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जम्मू-कश्मीर में धारा 370 हटाने का विरोध करने पर उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती पर देशद्रोह का केस दर्ज

नई दिल्ली 11 अगस्त 2019 । जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुला सहित कई नेताओं के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज हुआ है। ये मुकदमें में बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया कोर्ट में दर्ज कराए गए हैं। वकील ने देशद्रोह का मामला इसलिए दर्ज करवाया है क्योंकि इन नेताओं ने अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने का विरोध किया था। वकील का कहना है, “कोर्ट ने मामले पर संज्ञान लिया है। अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी।”

वकील अली मुराद ने बताया है कि मैंने महबूबा मुफ्ती, उमर अब्दुल्ला और अन्य नेताओें पर आईपीसी की धारा 124 ए (सरकर के खिलाफ कुछ लिखना या बोलना, संविधान का अपमान करना), 153 ए (धर्म, नस्ल, भाषा आदि के तहत लोगों में नफरत फैलाने का काम करना) 153 बी, 504 (शांति भंग करने की कोशिश करना),120 बी के कहत केस दायर कराया है।

बता दें कि केंद्र सरकार ने जब से जम्मू-कश्मीर से 370 को हटाया गया है तभी से महबूबा मुफ्ती समेत कई नेता इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। महबूबा मुफ्ती ने इसका विरोध करते हुए भारतीय लोकतंत्र का काला दिन भी बता दिया था।

नेशनल कॉफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने को लेकर यह बयान दिया था कि भारत सरकार का यह फैसला घाटी के लोगों के साथ किया गया धोखा है। गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटाए जाने से पहले पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और नेशनल कॉफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला को नजरबंद किया गया था।

बैंक भ्रष्टाचार मामले में महबूबा मुफ्ती के खिलाफ सबूत मिले, लटकी गिरफ्तारी की तलवार!

जम्मू-कश्मीर बैंक भ्रष्टाचार मामले में जांच एजेंसी को पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और उनके कई सहयोगियों (पूर्व मंत्रियों) के खिलाफ पक्के सबूत हाथ लग गए हैं। ऐसे में अब इन नेताओं की मुसीबतें बढ़ने जा रही हैं। आने वाले दिनों में किसी भी वक्त इन नेताओं की गिरफ्तारी हो सकती है। सूत्र बताते हैं कि एनआईए को ऐसे पक्के सबूत मिले हैं, जिनसे यह पता चलता है कि उक्त नेताओं ने जम्मू-कश्मीर बैंक में अपनी मनमर्जी से काम कराया है।
करीब 48 हजार खाते ऐसे मिले हैं, जिनमें कई तरह की अनिवार्य सूचनाओं का अभाव है। कुछ खाते तो ऐसे पाए गए हैं, जिनमें नाम पता गलत होने के अलावा व्यक्तिगत पहचान बताने वाला कोई दस्तावेज ही नहीं लगा है। इसके अलावा बैंक में ऐसे कर्मियों की भर्ती की गई, जिन्होंने कथित नेताओं के इशारे पर आतंकी संगठनों की मदद के लिए तय मापदंडों को दर-किनार कर रुपये का लेनदेन किया।
बैंक के पूर्व अध्यक्ष से होगी पूछताछ
राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा जम्मू-कश्मीर बैंक में हुए कथित भर्ती घोटाले की जांच में दो बातें सामने आ रही हैं। पहली, जम्मू-कश्मीर सरकार के इशारे पर तय नियमों का उल्लंघन कर बैंक कर्मियों की भर्ती की गई। दूसरा, आतंकी संगठनों को वित्तीय मदद पहुंचाने के मकसद से बैंकिंग के तमाम मापदंड किनारे रख दिए गए। जांच एजेंसी के सूत्र बताते हैं कि इस मामले में बैंक के पूर्व अध्यक्ष परवेज अहमद से भी पूछताछ की जाएगी।
बता दें कि बैंक में भर्ती घोटाले, भ्रष्टाचार और आतंकी संगठनों को वित्तीय मदद पहुंचाने के आरोपों के चलते परवेज अहमद को दो माह पहले उनके पद से हटा दिया गया था। आरोप यह भी है कि उन्होंने नियमों के विपरीत जाकर 1,000 करोड़ रुपये के ऋण को डायवर्ट किया था। एसीबी की रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंक में हुई कई नियुक्तियां पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और उनके सहयोगी मंत्रियों की सिफारिश पर की गई थी।
साल 2011 में भी एनआईए द्वारा जम्मू-कश्मीर बैंक में आतंकी संगठनों को वित्तीय मदद देने के आरोपों की जांच की गई थी। उस वक्त यह आरोप लगे थे कि विदेशों से धन मंगाने वाली कई प्राइवेट एजेंसियों द्वारा इस बैंक में धन ट्रांसफर किया गया था।
सिफारिश पर लगे कर्मियों ने बैंक के सारे नियम तोड़े
जांच एजेंसी के मुताबिक, महबूबा मुफ्ती और उनके मंत्रियों की सिफारिश पर लगे बैंक कर्मियों ने सारे कायदे कानूनों को ताक पर रख दिया। उन्हें मालूम था कि कुछ खातों में आतंकी गतिविधियों के लिए बाहर से धन आ रहा है। जिन खातों में वह धन आता था, उनमें जानबूझकर कई कॉलम खाली रखे गए या फिर वहां गलत सूचना डाल दी गई। बैंक की कार्यप्रणाली में कई दूसरी विसंगतियां भी देखने को मिली हैं। जांच में पता चला है कि लंबे समय में बैंक में संदिग्ध गतिविधियां चल रही थीं। यह सब आतंकी वित्तपोषण की ओर इशारा कर रहा था।
2017 में आतंकी फंडिंग का एक मामला सामने आया था। उसमें पता चला कि आरोपी जेकेएलएफ नेता यासीन मलिक और दुख्तारन-ए-मिलत संगठन की आसिया अंद्राबी, जेकेएफपीएफ के अलगाववादी नेता शब्बीर शाह और मुस्लिम लीग के मसर्रत आलम सहित कई लोगों के जम्मू-कश्मीर बैंक में खाते हैं, लेकिन उनके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं था। बैंक से एक समय में कितनी धन राशि निकाली जा सकती है या किसी के खाते में कितनी राशि जमा हो सकती है, इस बाबत सभी नियम तोड़ दिए गए।
मनमर्जी से लोन दिया गया और बिना दस्तावेजों के बैंक खाते खोलकर मनमर्जी से रुपये का लेनदेन किया गया। दूसरे बैंकों में ग्राहकों से जैसे केवाईसी यानी अपने ग्राहक को जानें, फार्म भरवाया जाता है, जम्मू-कश्मीर बैंक के अनेक खाताधारकों से यह सब नहीं कराया गया। कई खातों में ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड और फोन नंबर तक नहीं लिखा था।
बिना जांच पड़ताल के लोन दे दिया, खाते में करोड़ों आए
जांच में सामने आया है कि बैंक ने बिना कोई जांच किए कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी गतिविधियों के नाम पर भारी मात्रा में धन का वितरण कर दिया था। इसके लिए पर्याप्त दस्तावेज भी नहीं जमा कराए गए। किसके खाते में कहां से पैसा आ रहा है और कौन कितना निकाल रहा है, बैंक कई खातों के मामले में यह सब नहीं देख रहा था। इन गतिविधियों में वही कर्मी शामिल हैं, जिन्हें नेताओं की सिफारिश पर नौकरी दी गई थी। एनआईए ने शक के आधार पर जब ऐसे कई खातों की जानकारी मांगी तो जवाब मिला कि बैंक के पास ऐसा कोई डेटा उपलब्ध नहीं है।
यहां तक कि बैंक के पास खाताधारक का फोन नंबर तक भी नहीं था। बैंक की ओर से संदिग्ध खातों की जानकारी संबंधित एजेंसियों को नहीं दी गई। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा इस मामले में पूर्व विधायक इंजीनियर राशिद को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। उनसे भी एजेंसी को कई अहम सुराग मिले हैं। इसी आधार पर अब महबूबा मुफ्ती और सहयोगियों की मुसीबतें बढ़ने जा रही हैं।

अनुच्छेद 370 के हटने से सचिन पायलट के परिवार को भी होगा फायदा

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों का बदलने पर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और डिप्टी सीएम सचिन पायलट की फिलहाल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन 370 के हटने से पायलट के परिवार को भी फायदा होगा। अब पायलट की पत्नी सारा पायलट अपने पिता जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम फारुख अब्दुल्ला की सम्पत्ति में से हिस्सा ले सकती हैं।
सचिन पायलट ने फारुख की पुत्री और उमर अब्दुल्ला की बहन सारा से विवाह किया था, लेकिन सचिन पायलट कश्मीर से बाहर के होने की वजह से सारा के अधिकार कश्मीर में समाप्त हो गए। असल में अनुच्छेद 370 और 35ए में यही सबसे बड़ा भेदभाव है। कोई कश्मीरी लड़की यदि दूसरे प्रांत के लड़के से विवाह करती है उसे अपने पिता की सम्पत्ति में अधिकार नहीं होगा और न ही उसके बच्चों को कश्मीर की नागरिकता मिलेगी। यानि यदि 370 के प्रावधान रहते तो सचिन पायलट के बच्चों को भी कश्मीर की नागरिकता नहीं मिली। जबकि फारुख अब्दुल्ला अपनी बेटी सारा और दामाद सचिन से बेहद प्यार करते हैं।
फारुख को अपने नाते और नाती से स्नेह हैं। लेकिन अब जब कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटा दिया गया है, तब इसका फायदा सचिन पायलट के परिवार को भी मिलेगा। हालांकि सचिन पायलट स्वयं आर्थिक दृष्टि से बहुत मजबूत हैं, लेकिन अब फारुख अब्दुल्ला भी अपनी बेटी को कश्मीर की जायजाद देने के लिए स्वतंत्र है। अब पायलट के बच्चों को भी कश्मीर की नागरिकता मिल सकेगी। इसे सियासत ही कहा जाएगा कि यदि कश्मीर का कोई लड़का दूसरे प्रांत की लड़की से निकाह करता है, तो उसके बच्चों को कश्मीर में पूरे अधिकार मिलेंगे। जो लोग 370 का समर्थन कर रहे हैं वे बताएं कि लैगिग भेदभाव कितना जायज है? क्या ऐसा भेदभाव समाप्त नहीं होना चाहिए?

नए जम्मू-कश्मीर में होंगे 12 जिले, 8 जिले समाप्त

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा अनुच्छेद-370 व 35-ए को निरस्त करने के साथ-साथ संसद में पेश किए गए जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक के मसौदे का अध्ययन करने से एक बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है, जिसके तहत नए केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में अब केवल 12 जिले होंगे और 8 जिलों को समाप्त कर दिया जाएगा, जबकि केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में पहले की तरह 2 जिले ही रहेंगे।

विधेयक के मसौदे के अनुसार साम्बा जिले का जम्मू, रियासी जिले का ऊधमपुर, किश्तवाड़ एवं रियासी जिलों का डोडा, गंदरबल जिले का श्रीनगर, बांदीपुरा जिले का बारामूला, शोपियां जिले का पुलवामा और कुलगाम का अनंतनाग में विलय कर दिया गया है। इसके विपरीत जम्मू क्षेत्र के लोगों की मांग के अनुरूप विधानसभा सीटों का परिसीमन नहीं किया गया है। कश्मीर में अब भी 46 और जम्मू में 37 सीटें ही रहेंगी। 8 जिलों को विलय करने का यह निर्णय केंद्र सरकार पर भारी पड़ सकता है और यदि इस निर्णय पर पुनॢवचार नहीं किया गया तो उसे लोगों के मुखर विरोध का सामना करना पड़ सकता है।

उल्लेखनीय है कि लोगों की जोरदार मांग पर वर्ष 2007 में कांग्रेस-पी.डी.पी. गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे तत्कालीन मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने जम्मू संभाग में साम्बा, रियासी, रामबन एवं किश्तवाड़ और कश्मीर में कुलगाम, गंदरबल, बांदीपुरा एवं शोपियां जिलों का गठन किया था। सरकार का यह आदेश 1 अप्रैल, 2007 से लागू हुआ था। इससे नए जिलों के लोगों में खुशी की लहर फैली थी, लेकिन अब केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक में इन जिलों की समाप्ति से निश्चित तौर पर इन जिलों के लोगों में निराशा की लहर फैलेगी।

अब किस जिले में कौन-सा विधानसभा क्षेत्र

जिला कुपवाड़ा-करनाह, कुपवाड़ा, हंदवाड़ा, लोलाब, लंगेट विधानसभा क्षेत्र।

जिला बारामूला- उड़ी, रफियाबाद, सोपोर, गुरेज, बांदीपुरा, सोनावारी, संगरामा, बारामूला, गुलमर्ग, पट्टन विधानसभा क्षेत्र।

जिला श्रीनगर -कंगन, गंदरबल, हजरतबल, जड़ीबल, ईदगाह, खानियार, हब्बा कदल, अमीरा कदल, सोनावर, बटमालू विधानसभा क्षेत्र।

जिला बडग़ाम- चाडूरा, बडग़ाम, बीरवाह, खानसाहिब, चरार-ए-शरीफ विधानसभा क्षेत्र।

जिला पुलवामा- तराल, पम्पोर, राजपुरा, पुलवामा, वाची, शोपियां विधानसभा क्षेत्र।

जिला अनंतनाग- नूराबाद, कुलगाम, होमशालीबग, अनंतनाग, देवसर, डुरु, कोकरनाग, शांगुस, बिजबिहाड़ा, पहलगाम विधानसभा क्षेत्र।

जिला डोडा- किश्तवाड़, इंद्रवाल, भद्रवाह, डोडा, रामबन, बनिहाल विधानसभा क्षेत्र।

जिला ऊधमपुर- गुलाबगढ़, रियासी, गूल अरनास, चिनैनी, ऊधमपुर, रामनगर विधानसभा क्षेत्र।

जिला कठुआ- बनी, बसोहली, बिलावर, कठुआ, हीरानगर विधानसभा क्षेत्र।

जिला जम्मू- साम्बा, विजयपुर, नगरोटा, गांधीनगर, जम्मू ईस्ट, जम्मू वैस्ट, बिश्नाह, आर.एस. पुरा, सुचेतगढ़, मढ़, रायपुर दोमाना, अखनूर, छम्ब विधानसभा क्षेत्र।

जिला राजौरी- दरहाल, राजौरी, नौशहरा, कालाकोट विधानसभा क्षेत्र।

जिला पुंछ- पुंछ हवेली, मेंढर, सूरनकोट विधानसभा क्षेत्र।

जम्मू-कश्मीर से 370 हटते ही अब इस बैंक पर केंद्र सरकार का कब्जा!

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटने के बाद अब यह एक केंद्र शासित प्रदेश बन गया है. अनुच्छेद 370 हटने के बाद अब केंद्र सरकार जम्मू एंड कश्मीर बैंक का अधिग्रहण कर लेगी. राज्य में यह सबसे बड़ा बैंक है.
दरअसल, अभी तक जम्मू-कश्मीर बैंक राज्य सरकार के अधीन था. लेकिन अब जब जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटा दिया गया है तो उसके बाद अब यह बैंक केंद्र सरकार के अधीन आ जाएगा. जिसके बाद वित्त मंत्रालय जम्मू एंड कश्मीर बैंक को ऑपरेट करेगा.बता दें, मौजूदा समय में J एंड K बैंक में जम्मू-कश्मीर राज्य सरकार का करीब 60 फीसदी हिस्सा है. लेकिन अब यह हिस्सेदारी केंद्र सरकार को मिल जाएगी. नियम के मुताबिक इस बैंक पर RBI का कोई नियंत्रण नहीं था. जम्मू-कश्मीर में इस बैंक की हैसियत रिजर्व बैंक की तरह ही थी. जब J एंड K बैंक केंद्र के अधीन आ जाएगा तो इसमें तमाम नियुक्तियां वित्त मंत्रालय के द्वारा किया जाएगा. केंद्र सरकार के अधीन आते ही इस बैंक पर भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियम लागू हो जाएंगे. हालांकि अभी तक इस लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. गौरतलब है कि J एंड K बैंक राज्य का सबसे प्रमुख बैंक है, जिसकी ब्रांच पूरे प्रदेश में मौजूद हैं. अभी तक J एंड K बैंक में राज्य के सचिव के पास 55.89 फीसदी और राज्य सरकार के वित्त विभाग के पास 3.34 फीसदी की हिस्सेदारी है. इस बैंक को अब तक वित्तीय मदद राज्य सरकार से मिलती आई है. लेकिन इसे निजी सेक्टर के बैंक का तमगा मिला हुआ है.खबर है कि केंद्र सरकार के अधीन आते ही वित्त मंत्रालय इस बैंक के मैनेजमेंट में बड़ा बदलाव कर सकता है. पिछले दिनों यह बैंक विवादों में भी रहा था, बैंक पर आतंकवादी संगठनों को लोन देने का मामला सामने आया था.यहीं नहीं, J एंड K BANK की वित्तीय सेहत सुधारने के लिए केंद्र सरकार की ओर से तमाम कदम उठाए जाएंगे. क्योंकि जेएंडके बैंक को इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में मुनाफा 58 फीसदी घटकर के 22 करोड़ रुपये पर आ गया था.

ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर
नियम के मुताबिक बैंक केंद्र सरकार के अधीन आ जाने से ग्राहक प्रभावित नहीं होंगे. क्योंकि बैंक के नाम में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा. हालांकि RBI के अधिकार क्षेत्र में आने से ब्याज दर में कुछ बदलाव हो सकता है. बैंक खातों और लोन खातों पर कोई भी प्रभाव नहीं पड़ेगा.

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