मुख्य पृष्ठ >> खास खबरें >> अब संघ जुटा रहा भाजपा के लिए प्रत्याशी

अब संघ जुटा रहा भाजपा के लिए प्रत्याशी

भोपाल 3 जुलाई 2018 ।  मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव नज़दीक है। ऐसे में भाजपा की चुनावी स्थिति के नतीजे पूरी तौर पर सुगम ना आने के चलते केंद्र और राज्य सरकार के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी भाजपा के लिए चुनावी तैयारी करने में जुट गया है। संघ अब भाजपा के लिए मज़बूत प्रत्याशियों का चयन करने में जुटा है। सरकार पहले ही यह तय कर चुकी है कि, जिन विधायकों का रिकार्ड जनता के बीच ठीक नहीं होगा, या उनके कार्यकाल में उनका परफार्मेंस ठीक नही होगा। ऐसे विधायक आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट की उम्मीद ना रखें।

नकारात्मक नतीजों ने बढ़ाई चिंता

इसी के मद्देनज़र संघ द्वारा प्रदेशभर के लगभग सभी विधायकों का सर्वे कराया गया, जिसमें करीब 70 फीसदी विधायकों के प्रति नतीजे नकारात्मक सामने आए। कई विधायकों को लेकर क्षेत्र की जनता नाराज़ भी दिखी। इसकी रिपोर्ट बनाकर संघ ने केंद्र और राज्य सरकार को भेज दी है। साथ ही, अब उन सीटों के लिए प्रत्याशियों को ढूंढा जा रहा है, जो इन 70 फीसदी विधायकों की जगह जीत सकें। संघ सूत्रों के मुताबिक, इसके लिए उन इलाकों के सभी विभागीय संघ प्रचारकों को उनके इलाके की विधानसभा सीट के लिए मज़बूत उम्मीदवार का चयन करने की जिम्मेदारी दी जा चुकी है, जिनका काम यह होगा कि, वह इस बात की जांच करें कि, उनकी विधानसभा क्षेत्र में प्रभावशाली व्यक्ति कोन है।

आलाकमान लेगा अंतिम फैसला

क्षेत्रीय संघ प्रचारकों ने अब तक जिन जिन लोगों के नामों का चयन कर लिया है, उनके नाम और विवरण से जुड़ी एक रिपोर्ट तैयार की जा रही है। यह रिपोर्ट भाजपा की आलाकमान और संघ की आलाकमान के समक्ष पेश की जाएगी, जो इस बात का फैसला लेंगे कि, एक विधानसभा क्षेत्र में ज़्यादा प्रबल उम्मीदवार कोन है। इसमें चयनित होने वाले व्यक्ति को पार्टी चर्चा कर प्रत्याशी के रूप में विधानसभा क्षेत्र की ज़िम्मेदारी सौंपेगी।

केंद्र भी कर रहा है यह तैयारी

पिछले दिनों विधायक दल की बैठक में शामिल होने राजधानी आए संगठन महामंत्री रामलाल ने भी विधायकों को सीधे तौर पर इस बात की हिदायत कर दी थी कि, इस बार का चुनाव कार्यकाल के कामो के आधार पर होगी। प्रत्याशी अपने कामों को लेकर इलाके में प्रचार करेगा। रामलाल ने इस बातो को स्पष्ट रूप से विधायकों को समझा दिया था कि, जो लोग कुछ समय में ही उनके प्रति बिगड़ी स्थितियों को सुधार नही सकते वह लोग आगामी चुनाव के लिए टिकट की प्रतिक्षा ना करें। उन्होंने विधायकों से दो टूक कहा था कि अगर प्रदेश के सर्वे में प्रत्याशी के लिए उनका नाम होगा और केंद्र के सर्वे में नाम नहीं हुआ तो उन्हें टिकट देने पर विचार नहीं किया जाएगा। इससे भाजपा में यह संदेश भी गया है कि प्रत्याशी चयन पूरी तरह केंद्रीय नेतृत्व के हाथ में होगा।

राज्यसभा की 4 मनोनीत सीटों के लिए दावेदारी शुरू, इन नामों पर लग सकती है मुहर

राज्यसभा के चारो मनोनीत सदस्य गुरुवार 28 जून को रिटायर हो गए हैं। हालांकि तीन सीट सचिन तेंदुलकर, रेखा, अनु आगा पहले ही रिटायर कर गए थे मगर 28 जून को के परासरन भी रिटायर हो गए। सरकार सभी चारों सीटें एक ही बार में नियुक्ति करना चाह रही थी इसीलिए के परासरन को रिटायर होने का इंतजार कर रही थी। चौथी सीट खाली होने से पहले कैबिनेट कमिटी ने 18 जुलाई से संसद का मानसून सत्र बुलाने की शिफारिश की है। यह सत्र इस लिए मायने रखता है कि इस सत्र में राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव करना है।

बीजेपी अपना उपसभापति बनवाने के लिए पूरी तैयारी में है, हालांकि अपने उम्मीदवार को जीताने के लिए उनके पास संख्या बल नहीं है। बीजेपी इस कमी को दूर करने के लिए अपने संभावित मित्र दलों को टटोल रही है। बीजेपी ने तेलंगाना में के चन्द्र शेखर राव के टीआरएस, आंध्रप्रदेश में जगन मोहन रैड्डी के व्याएसआर, और उड़ीसा में नवीन पटनायक के बीजेडी को अपने साथ लाने की कोशिश में है। बीजेपी सरकार सत्र शुरू होने से पहले ही इन चारों सीटों पर सदस्यों को मनोनीत करवा देना चाहती है ताकि चुनाव के समय इन्हें इसका फायदा मिल सके।

इस साल जो सीटें खाली हुई है वो फिल्म, खेल, सामाजिक कार्य और कानून से जुड़े हैं। यूपीए सरकार ने फिल्म से रेखा, खेल से सचिन तेंदुलकर, सामाजिक क्षेत्र से अनु आगा और कानून से के पराशरन को मनोनीत कराया था। अब इन्हीं चारों क्षेत्रों में एनडीए सरकार भी मनोनीत करने जा रही है। पिछले दिनों बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने सरकार के लिए समर्थन के दौरान कई हस्तियों से मिले थे हालांकि इन दोनों जिन लोगों से मिले हैं वो संभावित लिस्ट में हैं।

बताया जा रहा है कि बीजेपी नेइन सभी चारों सीटो के लिए लगभग अपना मन बना लिया है। इनमें फिल्म से रेखा की जगह माधुरी दीक्षित पर मन बन चुका है, माधुरी दीक्षित हरियाणा में बेटी बचाओ बेटी बचाओ अभियान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रही थीं पिछले दिनों अमित शाह मुंबई में माधुरी दीक्षित से मिल चुके हैं। इसके अलावा एक नाम अक्षय कुमार का भी है अक्षय कुमार किसी ना किसी तरह सरकार के ऐजेंडे को लेकर काम करते रहे हैं। आगे 15 अगस्त को उनकी फिल्म हॉकी की इतिहास के गोल्ड आ रही है जो राष्ट्रवाद की पूरी लवरेज से भरा हुआ है।

खेल से सचिन तेंदुलकर की जगह कपिल देव को लेकर तैयारियां चल रही है बताया यह भी जा रहा है कि पार्टी कपिल देव को चंडीगढ़ से लोकसभा भी लड़ाने की तैयारी है मगर राज्य सभा के लिए चर्चा शुरू हो गई है। अमित शाह कपिल देव से चंडीगढ़ में मिले थे। कानून क्षेत्र से हरीश साल्वे या फिर मुकुल रोहतगी रेस में है इन दिनों में से ही किसी एक को चुने जाने की संभावना है। एक और नाम चल रहा है सुभाष कश्यप का अमित शाह इनसे भी मिले थे। लेकिन सामाजिक क्षेत्र से कई बड़े नाम है जिनका जल्द ही तय कर लिया जाऐगा लेकिन जो भी होगा ऐसा नाम होगा जो बीजेपी को लाभ पहुंचा सके।

यूपीए सरकार ने भी इन हस्तियों को राज्य सभा इसलिए लाए थे कि वो इनका उपयोग लोकसभा चुनाव में स्टार कंपेनर के तौर पर कर सके मगर उन्हें वो इनका लाभ नहीं ले सके सचिन तेंदुलकर, रेखा ने चुनाव प्रचार करने से मना कर दिया था। अब देखना है कि एनडीए सरकार इन हस्तियों को 2019 के लोकसभा चुनाव में स्टार कंपेनर बना सकते हैं या नहीं। गौरतलब है कि ऐ मनोनीत सदस्य किसी दल के लिए कम ही प्रचार करते हैं क्योंकि इनका मनोनयन राष्ट्रपति के हाथों होता है। लेकिन यह भी सही है कि जिस पार्टी की सरकार होती है वो अपने समर्थित लोगों को ही यह मौका देते हैं।

 नेता पुत्रों के टिकट खतरे में, हाईकमान नाराज

मध्यप्रदेश में 1 दर्जन से ज्यादा दिग्गज नेताओं ने अपने पुत्रों को विधानसभा चुनाव 2018 के लिए तैयार कर दिया है। पिछले कुछ सालों में नेताओं ने कई कार्यक्रमों में अपनी जगह अपने पुत्रों को भेजा। सरकारी साधन मुहैया कराए यहां तक कि कुछ सरकारी कार्यक्रमों में भी पुत्रों का प्रदर्शन किया गया लेकिन भाजपा का हाईकमान दिग्गज नेताओं की इन हरकतों से नाराज है। अमित शाह की टीम नहीं चाहती कि नेताओं के बेटे, बेटी या रिश्तेदारों को टिकट मिले और भाजपा पर वंशवाद का आरोप लगे।

केंद्रीय नेतृत्व ने इतनी राहत जरूर दी है कि यदि किसी नेता का बेटा या बेटी पार्टी में सक्रिय है और जीतने लायक चेहरा है तो उनके पिता को अपनी सीट खाली करनी पड़ेगी। 2018 के विधानसभा चुनावों में संभवत: पहली बार होगा कि जब भाजपा में 17 नेताओं के पुत्र-पुत्री या अन्य परिजन टिकट की दावेदारी पेश कर रहे हैं। पिछले दो बार के चुनावों से यह सर्वाधिक है। इस बार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय चुनाव से ठीक पहले खासे सक्रिय दिख रहे हैं। हाल ही में वे मोर्चा की बाइक रैली के दौरान पहले सीहोर में फिर पन्ना और सतना भी गए। उन्होंने कहा है कि वो चुनाव नहीं लड़ेगे परंतु शिवराज सिंह का फैसला कब बदल जाए कहा नहीं जा सकता।

भाजपा में परिवारवाद पहले से ही स्थापित है
वंशवाद का मुखर विरोध करने वाली बारतीय जनता पार्टी में ऐसे भी कई उदाहरण हैं, जिसमें परिवार के लोग ही सत्ता में हैं। सांसद प्रहलाद पटेल के भाई जालिम सिंह पटेल राज्य सरकार में मंत्री हैं। कैबिनेट मंत्री विजयशाह के भाई संजय शाह विधायक और पत्नी महापौर रह चुकीं हैं। पूर्व मंत्री व सांसद ज्ञान सिंह के बेटे शिवनारायण को भाजपा ने उपचुनाव में टिकट दिया, जीतकर वे विधायक हैं। केंद्रीय मंत्री थावरचंद गेहलोत के बेटे जितेंद्र विधायक हैं। वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह पाल के भाई विजयपाल दो बार से विधायक हैं। इसी तरह पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते के भाई रामप्यारे कुलस्ते विधायक हैं। अब उनकी बेटी या दामाद में से कोई एक दावेदार होगा।

कांग्रेस में नेता पुत्रों से परहेज नहीं
कांग्रेस को नेता पुत्रों को विधानसभा चुनाव का टिकट देने से कोई परहेज नहीं है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के पुत्र नकुल नाथ की राजनीति में सक्रियता कम है। वे सिर्फ नाथ के कार्यभार ग्रहण करने के समय ही मंच पर नजर आए थे, उसके बाद पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में नहीं दिखे। नाथ भी स्पष्ट कर चुके हैं कि नकुल अभी राजनीति में नहीं है। वहीं प्रदेश कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेटे महाआर्यमन सिंधिया अभी 22 साल के हैं और किसी भी राजनीतिक गतिविधि में शामिल नहीं होते हैं। वे सिर्फ अपनी मां प्रियदर्शनी राजे सिंधिया के साथ सामाजिक गतिविधियों में नजर आते थे। हाल ही में उन्होंने सिंधिया के संसदीय क्षेत्र गुना-शिवपुरी-अशोकनगर का दौरा किया। उन्होंने सार्वजनिक स्थानों पर चाय पी तो कहीं आलू की टिकिया बनाकर लोगों को खिलाई। इस दौरान उन्हें जनसमर्थन भी मिला। दिग्विजय सिंह स्वयं राज्यसभा सांसद हैं और उनके बेटे जयवर्धन सिंह विधायक हैं। दोनों ही राजनीति में सक्रिय हैं।

पिता की दम पर तैयार हुए ये युवराज
नरेंद्र सिंह तोमर के पुत्र रामू,

प्रभात झा के बेटे तुष्मुल,

कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश,

गोपाल भार्गव के पुत्र अभिषेक,

जयंत मलैया के बेटे सिद्धार्थ,

मालिनी गौड़ के बेटे एकलव्य,

सुमित्रा महाजन के पुत्र मंदार,

गौरीशंकर बिसेन की बेटी मौसम,

माया सिंह के पुत्र पीतांबर सिंह,

गौरीशंकर शेजवार के पुत्र मुदित,

नरोत्तम मिश्रा के बेटे सुकर्ण मिश्रा,

कमल पटेल के बेटे सुदीप,

नंदकुमार सिंह चौहान के बेटे हर्षवर्धन।

इस विषय में नेता पुत्रों के तर्क
नेता-पुत्र होने के आधार पर ही टिकट कटना या मिलना ठीक नहीं, लेकिन भाजपा में काम के आधार पर फैसला हो।

रामू तोमर (पिता नरेंद्र सिंह तोमर)

तुष्मुल झा (पिता प्रभात झा)
यह सही है कि एक दिन में कोई कार्यकर्ता नहीं बनता। मेरे परिवार में राजनीतिक माहौल बचपन से है। मैं 3-4 साल से युवा मोर्चा में हूं।

सिद्धार्थ मलैया (पिता जयंत मलैया)
यह पार्टी को तय करना है, लेकिन मैं 14 साल से सक्रिय हूं। पहले युवा मोर्चा में प्रदेश कार्य समिति सदस्या था, अब शिक्षा प्रकोष्ठ देख रहा हूं।

इस सर्वे में खिलाफ आई राय तो कटेगी भाजपा विधायकों की टिकट

विधायकों का प्रदर्शन जानने के लिए जुलाई के महीने में होने वाले सर्वे में कार्यकर्ताओं की राय भी ली जाएगी। ये राय विधायक की टिकट के लिए काफी महत्वपूर्ण होगी। पार्टी नेताओं का मानना है कि जिन विधानसभा क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं का अभिमत विधायक के खिलाफ होगा, उसे टिकट मिल पाना मुश्किल होगा। इस सर्वे में आम मतदाताओं का रूझान, विधायकों के प्रति उनकी धारणा, जनता के बीच विधायक की मौजूदगी का भी आंकलन किया जाएगा। विधानसभा चुनाव के टिकट बांटने से पहले हो रहे इस आखिरी सर्वे में खास बात ये है कि पार्टी कांग्रेस के संभावित प्रत्याशी और उसके बारे में भी लोगों की राय एकत्र करेगी। भाजपा प्रदेश में चैथी बार सरकार बनाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। इस बार का चुनाव पार्टी ने संगठन और कार्यकर्ताओं की बदौलत लड़ने का निर्णय लिया है। पार्टी के अंदरूनी हालात बताते हैं कि कार्यकर्ता अपनी उपेक्षा के कारण नाराज हैं। यही वजह है कि पार्टी ने सर्वे में कार्यकर्ताओं को तबज्जो देने का निर्णय लिया है। इससे पार्टी के दो फायदे होंगे। पहला तो विधायक के बारे में उसे सही जानकारी मिलेगी। दूसरा तबज्जो मिलने से कार्यकर्ता खुश हो जाएगा।

शेयर करें :

इसे भी पढ़ें...

ये तो छोड़कर चले गए थे…अशोक गहलोत ने सचिन पायलट गुट के विधायकों पर कसा तंज

नयी दिल्ली 4 दिसंबर 2021 । अशोक गहलोत और सचिन पायलट राजस्थान कांग्रेस में सबकुछ अच्छा …