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अब विंडो टिकट बुक कराने वालों को भी मिलेगा विकल्प का लाभ

नई दिल्ली 1 जून 2018 । रेलवे ने अपने आरक्षण फॉर्म में कुछ संशोधन किए हैं। इससे काउंटर से टिकट बुक कराने वाले यात्रियों को वैकल्पिक ट्रेन समायोजन योजना का लाभ मिल सकेगा। वर्तमान में इस योजना का लाभ ऑनलाइन टिकट बुक कराने वाले यात्रियों को ही मिलता है।

प्रतीक्षा सूची में शामिल यात्रियों को कन्फर्म टिकट दिलाने और उपलब्ध स्थान का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए 2015 में “ऑल्टरनेट ट्रेन अकोमोडेशन स्कीम विकल्प” की शुरुआत की गई थी।

यह सुविधा केवल ऑनलाइन टिकट बुक करने वालों के लिए शुरू की गई थी। इस योजना के तहत किसी ट्रेन की वेटिंग लिस्ट में शामिल यात्री वैकल्पिक ट्रेनों में कन्फर्म टिकट चुन सकते हैं।

रेल मंत्रालय ने कहा है, “संशोधित आरक्षण फॉर्म में यात्रियों को विकल्प योजना चुनने का मौका दिया जाएगा। वह इसे प्राथमिकता दे रहे हैं या नहीं इसके लिए उन्हें फॉर्म पर दिए गए कॉलम में यस या नो भरना होगा।

यदि यात्री विकल्प को चुनते हैं तो उन्हें 12, 24 या 48 घंटे के भीतर रवाना होने वाली वैकल्पिक ट्रेन पर मार्क करना होगा। यात्रियों को आरक्षण फॉर्म पर आधार नंबर का उल्लेख करने का विकल्प भी दिया गया है।”

रेल की सुस्त ‘रफ्तार’ को अब लगेगा पंख, सेमी-हाईस्पीड ट्रेन चलाने की तैयारी

रेलमंत्री पीयूष गोयल ने लेटलतीफी दूर करने के लिए ट्रेनों की औसत रफ्तार बढ़ाने तथा दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा रूटों को तीन महीने के भीतर 160 किलोमीटर की रफ्तार वाली ट्रेनों के योग्य बनाने के अफसरों को निर्देश दिए हैं।

रेलमंत्री ने ये निर्देश पिछले तीन वर्षों से चलाए जा रहे “मिशन रफ्तार” की सुस्त रफ्तार को देखने के बाद दिए हैं। मिशन की समीक्षा के लिए आयोजित सम्मेलन में उन्होंने इस स्थिति के लिए रेलवे बोर्ड और जोनल रेलों के आला अधिकारियों को आड़े हाथ लिया। साथ ही बहानेबाजी छोड़ काम की रफ्तार बढ़ाने की ताकीद की।

गोयल ने पाया कि तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी मिशन रफ्तार में मामूली प्रगति हुई है। जबकि सरकार ने इसी मिशन के बूते ही प्रमुख रूटों पर ट्रेनों की औसत स्पीड बढ़ाने और 160 किलोमीटर गति वाली सेमी-हाई स्पीड ट्रेने चलाने का मंसूबा बांधा था। हालत ये है कि एक भी रूट अभी इसके लिए पूर्णतया तैयार नहीं है। गोयल ने इस पर नाराजगी जताते हुए अगले तीन महीनों में दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा रूटों पर चल रहे समस्त कार्यों को पूरा करने को कहा है।

दरअसल, सरकार का इरादा अगले आम चुनावों से पहले रेलवे में कोई बड़ी उपलब्धि दिखाने का है। चूंकि फिलहाल जनता की सबसे ज्यादा शिकायत ट्रेनों की लेटलतीफी को लेकर हैं। लिहाजा गोयल ने इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देने तथा कम से कम दो सेमी-हाईस्पीड ट्रेनें चला देने का है। इसके लिए शीघ्र ही कैबिनेट में प्रस्ताव भेजे जाने की संभावना है।

दिल्ली-आगरा के बीच गतिमान एक्सप्रेस पहले ही 160 किलोमीटर की रफ्तार पर चल रही है। लेकिन आगरा के बाद झांसी तक इसे 130 किमी पर चलाया जा रहा है। गोयल इससे असंतुष्ट हैं और उन्होंने पूरे ट्रैक में जरूरी सुधार के निर्देश दिए हैं। हालांकि दिल्ली-मुंबई सेमी हाईस्पीड ट्रेन को झांसी के बजाय कोटा रतलाम रूट वाले रूट पर चलाया जाएगा।

गोयल ने दिल्ली-हावड़ा रूट को भी सेमी-हाईस्पीड लायक बनाने तथा खासकर गाजियाबाद-मुगलसराय ट्रैक की अड़चनों को शीघ्रातिशीघ्र दूर करने को कहा है। इसके अलावा उन्होंने जिन रूटों पर काम तेज करने को कहा है कि उनमें हावड़ा-चेन्नई, दिल्ली-चेन्नई तथा हावड़ा-मुंबई रूट शामिल हैं।

मिशन रफ्तार पर हुई कांफ्रेंस में अफसरों को अन्य मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों की रफ्तार में औसतन 25 किलोमीटर की बढ़ोतरी का लक्ष्य सौंपा है। अभी यात्री ट्रेनों की औसत रफ्तार 44 किलोमीटर, जबकि मालगाड़ियों की 24 किलोमीटर है।

इसके लिए ट्रैक और सिग्नल प्रणाली में सुधार के अलावा मानव रहित क्रासिंगों को पूरी तरह समाप्त करने तथा नगरीय सीमा में ट्रैक के दोनों ओर बाड़ लगाने के कार्यों में तेजी लाने को कहा गया हैं। ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने के लिए उच्च हार्सपावर के लोकोमोटिव इस्तेमाल करने की योजना भी बनाई गई है।

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