी खरीदी है। बता दें किसान सड़क निधि का फंड मध्य प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा अनुरक्षित किया जाता है। जिसे आमतौर पर मंडी बोर्ड भी कहा जाता है। इस बोर्ड का काम ग्रामीण इलाकों में सड़क और पुलों का निर्माण करने के साथ उनकी देखभाल करना भी है।
विपक्षी पार्टी के नेता अजय सिंह ने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब राज्य में किसान आत्महत्या कर रहे थे तब वहां के मुख्यमंत्री के लिए 30 लाख रुपये की फॉर्च्यूनर गाड़ी खरीदी गई। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि वह किसान सड़क निधी की सशक्त समिति के सह-अध्यक्ष हैं।
उन्होंने कहा कि यह गाड़ी 6 जून 2017 को मंदसौर में हुए किसान गोलीकांड से महज एक महीने पहले ही खरीदी गई थी। उस वक्त गोलीकांड में करीब 5 किसानों की मौत हुई थी। उन्होंने कहा, गाड़ी खरीदने के अलावा आरटीओ एजेंट के माध्यम से गाड़ी का वीआईपी नंबर लेने के लिए करीब 32,070 रुपये भी खर्च किए गए। इस राशि में एजेंट के पैसे भी शामिल थे।
वहीं मंडी बोर्ड के प्रबंध निदेशक फैज अहमद किदवई ने इस बात की पुष्टि की है कि एसयूवी गाड़ी मुख्यमंत्री के आधिकारिक इस्तेमाल के लिए ही खरीदी गई थी। उन्होंने कहा कि वह इस बात की जांच करेंगे कि गाड़ी किस योजना के फंड से खरीदी गई। मामले पर राज्य सरकार के प्रवक्ता और संसदीय कार्य व जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।

उज्जैन शहर कांग्रेस अध्यक्ष तय…सिर्फ घोषणा बाकी

शहर कांग्रेस अध्यक्ष के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं उज्जैन विकास प्राधिकरण के पूर्व उपाध्यक्ष महेश सोनी का नाम लगभग तय हो चुका है। जबकि जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष पद के लिए अभी कोई नाम तय नहीं हो पाया है।
हालांकि कुछ नेताओं के नाम जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष पद के लिए वरिष्ठ नेताओं के समक्ष पहुंचे हैं। गुरुवार-शुक्रवार की रात एक बजे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया से कांग्रेस नेताओं ने देवास रोड सर्किट हाउस पर चर्चा की। इस दौरान बावरिया ने महेश सोनी से कहा कि वह संगठन को अच्छी तरह से चलाए।

इससे इस बात का संकेत गया है कि उनका नाम अध्यक्ष के लिए लगभग फाइनल हो चुका है। पूर्व विधायक डॉ. बटुकशंकर जोशी ने महेश सोनी के नाम को आगे बढ़ाया है। जबकि जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष पद के लिए जो नाम अभी चर्चा में उसमें तराना नगर पंचायत अध्यक्ष उमेश शर्मा, ग्राम पंचायत भैंसोदा के सरपंच कमल पटेल, मुरली मोरवाल, नारायणसिंह भाटिया, बहादुरसिंह पटेल आदि शामिल है।

सिंधिया करेंगे प्रदेश का दौरा, बनायेंगे टीम

ज्योतिरादित्य सिंधिया की अध्यक्षता में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में चुनाव प्रचार अभियान समिति की तीसरी बैठक संपन्न हुई। सिंधिया ने सदस्यों से कहा कि जो संकल्प और निर्णय हमने इन तीन बैठकों में लिये हैं अब उन्हें जमीन पर उतारने का समय है। अगले तीन दिन में संभागीय चुनाव प्रचार अभियान समिति का गठन कर दिया जायेगा। हर संभागीय समिति में 25 सदस्य शामिल रहेंगे। संभागीय अध्यक्ष अपने संभाग में विधानसभावार चुनाव प्रचार अभियान समिति गठित करेंगे जिसमें अधिकतम ग्यारह सदस्य रहेंगे। संभाग स्तरीय समिति बनने के बाद वह ब्लाकवार दौरा करके प्रचार अभियान की शुरूआत करेगी। यह अभियान 10 जुलाई से 10 अगस्त तक चलेगा।
सिंधिया ने कहा कि वे स्वयं भी जिलों का दौरा करेंगे। इस दौरान कोई आमसभा नहीं होगी। अब चुनाव अभियान समिति की बैठक भोपाल में न होकर हर संभाग की अलग-अलग होंगी। इसी तारतम्य में सिंधिया अपना दौरा आगामी 10 जुलाई से शुरू करेंगे। वे 11 जुलाई को खजुराहो पहुंचकर वहां टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना के चुनाव अभियान समिति के सदस्यों की बैठक लेंगे और उसके बाद इन जिलों में जनसंपर्क करेंगे। इस बैठक में चुनाव अभियान समिति के सदस्य मुकेश नायक उपस्थित रहेंगे। सिंधिया 12 जुलाई को रीवा में रीवा, सतना और सीधी के चुनाव अभियान समिति सदस्यों की बैठक लेंगे। प्रचार समिति के सदस्य राजमणि पटेल इस बैठक में उपस्थित रहेंगे।
सिंधिया 13 जुलाई को शहडोल में शहडोल, उमरिया और अनूपपुर जिलों की बैठक लेंगे और जनसंपर्क करेंगे। बैठक में इंद्रजीत कुमार पटेल उपस्थित रहेंगे। वे 14 जुलाई को जबलपुर में जबलपुर, मंडला और डिंडौरी और 15 जुलाई को दमोह में दमोह, सागर और कटनी जिलों की बैठक और जनसंपर्क । जबलपुर की बैठक में विवेक तन्खा और दमोह की बैठक में मुकेश नायक उपस्थित रहेंगे। बैठक में कांग्रेस पदाधिकारी चंद्रप्रभाष शेखर, गोविंद गोयल सहित समिति के सदस्यगण कांतिलाल भूरिया, सज्जनसिंह वर्मा, रामनिवास रावत, मुकेश नायक, जीतू पटवारी, सुरेन्द्र चौधरी, राजमणि पटेल, इंद्रजीत पटेल, राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, हृदयमोहन जैन, रामगोपाल राजपूत, मनोज पाल यादव, अर्चना जायसवाल, मीडिया प्रभारी मानक अग्रवाल, मीडिया सदस्य पंकज चतुर्वेदी, सैयद जाफर, मोर्चा संगठन के अध्यक्ष योगेश यादव, मांडवी चौहान, कुणाल चौधरी, विपिन वानखेड़े और अजय शाह उपस्थित थे।

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